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  • देवदत्त पडिक्कल की मैराथन पारी से न्यूजीलैंड ए के गेंदबाज पस्त, 24 चौके और 3 छक्के जड़कर 199 रन पर हुए आउट

    देवदत्त पडिक्कल की मैराथन पारी से न्यूजीलैंड ए के गेंदबाज पस्त, 24 चौके और 3 छक्के जड़कर 199 रन पर हुए आउट


    नई दिल्ली । भारत ए और न्यूजीलैंड ए के बीच लिंकन के बर्ट सटक्लिफ ओवल मैदान पर खेले जा रहे पहले अनौपचारिक टेस्ट में देवदत्त पडिक्कल ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। दूसरी पारी में उन्होंने 199 रन की बेहतरीन पारी खेली लेकिन दोहरे शतक से महज एक रन दूर रह गए। पडिक्कल ने अपनी पारी के दौरान धैर्य और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया। हालांकि वह जिस तरह आउट हुए उससे भारतीय बल्लेबाज के चेहरे पर निराशा साफ नजर आई। उनकी इस पारी ने मुश्किल में फंसी भारत ए की टीम को मुकाबले में मजबूत वापसी का मौका दिया है।

    पडिक्कल ने 248 गेंदों का सामना करते हुए 199 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 24 चौके और तीन छक्के लगाए। वह दोहरा शतक पूरा करने के बेहद करीब थे लेकिन न्यूजीलैंड ए के तेज गेंदबाज जैक गिब्सन की गेंद उनके पैड पर लगी। गेंदबाज और विपक्षी खिलाड़ियों ने जोरदार अपील की जिसके बाद अंपायर ने उन्हें आउट करार दे दिया। भारतीय बल्लेबाज इस फैसले से संतुष्ट नहीं दिखे और दोहरे शतक से चूकने की निराशा उनके चेहरे पर नजर आई। हालांकि उनकी पारी ने भारत ए के लिए दूसरी पारी में मजबूत आधार तैयार कर दिया।

    दूसरी पारी में भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल केवल पांच रन बनाकर आउट हो गए जबकि केएल राहुल भी चार रन ही बना सके। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने से टीम पर दबाव बढ़ गया था। ऐसे समय में पडिक्कल ने साई सुदर्शन के साथ मिलकर पारी को संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ए के गेंदबाजों का सामना किया और तीसरे विकेट के लिए 340 गेंदों पर 215 रन की शानदार साझेदारी निभाई।

    साई सुदर्शन ने भी बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 184 गेंदों में 91 रन बनाए। उनकी पारी में 12 चौके शामिल रहे। पडिक्कल और सुदर्शन की साझेदारी ने भारत ए को शुरुआती झटकों से उबरने में मदद की। सुदर्शन के आउट होने के बाद कप्तान ध्रुव जुरेल भी ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके और केवल दो रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बावजूद पडिक्कल ने एक छोर संभाले रखा और रन बनाने का सिलसिला जारी रखा।

    इसके बाद पडिक्कल को यश राठौड़ का साथ मिला। दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर उपयोगी साझेदारी की और स्कोर को आगे बढ़ाया। यश राठौड़ ने भी जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक पूरा किया। टी ब्रेक तक भारत ए ने दूसरी पारी में पांच विकेट के नुकसान पर 377 रन बना लिए थे। यश राठौड़ 66 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे जबकि वॉशिंगटन सुंदर दो रन बनाकर उनका साथ दे रहे थे। इस समय भारत ए की कुल बढ़त 173 रन तक पहुंच चुकी थी और उसके पांच विकेट शेष थे।

    मैच की पहली पारी में भारत ए की बल्लेबाजी पूरी तरह लड़खड़ा गई थी और पूरी टीम केवल 113 रन बना सकी थी। इसके जवाब में न्यूजीलैंड ए ने 317 रन बनाकर 204 रन की अहम बढ़त हासिल कर ली थी। ऐसे में दूसरी पारी में पडिक्कल की शानदार बल्लेबाजी भारत ए के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। उनकी पारी ने न केवल टीम को संकट से बाहर निकालने में मदद की बल्कि मुकाबले में वापसी की उम्मीद भी जगा दी।

    हालांकि पडिक्कल अपने दोहरे शतक से चूक गए लेकिन 199 रन की उनकी पारी इस मुकाबले की सबसे अहम पारियों में शामिल हो गई। अब भारत ए की कोशिश अपनी बढ़त को और मजबूत करने की होगी ताकि न्यूजीलैंड ए के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा जा सके।

  • टीम इंडिया को मिला नया शतकवीर, देवदत्त पडिक्कल ने विदेशी धरती पर लगातार दो टेस्ट में सेंचुरी लगाकर रचा इतिहास

    टीम इंडिया को मिला नया शतकवीर, देवदत्त पडिक्कल ने विदेशी धरती पर लगातार दो टेस्ट में सेंचुरी लगाकर रचा इतिहास


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मुकाबले में भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने एक बार फिर अपने बल्ले का दम दिखाते हुए लगातार दूसरा शतक जड़ दिया। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने शानदार धैर्य और बेहतरीन तकनीक का परिचय देते हुए 168 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। इसके साथ ही पडिक्कल ने विदेशी धरती पर लगातार दो टेस्ट मैचों में शतक लगाने वाले चुनिंदा भारतीय बल्लेबाजों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया। इससे पहले गाले में खेले गए सीरीज के पहले टेस्ट में भी उन्होंने शानदार शतकीय पारी खेली थी और अब कोलंबो में भी अपने प्रदर्शन को दोहराकर टीम इंडिया के लिए बड़ी पारी खेली है।

    पडिक्कल ने कोलंबो टेस्ट में 193 गेंदों का सामना करते हुए 117 रन बनाए। उनकी पारी में 12 शानदार चौके शामिल रहे। उनकी बल्लेबाजी की खास बात यह रही कि उन्होंने शुरुआत से ही श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की और मुश्किल परिस्थितियों में भी अपना विकेट संभालकर रखा। इससे पहले गाले टेस्ट में पडिक्कल ने 167 रन की शानदार पारी खेली थी। उनकी उस पारी की बदौलत भारतीय टीम ने पहला टेस्ट 165 रन से अपने नाम किया था। अब दूसरे टेस्ट में भी शतक लगाकर पडिक्कल ने साबित कर दिया है कि उनका पिछला प्रदर्शन महज संयोग नहीं था।

    लगातार दो टेस्ट में शतक लगाने की उपलब्धि ने पडिक्कल को भारतीय क्रिकेट के एक खास क्लब में पहुंचा दिया है। साल 2018-19 के बाद विदेशी जमीन पर लगातार दो टेस्ट मैचों में शतक लगाने वाले वह पहले भारतीय बल्लेबाज हैं। उनसे पहले चेतेश्वर पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के दौरान यह उपलब्धि हासिल की थी। पुजारा ने मेलबर्न टेस्ट में 106 और सिडनी टेस्ट में 193 रन की शानदार पारियां खेली थीं। अब पडिक्कल ने भी लगातार दो विदेशी टेस्ट में शतक लगाकर इस खास रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है।

    कोलंबो टेस्ट में भारतीय टीम की शुरुआत हालांकि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया को शुरुआती झटका केएल राहुल के रूप में लगा। राहुल केवल 18 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद यशस्वी जायसवाल और पडिक्कल ने पारी को संभालने की कोशिश की। जायसवाल ने 45 रन की उपयोगी पारी खेली लेकिन असिथा फर्नांडो की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए।

    इसके बाद पडिक्कल ने कप्तान शुभमन गिल के साथ मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए 120 रन की शानदार साझेदारी हुई। गिल ने भी अर्धशतक जमाते हुए 50 रन बनाए लेकिन फर्नांडो की गेंद पर विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हो गए। दूसरी तरफ पडिक्कल लगातार क्रीज पर डटे रहे और अपने शतक तक पहुंचकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

    भारतीय टीम ने इस मुकाबले में कुलदीप यादव की जगह सारांश जैन को मौका दिया है। कुलदीप संक्रमण के कारण मुकाबले के लिए उपलब्ध नहीं थे। सारांश जैन इसी मुकाबले से टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण कर रहे हैं। वहीं भारत की नजर अब दूसरे टेस्ट में बड़ी पहली पारी का स्कोर खड़ा करने और सीरीज पर कब्जा मजबूत करने पर है। इस बीच पडिक्कल की लगातार दूसरी शतकीय पारी टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक खबर बनकर सामने आई है।

  • कोलंबो टेस्ट में भारत का पलड़ा भारी, पडिक्कल ने जड़ा अर्धशतक तो गिल ने भी जमाया पचासा

    कोलंबो टेस्ट में भारत का पलड़ा भारी, पडिक्कल ने जड़ा अर्धशतक तो गिल ने भी जमाया पचासा


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो के सिंहली क्रिकेट क्लब स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के दूसरे सेशन में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया। टी-ब्रेक तक भारतीय टीम ने पहली पारी में तीन विकेट के नुकसान पर 187 रन बना लिए थे। देवदत्त पडिक्कल ने एक बार फिर शानदार बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक पूरा किया जबकि कप्तान शुभमन गिल ने भी बेहतरीन पारी खेलते हुए पचासा जड़ा। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई मजबूत साझेदारी ने भारत को शुरुआती झटकों से उबारकर मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

    पहले टेस्ट में शतक लगाने वाले देवदत्त पडिक्कल ने कोलंबो में भी अपनी शानदार फॉर्म जारी रखी। टी-ब्रेक तक वह 117 गेंदों में 63 रन बनाकर क्रीज पर टिके हुए थे। उनकी पारी में सात शानदार चौके शामिल रहे। पडिक्कल ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजों का सामना किया और टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।

    कप्तान शुभमन गिल ने भी शानदार बल्लेबाजी की और 108 गेंदों पर 50 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में छह चौके लगाए। गिल और पडिक्कल ने तीसरे विकेट के लिए 209 गेंदों पर 120 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस साझेदारी ने भारतीय पारी को मजबूती दी और श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा दिया। हालांकि अर्धशतक पूरा करने के बाद गिल ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके और असिथा फर्नांडो की गेंद पर विकेटकीपर निरोशन डिकवेला को कैच दे बैठे।

    भारत की शुरुआत हालांकि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया ने शुरुआती दौर में ही केएल राहुल का विकेट गंवा दिया। राहुल सिर्फ 18 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद यशस्वी जायसवाल ने तेज शुरुआत की और कई शानदार चौके लगाए लेकिन वह अपनी पारी को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। जायसवाल 53 गेंदों पर 45 रन बनाकर असिथा फर्नांडो की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए।

    इन शुरुआती झटकों के बाद गिल और पडिक्कल ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ धैर्य से बल्लेबाजी की और लगातार रन बनाते हुए भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। टी-ब्रेक के समय ऋषभ पंत एक रन बनाकर पडिक्कल का साथ दे रहे थे। श्रीलंका की ओर से असिथा फर्नांडो अब तक दो विकेट ले चुके थे जबकि लाहिरू कुमारा को एक सफलता मिली।

    दूसरे टेस्ट के लिए भारतीय टीम में एक बदलाव किया गया है। कुलदीप यादव की जगह मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है। सारांश ने इसी मुकाबले से अपना टेस्ट डेब्यू किया। कप्तान गिल ने टॉस के समय बताया था कि कुलदीप संक्रमण के कारण चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। सारांश अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

    वहीं श्रीलंका की टीम में भी एक खिलाड़ी ने टेस्ट डेब्यू किया है। कामिल मिशारा को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है। भारतीय टीम दो मैचों की टेस्ट सीरीज में पहले ही 1-0 से आगे है। पहले टेस्ट में भारत ने श्रीलंका को 165 रनों से हराकर शानदार जीत दर्ज की थी। ऐसे में दूसरे टेस्ट में भी भारतीय टीम की नजर जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने पर है।

  • गिल फिट नहीं हुए तो किसे मिलेगा नंबर-4 का मौका? इन 3 खिलाड़ियों पर टिकी टीम इंडिया की नजर

    गिल फिट नहीं हुए तो किसे मिलेगा नंबर-4 का मौका? इन 3 खिलाड़ियों पर टिकी टीम इंडिया की नजर


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले टीम इंडिया के सामने शुभमन गिल की चोट ने नई चिंता खड़ी कर दी है। गिल भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान होने के साथ बल्लेबाजी क्रम में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अगर वह 15 अगस्त से शुरू होने वाले पहले टेस्ट तक पूरी तरह फिट नहीं हो पाते हैं तो भारतीय टीम को न सिर्फ कप्तानी बल्कि नंबर चार की बल्लेबाजी को लेकर भी बड़ा फैसला लेना पड़ सकता है।

    शुभमन गिल को प्रैक्टिस के दौरान दाहिने हाथ की रिंग फिंगर में चोट लगी है। इसी वजह से वह इंडिया और श्रीलंका इलेवन के बीच खेले जा रहे अभ्यास मुकाबले के पहले दिन मैदान पर नहीं उतरे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की मेडिकल टीम उनकी चोट पर लगातार नजर रख रही है। फिलहाल उनकी चोट कितनी गंभीर है और वह अभ्यास मैच में आगे हिस्सा लेंगे या नहीं इसे लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। हालांकि अगर वह पहले टेस्ट से पहले फिट हो जाते हैं तो टीम इंडिया के लिए राहत की खबर होगी लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो नंबर चार पर उनकी जगह भरना आसान नहीं होगा।

    ऐसी स्थिति में रवींद्र जडेजा सबसे अनुभवी विकल्पों में से एक हो सकते हैं। जडेजा भले ही शुद्ध रूप से नंबर चार के बल्लेबाज नहीं हैं लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका अनुभव और बल्लेबाजी क्षमता उन्हें इस भूमिका के लिए मजबूत दावेदार बनाती है। खासकर स्पिन के खिलाफ जडेजा की बल्लेबाजी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। वह पहले भी ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी कर चुके हैं और एक टेस्ट के लिए उन्हें नंबर चार पर भेजना टीम के लिए व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। इसके अलावा उनकी मौजूदगी टीम को गेंदबाजी में भी अतिरिक्त विकल्प देती है।

    दूसरा नाम ध्रुव जुरेल का है। विकेटकीपर बल्लेबाज जुरेल ने अब तक टेस्ट क्रिकेट में मुश्किल परिस्थितियों में अपनी बल्लेबाजी क्षमता दिखाई है। उन्होंने नंबर चार से लेकर नंबर छह तक बल्लेबाजी की है और उनके टेस्ट आंकड़े बताते हैं कि वह केवल बैकअप विकेटकीपर नहीं बल्कि एक उपयोगी बल्लेबाज भी हैं। अगर टीम प्रबंधन ऋषभ पंत के साथ एक अतिरिक्त बल्लेबाज खिलाने का फैसला करता है तो जुरेल को नंबर चार पर मौका दिया जा सकता है। गिल की गैरमौजूदगी उनके लिए खुद को साबित करने का बड़ा अवसर भी बन सकती है।

    तीसरा और शायद सबसे स्वाभाविक विकल्प देवदत्त पडिक्कल हो सकते हैं। पडिक्कल विशेषज्ञ बल्लेबाज के तौर पर टीम के साथ हैं और नंबर चार पर बल्लेबाजी का अनुभव रखते हैं। घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन करने वाले पडिक्कल तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज माने जाते हैं। अगर टीम प्रबंधन सीधे गिल की जगह विशेषज्ञ बल्लेबाज उतारना चाहता है तो पडिक्कल को मौका मिल सकता है। हालांकि इससे भारतीय बल्लेबाजी क्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की संख्या बढ़ जाएगी लेकिन एक टेस्ट के लिए यह बड़ी समस्या नहीं मानी जाएगी।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल शुभमन गिल की फिटनेस को लेकर है। बीसीसीआई की मेडिकल टीम की रिपोर्ट के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि वह श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट में मैदान पर उतर पाएंगे या नहीं। अगर गिल फिट नहीं होते हैं तो टीम इंडिया के पास जडेजा का अनुभव जुरेल की युवा क्षमता और पडिक्कल की विशेषज्ञ बल्लेबाजी के रूप में तीन अलग-अलग विकल्प मौजूद हैं। अब फैसला टीम मैनेजमेंट को करना होगा कि वह अनुभव को प्राथमिकता देता है युवा खिलाड़ी पर भरोसा करता है या विशेषज्ञ बल्लेबाज को नंबर चार की जिम्मेदारी सौंपता है।

  • 9 मैचों में 5 शतक, 781 रन… पडिक्कल से भी आगे निकला ये धुरंधर, 25 साल के अमन मोखाड़े ने उड़ाया गर्दा

    9 मैचों में 5 शतक, 781 रन… पडिक्कल से भी आगे निकला ये धुरंधर, 25 साल के अमन मोखाड़े ने उड़ाया गर्दा


    नई दिल्ली । जब कोई बल्लेबाज शानदार फॉर्म में होता है, तो उसे रोक पाना किसी भी गेंदबाजी आक्रमण के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों भारतीय घरेलू क्रिकेट में देखने को मिल रहा है, जहां एक 25 साल का युवा बल्लेबाज गेंदबाजों पर कहर बनकर टूट पड़ा है। यह खिलाड़ी कोई और नहीं, बल्कि विदर्भ के सलामी बल्लेबाज अमन मोखाड़े हैं, जिन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में अपने बल्ले से रनों की झड़ी लगा दी है। अमन मोखाड़े ने इस टूर्नामेंट में अब तक 9 मैच खेले हैं और इनमें 5 शानदार शतक जड़ चुके हैं। इन 9 पारियों में उनके बल्ले से कुल 781 रन निकले हैं, जिससे वह इस सीजन के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।
    उन्होंने कर्नाटक के स्टार बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल को भी पीछे छोड़ दिया है, जिनके नाम इस टूर्नामेंट में 721 रन दर्ज हैं। अमन की इस विस्फोटक बल्लेबाजी का ही नतीजा है कि विदर्भ की टीम ने विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में जगह बना ली है और अब खिताब जीतने से सिर्फ एक कदम दूर है। दाएं हाथ के इस ओपनर ने टूर्नामेंट की शुरुआत भी धमाकेदार अंदाज में की थी। पहले ही मैच में उन्होंने 110 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली, जबकि दूसरे मुकाबले में 82 रन बनाए। इसके बाद तो मानो शतकों की बारिश ही हो गई। हर मैच में अमन का आत्मविश्वास और तकनीक देखने लायक रही, जिसने चयनकर्ताओं और क्रिकेट एक्सपर्ट्स का ध्यान खींचा है।

    शानदार फॉर्म के चलते अमन मोखाड़े ने एक बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। वह अब लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज 1000 रन पूरे करने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं। उन्होंने यह कारनामा सिर्फ 16 पारियों में कर दिखाया, जिससे उन्होंने देवदत्त पडिक्कल और अभिनव मुकुंद का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने 1000 रन तक पहुंचने में 17 पारियां खेली थीं। इतना ही नहीं, अमन ने इस मामले में साउथ अफ्रीका के महान बल्लेबाज ग्रीम पोलॉक की बराबरी भी कर ली है, जिन्होंने भी 16 पारियों में 1000 लिस्ट-ए रन पूरे किए थे।

    अमन मोखाड़े का बल्ला सिर्फ विजय हजारे ट्रॉफी में ही नहीं, बल्कि पूरे घरेलू सीजन में आग उगलता नजर आया है। रणजी ट्रॉफी में उन्होंने 7 पारियों में 577 रन बनाए थे, जबकि सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनके नाम 206 रन दर्ज हैं। अब विजय हजारे ट्रॉफी में 781 रन बनाकर उन्होंने यह साफ कर दिया है कि वह लंबे रेस के घोड़े हैं। क्रिकेट फैंस के लिए अमन मोखाड़े भले ही नया नाम हों, लेकिन उनकी कहानी बेहद दिलचस्प है। 16 जनवरी 2001 को जन्मे अमन ने ज्वाला सिंह से कोचिंग ली है, जिन्होंने भारतीय टीम के युवा स्टार यशस्वी जायसवाल को भी तैयार किया है। अमन एक आक्रामक ओपनर होने के साथ-साथ लेग ब्रेक गेंदबाजी भी कर सकते हैं। अब 18 जनवरी को विजय हजारे ट्रॉफी का फाइनल खेला जाना है और सभी की नजरें एक बार फिर इस रन मशीन पर टिकी होंगी।