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  • जंतर-मंतर प्रदर्शन को तुषार गांधी का समर्थन, बोले- आंदोलन अब नई पीढ़ी का बन चुका है, परिवार के सदस्य भी मार्च में हुए शामिल

    जंतर-मंतर प्रदर्शन को तुषार गांधी का समर्थन, बोले- आंदोलन अब नई पीढ़ी का बन चुका है, परिवार के सदस्य भी मार्च में हुए शामिल


    नई दिल्ली ।
    राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP के प्रदर्शन को सोमवार को महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी का समर्थन मिला। उन्होंने आंदोलन के समर्थन में सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अभियान अब केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की नई पीढ़ी भी इससे जुड़ रही है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष भी संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल होकर इस आंदोलन का हिस्सा बने हैं।

    तुषार गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। उनके अनुसार यह अब केवल सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक या CJP तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा इसमें भागीदारी कर रहे हैं। उन्होंने इसे नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी का उदाहरण बताते हुए कहा कि आंदोलन का स्वरूप लगातार व्यापक होता जा रहा है।

    उन्होंने अपने परिवार की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष संसद मार्च में शामिल हुए। उनके अनुसार दोनों ने परिवार का प्रतिनिधित्व करते हुए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध में भाग लिया। तुषार गांधी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग का हिस्सा बताया और कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी किसी भी जन आंदोलन को व्यापक स्वरूप देती है।

    तुषार गांधी ने अपने वक्तव्य में केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन के प्रति संवेदनशील रुख अपनाने के बजाय उसे नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का उल्लेख किया और कहा कि उस समय भी नेतृत्व की गिरफ्तारी के बावजूद जनभागीदारी के कारण आंदोलन जारी रहा था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और असहमति व्यक्त करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

    अपने वक्तव्य में तुषार गांधी ने अभिनेता आमिर खान और फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी की फिल्म “3 इडियट्स” का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें फिल्म पसंद आई थी, लेकिन उन्हें यह अच्छा नहीं लगा कि सोनम वांगचुक के संदर्भ में “इडियट” शब्द का उपयोग किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माताओं द्वारा यह स्पष्ट किया जाना उचित था कि फिल्म सीधे तौर पर सोनम वांगचुक के जीवन पर आधारित नहीं थी।

    दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। समर्थक इसे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का माध्यम बता रहे हैं, जबकि राजनीतिक स्तर पर भी इसे लेकर अलग-अलग मत व्यक्त किए जा रहे हैं। तुषार गांधी के समर्थन और उनके परिवार की भागीदारी ने इस आंदोलन को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है।

    फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और इससे जुड़े घटनाक्रमों पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर बहस जारी रहने की संभावना है।

  • भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, वादों पर अमल न होने से नाराजगी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, वादों पर अमल न होने से नाराजगी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    भोपाल। अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे हजारों अतिथि शिक्षकों ने बुधवार को राजधानी भोपाल में जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार पर चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया और लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। उन्होंने साफ कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

    प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने गुरुजियों की तर्ज पर नीति लागू करने, सीधी भर्ती में बोनस अंक देने और वार्षिक अनुबंध के जरिए भविष्य सुरक्षित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे शिक्षकों में गहरा असंतोष है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अतिथि शिक्षकों को न्याय दिलाने की बात कही थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई निर्णय सामने नहीं आया है।

    सरकार पर वादों से मुकरने का आरोप

    संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी रामचंद्र नागर और प्रदेश अध्यक्ष के.सी. पवार ने कहा कि सरकार वार्षिक अनुबंध लागू करने के अपने वादे से पीछे हटती नजर आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 30 अप्रैल के बाद कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो करीब सवा लाख अतिथि शिक्षकों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने यह भी मांग रखी कि सीधी भर्ती, प्रमोशन और ट्रांसफर से प्रभावित अनुभवी अतिथि शिक्षकों को रिक्त पदों पर प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए।

    ई-अटेंडेंस और भुगतान में समस्याएं उठाईं

    प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने ई-अटेंडेंस प्रणाली में आ रही तकनीकी खामियों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई बार तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे मानदेय कट जाता है। साथ ही कुछ मामलों में सितंबर महीने का भुगतान भी अभी तक लंबित है।

    भर्ती प्रक्रिया में अनुभव को लेकर उठे सवाल
    बी.एम. खान ने भर्ती प्रक्रिया में मौजूद विसंगतियों को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को उनके अनुभव का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। वर्तमान में स्कोर कार्ड में केवल 5 साल का अनुभव जोड़ा जा रहा है, जबकि इसे बढ़ाकर हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100 अंक) किया जाना चाहिए। इसके अलावा 2008 और 2011 की पात्रता परीक्षाओं के अंक भी शामिल करने की मांग की गई। प्रांत अध्यक्ष तूफान शर्मा ने कहा कि अतिथि शिक्षक सभी आवश्यक योग्यताओं को पूरा करते हैं, इसलिए उनके अनुभव के आधार पर उन्हें न्याय मिलना चाहिए।

    मुख्य मांगें इस प्रकार हैं
    नियमितीकरण के लिए विशेष विभागीय पात्रता परीक्षा आयोजित कर कम से कम 30% पद अतिथि शिक्षकों के लिए आरक्षित किए जाएं।
    शिक्षक भर्ती में 50% पद अतिथि शिक्षकों के लिए तय हों, हर वर्ष 4 बोनस अंक (अधिकतम 20) दिए जाएं और पात्रता अंकों में 10% की छूट दी जाए।
    स्कोर कार्ड में हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100) जोड़े जाएं और 50 दिन कार्य पूर्ण होने पर अनुभव अंक मिले, साथ ही 2011 संविदा परीक्षा के अंक भी जोड़े जाएं।
    12 महीने का वार्षिक अनुबंध लागू किया जाए और कार्यमुक्त होने पर समायोजन सुनिश्चित किया जाए।
    बीमा, पीएफ, स्वास्थ्य सुविधाएं और 13 आकस्मिक व 3 ऐच्छिक अवकाश प्रदान किए जाएं।
    ई-अटेंडेंस प्रणाली में सुधार कर काटे गए मानदेय का शीघ्र भुगतान किया जाए।
    तकनीकी समस्या होने पर ऑफलाइन उपस्थिति को मान्यता दी जाए।
    पुराने आश्वासनों को लागू करने की मांग तेज
    प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि अतिथि शिक्षकों को लेकर पहले कई घोषणाएं की गई थीं और इस मुद्दे को राजनीतिक समर्थन भी मिला था। लेकिन अब उन वादों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे शिक्षकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

  • भोपाल पहुंचकर रुकी आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा, 200 किमी पैदल आए कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    भोपाल पहुंचकर रुकी आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा, 200 किमी पैदल आए कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    भोपाल। मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर निकली आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा राजधानी पहुंचते ही थम गई। बैतूल से करीब 200 किलोमीटर का सफर तय कर आए आंदोलनकारियों को पुलिस ने बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी के पास रोक दिया और मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी।

    11 दिन में तय किया लंबा सफर
    यह पदयात्रा 1 अप्रैल को बैतूल जिले के अंबेडकर चौक से शुरू हुई थी। लक्ष्य था 11 दिनों में भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपना और आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुंचाना। पूर्व छात्र नेता रामकुमार नागवंशी के नेतृत्व में निकली इस यात्रा को आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा नाम दिया गया। उनका कहना है कि गांव-गांव में सेवाएं देने वाली इन कार्यकर्ताओं को न तो उचित वेतन मिलता है और न ही सरकारी कर्मचारी का दर्जा, इसलिए यह आंदोलन उनके अधिकारों के लिए है।

    राजधानी में एंट्री पर पुलिस ने रोका रास्ता

    शनिवार सुबह करीब 8:45 बजे जब पदयात्रा बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी के पास पहुंची, तब पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उन्हें मुख्यमंत्री निवास तक नहीं जाने दिया गया और पास ही बैठा दिया गया।

    व्यक्तिगत अनुभव से जुड़ा आंदोलन
    रामकुमार नागवंशी ने बताया कि उनके परिवार की महिलाएं भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। उनके संघर्ष को करीब से देखने के बाद ही उन्होंने इस पदयात्रा की शुरुआत की। उनके मुताबिक यह लाखों महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई है। तेज गर्मी के बावजूद कार्यकर्ताओं ने लगातार पैदल यात्रा जारी रखी। रास्ते में गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया और समर्थन जुटाया।

    मुख्य मांगें और आगे की रणनीति

    आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, साथ ही उनके वेतन और सुविधाओं में सुधार किया जाए। उनका कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

  • बैतूल में आदिवासी भूमि अधिकारों को लेकर जयस का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

    बैतूल में आदिवासी भूमि अधिकारों को लेकर जयस का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


    बैतूल । बैतूल जिले में आदिवासी भूमि अधिकारों को लेकर जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन ने जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं और आदिवासी समाज के लोगों ने रानी दुर्गावती ऑडिटोरियम में सभा आयोजित की जिसमें संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की गई।

    सभा के बाद कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर बैतूल कलेक्ट्रेट का रुख किया। वहां उन्होंने राज्यपाल के नाम ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा। ज्ञापन में मुख्य रूप से आदिवासी भूमि संरक्षण जमीन हड़पने के खिलाफ सुरक्षा और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा को सुनिश्चित करने की मांग की गई।

    कार्यकर्ताओं का कहना था कि पिछले वर्षों में आदिवासी भूमि से जुड़े मुद्दों पर प्रशासनिक कार्रवाई में देरी और कानूनी रूप से सही संरक्षण न होने के कारण कई समुदाय प्रभावित हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी भूमि के संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता दी जाए।

    आदिवासी समाज के लोग और युवा कार्यकर्ता इस प्रदर्शन के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अपने अधिकारों के लिए सतत जागरूक हैं और उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए जिससे प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक उनकी मांगों का प्रभावी संदेश पहुंचा।