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  • T20 World Cup: श्रीलंका को हराने के बाद भी PAK टूर्नामेंट से बाहर, सेमीफाइनल में NZ

    T20 World Cup: श्रीलंका को हराने के बाद भी PAK टूर्नामेंट से बाहर, सेमीफाइनल में NZ


    कोलंबो।
    आईसीसी टी20 विश्‍व कप 2026 (ICC T20 World Cup 2026) के 50वें और सुपर-8 के अहम मैच में शनिवार को पाकिस्‍तान टीम की टक्‍कर श्रीलंका (Pakistan vs Sri Lanka) से हुई। यह मुकाबला पल्लेकेले इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया। इस मैच में पाकिस्‍तान ने श्रीलंका 5 रन से हराया। पाकिस्‍तान भले ही मैच जीत गई हो पर न्‍यूजीलैंड ने सेमीफाइनल में जगह बनाई है। दोनों टीमों के 3-3 अंक थे। पर कीवी टीम का नेट रन रेट पाकिस्‍तान से बेहतर था।

    श्रीलंका के कप्‍तान दासुन शनाका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैस‍ला लिया है। पहले बल्‍लेबाजी करने उतरी पाकिस्‍तान ने 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 212 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका टीम 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 207 रन ही बना सकी।

    इस जीत के बावजूद ग्रीन टीम सेमी-फाइनल की रेस से बाहर हो गई है. यहीं नहीं उसका टूर्नामेंट से भी बोरिया बिस्तर बंध चुका है. क्योंकि टीम को सेमी-फाइनल में प्रवेश करने के लिए विपक्षी टीम के खिलाफ आज 64 रनों से जीत हासिल करनी थी. मगर वह यह कारनामा नहीं कर पाई। वह श्रीलंका के खिलाफ आज के मैच में पांच रन से ही जीत पाई।

    पाकिस्तान की तरफ से जीत के लिए मिले 213 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए दसून शानका ने 31 गेंदों में 245.16 की स्ट्राइक रेट से 76 रनों की नाबाद विस्फोटक अर्धशतकीय पारी खेली. मगर वह भी टीम को जीत नहीं दिला सके. शानका के अलावा चौथे क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए पवन रत्नायके ने 37 गेंदों में 58 रनों का योगदान दिया. कामिल मिशारा 15 गेंद में 26 और चरित असलंका 18 गेंद में 25 रन बनाने में कामयाब रहे। पाकिस्तान की तरफ से आज के मुकाबले में सबसे सफल गेंदबाज अबरार अहमद रहे. जिन्होंने चार ओवरों में 23 रन खर्च करते हुए सर्वाधिक तीन सफलता प्राप्त की. उनके अलावा शाहीन शाह अफरीदी, नसीम शाह और मोहम्मद नवाज ने क्रमशः एक-एक विकेट चटकाए।

    इससे पहले पल्लेकेले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान की टीम 20 ओवरों में आठ विकेट के नुकसान पर 212 रन बनाने में कामयाब हुई थी. पारी का आगाज करते हुए साहबजादा फरहान सर्वोच्च स्कोरर रहे. जिन्होंने 60 गेंद में 100 रन की शतकीय पारी खेली. उनके अलावा फखर जमान ने 42 गेंदों में 200.00 की स्ट्राइक रेट से 84 रनों का योगदान दिया. बाकी के अन्य बल्लेबाज विपक्षी टीम के गेंदबाजों के सामने हमेशा रनों के लिए जुझते हुए ही नजर आए। श्रीलंका की तरफ से आज के मुकाबले में दिलशान मदुशंका ने सर्वाधिक तीन सफलता प्राप्त की. उनके अलावा दसून शानका ने दो और दुश्मांता चमीरा ने एक विकेट चटकाए।

  • SC की अनुमति के बावजूद किसी भी हाईकोर्ट में नहीं हुई एड-हॉक जज की नियुक्ति

    SC की अनुमति के बावजूद किसी भी हाईकोर्ट में नहीं हुई एड-हॉक जज की नियुक्ति


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा करीब एक साल पहले लंबित आपराधिक मामलों के निस्तारण के लिए मार्ग प्रशस्त किए जाने के बावजूद अब तक किसी भी हाई कोर्ट (High Court) में तदर्थ (एड-हॉक) न्यायाधीशों की नियुक्ति (Appointment Ad-Hoc Judges) नहीं हुई है। वजह, उच्च न्यायालयों ने इस दिशा में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया से परिचित लोगों के अनुसार, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी ने भी तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश नहीं की है।

    सर्वोच्च न्यायालय ने 18 लाख से अधिक आपराधिक मामलों के लंबित होने पर चिंता व्यक्त करते हुए 30 जनवरी, 2025 को उच्च न्यायालयों को तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की अनुमति दी थी। जिनकी संख्या न्यायालय की कुल स्वीकृत संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। केंद्रीय विधि मंत्रालय को हालांकि, अभी तक किसी भी हाई कोर्ट के कॉलेजियम से सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ आधार पर नियुक्त करने के लिए कोई सिफारिश प्राप्त नहीं हुई है।

    संविधान का अनुच्छेद 224ए उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों के प्रबंधन में सहायता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त करने की अनुमति देता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, संबंधित उच्च न्यायालय के कॉलेजियम विधि मंत्रालय के न्याय विभाग को उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले उम्मीदवारों के नाम या सिफारिशें भेजते हैं। इसके बाद विभाग उम्मीदवारों के बारे में जानकारी और विवरण जोड़ता है और फिर उन्हें उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम को भेज देता है। इसके बाद उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम अंतिम निर्णय लेता है और सरकार को चयनित व्यक्तियों को न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश करता है। राष्ट्रपति नवनियुक्त न्यायाधीश के ‘नियुक्ति पत्र’ पर हस्ताक्षर करते हैं।

    तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया स्थायी जैसी ही रहेगी, सिवाय इसके कि राष्ट्रपति नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि एक मामले को छोड़कर, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ उच्च न्यायालय न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने का कोई पूर्व उदाहरण नहीं है। उच्च न्यायालयों में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति पर 20 अप्रैल, 2021 को दिए गए फैसले में उच्चतम न्यायालय ने कुछ शर्तें लगाई थीं। हालांकि, बाद में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बी.आर. गवई (एक अन्य पूर्व प्रधान न्यायाधीश) और सूर्यकांत (वर्तमान प्रधान न्यायाधीश) की विशेष पीठ ने कुछ शर्तों में ढील दी और कुछ को स्थगित रखा।

    पूर्व प्रधान न्यायाधीश एसए बोब्डे द्वारा लिखित इस फैसले में, लंबित मामलों को निस्तारित करने के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को दो से तीन साल की अवधि के लिए तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।