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  • पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला कार्यालय पर प्रशासन की कार्रवाई, सुरक्षा के बीच चला बुलडोजर

    पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला कार्यालय पर प्रशासन की कार्रवाई, सुरक्षा के बीच चला बुलडोजर

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल मच गई जब दक्षिण 24 परगना जिले के अमताला-बारुईपुर रोड स्थित तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के कथित अवैध रूप से निर्मित सांसद कार्यालय पर प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। पांच मंजिला इमारत को गिराने के लिए प्रशासन ने भारी मशीनरी और तीन बुलडोजर तैनात किए। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी रही ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार संबंधित भवन को अवैध निर्माण की श्रेणी में पाया गया था। प्रशासन का कहना है कि भवन स्वामी और संबंधित पक्ष को पहले नोटिस जारी कर निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। अधिकारियों के मुताबिक निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज या संतोषजनक जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का निर्णय लिया गया। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है।

    शनिवार सुबह जैसे ही बुलडोजर कार्यालय परिसर पहुंचे, बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र होने लगे। कुछ ही देर में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी घटनास्थल पर पहुंच गए, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी गई। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और प्रशासनिक कार्रवाई में सहयोग करने की अपील की।

    जानकारी के अनुसार यह कार्यालय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से बंद पड़ा था। इससे पहले डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र से जुड़े कई संगठनात्मक कार्यक्रम, बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों का संचालन इसी कार्यालय से किया जाता था। स्थानीय स्तर पर यह भवन तृणमूल कांग्रेस की महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है।

    इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन जहां इसे अवैध निर्माण के विरुद्ध सामान्य कानूनी कार्रवाई बता रहा है, वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना जताई जा रही है। मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल प्रशासन की निगरानी में भवन को ध्वस्त करने का कार्य जारी है और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सख्त रखी गई है। संबंधित पक्ष की ओर से इस कार्रवाई पर आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

  • जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई से गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने BJP पर लगाया शिक्षा को सांप्रदायिक नजरिए से देखने का आरोप

    जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई से गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने BJP पर लगाया शिक्षा को सांप्रदायिक नजरिए से देखने का आरोप

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा यूनिवर्सिटी परिसर की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण बताते हुए ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए जाने के बाद मामला प्रदेश की सियासत में चर्चा का केंद्र बन गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा के क्षेत्र में राजनीति करने का आरोप लगाया है।

    अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा को शिक्षा के क्षेत्र में भी सांप्रदायिकता दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा, शिक्षकों, छात्रों और शिक्षा के बाद मिलने वाले रोजगार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है तो अन्य संस्थानों और इमारतों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए।

    जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब रामपुर विकास प्राधिकरण ने परिसर में मौजूद कई भवनों को नियमों के अनुरूप स्वीकृति नहीं मिलने का हवाला देते हुए कार्रवाई का आदेश जारी किया। यह यूनिवर्सिटी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में जानी जाती है और लंबे समय से राजनीतिक चर्चाओं में रही है।

    इस बीच यूनिवर्सिटी परिसर से गुजरने वाली सड़क को लेकर भी नया विवाद सामने आया है। लोक निर्माण विभाग यानी PWD ने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर बोर्ड लगाकर स्पष्ट किया है कि यह सड़क आम जनता के उपयोग के लिए है। विभाग का कहना है कि यह सड़क सरकारी धन से बनाई गई है और इसे किसी भी नागरिक के आवागमन के लिए रोका नहीं जा सकता।

    PWD अधिकारियों के अनुसार, अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2016-17 के दौरान यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट से परिसर के अंदर तक लगभग 3.30 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण कराया गया था। इस परियोजना की लागत करीब 16 करोड़ रुपये बताई गई थी। विभाग का कहना है कि सड़क सार्वजनिक संपत्ति है और इसका उपयोग आम लोगों के लिए होना चाहिए।

    PWD अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2019 में यूनिवर्सिटी की ओर से मुख्य गेट बंद कर दिया गया था, जिसके बाद आम लोगों और विभागीय अधिकारियों की आवाजाही प्रभावित हुई। इस मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी चली। पहले हाईकोर्ट और फिर निचली अदालत में सुनवाई हुई। विभाग के अनुसार, अदालतों में अलग-अलग स्तर पर मामले की सुनवाई के बाद अब सार्वजनिक मार्ग को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए बोर्ड लगाया गया है।

    वहीं, जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन और उससे जुड़े पक्षों की ओर से भी अपनी दलीलें रखी जा रही हैं। यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों का कहना है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है और उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए समय दिया गया है।

    फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी मामला प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक विवाद दोनों का केंद्र बना हुआ है। एक तरफ भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश और सड़क को लेकर सरकारी विभाग सक्रिय हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रहा है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और प्रशासन की आगे की कार्रवाई से इस मामले की दिशा तय होगी।

  • जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतें गिराने के आदेश पर सियासत तेज, विपक्ष ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल

    जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतें गिराने के आदेश पर सियासत तेज, विपक्ष ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए उन्हें गिराने के प्रशासनिक आदेश के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर सरकार इसे कानून के दायरे में की जा रही कार्रवाई बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कदम बताते हुए सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं।

    जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 इमारतों को अवैध निर्माण की श्रेणी में रखते हुए उनके विध्वंस के आदेश जारी किए हैं। यह विश्वविद्यालय समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जाता है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित निर्माणों को लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है और सभी निर्णय नियमों के अनुरूप लिए गए हैं।

    मामले पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाए रखना है। उनके अनुसार, सरकार किसी भी मामले में कानून से समझौता नहीं करेगी और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है।

    वहीं विपक्ष ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। आरजेडी नेता मनोज कुमार झा ने विश्वविद्यालय को लेकर जारी विध्वंस नोटिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के प्रति इस तरह का रवैया उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बुलडोजर की कार्रवाई का चयनात्मक इस्तेमाल कर रही है और गंभीर अपराधों के मामलों में ऐसी सख्ती दिखाई नहीं देती। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों का सम्मान होना चाहिए और कानून का समान रूप से पालन कराया जाना चाहिए।

    जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2006 में की गई थी, जबकि इसका औपचारिक उद्घाटन वर्ष 2012 में हुआ था। विश्वविद्यालय लगभग 1500 बीघा भूमि में फैला हुआ है। परिसर के लिए खरीदी गई जमीन और निर्माण कार्य को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद जारी हैं। प्रशासन और जांच एजेंसियां पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मामलों की जांच कर रही हैं।

    बताया जाता है कि मोहम्मद आजम खान के खिलाफ दर्ज कई मामलों का संबंध भी जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े भूमि और निर्माण विवादों से है। इन्हीं मामलों के आधार पर समय-समय पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाती रही है। राज्य में वर्ष 2017 के बाद विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की गति तेज हुई, जिसके बाद कई कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई गईं।

    फिलहाल जौहर विश्वविद्यालय को लेकर जारी विध्वंस आदेश राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। सरकार इसे पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है, जबकि विपक्ष निष्पक्षता और कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रहा है। अब सभी की नजर इस मामले में आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं बल्कि राज्य की राजनीतिक और कानूनी बहस पर भी पड़ सकता है।

  • गुरुग्राम में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान चंद्रचूड़ सिंह के घर के बाहर हुई कार्रवाई, अभिनेता का शांत व्यवहार बना चर्चा का विषय

    गुरुग्राम में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान चंद्रचूड़ सिंह के घर के बाहर हुई कार्रवाई, अभिनेता का शांत व्यवहार बना चर्चा का विषय

    नई दिल्ली । हरियाणा के गुरुग्राम में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह के आवास के बाहर भी प्रशासन ने कार्रवाई की। यह अभियान डीएलएफ फेज-1 से फेज-5 तक विभिन्न स्थानों पर कथित अवैध निर्माण हटाने के लिए चलाया गया। इसी दौरान अभिनेता के घर के बाहर भी बुलडोजर पहुंचा और प्रशासनिक टीम ने निर्धारित दायरे में कार्रवाई की। घटना के दौरान अभिनेता का शांत और संयमित व्यवहार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    जानकारी के अनुसार प्रशासन की टीम जब चंद्रचूड़ सिंह के आवास के बाहर पहुंची तो अभिनेता स्वयं घर से बाहर आए और अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने शांतिपूर्वक यह समझने का प्रयास किया कि कार्रवाई किस सीमा तक की जाएगी। बातचीत के दौरान उन्होंने किसी प्रकार का विरोध या विवाद नहीं किया और पूरी प्रक्रिया के दौरान संयम बनाए रखा।

    घटनास्थल पर मौजूद लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं। वीडियो में अभिनेता प्रशासनिक अधिकारियों से सामान्य तरीके से बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। उनके व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर अनेक लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कई उपयोगकर्ताओं ने उनकी सादगी, शालीनता और संयम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी स्थिति को बेहद संतुलित तरीके से संभाला।

    गुरुग्राम प्रशासन इन दिनों शहर के विभिन्न इलाकों में अतिक्रमण हटाने और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चला रहा है। इसी क्रम में डीएलएफ क्षेत्र के कई हिस्सों में भी कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप सार्वजनिक स्थानों और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करना है।

    चंद्रचूड़ सिंह हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल रहे हैं जिन्होंने 1990 के दशक में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कई सफल फिल्मों में अभिनय कर दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की। बाद के वर्षों में स्वास्थ्य और निजी कारणों से उन्होंने फिल्मी दुनिया से कुछ समय के लिए दूरी बना ली थी, लेकिन हाल के वर्षों में उन्होंने अभिनय में वापसी भी की।

    अभिनेता का पारिवारिक संबंध एक प्रतिष्ठित परिवार से माना जाता है। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी रह चुके थे और सार्वजनिक जीवन से भी जुड़े रहे, जबकि उनकी मां का संबंध पूर्व रियासती परिवार से बताया जाता है। इसके बावजूद अभिनेता का सरल और विनम्र स्वभाव अक्सर चर्चा का विषय रहा है।

    गुरुग्राम में हुई इस कार्रवाई के दौरान भी उनका शांत रवैया लोगों का ध्यान आकर्षित करता दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में अधिकांश प्रतिक्रियाएं उनके संयमित व्यवहार की प्रशंसा करती नजर आ रही हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने का अभियान विभिन्न क्षेत्रों में जारी है और निर्धारित मानकों के अनुसार आगे भी कार्रवाई की जा रही है।

  • दिल्ली में अवैध निर्माण पर नगर निगम का हथौड़ा: मालवीय नगर अग्निकांड के बाद एमसीडी की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, 217 इमारतें ध्वस्त और 237 संपत्तियां सील

    दिल्ली में अवैध निर्माण पर नगर निगम का हथौड़ा: मालवीय नगर अग्निकांड के बाद एमसीडी की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, 217 इमारतें ध्वस्त और 237 संपत्तियां सील

    नई दिल्ली । दिल्ली नगर निगम ने राजधानी में अवैध निर्माण और भवन नियमों के गंभीर उल्लंघन के खिलाफ अपने अब तक के सबसे बड़े प्रशासनिक और दंडात्मक अभियान को तेज कर दिया है। शहर के रिहाइशी और व्यावसायिक इलाकों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर बनाई गई इमारतों पर निगम का डंडा पूरी ताकत से चला है। हाल ही में मालवीय नगर के एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद नींद से जागे नागरिक प्रशासन ने अवैध रूप से संचालित और निर्मित संपत्तियों को लक्षित करते हुए चौबीसों घंटे की कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसके तहत तोड़फोड़ और सीलिंग का काम युद्ध स्तर पर जारी है।

    प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को ही निगम की प्रवर्तन टीमों ने शहर के विभिन्न कोनों में चौदह अवैध संपत्तियों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया, जबकि पच्चीस अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मौके पर ही सील कर दिया गया। पिछले दस दिनों के भीतर राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीमों ने पूरी दिल्ली में सात सौ सत्तर से अधिक संदिग्ध और अनियमित प्रतिष्ठानों के खिलाफ औचक निरीक्षण कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की है, जिससे नियम तोड़ने वाले भवन स्वामियों में हड़कंप मचा हुआ है।

    जून महीने की शुरुआत में हुए मालवीय नगर अग्निकांड को एक टर्निंग पॉइंट मानते हुए नगर निकाय ने पिछले दो हफ्तों के भीतर कुल दो सौ सत्रह अवैध संपत्तियों को मलबे में तब्दील कर दिया है, जबकि दो सौ सैंतीस अन्य विवादित संपत्तियों पर सरकारी ताला लटकाया जा चुका है। इस अभूतपूर्व कार्रवाई के दौरान निगम ने कानूनसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए अवैध निर्माण के मामलों में तीन सौ तीस कारण बताओ नोटिस और संपत्तियों को कुर्क या सील करने के लिए एक सौ एकावन वैधानिक नोटिस जारी किए हैं, जिसके साथ ही इक्यानवे पक्के विध्वंस आदेश भी पारित किए जा चुके हैं।

    राजस्व विभाग की दैनिक निरीक्षण रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली के सभी बारह जोनों में विशेष टीमें लगातार ग्राउंड सर्वे कर रही हैं। उत्तरी जिले, नई दिल्ली जिले और दक्षिण-पश्चिम जिले में जिलाधिकारियों और निगम अभियंताओं की संयुक्त टीमों ने औचक निरीक्षण किए हैं, जहां पाई गई भारी अनियमितताओं के दस्तावेज नजफगढ़ जोन को आगे की दंडात्मक कार्रवाई के लिए सौंपे गए हैं। इसी तरह दक्षिण-पूर्व और पश्चिमी जिलों में भी दर्जनों ऐसी इमारतों को चिन्हित किया गया है जो बिना स्वीकृत मानचित्र या बिना फायर एनओसी के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रही थीं।

    दिल्ली में नागरिक बुनियादी ढांचे की विफलता, अग्नि सुरक्षा नियमों के खुले उल्लंघन और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक ढिलाई के कारण पूर्व में हुए कई हादसों को देखते हुए उच्च स्तरीय बैठकों में यह सख्त नीति तैयार की गई है। निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया है कि यह अभियान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दिल्ली में जहां भी सुरक्षा मानकों के साथ समझौता पाया जाएगा, वहां बुलडोजर की कार्रवाई और सीलिंग की प्रक्रिया को बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के अंजाम दिया जाता रहेगा।