Tag: Dhaka Political News

  • बांग्लादेशी राजनीति में नया बवाल, बीएनपी सांसद ने शेख हसीना की अवामी लीग के विलय का किया समर्थन।

    बांग्लादेशी राजनीति में नया बवाल, बीएनपी सांसद ने शेख हसीना की अवामी लीग के विलय का किया समर्थन।

    नई दिल्ली ।बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत से दिए गए बयान और दिसंबर में स्वदेश वापसी की घोषणा के बीच देश की राजनीति में एक नया विवाद गहरा गया है। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के सांसद नासिर उद्दीन चौधरी ने पूर्व प्रधानमंत्री की पार्टी अवामी लीग को अपना राजनीतिक सहयोगी बताते हुए दोनों दलों के भविष्य में विलय का सुझाव दिया है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पार्टी के सांसद के इस अप्रत्याशित बयान के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है, क्योंकि दोनों दलों के बीच ऐतिहासिक रूप से गहरा राजनीतिक विरोध रहा है।

    सुनामगंज-2 संसदीय क्षेत्र से सांसद नासिर उद्दीन चौधरी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अवामी लीग को दुश्मन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि वे एक सहयोगी की भूमिका में हैं। उन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम के साझा इतिहास का हवाला देते हुए दावा किया कि आने वाले समय में अवामी लीग का विलय बीएनपी में हो सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश की अंतरिम व्यवस्था और वर्तमान सरकार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है तथा अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं।

    सांसद के इस बयान के तुरंत बाद बीएनपी के शीर्ष नेतृत्व और सरकारी प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह विचार पूरी तरह से व्यक्तिगत है और इसका पार्टी की आधिकारिक नीति से कोई संबंध नहीं है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि पूर्ववर्ती शासन के दौरान हुए घटनाक्रमों और राजनीतिक दमन के कारण दोनों दलों के बीच किसी भी प्रकार के तालमेल या विलय का प्रश्न ही नहीं उठता। सरकारी प्रतिनिधियों ने शेख हसीना के हालिया बयानों पर भी आपत्ति जताते हुए इसे देश के लोकतांत्रिक ढांचे और राजनीतिक स्थिरता के प्रतिकूल बताया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2024 के घटनाक्रमों के बाद से बांग्लादेश की राजनीति अत्यंत संवेदनशील दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहां सरकार पूर्व प्रधानमंत्री को वापस लाने और उन पर कानूनी प्रक्रिया चलाने के प्रयास में जुटी है, वहीं पार्टी के भीतर से आने वाले इस तरह के बयानों से संगठन की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सांसद के इस विवादित बयान से आम जनता और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है कि आगामी चुनावों से पहले देश के राजनीतिक समीकरण क्या मोड़ लेंगे।