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  • टी20 विश्वकप से पहले भारत-पाक मैच पर टकराव: आईसीसी ने पीसीबी की तीन बड़ी मांगें ठुकराईं

    टी20 विश्वकप से पहले भारत-पाक मैच पर टकराव: आईसीसी ने पीसीबी की तीन बड़ी मांगें ठुकराईं


    नई दिल्ली।
    टी20 विश्व कप 2026 (T20 World Cup 2026) में भारत (India) के खिलाफ मैच खेलने से पाकिस्तान (Pakistan) के इनकार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) (Pakistan Cricket Board – PCB) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) (International Cricket Council – ICC) के बीच तनातनी बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईसीसी ने पीसीबी की तीन प्रमुख मांगों को खारिज कर दिया है।

    बताया जा रहा है कि पीसीबी ने आईसीसी से भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय सीरीज कराने की मांग रखी, लेकिन आईसीसी ने साफ किया कि द्विपक्षीय सीरीज उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं, भले ही वह विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र का हिस्सा क्यों न हों।

    इसके अलावा पीसीबी ने भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच त्रिकोणीय सीरीज का प्रस्ताव भी रखा, जिसे आईसीसी ने अस्वीकार कर दिया। पीसीबी ने यह भी आग्रह किया कि भारत इस वर्ष बांग्लादेश दौरे पर जाए, जो पिछली बार टल गया था, मगर आईसीसी ने इसमें हस्तक्षेप से इनकार किया।

    हालांकि बांग्लादेश से जुड़े कुछ मुद्दों पर आईसीसी ने नरम रुख दिखाया है। महिलाओं के टी20 विश्व कप की मेजबानी स्थानांतरित होने के बाद बांग्लादेश को भविष्य में किसी आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी मिल सकती है, जैसे अंडर-19 विश्व कप। साथ ही आईसीसी ने बांग्लादेश की राजस्व हिस्सेदारी पर कोई दंडात्मक कदम न उठाने का फैसला किया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार आईसीसी ने पीसीबी को अंतिम फैसला लेने के लिए 24 घंटे का समय दिया है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के स्तर पर होगा। मैदान पर दोनों टीमों ने अपने अभियान की जीत से शुरुआत की है। पाकिस्तान ने नीदरलैंड्स को करीबी मुकाबले में हराया, जबकि भारत ने अमेरिका को 29 रन से मात दी। अब सबकी नजर इस पर है कि भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर अंतिम फैसला क्या होता है।

  • महाराणा प्रताप सेना का दावा… अजमेर शरीफ दरगाह पहले था शिव मंदिर, कोर्ट से ASI सर्वे की मांग

    महाराणा प्रताप सेना का दावा… अजमेर शरीफ दरगाह पहले था शिव मंदिर, कोर्ट से ASI सर्वे की मांग


    अजमेर।
    अजमेर जिला अदालत (Ajmer District Court) में एक याचिका दायर कर दावा किया गया है कि अजमेर शरीफ दरगाह (Ajmer Sharif Dargah) मूल रूप से एक शिव मंदिर (Shiva Temple) है। महाराणा प्रताप सेना (Maharana Pratap Army) के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार द्वारा दाखिल इस याचिका में एएसआई सर्वेक्षण (ASI survey) की मांग की गई है। उनका कहना है कि मंदिर को बदलकर दरगाह बनाया गया था जिसे लेकर वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। इससे पहले भी हिंदू सेना ऐसी मांग कर चुकी है।


    महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष ने डाली अर्जी

    अजमेर की अदालत में महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने एक अर्जी दी है। अपनी याचिका में राजवर्धन सिंह ने दावा किया कि अजमेर दरगाह पहले एक शिव मंदिर था जिसे बाद में दरगाह बना दिया गया। उन्होंने कहा कि वह इस बात को लेकर काफी समय से कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले राष्ट्रपति को भी एक प्रार्थना पत्र दिया गया था जिसे आगे की कार्रवाई के लिए राजस्थान के मुख्य सचिव को भेज दिया गया है।


    विष्णु गुप्ता भी कर चुके हैं ऐसा ही दावा

    वकील एपी सिंह ने कहा कि यह जगह भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर था। यह प्राचीन कालीन स्थल है। याचिका अजमेर की जिला अदालत में पेश की गई है। साल 2024 में हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने भी ऐसी ही एक याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह एक मंदिर के ऊपर बनी है। उन्होंने ने भी अदालत से दरगाह को हिंदू मंदिर घोषित करने की मांग की थी।


    पवित्र मुस्लिम स्थलों में शुमार

    बता दें कि अजमेर शरीफ दरगाह को भारत के पवित्र मुस्लिम धर्म स्थलों में गिना जाता है। यह अजमेर का एक मशहूर ऐतिहासिक स्थान है। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती फारस से 1192 ईस्वी में अजमेर आए थे और 1236 ईस्वी में अपनी मृत्यु तक यहीं रहे। मुगल बादशाह हुमायूं ने उनकी याद में इस दरगाह का निर्माण करवाया था। यहां उनकी मजार मौजूद है। अपने शासन के दौरान मुगल सम्राट अकबर भी हर साल अजमेर की यात्रा पर आता था।