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  • ब्लिंकिट में दो घंटे डिलीवरी करके लॉ स्टूडेंट ने कमाए 149 रुपये, पहले दिन की कुल कमाई जानिए

    ब्लिंकिट में दो घंटे डिलीवरी करके लॉ स्टूडेंट ने कमाए 149 रुपये, पहले दिन की कुल कमाई जानिए

    नई दिल्ली । पढ़ाई के साथ अपने निजी खर्चों को पूरा करने के लिए कई छात्र पार्ट-टाइम काम का सहारा लेते हैं। कोई ट्यूशन पढ़ाता है, तो कोई अपनी सुविधानुसार दूसरे काम करता है। इसी बीच लॉ की पढ़ाई कर रहे कवल देसाई ने ब्लिंकिट के डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम करने का अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि इस काम के जरिए पढ़ाई जारी रखते हुए कमाई करना संभव हो रहा है। उनके मुताबिक, डिलीवरी का काम शुरू करने के बाद पार्ट-टाइम नौकरी को लेकर उनकी सोच भी बदली है।

    कवल देसाई ने अपने अनुभव में बताया कि उन्होंने दो घंटे काम करके छह ऑर्डर डिलीवर किए और इसके बदले उन्हें 149 रुपये मिले। उनके पास एथर का इलेक्ट्रिक स्कूटर है, इसलिए इस दौरान पेट्रोल पर अलग से खर्च नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें घूमना-फिरना पसंद है और डिलीवरी के काम के साथ कमाई होने से उन्हें अच्छा अनुभव मिल रहा है।

    कवल के मुताबिक, उनका मुख्य ध्यान एलएलबी की पढ़ाई पर ही है। डिलीवरी का काम उन्होंने पढ़ाई के साथ अपने निजी खर्चों को पूरा करने के उद्देश्य से शुरू किया। वह ऐसा काम करना चाहते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो और उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आर्थिक रूप से कुछ मदद मिल सके। उनके साझा किए गए अनुभव ने पार्ट-टाइम काम के ऐसे विकल्पों पर ध्यान खींचा है, जिन्हें छात्र अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं।

    उन्होंने अपने पहले दिन की कमाई का विस्तृत ब्योरा भी साझा किया। कवल ने बताया कि पहले दिन उन्होंने लगभग छह घंटे 30 मिनट काम किया और इस दौरान 19 ऑर्डर डिलीवर किए। इन ऑर्डर को पहुंचाने के लिए उन्होंने करीब 51 किलोमीटर की दूरी तय की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दूरी केवल ऑर्डर डिलीवर करने के दौरान तय की गई थी। इसमें वापसी की दूरी शामिल नहीं थी।

    कवल के अनुसार, पहले दिन उनकी कुल कमाई 508 रुपये रही। इसमें 75 रुपये का इंसेंटिव भी शामिल था। इसके अलावा, निर्धारित लक्ष्य पूरा करने पर उन्हें 100 रुपये का बोनस भी मिला। इस तरह उनके पहले दिन के अनुभव में नियमित डिलीवरी की कमाई के साथ इंसेंटिव और लक्ष्य पूरा करने पर मिलने वाले अतिरिक्त बोनस की भी भूमिका रही।

    हालांकि, कवल ने यह नहीं बताया कि पहले दिन मिली कुल रकम में बोनस का हिसाब किस तरह शामिल किया गया था। उनके साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पहले दिन 19 ऑर्डर पूरे करने और लगभग साढ़े छह घंटे काम करने के बाद कुल कमाई 508 रुपये रही। वहीं, दो घंटे में छह डिलीवरी करने पर उन्होंने 149 रुपये कमाने की जानकारी दी थी।

    कवल ने यह भी बताया कि छह डिलीवरी पूरी करने के बाद उन्होंने उस दिन काम रोकने का फैसला किया। इसकी दो वजहें थीं। पहली, उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए भी समय निकालना था और दूसरी, उनके इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी कम होने लगी थी। इस अनुभव से स्पष्ट होता है कि उनके लिए काम के घंटे तय करते समय पढ़ाई और वाहन की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण रही।

    अपने अनुभव से उत्साहित कवल ने ब्लिंकिट के साथ काम करने को अपने जैसे छात्रों के लिए वरदान बताया। उन्होंने कहा कि कंपनी के साथ काम करना आसान और अच्छा अनुभव रहा है। उनके अनुभव में पार्ट-टाइम डिलीवरी से मिलने वाली कमाई के साथ काम के समय को अपनी जरूरतों के अनुसार संभालने की सुविधा भी अहम रही।

    हालांकि, कवल की कमाई उनके व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। डिलीवरी करने वाले दूसरे लोगों की आय ऑर्डर की संख्या, काम के घंटों, इंसेंटिव की शर्तों, तय लक्ष्यों और यात्रा की दूरी के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए उनके बताए आंकड़ों को हर डिलीवरी पार्टनर की निश्चित कमाई नहीं माना जा सकता।

  • Zomato COD Charges: कैश ऑन डिलीवरी चुनने वाले ग्राहकों से 5 से 20 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क वसूलेगी कंपनी

    Zomato COD Charges: कैश ऑन डिलीवरी चुनने वाले ग्राहकों से 5 से 20 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क वसूलेगी कंपनी

    नई दिल्ली ।ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने कैश ऑन डिलीवरी यानी COD विकल्प चुनने वाले ग्राहकों के लिए अतिरिक्त शुल्क लागू करना शुरू किया है। अब डिलीवरी के समय नकद भुगतान करने वाले ग्राहकों को ऑर्डर के सामान्य बिल के अलावा 5 से 20 रुपये तक अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ सकती है। कंपनी के ऐप पर बिल विवरण में यह राशि ‘पे ऑन डिलीवरी फीस’ के नाम से अलग से दिखाई जा रही है।

    यह शुल्क केवल उन ग्राहकों पर लागू हो रहा है, जो ऑनलाइन भुगतान करने के बजाय ऑर्डर की डिलीवरी के समय नकद भुगतान का विकल्प चुनते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ज्यादातर मामलों में यह शुल्क 5 रुपये है। हालांकि, कुछ ऑर्डरों में ग्राहकों से 7 रुपये और कुछ मामलों में 20 रुपये तक भी वसूले गए हैं। शुल्क की राशि अलग-अलग ऑर्डर में अलग हो सकती है।

    ‘पे ऑन डिलीवरी फीस’ को जोमैटो के पहले से लागू दूसरे शुल्कों से अलग रखा गया है। ग्राहकों को प्लेटफॉर्म शुल्क के अलावा रेस्तरां की ओर से लिया जाने वाला पैकेजिंग शुल्क और जीएसटी भी देना होता है। ऐसे में कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प चुनने पर कुल बिल में यह अतिरिक्त राशि भी जुड़ रही है। वहीं, ऑनलाइन भुगतान करने वाले ग्राहकों से इस शुल्क की वसूली नहीं की जा रही है।

    जोमैटो के लिए यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब कंपनी फूड डिलीवरी कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी आय के नए स्रोतों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी रोजाना करीब 23 लाख से 25 लाख फूड ऑर्डर प्रोसेस करती है। इतने बड़े ऑर्डर वॉल्यूम के बीच प्रति ऑर्डर छोटी अतिरिक्त फीस भी कंपनी के राजस्व पर असर डाल सकती है।

    फूड डिलीवरी बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। रैपिडो का फूड डिलीवरी ब्रांड ओनली तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। इसके अलावा फ्लिपकार्ट भी अपने ‘ईट इन’ फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म का परीक्षण कर रहा है। ऐसे माहौल में जोमैटो अपने कारोबार से आय बढ़ाने के लिए भुगतान के तरीके से जुड़े शुल्क का इस्तेमाल कर रही है।

    फूड डिलीवरी कंपनियों ने वर्ष 2023 में पहली बार प्लेटफॉर्म फीस लागू करना शुरू किया था। इसकी शुरुआत स्विगी ने 2 रुपये प्रति ऑर्डर के शुल्क से की थी। इसके बाद जोमैटो ने भी प्लेटफॉर्म फीस लागू की। समय के साथ कंपनी ने इस शुल्क में बढ़ोतरी की और इस वर्ष इसे 12.50 रुपये से बढ़ाकर 14.99 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया। इस शुल्क पर जीएसटी अलग से लिया जाता है।

    मौजूदा ऑर्डर वॉल्यूम को देखते हुए प्रति ऑर्डर शुल्क में मामूली बढ़ोतरी भी कंपनी के लिए सालाना आधार पर अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती है। कैश ऑन डिलीवरी फीस इसी दिशा में एक और कदम है, जिसमें भुगतान के विकल्प के आधार पर ग्राहकों से अलग राशि ली जा रही है।

    जोमैटो हाल के महीनों में लागत नियंत्रण और परिचालन ढांचे में बदलाव पर भी काम कर रही है। अगस्त में सामने आई जानकारी के अनुसार, कंपनी ने संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा के बाद करीब 250 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इसी प्रक्रिया के तहत हैदराबाद स्थित कस्टमर डिलाइट ऑपरेशंस को बंद करने और बची हुई इन-हाउस ग्राहक सहायता गतिविधियों को गुरुग्राम में एकीकृत करने का फैसला लिया गया था।

  • बुलंदशहर में प्रसव के बाद महिला की मौत, परिजनों का आरोप अस्पताल ने मृत अवस्था में स्वस्थ बताकर किया डिस्चार्ज

    बुलंदशहर में प्रसव के बाद महिला की मौत, परिजनों का आरोप अस्पताल ने मृत अवस्था में स्वस्थ बताकर किया डिस्चार्ज

    नई दिल्ली । बुलंदशहर नगर के भूड़ चौराहा स्थित प्रगति मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। शनिवार दोपहर एक मृत महिला को स्वस्थ बताकर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। परिजनों को महिला के मृत होने की जानकारी लगी तो उन्होंने विरोध जताकर हंगामा किया। वहीं, अस्पताल स्टाफ मौके से भाग गया। हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर शांत किया। हालांकि, परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों को घर भेज दिया।

    चोला क्षेत्र के गांव कौराली निवासी शमी आलम की 23 वर्षीय पत्नी मुस्कान को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने बृहस्पतिवार रात भूड़ चौराहा स्थित प्रगति मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया। शनिवार को मृत महिला को स्वस्थ बताकर घर भेजे जाने के बाद परिजनों ने स्टाफ पर डिलीवरी में लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर हंगामा किया।

    परिजनों का हंगामा देख अस्पताल स्टाफ और भर्ती अन्य मरीज भाग गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाकर शांत कराया और तहरीर देने की मांग की। परिजन तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। बाद में बिना पोस्टमार्टम कराए शव को घर ले गए। देवर जान आलम ने बताया कि उनकी भाभी को जब भर्ती कराया गया था, वह बिल्कुल ठीक थीं।

    शुक्रवार को उन्होंने पुत्री को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी में स्टाफ की लापरवाही से ब्लीडिंग होती रही। स्टाफ ने ब्लड कम होने की बात कहकर करीब तीन यूनिट ब्लड मांगा, जिसे तत्काल उपलब्ध करवा दिया गया। शनिवार सुबह अस्पताल स्टाफ ने छुट्टी करने से पूर्व पैसा जमा करवाने की बात कही। इसके बाद वह पिता शमी खां के साथ बैंक से रुपये निकालने के लिए चले गए।

    इसी बीच परिजनों के अनुसार भाभी को मृत अवस्था में सही बताकर अस्पताल से बाहर कर दिया गया और घर ले जाने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि मां ने डिस्चार्ज की बात बताई तो वह अस्पताल पहुंचे। उनके पहुंचने से पूर्व अस्पताल का स्टाफ जा चुका था और भाभी को देखा तो वह मृत अवस्था में थीं।

    घटना के बाद अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर प्रसव के दौरान लापरवाही बरतने और महिला की स्थिति के संबंध में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि महिला को अस्पताल में भर्ती कराते समय उसकी हालत ठीक थी और प्रसव के बाद सामने आई स्थिति ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।

    हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने परिजनों से तहरीर देने को कहा, जबकि परिजन तत्काल कार्रवाई की मांग करते रहे। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से भी इनकार किया और शव को अपने साथ घर ले गए। पुलिस की ओर से कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद परिजन घर लौट गए।

    घटना के बाद अस्पताल स्टाफ के मौके से चले जाने की बात भी सामने आई है। पूरे मामले में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और अस्पताल की ओर से इलाज तथा डिस्चार्ज प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं। फिलहाल घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और प्रसव के दौरान मरीज की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • जेप्टो ने फ्री डिलीवरी के लिए बढ़ाई न्यूनतम ऑर्डर राशि, सामान्य समय में 199 और पीक डिमांड में 299 रुपये खर्च जरूरी

    जेप्टो ने फ्री डिलीवरी के लिए बढ़ाई न्यूनतम ऑर्डर राशि, सामान्य समय में 199 और पीक डिमांड में 299 रुपये खर्च जरूरी


    नई दिल्ली । 
    क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो ने ग्राहकों के लिए फ्री डिलीवरी से जुड़ी अपनी न्यूनतम ऑर्डर राशि में बदलाव किया है। अब सामान्य परिस्थितियों में मुफ्त डिलीवरी का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को कम से कम 199 रुपये का ऑर्डर करना होगा। इससे पहले यह सीमा 149 रुपये थी। वहीं अधिक मांग वाले समय में फ्री डिलीवरी के लिए न्यूनतम ऑर्डर राशि 299 रुपये तक पहुंच सकती है।

    नई व्यवस्था का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से कम कीमत की कुछ जरूरी वस्तुएं ही मंगाते हैं। पहले 149 रुपये के ऑर्डर पर फ्री डिलीवरी उपलब्ध होने के कारण छोटे ऑर्डर करना अपेक्षाकृत आसान था। अब ऐसे ग्राहकों को मुफ्त डिलीवरी पाने के लिए अपनी खरीदारी में अतिरिक्त सामान जोड़ना पड़ सकता है।

    जेप्टो की नई न्यूनतम ऑर्डर सीमा सामान्य समय और पीक डिमांड के हिसाब से अलग रखी गई है। सामान्य परिस्थितियों में ग्राहक को 199 रुपये का ऑर्डर करना होगा, जबकि जब मांग अधिक होगी, तब यह सीमा बढ़कर 299 रुपये तक हो सकती है। इस तरह फ्री डिलीवरी का लाभ लेने के लिए ग्राहक की ओर से किया जाने वाला न्यूनतम खर्च समय के अनुसार बदल सकता है।

    क्विक कॉमर्स कंपनियों के कारोबार में डिलीवरी की लागत एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। कुछ मिनटों में सामान पहुंचाने के लिए कंपनियों को डार्क स्टोर, डिलीवरी नेटवर्क, कर्मचारियों और लॉजिस्टिक्स पर लगातार खर्च करना पड़ता है। ऐसे में न्यूनतम ऑर्डर राशि बढ़ाने का उद्देश्य प्रति ऑर्डर मिलने वाले राजस्व और डिलीवरी लागत के बीच बेहतर संतुलन बनाना हो सकता है।

    इस बदलाव से जेप्टो की फ्री डिलीवरी नीति प्रतिस्पर्धी क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के करीब आती दिखाई दे रही है। बाजार में कंपनियां लगातार अपनी फीस, डिलीवरी शर्तों और न्यूनतम ऑर्डर मूल्य में बदलाव कर रही हैं। इसका उद्देश्य ग्राहकों को प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के साथ कारोबार की लाभप्रदता को बेहतर करना भी है।

    नई व्यवस्था से ग्राहकों की खरीदारी की आदतों में भी बदलाव आने की संभावना है। जिन उपभोक्ताओं को केवल एक या दो छोटी जरूरत की चीजें तत्काल मंगानी होती हैं, वे अतिरिक्त सामान खरीदने या डिलीवरी शुल्क का विकल्प चुनने के बीच फैसला कर सकते हैं। वहीं नियमित ग्राहक अपनी खरीदारी को एक साथ करने पर विचार कर सकते हैं, ताकि न्यूनतम ऑर्डर सीमा पूरी हो सके।

    क्विक कॉमर्स क्षेत्र में लाभप्रदता का मुद्दा पिछले कुछ समय से महत्वपूर्ण बना हुआ है। कंपनियां तेजी से डिलीवरी के साथ परिचालन लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। डिलीवरी शुल्क और न्यूनतम ऑर्डर राशि में बदलाव इसी व्यापक कारोबारी रणनीति का हिस्सा माने जा सकते हैं।

    ऑनलाइन डिलीवरी क्षेत्र में केवल क्विक कॉमर्स ही नहीं, बल्कि फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भी शुल्क संबंधी बदलाव करते रहे हैं। मार्च में जोमैटो ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की थी। इसके बाद स्विगी ने भी प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म शुल्क बढ़ाया था। इन बदलावों से संकेत मिलता है कि डिलीवरी आधारित कारोबार में कंपनियां राजस्व बढ़ाने और परिचालन खर्च का दबाव कम करने के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारण रणनीतियों का इस्तेमाल कर रही हैं।

    जेप्टो की नई सीमा ऐसे समय सामने आई है जब भारतीय क्विक कॉमर्स बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज है। ग्राहकों के लिए कीमत, डिलीवरी समय और सुविधा महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। ऐसे में कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि वे लागत और लाभप्रदता को नियंत्रित करते हुए ग्राहकों को आकर्षक सेवा उपलब्ध कराती रहें। जेप्टो की बढ़ी हुई न्यूनतम ऑर्डर राशि इसी संतुलन की दिशा में उठाया गया कदम है।