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  • MP: उज्जैन में प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान जी प्रतिमा… श्रद्धालु मान रहे चमत्कार

    MP: उज्जैन में प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान जी प्रतिमा… श्रद्धालु मान रहे चमत्कार


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस कारण उज्जैन के प्रसिद्ध खड़े हनुमान जी (Standing Hanuman Ji) के मंदिर को हटाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन की टीमों ने मंदिर का ढांचा तोड़ दिया है लेकिन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा टस से मस होने का नाम नहीं ले रही है। प्रशासन की तमाम कोशिशें विफल रही हैं। इसको श्रद्धालु चमत्कार मान रहे हैं। विरोध में हिंदूवादी संगठनों और भक्तों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ कर मूर्तिं को हटाने का विरोध किया। अब तकनीकी जांच की बात कही जा रही है।


    सिहस्थ के मद्देनजर चौड़ी की जा रही सड़क

    अधिकारियों ने बताया कि उज्जैन में सिहस्थ 2028 की तैयारियों के मद्देनजर सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस चौड़ीकरण की हद में खड़े हनुमान जी के मंदिर का कुछ हिस्सा आ रहा है जिसे प्रसासन हटाने में लगा हुआ है। यह क्षेत्र कंठाल चौराहे से लेकर गोपाल मंदिर तक के मार्ग में है। मंदिर का ढांचा हटाने के बाद प्रशासन खड़े हनुमान जी की मूर्ति को बिना नुकसान पहुंचाए हटाना चाहता है।


    तमाम कोशिशें बेकार, टस से मस नहीं हुई प्रतिमा

    बताया जाता है कि बीते एक हफ्ते के भीतर प्रशासन की टीमों ने तीन बार हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की कोशिशें की लेकिन मूर्ति टस से मस नहीं हुई। अब श्रद्धालु, संत और हिंदूवादी संगठन इसे चमत्कार मान रहे हैं। लोग प्रशासन से मूर्ति को नहीं हटाने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि मौजूदा वक्त में हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिण दिशा की ओर है जबकि प्रशासन ने टंकी चौराहे पर मंदिर के लिए जो जगह दी है वहां प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर होगा।


    जैसे पता चल कि प्रशासन आने वाला है, लग गया जमावड़ा

    श्रद्धालुओं का कहना है कि इससे मंदिर के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व पर असर पड़ सकता है। बताया जाता है कि मंगलवार को बाबा महाकाल की राजसी सवारी के बाद खबरें फैलीं कि प्रशासन की टीम एक बार फिर मूर्ति को हटाने के लिए पहुंच सकती है। इसके बाद लोगों का जमावड़ा लगने लगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता और महामंडलेश्वर शैलेशानंद मंदिर पहुंच गए।


    हनुमानजी से मत उलझो, मिट जाओगे…

    भारी भीड़ के बीच भक्तों ने मंदिर के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया। लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। नारेबाजी करते हुए लोगों ने हनुमान जी की प्रतिमा को किसी भी सूरत में नहीं हटाने देने की चेतावनी दी। हिंदूवादी नेता रूपेश ठाकुर ने सरकार विकास के नाम पर 60 मंदिर हटा चुकी है। मैं सरकार से दो-टूक कहना चाहता हूं कि अटल विहारी वाजपेयी ने कहा था श्री राम जी मत उलझो मिट जाओगे। आज हम कहते हैं हनुमानजी से मत उलझो, मिट जाओगे।


    बढ़ रहा आक्रोश, विरोध प्रदर्शन होगा तेज

    रूपेश ठाकुर ने आगे कहा कि महापौर और पार्षद को इस्तीफा दे देना चाहिए। विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों का कहना है कि उनका विरोध और तेज होगा। मौजूदा वक्त में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा टेंट में विराजमान है। वहीं प्रशासन दिन प्रति दिन बढ़ते लोगों के आक्रोश के कारण कोई मुसीबत मोल नहीं लेना चाहता है। प्रशासन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने की कोशिशें कर रहा है। इसके लिए बेहद सावधानी बरती जा रही है।


    पुरातत्व विभाग की टीम भी लौटी

    प्रशासन की ओर से तमाम कोशिशें की जा चुकी हैं लेकिन मूर्ति हिलने का नाम नहीं ले रही है। इतना ही नहीं एक बार पुरातत्व विभाग की टीम भी लौट चुकी है। आलम यह कि खड़े हनुमान जी के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। नगर निगम की ओर से प्रतिमा को शिफ्ट करने के प्रयास सफल नहीं होने की खबरें ट्रेंड कर रही हैं। अब खड़े हनुमान जी मंदिर का मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया। अब मूर्ति की तकनीकी जांच की बात सामने आ रही है।

  • T20 World Cup: श्रीलंका को हराने के बाद भी PAK टूर्नामेंट से बाहर, सेमीफाइनल में NZ

    T20 World Cup: श्रीलंका को हराने के बाद भी PAK टूर्नामेंट से बाहर, सेमीफाइनल में NZ


    कोलंबो।
    आईसीसी टी20 विश्‍व कप 2026 (ICC T20 World Cup 2026) के 50वें और सुपर-8 के अहम मैच में शनिवार को पाकिस्‍तान टीम की टक्‍कर श्रीलंका (Pakistan vs Sri Lanka) से हुई। यह मुकाबला पल्लेकेले इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया। इस मैच में पाकिस्‍तान ने श्रीलंका 5 रन से हराया। पाकिस्‍तान भले ही मैच जीत गई हो पर न्‍यूजीलैंड ने सेमीफाइनल में जगह बनाई है। दोनों टीमों के 3-3 अंक थे। पर कीवी टीम का नेट रन रेट पाकिस्‍तान से बेहतर था।

    श्रीलंका के कप्‍तान दासुन शनाका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैस‍ला लिया है। पहले बल्‍लेबाजी करने उतरी पाकिस्‍तान ने 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 212 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका टीम 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 207 रन ही बना सकी।

    इस जीत के बावजूद ग्रीन टीम सेमी-फाइनल की रेस से बाहर हो गई है. यहीं नहीं उसका टूर्नामेंट से भी बोरिया बिस्तर बंध चुका है. क्योंकि टीम को सेमी-फाइनल में प्रवेश करने के लिए विपक्षी टीम के खिलाफ आज 64 रनों से जीत हासिल करनी थी. मगर वह यह कारनामा नहीं कर पाई। वह श्रीलंका के खिलाफ आज के मैच में पांच रन से ही जीत पाई।

    पाकिस्तान की तरफ से जीत के लिए मिले 213 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए दसून शानका ने 31 गेंदों में 245.16 की स्ट्राइक रेट से 76 रनों की नाबाद विस्फोटक अर्धशतकीय पारी खेली. मगर वह भी टीम को जीत नहीं दिला सके. शानका के अलावा चौथे क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए पवन रत्नायके ने 37 गेंदों में 58 रनों का योगदान दिया. कामिल मिशारा 15 गेंद में 26 और चरित असलंका 18 गेंद में 25 रन बनाने में कामयाब रहे। पाकिस्तान की तरफ से आज के मुकाबले में सबसे सफल गेंदबाज अबरार अहमद रहे. जिन्होंने चार ओवरों में 23 रन खर्च करते हुए सर्वाधिक तीन सफलता प्राप्त की. उनके अलावा शाहीन शाह अफरीदी, नसीम शाह और मोहम्मद नवाज ने क्रमशः एक-एक विकेट चटकाए।

    इससे पहले पल्लेकेले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान की टीम 20 ओवरों में आठ विकेट के नुकसान पर 212 रन बनाने में कामयाब हुई थी. पारी का आगाज करते हुए साहबजादा फरहान सर्वोच्च स्कोरर रहे. जिन्होंने 60 गेंद में 100 रन की शतकीय पारी खेली. उनके अलावा फखर जमान ने 42 गेंदों में 200.00 की स्ट्राइक रेट से 84 रनों का योगदान दिया. बाकी के अन्य बल्लेबाज विपक्षी टीम के गेंदबाजों के सामने हमेशा रनों के लिए जुझते हुए ही नजर आए। श्रीलंका की तरफ से आज के मुकाबले में दिलशान मदुशंका ने सर्वाधिक तीन सफलता प्राप्त की. उनके अलावा दसून शानका ने दो और दुश्मांता चमीरा ने एक विकेट चटकाए।

  • SC की अनुमति के बावजूद किसी भी हाईकोर्ट में नहीं हुई एड-हॉक जज की नियुक्ति

    SC की अनुमति के बावजूद किसी भी हाईकोर्ट में नहीं हुई एड-हॉक जज की नियुक्ति


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा करीब एक साल पहले लंबित आपराधिक मामलों के निस्तारण के लिए मार्ग प्रशस्त किए जाने के बावजूद अब तक किसी भी हाई कोर्ट (High Court) में तदर्थ (एड-हॉक) न्यायाधीशों की नियुक्ति (Appointment Ad-Hoc Judges) नहीं हुई है। वजह, उच्च न्यायालयों ने इस दिशा में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया से परिचित लोगों के अनुसार, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी ने भी तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश नहीं की है।

    सर्वोच्च न्यायालय ने 18 लाख से अधिक आपराधिक मामलों के लंबित होने पर चिंता व्यक्त करते हुए 30 जनवरी, 2025 को उच्च न्यायालयों को तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की अनुमति दी थी। जिनकी संख्या न्यायालय की कुल स्वीकृत संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। केंद्रीय विधि मंत्रालय को हालांकि, अभी तक किसी भी हाई कोर्ट के कॉलेजियम से सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ आधार पर नियुक्त करने के लिए कोई सिफारिश प्राप्त नहीं हुई है।

    संविधान का अनुच्छेद 224ए उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों के प्रबंधन में सहायता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त करने की अनुमति देता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, संबंधित उच्च न्यायालय के कॉलेजियम विधि मंत्रालय के न्याय विभाग को उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले उम्मीदवारों के नाम या सिफारिशें भेजते हैं। इसके बाद विभाग उम्मीदवारों के बारे में जानकारी और विवरण जोड़ता है और फिर उन्हें उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम को भेज देता है। इसके बाद उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम अंतिम निर्णय लेता है और सरकार को चयनित व्यक्तियों को न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश करता है। राष्ट्रपति नवनियुक्त न्यायाधीश के ‘नियुक्ति पत्र’ पर हस्ताक्षर करते हैं।

    तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया स्थायी जैसी ही रहेगी, सिवाय इसके कि राष्ट्रपति नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि एक मामले को छोड़कर, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ उच्च न्यायालय न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने का कोई पूर्व उदाहरण नहीं है। उच्च न्यायालयों में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति पर 20 अप्रैल, 2021 को दिए गए फैसले में उच्चतम न्यायालय ने कुछ शर्तें लगाई थीं। हालांकि, बाद में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बी.आर. गवई (एक अन्य पूर्व प्रधान न्यायाधीश) और सूर्यकांत (वर्तमान प्रधान न्यायाधीश) की विशेष पीठ ने कुछ शर्तों में ढील दी और कुछ को स्थगित रखा।

    पूर्व प्रधान न्यायाधीश एसए बोब्डे द्वारा लिखित इस फैसले में, लंबित मामलों को निस्तारित करने के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को दो से तीन साल की अवधि के लिए तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।