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  • मराठी नहीं आई तो 20 हजार जुर्माना!’ अफवाह से सड़क पर उतरे ऑटो-टैक्सी ड्राइवर, फडणवीस बोले- ऐसा कोई मकसद नहीं

    मराठी नहीं आई तो 20 हजार जुर्माना!’ अफवाह से सड़क पर उतरे ऑटो-टैक्सी ड्राइवर, फडणवीस बोले- ऐसा कोई मकसद नहीं


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के विरोध प्रदर्शन तक पहुंच गया है। राज्य सरकार के मराठी भाषा से जुड़े फैसले को लेकर सोमवार को मुंबई और आसपास के कई इलाकों में ड्राइवरों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान ड्राइवरों के बीच भारी जुर्माने और लाइसेंस रद्द होने जैसी खबरें तेजी से फैलने लगीं। मामला बढ़ता देख मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ड्राइवरों को मराठी भाषा का विशेषज्ञ बनाना नहीं है बल्कि उन्हें इतनी मराठी सिखाना है जिससे वे यात्रियों से सामान्य बातचीत कर सकें।

    मुंबई के कांदिवली मलाड वेस्ट दहिसर अंधेरी और आसपास के कई इलाकों में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के विरोध की खबर सामने आई। कुछ जगहों पर प्रदर्शन कर रहे ड्राइवरों ने दूसरे ड्राइवरों को यात्रियों को ले जाने से रोकने की कोशिश भी की। इससे सुबह के व्यस्त समय में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। विरोध के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैल गया कि अगर किसी ड्राइवर को कामकाजी मराठी नहीं आती है तो उस पर 5 हजार से 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

    इसी अफवाह ने ड्राइवरों की चिंता बढ़ा दी। अधिकारियों के मुताबिक ड्राइवरों के बीच भ्रामक जानकारी फैलने के कारण स्थिति बिगड़ी। बोरीवली RTO के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी माना कि इस मुद्दे को लेकर गलत जानकारी प्रसारित हुई थी। इसके बाद सरकार को स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत महसूस हुई।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार का मकसद किसी ड्राइवर को मराठी का एक्सपर्ट बनाना नहीं है। उन्हें सिर्फ इतनी मराठी आनी चाहिए जिससे वह यात्रियों से बातचीत कर सकें और रोजमर्रा के काम में भाषा का इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया गया है और अगर उन्हें अतिरिक्त समय की जरूरत होगी तो सरकार उस पर भी विचार कर सकती है।

    फडणवीस ने यह भी कहा कि किसी भी ड्राइवर का लाइसेंस केवल इस वजह से तुरंत रद्द नहीं किया गया है। उनका कहना था कि भाषा सीखने के मामले में सरकार का जोर समझ विकसित करने पर है न कि अनावश्यक सख्ती पर। यानी सरकार चाहती है कि दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र में आकर काम करने वाले ड्राइवर भी स्थानीय यात्रियों से बुनियादी स्तर पर मराठी में संवाद कर सकें।

    वहीं परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने नियमों को लेकर एक और महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि अगर कोई RTO अधिकारी निर्धारित समय से पहले ड्राइवर पर जुर्माना लगाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सरकार की ओर से भाषा सीखने के लिए तय समयसीमा को लेकर आगे की प्रक्रिया भी बताई गई है। मंत्री के मुताबिक निर्धारित अवधि में कामचलाऊ मराठी नहीं सीखने वाले ड्राइवरों को अतिरिक्त समय दिया जा सकता है और नियमों के अनुसार आगे कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे विवाद के बीच शिवसेना नेता संजय निरुपम भी सरकार से ड्राइवरों पर तत्काल जुर्माना न लगाने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि कुछ ड्राइवरों को नोटिस अवधि पूरी होने से पहले ही भारी जुर्माने का डर दिखाया जा रहा है। अब मुख्यमंत्री की सफाई के बाद सरकार की कोशिश यही है कि भाषा सीखने के फैसले को लेकर फैली अफवाहों पर विराम लगे और ड्राइवरों को नियमों की वास्तविक स्थिति समझाई जा सके।

  • गूंगी गुड़िया' विवाद पर गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति, सुनेत्रा पवार का पलटवार और कांग्रेस पर सत्तापक्ष का हमला

    गूंगी गुड़िया' विवाद पर गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति, सुनेत्रा पवार का पलटवार और कांग्रेस पर सत्तापक्ष का हमला


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में कांग्रेस की एक टिप्पणी ने नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को लेकर कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर की गई ‘गूंगी गुड़िया’ टिप्पणी पर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए हैं। इस बयान के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है जबकि खुद सुनेत्रा पवार ने भी संयमित लेकिन सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उचित समय आने पर इसका करारा जवाब दिया जाएगा।

    पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में बीड़ जिले की कानून व्यवस्था से जुड़े सवाल पर पत्रकारों ने सुनेत्रा पवार से प्रतिक्रिया जाननी चाही लेकिन उनके स्थान पर मंत्री धनंजय मुंडे जवाब देते नजर आए। इस पर कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि आखिर सुनेत्रा पवार कब तक गूंगी गुड़िया बनी रहेंगी। इस टिप्पणी के सामने आते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी केवल सुर्खियां बटोरने के लिए बेहद निचले स्तर की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति में इस तरह की व्यक्तिगत और अपमानजनक टिप्पणियों की कोई जगह नहीं है। उनके मुताबिक जनता ऐसे बयानों को पसंद नहीं करती और कांग्रेस केवल प्रचार पाने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रही है।

    उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भी इस पूरे विवाद पर पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में हर आरोप का जवाब तुरंत देना जरूरी नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सही समय आने पर अपने काम और अपने जवाब से सभी सवालों का उत्तर देंगी। उनके इस बयान को सधे हुए राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कांग्रेस की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि किसी महिला जनप्रतिनिधि के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल केवल एक नेता का नहीं बल्कि पूरे राज्य की महिलाओं का अपमान है। उन्होंने कांग्रेस से सार्वजनिक माफी मांगने की भी बात कही।

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पार्टी प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कहा कि कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि कभी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी इसी तरह के तंज का सामना करना पड़ा था लेकिन उन्होंने अपने नेतृत्व और कार्यों से आलोचकों को जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस महिलाओं के सम्मान की बात करती है लेकिन व्यवहार में दोहरे मापदंड अपनाती है।

    वहीं मंत्री धनंजय मुंडे ने दावा किया कि कांग्रेस सुनेत्रा पवार के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव से घबराई हुई है और इसी वजह से इस तरह की टिप्पणियां कर रही है। दूसरी ओर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि यह कोई असंसदीय शब्द नहीं है और उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक सवाल उठाना था। एनसीपी शरद पवार गुट के नेता रोहित पवार ने भी कहा कि यह टिप्पणी केवल उस घटना के संदर्भ में की गई थी जहां पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है क्योंकि सत्तापक्ष इसे महिला सम्मान का मुद्दा बना रहा है जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक जवाबदेही से जोड़कर देख रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सुनेत्रा पवार अपने कहे अनुसार उचित समय पर किस तरह का राजनीतिक जवाब देती हैं।

  • फडणवीस और शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी चर्चा, शरद गुट ने NDA में शामिल होने की अटकलों को बताया निराधार

    फडणवीस और शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी चर्चा, शरद गुट ने NDA में शामिल होने की अटकलों को बताया निराधार


    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके सरकारी आवास ‘नंदनवन’ में करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। इससे पहले जयंत पाटिल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी देर रात मुलाकात कर चुके थे।

    लगातार हुई इन बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या शरद पवार की पार्टी सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के करीब आ रही है। हालांकि दोनों नेताओं ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मुलाकात का राजनीतिक गठबंधन से कोई संबंध नहीं है।

    जयंत पाटिल ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनकी शिंदे से मुलाकात क्षेत्र के विकास कार्यों और शहरी विकास विभाग से जुड़े लंबित मामलों को लेकर थी। उन्होंने बताया कि एक नगर परिषद अध्यक्ष की अयोग्यता के खिलाफ दायर अपील पर भी चर्चा की गई।

    वहीं, जितेंद्र आव्हाड ने भी कहा कि इतने लंबे राजनीतिक अनुभव वाला कोई भी नेता यदि किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन पर चर्चा करना चाहता है, तो वह इस तरह सार्वजनिक रूप से मुलाकात नहीं करेगा। उनके मुताबिक, इन बैठकों को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक कयास बेबुनियाद हैं।

    आव्हाड ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के नगर परिषद अध्यक्ष को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई सत्तारूढ़ गठबंधन की दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि इस फैसले के जरिए उन्हें राजनीतिक रूप से झुकाने की कोशिश की जा रही है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल जानबूझकर ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं ताकि जयंत पाटिल की साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल खड़े किए जा सकें। आव्हाड ने कहा कि वे केवल इस पूरे मामले को राज्य के शीर्ष नेतृत्व के सामने रख रहे हैं, क्योंकि इतना बड़ा प्रशासनिक फैसला मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की जानकारी के बिना संभव नहीं हो सकता।

  • देवेंद्र फडणवीस को PM पद पर समर्थन देने का ऐलान उद्धव ठाकरे के बयान से सियासी पारा चढ़ा

    देवेंद्र फडणवीस को PM पद पर समर्थन देने का ऐलान उद्धव ठाकरे के बयान से सियासी पारा चढ़ा


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय नई हलचल पैदा हो गई जब शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर बड़ा बयान दिया। ठाकरे ने कहा कि यदि फडणवीस भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी करते हैं तो उनकी पार्टी उनका समर्थन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह फडणवीस के विरोधी नहीं बल्कि हितैषी हैं और महाराष्ट्र से यदि कोई नेता देश का प्रधानमंत्री बनता है तो उसका समर्थन किया जाना चाहिए।

    शिरडी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि कुछ राजनीतिक ताकतें ऐसी रणनीति बना रही हैं जिससे देवेंद्र फडणवीस 2029 में प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल न हो सकें। उन्होंने कहा कि अगर महाराष्ट्र का कोई नेता प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में पहुंचता है तो उनकी पार्टी उसके साथ खड़ी होगी।

    हालांकि समर्थन की बात कहने के साथ ठाकरे ने भाजपा की आंतरिक राजनीति पर भी तंज कसा। उनका कहना था कि यदि फडणवीस सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री पद की महत्वाकांक्षा जाहिर करते हैं तो यह उनके लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है। ठाकरे ने सवाल उठाया कि ऐसी घोषणा के बाद क्या वह अपनी ही पार्टी में उसी स्थिति में बने रह पाएंगे।

    शिरडी में आयोजित रैली के दौरान ठाकरे ने हाल में दल बदलकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए सांसदों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के छह सांसदों के पाला बदलने के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका रही। ठाकरे ने यह भी कहा कि साईं बाबा के दर्शन के दौरान उन्होंने देवेंद्र फडणवीस की कुर्सी सुरक्षित रहने की प्रार्थना की।

    इससे पहले भी उद्धव ठाकरे ने ऑपरेशन टाइगर को लेकर बयान देते हुए दावा किया था कि इसका वास्तविक उद्देश्य ऑपरेशन देवेंद्र था। उनके अनुसार यह कथित रणनीति फडणवीस के राजनीतिक कद को सीमित रखने और उन्हें भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दौड़ से दूर रखने के लिए बनाई गई थी।

    उधर देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें महाराष्ट्र के 14 करोड़ लोगों और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व का आशीर्वाद प्राप्त है इसलिए कोई भी उनके राजनीतिक पंख नहीं काट सकता। उन्होंने हाल में उद्धव ठाकरे के साथ एक ही विमान में यात्रा करने को लेकर उठी अटकलों को भी महज संयोग बताया।

    महाराष्ट्र में हाल के दिनों में लगातार राजनीतिक उठापटक देखने को मिल रही है। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में संभावित टूट तथा दल बदल की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे का यह बयान राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं को और तेज कर गया है।

  • फिर आंदोलन की राह पर अन्ना हजारे RTI नियमों के विरोध में 5 जुलाई से भूख हड़ताल की चेतावनी

    फिर आंदोलन की राह पर अन्ना हजारे RTI नियमों के विरोध में 5 जुलाई से भूख हड़ताल की चेतावनी


    नई दिल्ली ।सूचना के अधिकार को लेकर एक बार फिर देश के चर्चित समाजसेवी अन्ना हजारे आंदोलन की राह पर दिखाई दे रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा सूचना के अधिकार से जुड़े नियमों में किए गए बदलावों के विरोध में अन्ना हजारे ने 5 जुलाई से भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि राज्य सरकार नए नियमों को वापस नहीं लेती है तो वे जनहित में आंदोलन शुरू करेंगे।

    अन्ना हजारे ने इस संबंध में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में लागू किए गए महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम 2026, सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की मूल भावना के अनुरूप नहीं हैं। उनके अनुसार नए नियम नागरिकों की सूचना तक पहुंच को कठिन बना सकते हैं और शासन व्यवस्था में पारदर्शिता को प्रभावित कर सकते हैं।

    अपने पत्र में अन्ना हजारे ने विशेष रूप से आवेदन शुल्क में वृद्धि पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शुल्क बढ़ाने के पीछे कोई ठोस आर्थिक विश्लेषण या स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि सूचना का अधिकार कोई राजस्व जुटाने वाला कानून नहीं है बल्कि नागरिकों को शासन से जुड़े तथ्यों और सूचनाओं तक पहुंच प्रदान करने का एक लोकतांत्रिक माध्यम है।

    अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि यदि लगभग दो दशक बाद आवेदन शुल्क बढ़ाया जा रहा है तो सूचना देने में अनावश्यक देरी करने या जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों पर लगने वाले दंड में भी समान रूप से वृद्धि होनी चाहिए। उनका मानना है कि जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों पक्षों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।

    उन्होंने नए नियमों में पहचान पत्र को अनिवार्य किए जाने का भी विरोध किया है। अन्ना का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(2) के अनुसार किसी भी आवेदक को सूचना मांगने के कारण या व्यक्तिगत विवरण बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसे में पहचान संबंधी अतिरिक्त शर्तें व्हिसलब्लोअर, सामाजिक कार्यकर्ताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं।

    इसके अलावा उन्होंने एक विषय पर एक आवेदन की व्यवस्था को भी अनावश्यक और जटिल बताया है। उनके अनुसार यह नियम आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा और कई मामलों में जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया को कठिन बना सकता है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि बार-बार आवेदन आने पर उन्हें बंद करने की व्यवस्था से लोगों को पूर्ण और अद्यतन जानकारी प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है।

    अन्ना हजारे का कहना है कि यदि सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया अत्यधिक तकनीकी, महंगी और प्रशासनिक नियंत्रण वाली बना दी जाएगी तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही कमजोर होगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि नए नियमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए ताकि सूचना के अधिकार की मूल भावना सुरक्षित रह सके।

    अब सबकी नजर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि सरकार और अन्ना हजारे के बीच सहमति नहीं बनती है तो आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में सूचना के अधिकार को लेकर एक बड़ा जन आंदोलन देखने को मिल सकता है।

  • देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी से की मुलाकात, विकास कार्यों पर लिया मार्गदर्शन

    देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी से की मुलाकात, विकास कार्यों पर लिया मार्गदर्शन


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए दी गई, जिसमें दोनों नेताओं की तस्वीर भी साझा की गई।

    PMO ने अपने पोस्ट में बताया कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी से शिष्टाचार भेंट की। वहीं, मुख्यमंत्री ने भी इस मुलाकात को महाराष्ट्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया और इसे प्रेरणादायक अनुभव कहा।

    मुलाकात के बाद सीएम फडणवीस ने ‘एक्स’ पर लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को महाराष्ट्र में चल रहे विकास कार्यों और विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। साथ ही राज्य के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

    फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री से हर मुलाकात उन्हें नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा देती है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

    हालांकि, राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस मुलाकात को केवल औपचारिक नहीं माना जा रहा है। चर्चा है कि बैठक में महाराष्ट्र के विकास कार्यों के अलावा किसानों से जुड़े मुद्दों, विशेषकर प्याज उत्पादक किसानों की स्थिति और सहकारी चीनी उद्योग से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हुई।

    इससे पहले मुख्यमंत्री फडणवीस ने नई दिल्ली में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी थी।

    यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब महाराष्ट्र में कई विकास परियोजनाओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की आवश्यकता मानी जा रही है।

  • 10 मिनट में मुंबई बंद बनाम खोखली धमकी: बीएमसी चुनाव से पहले राउत और फडणवीस में जुबानी जंग तेज

    10 मिनट में मुंबई बंद बनाम खोखली धमकी: बीएमसी चुनाव से पहले राउत और फडणवीस में जुबानी जंग तेज


    नई दिल्ली । बृहन्मुंबई महानगरपालिका बीएमसी चुनाव 2026 की आहट के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। शिवसेना यूबीटी के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के एक ताजा बयान ने राज्य में सियासी घमासान छेड़ दिया है। राउत ने दावा किया कि ठाकरे परिवार की ताकत आज भी इतनी है कि वे मात्र 10 मिनट के भीतर पूरी मुंबई को ठप कर सकते हैं। इस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे गीदड़ भभकी करार दिया है।

    संजय राउत ने रविवार को एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान शिवसेना यूबीटी की सांगठनिक शक्ति का प्रदर्शन करते हुए कहा चुनाव में हार-जीत तो चलती रहती है लेकिन ठाकरे परिवार को कभी खत्म नहीं किया जा सकता। हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि हम आज भी 10 मिनट में मुंबई बंद करा सकते हैं। जब तक ठाकरे परिवार सलामत है तब तक मराठी अस्मिता और मुंबई भी सुरक्षित है। राउत का यह बयान उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच बढ़ती नजदीकियों और आगामी निकाय चुनावों में उनके संभावित गठबंधन की खबरों के बीच आया है।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राउत के इस दावे पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ऐसी खोखली धमकियों से डरने वाली नहीं है। 11 जनवरी को एक कार्यक्रम के दौरान फडणवीस ने कहा संजय राउत अपने घर के आसपास का इलाका भी बंद नहीं करा सकते। वह दिन भर सिर्फ सुर्खियों में रहने के लिए ऐसे बयान देते हैं। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि एक दौर था जब स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के एक इशारे पर मुंबई दो घंटे में बंद हो जाती थी, लेकिन अब शिवसेना यूबीटी के पास वैसी ताकत और जनाधार नहीं बचा है।

    फडणवीस ने साल 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को याद दिलाते हुए कहा कि जब एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी तब भी यूबीटी नेताओं ने दावा किया था कि शिंदे मुंबई में कदम नहीं रख पाएंगे। उन्होंने कहा इसके बावजूद शिंदे 50 विधायकों के साथ मुंबई आए खुलेआम सड़कों से होते हुए राजभवन गए और सरकार बनाई। राउत के दावे जमीन से कोसों दूर हैं। 2026 के बीएमसी चुनाव को लेकर छिड़ी इस जंग ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में मुंबई की सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंकने वाले हैं। जहाँ एक ओर राउत कार्ड और ठाकरे परिवार की विरासत का हवाला दे रहे हैं वहीं फडणवीस और महायुति सरकार इसे बदलते वक्त की राजनीति बताकर चुनौती दे रही है।

  • भाजपा की बड़ी जीत से बढ़ सकती है एकनाथ शिंदे की टेंशनविपक्ष और सहयोगियों पर होगा असर

    भाजपा की बड़ी जीत से बढ़ सकती है एकनाथ शिंदे की टेंशनविपक्ष और सहयोगियों पर होगा असर


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के स्थानिक निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी भा,ज,पा,शिवसेना और एनसीपी अजित पवार गुट के गठबंधन महायुति ने भारी जीत दर्ज की है। भाजपा ने 129 सीटों के साथ सबसे ज्यादा अध्यक्ष पद जीतेजबकि शिवसेना ने 51 और एनसीपी अजित पवार ने 35 अध्यक्ष पदों पर जीत हासिल की। कुल 288 निकायों में से महायुति ने 215 निकायों में जीत हासिल कीजिससे भाजपा का इस चुनाव में वर्चस्व साफ तौर पर दिखा।

    इन परिणामों के बाद भाजपा के लिए यह एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। भाजपा ने इस चुनाव में अकेले प्रचार कियाजिससे पार्टी को यह जानने का मौका मिला कि वह अपनी शत-प्रतिशत भाजपा के लक्ष्य की दिशा में कितनी दूर तक बढ़ रही है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि इन नतीजों से कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास भी बढ़ेगाखासकर 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव में।

    हालांकिइस जीत के साथ भाजपा के सहयोगी दलों के लिए चिंता भी बढ़ सकती है। भाजपा की बेजोड़ जीत यह संकेत देती है कि पार्टी अब अपनी राजनीतिक राह पर अकेले बढ़ सकती है और इसे अपने सहयोगियों की कम जरूरत हो सकती है। इस परिणाम के बाद कुछ समय पहले से ही कमजोर हो रही महाविकास अघाड़ी गठबंधन की स्थिति और भी अस्थिर हो सकती हैखासकर तब जब भाजपा अपने सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे पर विचार करेगी।

    इसी तरहविपक्ष के लिए भी यह चुनाव परिणाम चिंता का कारण बन सकते हैं। विधानसभा चुनाव में पहले ही झटके झेल चुका विपक्ष इस बार भी पिछड़ता दिख रहा हैखासकर जब बीएमसी बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव नजदीक हैं। शिवसेना यूबीटी और एनसीपी एसपी दोनों ही अपनी सीटों के दोहरे आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए हैं। यह परिणाम विपक्ष के लिए और भी समस्याएं पैदा कर सकते हैंक्योंकि फूट के कारण पहले से ही कमजोर पड़ चुकी पार्टियों को अब इस पर काबू पाना और भी मुश्किल हो सकता है। उद्धव ठाकरे गुट को लेकर भी असमंजस बना हुआ हैक्योंकि शिवसेना यूबीटी की स्थिति पहले से ही कमजोर हो चुकी है

    शिवसेना के 3 दशकों के प्रभाव को बनाए रखना अब चुनौतीपूर्ण हो सकता हैखासकर जब भाजपा की जीत से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जीत को संगठन और सरकार के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस चुनाव में सकारात्मक विकास एजेंडे पर प्रचार किया और कभी किसी राजनीतिक नेता या पार्टी की आलोचना नहीं की। फडणवीस का मानना है कि यह पहली बार है जब पार्टी ने शत-प्रतिशत सकारात्मक वोट मांगे थेऔर उन्हें जनता का शत-प्रतिशत समर्थन मिला है। इस चुनाव परिणाम के बाद भाजपा अब राज्य की राजनीति में और भी दबदबा बना सकती हैलेकिन इसका असर महाविकास अघाड़ी गठबंधन और विपक्षी दलों पर भी होगा।

  • Maharashtra Politics Alert: BMC चुनाव से पहले माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे को लेकर सियासी उठापटक

    Maharashtra Politics Alert: BMC चुनाव से पहले माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे को लेकर सियासी उठापटक


    मुंबई/महाराष्ट्र की राजनीति में BMC चुनाव से पहले सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे को सदनिका घोटाला मामले में नासिक जिला न्यायालय द्वारा दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। अदालत ने 16 नवंबर को सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद पुलिस ने कोकाटे की गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर दी है और किसी भी समय उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी होने की संभावना बनी हुई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर वारंट जारी हुआ, तो पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे में एनसीपी प्रमुख अजित पवार को यह निर्णय लेना होगा कि कोकाटे इस्तीफा दें या हाई कोर्ट की रोक तक अपने मंत्री पद को बरकरार रखें। इस राजनीतिक पेंच ने सत्तारूढ़ दल और पार्टी नेतृत्व दोनों के लिए रणनीति बदलने की चुनौती खड़ी कर दी है।

    अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस की अहम बैठक
    हालिया राजनीतिक चर्चाओं के बीच अजित पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ‘वर्षा’ निवास पर मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे और विभाग के आवंटन पर विस्तृत चर्चा हुई। फडणवीस ने साफ कहा कि कोकाटे के इस्तीफे का निर्णय पार्टी नेतृत्व और अजित पवार पर निर्भर करेगा। बैठक में विभाग आवंटन पर भी बात हुई। फडणवीस ने अजित पवार से राय मांगी कि किसे विभाग सौंपा जाए। इससे पहले इसी तरह के हालात में धनंजय मुंडे को इस्तीफा देना पड़ा था।राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कोकाटे के इस्तीफे से एनसीपी की अंदरूनी राजनीति प्रभावित हो सकती है और आगामी BMC चुनाव में इसका असर भी देखने को मिल सकता है।

    हाई कोर्ट की रोक और मंत्री पद की स्थिति
    माणिकराव कोकाटे का मंत्री पद केवल हाई कोर्ट की रोक पर सुरक्षित रह सकता है। अगर कोर्ट रोक नहीं लगाती है, तो उनके इस्तीफे की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। विभाग आवंटन के मामले में पार्टी नेतृत्व को नई रणनीति तैयार करनी होगी। विश्लेषकों का मानना है कि BMC चुनाव से पहले यह मामला पार्टी और सरकार दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। अदालत का फैसला और अजित पवार के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी को इसी समय रणनीति बदलकर चुनावी समीकरणों को मजबूत करना होगा।

    मंत्रिपद और BMC चुनाव रणनीति पर असर
    कुल मिलाकर, माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे और विभाग आवंटन के फैसले से महाराष्ट्र में सियासी उठापटक बढ़ सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी नई रणनीतियों और संभावित बदलावों पर चर्चाएं तेज हो सकती हैं।BMC चुनाव के नजदीक आने के कारण यह मामला सिर्फ एनसीपी के आंतरिक समीकरण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके प्रभाव से सरकार की सियासी छवि, गठबंधन की स्थिति और चुनावी रणनीति भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए पार्टी के नेताओं और सियासी विश्लेषकों की निगाहें लगातार इस मामले पर बनी हुई हैं।

  • अन्ना हजारे ने 30 जनवरी 2026 से अनशन का किया ऐलान, बोले- "कानून लागू होने तक अंतिम सांस तक करेंगे आंदोलन

    अन्ना हजारे ने 30 जनवरी 2026 से अनशन का किया ऐलान, बोले- "कानून लागू होने तक अंतिम सांस तक करेंगे आंदोलन


    नई दिल्‍ली । समाजसेवी(social worker) अन्ना हजारे ने एक बार फिर देश को हिला देने वाला ऐलान कर दिया है। 30 जनवरी 2026 से महाराष्ट्र(Maharashtra) के रालेगण सिद्धि में वे आमरण अनशन(Hunger Strike till death) पर बैठने जा रहे हैं और यह अनशन उनकी अंतिम सांस तक चलेगा। अन्ना ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस(Devendra Fadnavis) को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि अगर कानून तुरंत लागू नहीं हुआ तो वे प्राण त्याग देंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे। अन्ना के इस ऐलान से एक बार फिर महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारे में हड़कंप मच गया है। गौरतलब है कि इससे पहले 2011 में अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन किया था। उस वक्त आंदोलन का ऐसा असर हुआ था कि केंद्र के साथ-साथ दिल्ली की कांग्रेस सरकार की विदाई हो गई थी।

    फिर आंदोलन पर क्यों उतरे अन्ना हजारे?
    अब सवाल यह है कि अन्ना हजारे ने अचानक फिर आंदोलन की घोषणा क्यों की? दरअसल, इस बार अनशन का कारण महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून को लागू करने में हो रही देरी है। बता दें कि राज्य में लोकायुक्त कानून को मंजूरी मिले दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसी से नाराज समाजसेवी अन्ना हजारे एक बार फिर आंदोलन के मूड में हैं।

    रालेगण सिद्धि में होगा आमरण अनशन
    अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर साफ कहा है कि अगर लोकायुक्त कानून तुरंत लागू नहीं किया गया तो वे 30 जनवरी 2026 से अपने गांव रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन शुरू कर देंगे। पत्र में उन्होंने लिखा है कि हार्ट अटैक से मरने की बजाय देश और समाज के हित में प्राण त्यागना उनके लिए सौभाग्य की बात होगी। बता दें कि अन्ना हजारे लंबे समय से महाराष्ट्र में मजबूत लोकायुक्त कानून लागू करने की मांग करते आ रहे हैं।

    2024 में राज्यपाल ने दी थी मंजूरी
    अन्ना हजारे के मुताबिक, लोकायुक्त विधेयक 2022 में विधानसभा से और 2023 में विधान परिषद से पारित हो चुका है। 2024 में राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई, इसके बावजूद आज तक कानून लागू नहीं हुआ। अन्ना ने कहा कि राज्य सरकार ने यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए केंद्र को भेज दिया है, पर एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई है।

    मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अन्ना हजारे ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि यह उनका निजी मुद्दा नहीं, बल्कि देश की जनता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का सवाल है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार में इस कानून को लागू करने की इच्छाशक्ति नजर नहीं आ रही। इसलिए उनके पास आमरण अनशन के अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।