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  • बदायूं में संदिग्ध बुखार का कहर: चार दिन में दो सगे भाइयों की मौत, गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात

    बदायूं में संदिग्ध बुखार का कहर: चार दिन में दो सगे भाइयों की मौत, गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात


    बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में संदिग्ध बुखार ने एक ही परिवार के दो युवकों की जान ले ली। दहगवां स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के नसीरपुर टप्पा मलसई गांव में चार दिनों के भीतर दो सगे भाइयों की मौत से पूरे गांव में भय का माहौल है। घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और अधिकारियों के निर्देश पर मेडिकल टीम ने गांव पहुंचकर जांच और उपचार का अभियान शुरू कर दिया।

    तेज बुखार के बाद बिगड़ी हालत
    जानकारी के अनुसार, गांव निवासी होरीलाल के 20 वर्षीय बेटे मोरपाल और 18 वर्षीय बेटे ब्रजेश को करीब चार दिन पहले अचानक तेज बुखार आया था। परिजनों का कहना है कि दोनों को बुखार के साथ अत्यधिक कमजोरी और उल्टी की शिकायत भी थी।

    शुरुआत में स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया, लेकिन दोनों की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और उपचार के बावजूद उनकी मौत हो गई। एक ही परिवार के दो जवान बेटों के निधन से घर में मातम पसरा है।

    गांव में मेडिकल कैंप, घर-घर सर्वे शुरू
    ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में कई अन्य लोग भी बुखार से पीड़ित हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने गांव में तत्काल मेडिकल कैंप लगाने और घर-घर सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।

    दहगवां स्वास्थ्य केंद्र की टीम शुक्रवार सुबह से गांव में मौजूद है। स्वास्थ्यकर्मी बीमार लोगों की जांच, रक्त के नमूने लेने और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने में जुटे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सलाह
    स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अफवाहों से बचने और घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में चिकित्सकीय जांच कराएं और झोलाछाप या अप्रमाणित उपचार से बचें।

    इसके साथ ही लोगों को उबालकर पानी पीने, घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने तथा जलभराव नहीं होने देने की सलाह दी गई है, ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सके। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और संक्रमण के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

  • बड़ी रणनीतिक तैयारी में जुटा चीन…. एशिया के विवादित समुद्री इलाकों में तैनात किए बड़े बेड़े

    बड़ी रणनीतिक तैयारी में जुटा चीन…. एशिया के विवादित समुद्री इलाकों में तैनात किए बड़े बेड़े


    बीजिंग।
    नई चाल के तह चीन (China) एशिया (Asia) के विवादित समुद्री इलाकों (Maritime areas) में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। इसके लिए वह मछली पकड़ने वाली नावों, कोस्ट गार्ड जहाजों (Coast Guard vessels.) और समुद्री मिलिशिया यूनिट्स (Maritime Militia Units) के बड़े बेड़े तैनात कर रहा है। यह एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद बिना किसी सीधी सैन्य टकराव के अपना नियंत्रण मजबूत करना है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट और ताइवान न्यूज के हवाले से यह जानकारी दी गई है। हाल ही में चीन की लगभग 200 मछली पकड़ने वाली नावें येलो सी में और अंदर तक चली गईं।

    ये नावें उन समुद्री इलाकों के और करीब पहुंच गईं, जिन पर चीन और दक्षिण कोरिया दोनों अपना दावा करते हैं। जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस कंपनी Ingenispace द्वारा जुटाए गए डेटा से पता चला है कि अहम शिपिंग मार्गों और विवादित समुद्री क्षेत्रों में जहाजों की आवाजाही असामान्य रूप से बहुत ज्यादा बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीजिंग अपनी ‘ग्रे-जोन’ रणनीति के तहत अब ज्यादा से ज्यादा नागरिक मछली पकड़ने वाले बेड़ों पर निर्भर हो रहा है। ये बेड़े दोहरे इस्तेमाल वाले ऑपरेशन्स के लिए तैयार किए गए हैं। इस रणनीति का मकसद धीरे-धीरे अपना प्रभाव बढ़ाना है, लेकिन साथ ही खुले युद्ध की स्थिति से भी बचना है।

    Ingenispace के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जेसन वांग ने कहा कि इन जहाजों की तैनाती से यह जाहिर होता है कि चीन अनियमित समुद्री ऑपरेशन्स के जरिए क्षेत्रीय समुद्री इलाकों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जहाजों की यह बढ़ती संख्या चीन की उस संभावित क्षमता को भी दर्शाती है, जिसके तहत वह तनाव बढ़ने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक शिपिंग मार्गों को बाधित कर सकता है। पूर्वी चीन सागर में भी चीन की समुद्री गतिविधियां तेज हो गई हैं। 3 अप्रैल को 600 से ज्यादा चीनी मछली पकड़ने वाली नावें लगभग 18 घंटों तक एक लंबी कतार बनाकर खड़ी देखी गईं।


    कोस्ट गार्ड की गश्त भी बढ़ी

    इसके साथ ही, बीजिंग ने विवादित डियाओयुताई द्वीपों के आसपास कोस्ट गार्ड की गश्त भी बढ़ा दी। साउथ चाइना सी में, चीन ने पिछले एक साल में स्कारबोरो शोल के पास अपने कोस्ट गार्ड ऑपरेशन्स को कथित तौर पर दोगुना कर दिया है और इस इलाके को ‘नेशनल नेचर रिजर्व’ घोषित करने के बाद ज्यादा सख्त प्रशासनिक उपाय लागू किए हैं। वियतनाम के पास पैरासेल आइलैंड्स में नई कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी देखी गई है।


    क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?

    सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ‘सीलाइट प्रोजेक्ट’ के रिसर्चर्स ने बताया कि चीन ने पिछले साल समुद्री मिलिशिया और कोस्ट गार्ड जहाजों की सुरक्षा में ‘एंटेलोप रीफ’ का विस्तार करना शुरू कर दिया था। एक्सपर्ट्स ने कहा कि चीन का लंबे समय का मकसद विवादित पानी में अपने दबदबे को धीरे-धीरे सामान्य बनाना है, और साथ ही सीधे टकराव से बचना है। CSIS में जियोपॉलिटिक्स और विदेश नीति विभाग के प्रेसिडेंट विक्टर चा ने कहा कि चीन की कार्रवाइयां बहुत सोच-समझकर की गई हैं, ताकि बिना युद्ध छेड़े क्षेत्रीय नियंत्रण को मजबूत किया जा सके।

  • होर्मुज की नाकेबंदी….जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए US ने तैनात किए 15 युद्धपोत

    होर्मुज की नाकेबंदी….जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए US ने तैनात किए 15 युद्धपोत


    वाशिंगटन।
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच गजब की तनातनी शुरू हो गई है। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में स्थित इस अहम समुद्री रास्ते पर ईरान के बाद अमेरिका ने पहरा लगा दिया है, जिसके बाद तनाव बढ़ता ही जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अपनी धमकियों के बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए पूरा दम लगा दिया है। अमेरिका ने इस क्षेत्र में 15 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए गए हैं, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों के आसपास नाकेबंदी लागू कर रहे हैं।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड फोर्स ने बताया है कि अमेरिका बहुत सख्ती से नाकेबंदी लागू कर रहा है। ऑपरेशन में अमेरिका का खास युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली (LHA-7) भी शामिल है। यहां से एफ-35बी लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट, एमवी-22 ओस्प्रे विमान और हेलिकॉप्टर लगातार होर्मुज की ओर भेजे जा रहे हैं। CENTCOM ने बताया कि यूएसएस ट्रिपोली खास तरह से डिजाइन किया गया है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा फाइटर जेट तैनात किए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर यह जहाज 20 से ज्यादा एफ-35बी जेट ऑपरेट कर सकता है।


    नाकेबंदी शुरू

    CENTCOM के मुताबिक, यह नाकेबंदी तय समय से शुरू कर दी गई है और इसे सख्ती से लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले हर जहाज पर नजर रखी जाएगी। हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि जो जहाज ईरान के अलावा दूसरे देशों के बंदरगाहों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे हैं, उन्हें नहीं रोका जाएगा। CENTCOM ने एक बयान में कहा, “नाकेबंदी सभी देशों के उन पोतों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी जाएगी।”

    वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान की कोई फास्ट अटैकर जहाज़ें नाकेबंदी के पास आईं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। हालांकि विश्लेषकों का कहना कि अमेरिका के लिए केवल बल प्रयोग के जरिये जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करना मुश्किल होगा। फिलहाल यह स्पष्ट भी नहीं है कि नाकेबंदी कैसे काम करेगी या ईरान जवाब में क्या कदम उठाएगा।


    नहीं हो पाया था युद्धविराम

    इससे पहले अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी को हुए सशर्त युद्ध-विराम समझौते को स्थायी शांति में बदलने के लिए पिछले शनिवार को पाकिस्तान में हुई बातचीत बेनतीजा रही थी, जिसके बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को निशाना बनाया है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर से शुरू होगी या नहीं, इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।


    ईरान ने दी बड़ी धमकी

    अमेरिकी एक्शन के जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग के मुताबिक, “फारस की खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सभी के लिए होगी या किसी के लिए भी नहीं।” ईरानी सेना ने कहा, “इस क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।”

  • West-Bangal: SIR प्रक्रिया को गति देने के लिए 150 बाहरी जजों की तैनाती… लेकिन भाषा बनी बड़ी चुनौती

    West-Bangal: SIR प्रक्रिया को गति देने के लिए 150 बाहरी जजों की तैनाती… लेकिन भाषा बनी बड़ी चुनौती


    कोलकाता।
    प. बंगाल (West-Bangal) में एसआईआर प्रक्रिया (SIR Process) को रफ्तार देने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देश पर दूसरे राज्यों से 150 से अधिक न्यायाधीशों की तैनाती की गई है। जमीनी स्तर पर इन बाहरी जजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है बांग्ला भाषा को समझना। कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) के पूर्व न्यायाधीशों को भी इस प्रक्रिया में जोड़ा गया है। ये सभी दावों-आपत्तियों के निपटारे, दस्तावेजों के सत्यापन और अंतिम निर्णय की प्रक्रिया में लगे हैं।

    इतनी बड़ी न्यायिक तैनाती के बावजूद कामकाज में सबसे बड़ी अड़चन भाषा बन रही है। एसआईआर के तहत आने वाले अधिकांश फॉर्म, दस्तावेज व गवाहों के बयान बांग्ला में हैं, जिन्हें दूसरे राज्यों से आए न्यायिक अधिकारी सीधे तौर पर समझ नहीं पा रहे हैं। बाहरी राज्य से आए एक न्यायाधीश ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि रोज सैकड़ों फाइलें देखनी होती हैं, जो बांग्ला में हैं। ऐसे में हर केस को समझने के लिए अनुवाद पर निर्भर रहना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, काम प्रभावित न हो, इसके लिए कई न्यायाधीशों को ट्रांसलेटर खुद रखने पड़ रहे हैं।


    फाइलें निपटाने में देरी संभव

    न्यायाधीशों के सामने भाषा की चुनौती का सीधा असर प्रक्रिया पर पड़ सकता है। बांग्ला न समझ पाने के कारण फाइलों के अनुवाद पर निर्भरता बढ़ रही है, जिससे मामलों के निपटारे में देरी संभव है। चुनाव आयोग के अनुसार, पहली सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट सोमवार को जारी होगी। इसमें उन वोटरों के नाम शामिल होंगे, जिनके दावे सही पाए गए हैं। फिर अपील और ट्रिब्यूनल प्रक्रिया से अंतिम सूची तैयार होगी।


    एसआईआर की यह स्थिति

    कुल दावे-आपत्तियां : 60 लाख से अधिक, 27 लाख मामले अब तक निपटाए गए।
    हटाए गए नाम : करीब 63 लाख से ज्यादा, 30 लाख मामले पुनर्विचार/विचाराधीन…बड़े पैमाने पर जोड़-घटाव जारी है।

  • ईरान के भूमिगत ठिकानों पर हमले की तैयारी? ब्रिटेन के एयरबेस पर अमेरिकी B-1B लांसर तैनात

    ईरान के भूमिगत ठिकानों पर हमले की तैयारी? ब्रिटेन के एयरबेस पर अमेरिकी B-1B लांसर तैनात

    वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच United States ने Iran के खिलाफ अपने सैन्य अभियान की तैयारी तेज कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने पहली बार United Kingdom के एक एयरबेस से ईरान पर हमले की योजना बनाई है। इसके लिए अमेरिकी वायुसेना के तीन रणनीतिक बमवर्षक विमान Rockwell B‑1B Lancer को ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस पर तैनात किया गया है।

    माना जा रहा है कि यह ब्रिटिश ठिकाने से ईरान पर संभावित अमेरिकी हमलों का पहला बड़ा मिशन हो सकता है। B-1B लांसर लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाला भारी बमवर्षक विमान है, जो बड़ी मात्रा में पारंपरिक बम ले जाने में सक्षम है।

    बंकर-बस्टर बमों की तैयारी

    रिपोर्ट के अनुसार एयरबेस पर ग्राउंड क्रू को बमवर्षक विमानों में GPS-गाइडेड हथियार लोड करते देखा गया है। इन हथियारों में Joint Direct Attack Munition (JDAM) किट से लैस बम शामिल हैं, जो सामान्य बमों को सटीक लक्ष्य भेदने वाले हथियार में बदल देते हैं।

    ये किट 500 पाउंड के Mk‑82 bomb, 1,000 पाउंड के Mk‑83 bomb और 2,000 पाउंड के Mk‑84 bomb जैसे बमों पर लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा इन्हें BLU‑109 जैसे पेनिट्रेटर बमों के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जो भूमिगत सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाए गए हैं।

    क्या होता है बंकर-बस्टर?

    बंकर-बस्टर बम विशेष रूप से जमीन के नीचे बने कंक्रीट बंकर, सुरंगों और सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इनका मजबूत स्टील आवरण विस्फोट से पहले जमीन के भीतर गहराई तक प्रवेश कर जाता है।

    अमेरिका का शक्तिशाली बंकर-बस्टर GBU‑57 Massive Ordnance Penetrator लगभग 200 फीट (करीब 60 मीटर) गहराई तक प्रवेश करने में सक्षम माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि B-1B लांसर जैसे भारी बमवर्षक विमानों को ऐसे हथियारों से लैस किया जाए तो वे भूमिगत मिसाइल ठिकानों और सैन्य भंडारों को भी निशाना बना सकते हैं।

    ब्रिटेन की भूमिका पर उठे सवाल

    इस संभावित सैन्य अभियान में ब्रिटेन की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। शुरुआती दौर में ब्रिटिश प्रधानमंत्री Keir Starmer की सरकार ने कहा था कि ब्रिटिश ठिकानों का इस्तेमाल सीधे हमलों के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

    हालांकि बाद में लंदन ने अमेरिकी अनुरोध को मंजूरी दे दी और कहा कि इसका उद्देश्य “रक्षा के लिए मिसाइल खतरों को स्रोत पर ही नष्ट करना” है। यह फैसला उस समय लिया गया जब Cyprus में स्थित एक ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला हुआ था।

    मध्य-पूर्व में बढ़ी सैन्य गतिविधि

    युद्ध की शुरुआत के बाद ब्रिटेन ने पूर्वी भूमध्यसागर में अतिरिक्त सैन्य संसाधन तैनात किए हैं और ईरानी मिसाइल तथा ड्रोन हमलों को रोकने के लिए सहयोगी देशों के साथ ऑपरेशन चला रहा है।

    हालांकि ब्रिटेन में इस युद्ध को लेकर जनमत बंटा हुआ है। सर्वे एजेंसी YouGov के एक सर्वे के मुताबिक केवल 10% लोगों ने ही ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जोरदार समर्थन किया, जबकि 37% लोगों ने इसका विरोध जताया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका वास्तव में ब्रिटिश एयरबेस से हमले करता है, तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव और भी बढ़ सकता है।

  • जबलपुर में दो गुटों के बीच हिंसक झड़प के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

    जबलपुर में दो गुटों के बीच हिंसक झड़प के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

    जबलपुर में दो गुटों के बीच हिंसक झड़प के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात
    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में पुरानी रंजिश को लेकर बुधवार रात दो पक्षों के बीच अचानक हिंसक झड़प हो गई। इस घटना में करीब 20 वर्षीय युवक घायल हो गया। विवाद के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया, जिसे देखते हुए प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। घायल युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
    मामूली कहासुनी से बढ़ा विवाद

    पुलिस के अनुसार, बुधवार रात करीब 10:30 बजे भान तलैया से छोटी ओमती मार्ग पर सोनकर समाज के दो पक्षों के बीच मामूली कहासुनी शुरू हुई थी। देखते ही देखते यह विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए।

    कुछ ही देर में बहस झड़प में बदल गई और दोनों तरफ से मारपीट शुरू हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि लोगों ने एक-दूसरे पर जमकर पत्थरबाजी भी कर दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    हमले में युवक घायल

    इस दौरान आयुष सोनकर नाम का युवक घायल हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उसकी हालत अब स्थिर है।

    मामले की सूचना मिलते ही बेलबाग, हनुमानताल और ओमती थाना क्षेत्र की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू में किया। Sonu Kurmi, सिटी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ने बताया कि इस मामले में अप्पा सोनकर समेत अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि अप्पा सोनकर पहले से ही एक अन्य आपराधिक मामले में वांछित है।

    गोली चलने की अफवाह से मची भगदड़

    घटना के दौरान गोली चलने की अफवाह भी फैल गई, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया और कुछ समय के लिए भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वास्तव में गोली चली या नहीं।

    पुलिस का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

    CCTV और वायरल वीडियो से जांच

    घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान के लिए वायरल वीडियो और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज अपने कब्जे में ले ली है और उनकी जांच की जा रही है।

    अधिकारियों का कहना है कि माहौल बिगाड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।