हसीना की इस मांग को उनके समर्थक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम बता रहे हैं। यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। यह अपील ऐसे समय में सामने आई है जब बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार के गठन को एक महीना हुआ है। वहीं, अवामी लीग के कुछ नेता भारत और यूरोप में शरण लिए हुए हैं और बांग्लादेश में पार्टी को दोबारा सक्रिय करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
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मौत की सजा रद्द करने की अपील, निष्पक्ष ट्रायल की मांग; पूर्व पीएम शेख हसीना का बांग्लादेश ट्रिब्यूनल को पत्र
ढाका। शेख हसीना ने बांग्लादेश की न्यायिक अथॉरिटीज से अपील करते हुए उनके खिलाफ सुनाई गई मौत की सजा को कानूनी रूप से निरस्त करने की मांग की है।उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि न्याय की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।30 मार्च को लिखे गए पत्र में कुल पांच मांगें रखी गईं। इनमें प्रमुख मांग यह थी कि शेख हसीना के खिलाफ दिए गए फैसले और सजा को “तत्काल कानूनी रूप से अमान्य घोषित करते हुए रद्द किया जाए” तथा मृत्युदंड लागू करने की दिशा में कोई कदम न उठाया जाए। पत्र में यह भी कहा गया कि आगे की सभी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय निष्पक्ष सुनवाई मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, जिसमें आरोपों की पूरी जानकारी, सबूतों का खुलासा, अपनी पसंद के वकील से बचाव का अवसर और स्वतंत्र न्यायाधिकरण के समक्ष सुनवाई शामिल हो।दरअसल, अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने 17 नवंबर को शेख हसीना को 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों पर कार्रवाई को मानवता के खिलाफ अपराध मानते हुए दोषी ठहराया था और उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। न्यायाधिकरण ने यह भी कहा था कि वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अवामी लीग कार्यकर्ताओं द्वारा नागरिकों के खिलाफ अपराध रोकने में विफल रहीं। इस मामले में उन्हें अलग से आजीवन कारावास की सजा भी दी गई थी। -

खाड़ी देश कोई युद्ध रोकने के पक्ष में तो कोई ईरान पर हमले तेज करने की मांग में
तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध का 28वां दिन और तनावपूर्ण हो गया है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई अहम ठिकानों पर फिर हमले किए हैं, जिससे संकट और गहरा गया है।इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमलों को आगे बढ़ाते हुए तेहरान को चेतावनी दी है कि वह को खोले, अन्यथा उसके ऊर्जा संयंत्र निशाने पर आ सकते हैं।
खाड़ी देश दो फाड़
ईरान को लेकर खाड़ी के मुस्लिम देश अलग-अलग रुख अपनाते दिख रहे हैं। कतर, ओमान और कुवैत आर्थिक नुकसान और जवाबी हमलों के डर से युद्ध जल्द खत्म करने की वकालत कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, खाड़ी देश कतर, ओमान और कुवैत और Bahrain का मानना है कि जब तक ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता खत्म नहीं होती, तब तक उस पर हमले जारी रहने चाहिए। इन देशों का कहना है कि अधूरा समझौता भविष्य में फिर संकट पैदा कर सकता है।अमेरिका से सख्त समझौते की मांग
खाड़ी देशों ने निजी बातचीत में अमेरिका से कहा है कि किसी भी समझौते में ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं पर स्थायी रोक, ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनका जोर इस बात पर है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भविष्य में हथियार की तरह इस्तेमाल न किया जा सके।बार-बार हमलों से बढ़ी चिंता
खाड़ी देशों का कहना है कि ईरान ने युद्ध के दौरान उनके ऊर्जा और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इसलिए वे ऐसे व्यापक समझौते की मांग कर रहे हैं जिसमें प्रॉक्सी युद्ध, तेल मार्गों की सुरक्षा और समुद्री यातायात की गारंटी शामिल हो।एमिरेट्स पॉलिसी सेंटर की प्रमुख Ebtesam Al-Ketbi ने कहा कि असली चुनौती सिर्फ युद्ध रोकना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे संकट से बचाव सुनिश्चित करना है। वहीं अमेरिका में यूएई के राजदूत Yousef Al Otaiba ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता की परीक्षा बताया।सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया आकलन में ईरान के मिसाइल भंडार का करीब एक-तिहाई हिस्सा नष्ट होने का अनुमान है, लेकिन उसकी क्षमताएं अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ऐसे में खाड़ी देश 2015 के परमाणु समझौते से अधिक व्यापक नए समझौते की मांग कर रहे हैं, ताकि पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।