नई दिल्ली। दिल्लीवासियों के लिए चेतावनी: फेफड़ों की समस्याओं के बाद अब लीवर और किडनी पर खतरा मंडरा रहा है। नवंबर से जारी जहरीली हवाओं के बीच अब एक नई रिपोर्ट ने भूजल में नाइट्रेट (Nitrate) की घातक मात्रा का खुलासा किया है, जिससे ब्रेन, किडनी और लीवर पर गंभीर असर पड़ सकता है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने बताया कि दिल्ली के कई जिलों में ग्राउंड वाटर में नाइट्रेट का स्तर सुरक्षित सीमा 45 mg/l से 22 गुना अधिक यानी 994 mg/l तक पहुंच गया है। ।
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दिल्लीवासियों के लिए खतरे की घंटी: जहरीली हवा और ग्राउंड वाटर में नाइट्रेट की भारी बढ़ोतरी से फेफड़े, लीवर और किडनी पर मंडरा रहा गंभीर खतरा
नई दिल्ली। दिल्लीवासियों के लिए चेतावनी: फेफड़ों की समस्याओं के बाद अब लीवर और किडनी पर खतरा मंडरा रहा है। नवंबर से जारी जहरीली हवाओं के बीच अब एक नई रिपोर्ट ने भूजल में नाइट्रेट (Nitrate) की घातक मात्रा का खुलासा किया है, जिससे ब्रेन, किडनी और लीवर पर गंभीर असर पड़ सकता है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने बताया कि दिल्ली के कई जिलों में ग्राउंड वाटर में नाइट्रेट का स्तर सुरक्षित सीमा 45 mg/l से 22 गुना अधिक यानी 994 mg/l तक पहुंच गया है। ।दिल्ली के 11 में से 7 जिले नई दिल्ली, उत्तरी, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और पश्चिमी दिल्ली इस जहरीले पानी की चपेट में हैं। स्थिति केवल दिल्ली तक सीमित नहीं, आंध्र प्रदेश में नाइट्रेट का स्तर 2,296.36 mg/l तक पहुंच गया है, जबकि राजस्थान में लगभग आधे नमूने सुरक्षित सीमा से बाहर पाए गए हैं। 2017 में देश के 359 जिलों में नाइट्रेट की समस्या थी, जो अब बढ़कर 440 जिलों तक फैल चुकी है।विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद भी भूजल प्रदूषण कम नहीं हो रहा है क्योंकि नाइट्रोजन युक्त उर्वरक और गंदगी बारिश के पानी के साथ जमीन में समा जाती हैं, जिससे मानसून के बाद नाइट्रेट का स्तर और बढ़ जाता है। मानसून से पहले फेल हुए नमूनों की संख्या 30.77% थी, जो मानसून के बाद बढ़कर 32.66% हो गई। दिल्लीवासियों को सलाह दी जा रही है कि पीने के पानी पर विशेष ध्यान दें और यदि संभव हो तो फिल्टर या बोतलबंद पानी का इस्तेमाल करें, ताकि लीवर, किडनी और अन्य अंगों पर खतरे से बचा जा सके। -

दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…
नई दिल्ली/ दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR में वायु गुणवत्ता AQI का स्तर एक बार फिर ‘बेहद खराब’ Severe श्रेणी में पहुंचने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत कार्यरत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग CAQM ने तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान GRAP के सबसे सख्त चरण, यानी चरण 4 GRAP-4 को लागू करने का आदेश दिया है।प्रदूषण की स्थिति और GRAP-4 की आवश्यकता
राजधानी दिल्ली के कई निगरानी स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक AQI 450 के आंकड़े को पार कर गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी को दर्शाता है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है, बल्कि इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के करीब माना जाता है। इस भयावह स्थिति से निपटने और प्रदूषण के खतरनाक स्रोतों पर तत्काल नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से प्रशासन ने ये कड़े कदम उठाए हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक वायुमंडलीय स्थिरता और हवा की कम गति के कारण प्रदूषण के स्तर में किसी बड़े सुधार की संभावना कम है, जिसने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
शिक्षा पर तत्काल प्रभाव: हाइब्रिड मोड की वापसीGRAP-4 के लागू होते ही, दिल्ली शिक्षा निदेशालय DoE ने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों के लिए विस्तृत और सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों का मुख्य फोकस कक्षा 9वीं से लेकर 11वीं तक के छात्रों की शिक्षा पद्धति में परिवर्तन लाना है:हाइब्रिड मोड: कक्षा 9वीं, 10वीं और 11वीं के छात्रों के लिए पढ़ाई अब हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएगी। इसका अर्थ है कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित होगी।स्कूलों पर लागू: यह नई व्यवस्था दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त Aided और निजी Private स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो छात्र ऑनलाइन क्लास का विकल्प चुनते हैं, उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो। अन्य कक्षाएं: हालांकि, आदेश में 12वीं कक्षा के छात्रों और छोटी कक्षाओं 8वीं तक के लिए स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं, लेकिन यह संकेत है कि सबसे अधिक संवेदनशील आयु वर्ग को घर से पढ़ने का विकल्प दिया जा रहा है। यह कदम छात्रों को अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में बाहर निकलने और स्कूल आने-जाने से रोकने के लिए उठाया गया है।
कार्यालयों और परिवहन पर सख्त नियंत्रण
प्रदूषण के स्रोतों को कम करने के लिए कार्यस्थलों और परिवहन क्षेत्र पर भी महत्वपूर्ण पाबंदियां लगाई गई हैं:सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति पर सीमा:कर्मचारी सीमा: सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित कर दिया गया है। केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही भौतिक रूप से कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। वर्क फ्रॉम होम: शेष 50 प्रतिशत कर्मचारी ‘वर्क फ्रॉम होम’ WFH मोड पर कार्य करेंगे। इस व्यवस्था का लक्ष्य सड़क पर वाहनों की संख्या को कम करना है।
निजी दफ्तरों को निर्देश:निजी दफ्तरों और प्रतिष्ठानों को भी सक्रिय रूप से फ्लेक्सिबल टाइमिंग Flexible Timings अपनाने और कर्मचारियों को अधिकतम संभव सीमा तक घर से काम Work From Home करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया है। यह व्यवस्था भीड़भाड़ वाले समय में वाहनों के आवागमन को कम करने में सहायक होगी।
परिवहन पर पाबंदियां:भारी वाहनों पर रोक: दिल्ली की सीमा में बाहरी राज्यों से आने वाले ट्रकों और अन्य भारी/मध्यम मालवाहक वाहनों आवश्यक सेवाओं को छोड़कर के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह कदम भारी वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्य पर पाबंदी: GRAP-4 के तहत पहले से ही गैर-आवश्यक निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।आगे की राह
प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए ये कदम अल्पकालिक राहत प्रदान करने के उद्देश्य से हैं। दिल्ली-NCR के नागरिकों को भी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अत्यंत आवश्यक न होने पर घर से बाहर न निकलें और N-95 जैसे मास्क का उपयोग करें। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करें और सार्वजनिक परिवहन, साइकिलिंग या पैदल चलने को प्राथमिकता दें, ताकि इस राष्ट्रीय संकट से मिलकर लड़ा जा सके। -

दिल्ली में प्रदूषण का कहर: AQI 700 के पार, GRAP-3 लागू, आपातकाल जैसी स्थिति
नई दिल्ली। दिल्ली की हवा एक बार फिर ‘गंभीर’ से भी ऊपर पहुंच गई है, और इसके परिणामस्वरूप वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में 700 तक पहुंच चुका है। इस खतरनाक प्रदूषण को देखते हुए, प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज 3 को लागू कर दिया है, जिससे दिल्ली में आपातकाल जैसी स्थिति बन गई है।प्रदूषण की गंभीरता और GRAP-3 का इमरजेंसी ऐलर्ट
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुँच चुका है। वायु गुणवत्ता में अचानक आई इस गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 13 दिसंबर की सुबह से तत्काल प्रभाव से GRAP-3 लागू कर दिया। इस स्थिति में दिल्ली के कई क्षेत्रों में AQI 400 से अधिक दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। कुछ इलाकों में तो AQI 700 तक पहुंच चुका है, जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक साबित हो सकता है।GRAP-3 के तहत कड़े प्रतिबंधों की शुरुआत
GRAP-3 लागू होने के बाद, प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर सीधे और कड़ी रोक लगा दी गई है। इनमें शामिल हैं:निर्माण और विध्वंस पर रोक: गैर-आवश्यक निर्माण कार्यों और विध्वंस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, पत्थर तोड़ने की मशीनों और ईंट भट्टों को भी बंद कर दिया गया है।
डीजल जेनरेटर पर प्रतिबंध: डीजल जेनरेटर के उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, सिवाय आवश्यक सेवाओं के।
वाहनों और औद्योगिक गतिविधियों पर नियंत्रण: गैर-जरूरी वाहनों की संख्या कम करने और औद्योगिक उत्सर्जन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
सशर्त छूट
कुछ आवश्यक सेवाओं को इस कड़े प्रतिबंध से छूट दी गई है, जैसे कि मेट्रो, रेलवे, हवाई अड्डे, स्वास्थ्य और स्वच्छता सेवाएं। विकलांगों के लिए विशेष छूट प्राप्त वाहन और कक्षा 5 तक की हाइब्रिड पढ़ाई की व्यवस्था भी की जा सकती है। इसके साथ ही, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया गया है।किस प्रकार के क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए?
दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि 21 प्रमुख निगरानी केंद्रों पर AQI 400 से अधिक दर्ज किया गया। इनमें से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में वजीरपुर (AQI 445), विवेक विहार (AQI 444), जहाँगीरपुरी (AQI 442), आनंद विहार (AQI 439) और अशोक विहार तथा रोहिणी (AQI 437) शामिल हैं।प्रदूषण के प्रमुख कारण: मौसम का बदला मिजाज
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण पश्चिमी राज्यों में पराली जलाने से उठने वाला धुआं है, जो हवा के माध्यम से दिल्ली-NCR में पहुँच रहा है। इसके अलावा, बढ़ती हुई गाड़ियों की संख्या और लगातार चल रहे निर्माण कार्य भी PM 2.5 और PM 10 कणों की मात्रा को बढ़ा रहे हैं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, क्लाइमेट चेंज के कारण मौसम का पैटर्न बदल चुका है, जिससे प्रदूषकों का शहर में जमाव अधिक हो रहा है।आगे की चुनौती: स्वास्थ्य पर ध्यान और सख्त उपाय
दिल्ली में प्रदूषण की बढ़ती समस्या अब प्रशासन और नागरिकों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। अधिकारियों को सख्त प्रतिबंधों के साथ प्रदूषण पर काबू पाना है, ताकि आम जनजीवन और स्वास्थ्य को बचाया जा सके। प्रदूषण से बचने के लिए नागरिकों को घर के अंदर रहने, मास्क पहनने और बच्चों एवं बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।