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  • बांग्लादेश चीन से J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में, रक्षा आधुनिकीकरण से बदलेगा क्षेत्रीय सामरिक संतुलन

    बांग्लादेश चीन से J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में, रक्षा आधुनिकीकरण से बदलेगा क्षेत्रीय सामरिक संतुलन


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश अपनी वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए चीन निर्मित J-10CE मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की खरीद की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित सौदे को देश के व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा बताया जा रहा है। इसके साथ ही अटैक हेलीकॉप्टर, वीआईपी हेलीकॉप्टर और ड्रोन प्रणालियां खरीदने की योजना पर भी काम चल रहा है।

    बांग्लादेश सरकार के अनुसार, J-10CE और अटैक हेलीकॉप्टरों से संबंधित प्रस्ताव पर खरीद समितियों ने मसौदा तैयार कर लिया है। अब इन दस्तावेजों को सशस्त्र बल प्रभाग और संबंधित मंत्रालयों से मंजूरी मिलने का इंतजार है। सरकार की योजना उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आधार पर खरीद को मौजूदा वित्तीय वर्ष में आगे बढ़ाने या अगले बजट में शामिल करने की है।

    J-10CE चीन का चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। यह अलग-अलग प्रकार के हवाई अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। बांग्लादेश की ओर से विमान की क्षमताओं और लागत को खरीद प्रक्रिया में महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि समान श्रेणी के कुछ पश्चिमी लड़ाकू विमानों की तुलना में चीनी विकल्प अपेक्षाकृत कम लागत में उपलब्ध हो सकते हैं।

    बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण सलाहकार जाहेद उर रहमान ने J-10CE के युद्ध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य संघर्ष का हवाला दिया। हालांकि, किसी राफेल विमान को J-10CE द्वारा मार गिराए जाने की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस दावे को लेकर अलग-अलग विरोधाभासी बातें सामने आती रही हैं, इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं है।

    ढाका की प्रस्तावित खरीद केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। सरकार अटैक हेलीकॉप्टर, वीआईपी परिवहन के लिए हेलीकॉप्टर और मानव रहित हवाई प्रणालियों यानी ड्रोन की क्षमता बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इसका उद्देश्य बांग्लादेश की वायुसेना और व्यापक सुरक्षा ढांचे को आधुनिक तकनीक से मजबूत करना बताया गया है।

    J-10CE की संभावित खरीद का क्षेत्रीय प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बांग्लादेश भारत का पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक तथा सुरक्षा संबंध रहे हैं। ऐसे में ढाका की सैन्य खरीद में चीन की भूमिका बढ़ने पर दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरणों पर चर्चा स्वाभाविक है।

    हालांकि, प्रस्तावित खरीद को अभी अंतिम सौदा नहीं माना जा सकता। मसौदा समझौतों को विभिन्न सरकारी स्तरों पर मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना है। इसके बाद ही विमान और अन्य रक्षा उपकरणों की वास्तविक खरीद, संख्या, कीमत तथा आपूर्ति से जुड़ी शर्तें स्पष्ट हो सकेंगी।

    बांग्लादेश सरकार इस रक्षा योजना को अपनी रणनीतिक निर्णय क्षमता से भी जोड़ रही है। सरकार के प्रतिनिधियों का कहना है कि देश अब अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विदेश और रक्षा नीति से जुड़े फैसले लेने पर अधिक जोर दे रहा है। इसी संदर्भ में चीन से लड़ाकू विमान खरीदने की चर्चा को स्वतंत्र रणनीतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

    J-10CE सौदा आगे बढ़ता है तो यह बांग्लादेश की वायुसेना के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक सामरिक उपयोगिता विमान की संख्या, हथियार प्रणाली, प्रशिक्षण, रखरखाव और परिचालन क्षमता पर निर्भर करेगी। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ढाका ने खरीद प्रक्रिया को औपचारिक स्तर पर आगे बढ़ा दिया है और संबंधित प्रस्ताव मंजूरी के चरण में पहुंच चुके हैं।

  • भारत बांग्लादेश क्रिकेट मैच, BCCI टीम इंडिया, बांग्लादेश क्रिकेट टीम, ढाका क्रिकेट स्टेडियम, भारत बांग्लादेश सीरीज

    भारत बांग्लादेश क्रिकेट मैच, BCCI टीम इंडिया, बांग्लादेश क्रिकेट टीम, ढाका क्रिकेट स्टेडियम, भारत बांग्लादेश सीरीज

    नई दिल्ली ।भारत और बांग्लादेश के बीच सितंबर 2026 में प्रस्तावित वनडे और टी20 सीरीज को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है। भारतीय क्रिकेट टीम इस दौरे पर जाएगी या नहीं, इसका अंतिम फैसला फिलहाल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के हाथ में नहीं है। बांग्लादेश में मौजूदा परिस्थितियों और खिलाड़ियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को देखते हुए बीसीसीआई ने इस मामले में भारत सरकार की मंजूरी को जरूरी बताया है।

    प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार भारतीय टीम को बांग्लादेश दौरे पर तीन वनडे और तीन टी20 मुकाबले खेलने हैं। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड इस सीरीज को आयोजित करने को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है और उसने भारतीय बोर्ड के सामने दौरे को लेकर अपनी तैयारी भी जाहिर की है। दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड के बीच इस विषय पर बातचीत जारी है, लेकिन भारतीय टीम की यात्रा को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।

    बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बोर्ड सुरक्षा से जुड़े किसी भी मामले में अपने स्तर पर अंतिम फैसला नहीं लेना चाहता। ऐसे में भारत सरकार के संबंधित विभागों से बातचीत की जाएगी और सरकारी मंजूरी मिलने के बाद ही दौरे पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया जाएगा। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा को बोर्ड की प्राथमिकता माना जा रहा है।

    बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 29 अगस्त से 15 सितंबर के बीच प्रस्तावित व्हाइट बॉल सीरीज के लिए समय भी निर्धारित रखा है। इस अवधि में तीन वनडे और तीन टी20 मैच कराने की योजना है। हालांकि, भारतीय टीम के दौरे की पुष्टि सरकार की सुरक्षा समीक्षा और मंजूरी पर निर्भर करेगी। अगर अनुमति मिलती है तो निर्धारित अवधि में सीरीज आयोजित की जा सकती है।

    इस पूरे मामले में भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुरक्षा परिस्थितियों का आकलन करने के बाद सरकार की ओर से बीसीसीआई को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भारतीय खिलाड़ी बांग्लादेश की राजधानी ढाका जाएंगे या दौरा आगे के लिए टाल दिया जाएगा।

    इस सीरीज का इतिहास भी मौजूदा स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। भारत और बांग्लादेश के बीच यह दौरा मूल रूप से 2024 में प्रस्तावित था। उस समय बांग्लादेश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और बाद में हुए राजनीतिक बदलाव के कारण दोनों देशों के बीच परिस्थितियां बदल गई थीं। इसी पृष्ठभूमि में प्रस्तावित क्रिकेट दौरे को आगे के लिए स्थगित कर दिया गया था।

    अब 2026 में इस सीरीज को दोबारा आयोजित करने की योजना सामने आई है। हालांकि, पहले की परिस्थितियों और वर्तमान सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारतीय पक्ष किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहता। क्रिकेट बोर्ड के लिए खिलाड़ियों की सुरक्षा से समझौता नहीं करना प्राथमिकता है।

    अगर भारत सरकार दौरे को मंजूरी देती है तो अगस्त के अंत और सितंबर के दौरान दोनों टीमों के बीच सीमित ओवरों की सीरीज देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का प्रस्तावित कार्यक्रम प्रभावित होगा।

    फिलहाल दोनों क्रिकेट बोर्ड के बीच संपर्क बना हुआ है और अंतिम निर्णय के लिए सरकारी स्तर पर सुरक्षा आकलन का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार के रुख के बाद ही भारत-बांग्लादेश सीरीज के आयोजन और भारतीय टीम के दौरे को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • दिल्ली में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भड़का बांग्लादेश, भारत के सामने जताई कड़ी नाराजगी और प्रत्यर्पण की मांग दोहराई

    दिल्ली में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भड़का बांग्लादेश, भारत के सामने जताई कड़ी नाराजगी और प्रत्यर्पण की मांग दोहराई


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक तनाव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हसीना को भारत में मीडिया के सामने खुलकर अपनी बात रखने का अवसर दिए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। ढाका ने आरोप लगाया कि हसीना और उनके सहयोगियों ने भारत की जमीन से बांग्लादेश और उसके लोगों के खिलाफ जहरीली बयानबाजी की। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम को लेकर उसने पहले ही भारत सरकार के सामने अपनी चिंता रखी थी, इसके बावजूद प्रेस कॉन्फ्रेंस होने दी गई।

    बांग्लादेश सरकार ने हसीना के बयानों को इतिहास की धारा को पलटने की नाकाम कोशिश करार दिया। ढाका का कहना है कि जिस समय बांग्लादेश में जुलाई क्रांति की दूसरी बरसी मनाई जा रही थी, उसी समय भारत से हसीना का मीडिया को संबोधित करना वहां के लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने इसे देश की संप्रभुता और जुलाई आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के प्रति अपमान बताया। सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा और नागरिकों की मौत से जुड़े तथ्यों का भी हवाला दिया।

    ढाका ने हसीना और उनके सहयोगियों के बयानों को खारिज करते हुए कहा कि बांग्लादेश के लोग देश को दोबारा उस दौर में नहीं ले जाना चाहते, जिसे वह फासीवाद का अंधेरा दौर बताता है। बांग्लादेश सरकार ने यह भी कहा कि देश किसी दूसरे राष्ट्र का क्लाइंट स्टेट नहीं बनेगा। इस बयान से स्पष्ट है कि हसीना के राजनीतिक भविष्य और उनके भारत में रहने को लेकर ढाका का रुख अभी भी बेहद सख्त है।

    बांग्लादेश ने भारत के साथ संबंधों को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह भारत के साथ संप्रभु समानता, आपसी सम्मान और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप के आधार पर रचनात्मक संबंध चाहता है। हालांकि, इसी के साथ ढाका ने हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा फिर उठा दिया। बांग्लादेश ने कहा कि वर्ष 2013 में दोनों देशों के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत वह शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कई बार कर चुका है, लेकिन भारत की ओर से उसकी मांग पर अभी तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

    बांग्लादेश सरकार के मुताबिक, हसीना को भारत में खुले तौर पर मीडिया से बातचीत का अवसर मिलना वहां के लोगों के लिए बेहद पीड़ादायक है। ढाका ने आशंका जताई कि इस तरह की घटनाएं भारत-बांग्लादेश संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। दूसरी ओर, भारत में मौजूद हसीना की सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर बांग्लादेश की आपत्ति इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच उनके प्रत्यर्पण का मुद्दा अभी भी संवेदनशील बना हुआ है।

    शेख हसीना को लेकर बांग्लादेश का रुख आने वाले समय में भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। ढाका एक तरफ भारत के साथ बेहतर और सम्मानजनक संबंधों की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हसीना के प्रत्यर्पण और दिल्ली में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर लगातार दबाव बना रहा है। ऐसे में दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक मतभेदों को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • बांग्लादेश की विशेष अदालत का बड़ा फैसला, शेख हसीना समेत 40 लोगों पर मानवता के खिलाफ अपराध का मुकदमा

    बांग्लादेश की विशेष अदालत का बड़ा फैसला, शेख हसीना समेत 40 लोगों पर मानवता के खिलाफ अपराध का मुकदमा

    नई दिल्ली । बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत 40 अन्य लोगों के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराध के आरोपों में मामला दर्ज किया है। यह मामला वर्ष 2013 में राजधानी ढाका के मोतीझील स्थित शपला चत्तर में आयोजित एक विरोध रैली के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने मामले में संज्ञान लेते हुए फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी करने के आदेश दिए हैं। इस घटनाक्रम को बांग्लादेश की न्यायिक और राजनीतिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    यह मामला 5 मई 2013 को आयोजित उस विरोध प्रदर्शन से संबंधित है, जिसमें हिफाजत-ए-इस्लाम संगठन ने अपनी 13 सूत्री मांगों के समर्थन में ढाका में विशाल रैली आयोजित की थी। संगठन की प्रमुख मांगों में ईशनिंदा कानून लागू करने और इस्लाम के अपमान के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान शामिल था। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत होने के आरोप लगाए गए थे, जिसके आधार पर अब मानवता के विरुद्ध अपराध का मामला दर्ज किया गया है।

    ट्रिब्यूनल में मुख्य अभियोजक अमीनुल इस्लाम की ओर से आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामले में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के अलावा तत्कालीन सेना प्रमुख, कई वरिष्ठ राजनेता, सुरक्षा अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। अदालत ने आरोपों पर प्रारंभिक संज्ञान लेते हुए उन आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं, जो फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।

    अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस मामले में कई हाई-प्रोफाइल आरोपी पहले से ही विभिन्न मामलों में जेल में बंद हैं। इनमें पूर्व मंत्री, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और अन्य प्रमुख अधिकारी शामिल बताए गए हैं। अदालत अब मामले की आगे की सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर अगली कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब बांग्लादेश में पिछले कुछ समय से राजनीतिक और कानूनी स्तर पर कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई जारी है। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल पहले भी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जुड़े मामलों की सुनवाई कर चुका है। अदालत ने पिछले वर्ष एक अन्य मामले में उन्हें छात्र आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम के संदर्भ में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। वर्तमान मामला उससे अलग है और वर्ष 2013 की रैली के दौरान हुई घटनाओं पर आधारित है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की सुनवाई पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी रहेगी, क्योंकि इसमें देश के पूर्व शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं। अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के बाद अब संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

    बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थितियों के बीच यह मामला एक बार फिर वर्ष 2013 की घटनाओं को चर्चा के केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के आधार पर मामले की दिशा तय होगी। फिलहाल अदालत ने आरोपों पर संज्ञान लेते हुए कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है और संबंधित पक्षों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

  • ढाका में भारत ने जताई कड़ी आपत्ति: सेमिनार में जम्मू-कश्मीर का गलत नक्शा दिखाए जाने पर किया विरोध

    ढाका में भारत ने जताई कड़ी आपत्ति: सेमिनार में जम्मू-कश्मीर का गलत नक्शा दिखाए जाने पर किया विरोध


    नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर दिखाए गए कथित गलत नक्शे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह मामला उस समय सामने आया जब एक प्रस्तुति के दौरान भारतीय मानचित्र में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दर्शाया गया।

    यह सेमिनार बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (BIISS) में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का विषय था ‘सार्क को फिर से मजबूत बनाने के रास्ते’। सेमिनार में भारत में बांग्लादेश के पूर्व उच्चायुक्त रह चुके अहमद तारिक करीम प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान प्रदर्शित किए गए नक्शे पर भारतीय पक्ष ने आपत्ति जताई।

    ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सेकंड सेक्रेटरी पूजा कुमारी झा ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि प्रस्तुत किया गया नक्शा गलत है और जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस तरह के चित्रण का विरोध करता है।

    करीम ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि यह नक्शा केवल सांकेतिक (प्रतीकात्मक) उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया था और इसमें वास्तविक सीमाओं को प्रदर्शित नहीं किया गया है। हालांकि, भारतीय अधिकारी ने इस स्पष्टीकरण से असहमति जताते हुए दोबारा भारत का आधिकारिक रुख दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।

    बाद में करीम ने पूछा कि क्या पूजा झा भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इस पर उन्होंने स्वयं को भारतीय उच्चायोग की अधिकारी बताया। इसके बाद करीम ने कहा कि उनकी आपत्ति को नोट कर लिया गया है और फिर अपनी प्रस्तुति जारी रखी।

    सेमिनार में बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। अपने संबोधन में उन्होंने दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और सार्क को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संगठन की कार्यक्षमता, वित्तीय मजबूती और बेहतर फॉलो-अप व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही।

    ओबैद ने यह भी संकेत दिया कि बांग्लादेश आने वाले महीनों में सार्क सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से कुछ नई पहल पर विचार कर रहा है। इनमें ढाका में मौजूद सार्क देशों के राजदूतों के साथ बैठकें और काठमांडू स्थित सार्क सचिवालय के साथ समन्वय बढ़ाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने पूजा कुमारी झा की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने मौके पर ही भारत का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट रूप से सामने रखा।

  • ‘बांग्लादेश की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं’, भारतीय उच्चायुक्त के बयान के विरोध में नाहिद इस्लाम और जमात का सख्त रुख

    ‘बांग्लादेश की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं’, भारतीय उच्चायुक्त के बयान के विरोध में नाहिद इस्लाम और जमात का सख्त रुख


    नई दिल्ली ।
    भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों के बीच एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है। बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख नेता नाहिद इस्लाम ने भारत के नवनियुक्त उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की एक टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि भारत और बांग्लादेश की पहचान, संप्रभुता और राष्ट्रीय अस्तित्व अलग-अलग हैं तथा दोनों देशों को इसी आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाना चाहिए।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब हाल ही में ढाका में कार्यभार संभालने वाले भारतीय उच्चायुक्त ने दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और बांग्लादेश एक ही आसमान और हवा साझा करते हैं। उनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक निकटता और सहयोग को रेखांकित करना था, लेकिन इस बयान को लेकर बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक दलों ने अलग दृष्टिकोण अपनाया।

    चट्टोग्राम में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान नाहिद इस्लाम ने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बांग्लादेश एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा उसकी राष्ट्रीय पहचान किसी भी अन्य देश से अलग है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सभी देशों के साथ सम्मान और समानता के आधार पर संबंध चाहता है, लेकिन किसी भी प्रकार के प्रभाव या वर्चस्व की धारणा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके बयान को वहां मौजूद समर्थकों ने भी समर्थन दिया।

    नाहिद इस्लाम ने अपने संबोधन में भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े कुछ पुराने मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सीमा सुरक्षा, सीमा पर होने वाली घटनाओं और जल संसाधनों से जुड़े मामलों को दोनों देशों के संबंधों में संवेदनशील विषय बताया। उनका कहना था कि इन मुद्दों का समाधान आपसी विश्वास और संवाद के माध्यम से होना चाहिए ताकि द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक वातावरण बना रहे।

    इस मुद्दे पर केवल एनसीपी ही नहीं, बल्कि जमात-ए-इस्लामी ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी नेतृत्व ने भारतीय उच्चायुक्त की टिप्पणी को लेकर स्पष्टीकरण की मांग उठाई है। इससे स्पष्ट है कि बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में भारत से जुड़े विषय अभी भी महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों के रूप में मौजूद हैं और विभिन्न दल इन पर अपने-अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत से जुड़े मुद्दों पर बयानबाजी का प्रभाव आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार संवाद जारी है, राजनीतिक बयान संबंधों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे रहे हैं।

    भारत और बांग्लादेश के संबंध दक्षिण एशिया की सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय साझेदारियों में गिने जाते हैं। दोनों देशों ने पिछले वर्षों में कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया है। हालांकि समय-समय पर राजनीतिक बयान और घरेलू मुद्दों से जुड़ी प्रतिक्रियाएं सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित करती रही हैं। मौजूदा घटनाक्रम भी इसी क्रम की एक कड़ी माना जा रहा है, जिस पर दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

  • सरमा के बयान से भड़का कूटनीतिक विवाद: बांग्लादेश ने भारत के उच्चायुक्त को तलब कर जताया कड़ा विरोध

    सरमा के बयान से भड़का कूटनीतिक विवाद: बांग्लादेश ने भारत के उच्चायुक्त को तलब कर जताया कड़ा विरोध


    नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक रिश्तों में एक नया तनाव उभरकर सामने आया है, जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर ढाका ने कड़ी आपत्ति जताई। गुरुवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारतीय कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और इस तरह की टिप्पणियों को ‘काउंटरप्रोडक्टिव’ बताया।

    विवाद की जड़ 26 अप्रैल को दिया गया वह बयान है, जिसमें हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया था कि असम में पकड़े गए 20 विदेशी नागरिकों को ‘पुश बैक’ कर बांग्लादेश भेज दिया गया। इस बयान के सामने आते ही बांग्लादेश की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। ढाका ने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक बयानबाजी से दोनों देशों के बीच भरोसे पर असर पड़ सकता है और द्विपक्षीय संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा होता है।

    बांग्लादेश के अधिकारियों ने भारतीय प्रतिनिधि के समक्ष यह भी कहा कि सीमा, प्रवासन और नागरिकता जैसे विषय बेहद संवेदनशील होते हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच पहले से स्थापित कूटनीतिक तंत्र के जरिए ही बातचीत होनी चाहिए। सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयान न केवल गलतफहमी बढ़ाते हैं, बल्कि सहयोग की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकते हैं।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब भारत और बांग्लादेश के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत होने के बावजूद कुछ मुद्दों को लेकर संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम से लेकर अब तक दोनों देशों ने सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में करीबी सहयोग बनाए रखा है। हालांकि अवैध प्रवासन, सीमा प्रबंधन और राजनीतिक बयानबाजी जैसे विषय समय-समय पर तनाव की वजह बनते रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया विवाद भले ही बयानबाजी तक सीमित हो, लेकिन इसका असर कूटनीतिक संवाद पर पड़ सकता है। ऐसे में दोनों देशों के लिए जरूरी है कि वे संवाद और संयम के जरिए इस तरह के मुद्दों को सुलझाएं, ताकि लंबे समय से बने भरोसे और साझेदारी को नुकसान न पहुंचे।

    फिलहाल, यह मामला इस बात का संकेत है कि पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए केवल नीतियां ही नहीं, बल्कि नेताओं की भाषा और सार्वजनिक बयान भी उतने ही अहम होते हैं

  • ईरान युद्ध के बीच दिल्ली के पास आ रहा ढाका; बांग्लादेशी मंत्री संग डोभाल की डिनर डिप्लोमेसी

    ईरान युद्ध के बीच दिल्ली के पास आ रहा ढाका; बांग्लादेशी मंत्री संग डोभाल की डिनर डिप्लोमेसी

    नई दिल्‍ली। मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है। इजरायल और अमरिका की ओर से ईरान पर ताबड़तोड़ हमले जारी है। इस बीच बांग्लादेश के विदेश मंत्री भारत पहुंच चुके हैं। भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई शुरुआत और आपसी विश्वास बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ढाका के विदेश मंत्री डॉ खलीलुर रहमान से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात डिनर टेबल पर होगी।
    इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती प्रदान करने, हाल के दिनों में उत्पन्न तनाव को दूर करने और साझा हितों पर आधारित स्थिर तथा दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह मुलाकात प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार द्वारा दोनों देशों के बीच ‘नए रिश्ते’ की नींव रखने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस उच्चस्तरीय बैठक में सीमा प्रबंधन, व्यापार, सुरक्षा सहयोग और जल संसाधनों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।

    मोहम्मद यूनुस के अंतरिम सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके अनुभवी राजनयिक खलीलुर रहमान फरवरी में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की भारी जीत के बाद भारत आने वाले पहले वरिष्ठ मंत्री हैं। उनके साथ प्रधानमंत्री तारिक रहमान के करीबी सलाहकार हुमायून कबीर भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, हाल के वर्षों में बांग्लादेश के साथ संबंधों को मजबूत करने में एनएसए डोभाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दोनों नेताओं की यह मुलाकात पिछले कुछ समय में उत्पन्न तनाव को दूर कर संबंधों को फिर से पटरी पर लाने का अवसर होगी।
    इनसे भी मिलेंगे बांग्लादेशी मंत्री

    बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि विदेश मंत्री रहमान अपनी भारतीय समकक्षों, जिनमें एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल हैं, से मुलाकातों के दौरान ‘गरिमा, आपसी विश्वास, सम्मान और साझा हितों पर आधारित द्विपक्षीय संबंधों की स्थिरता तथा निरंतर विकास’ पर जोर देंगे।

    बयान में उम्मीद जताई गई है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग को अधिक फलदायी और टिकाऊ बनाने के लिए मजबूत आधार तैयार करेगी।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, रहमान बुधवार को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भी मुलाकात करेंगे।

    पुरी के साथ बैठक खासतौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ढाका ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से उत्पन्न ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अतिरिक्त ईंधन, खासकर डीजल की आपूर्ति की मांग की है।
    इन मुद्दों पर चर्चा संभव

    सूत्रों का कहना है कि चर्चा के प्रमुख मुद्दों में भारतीय वीजा प्रतिबंधों में ढील (खासकर पर्यटकों और व्यापारियों के लिए), 2025 में संबंधों में आई गिरावट के बाद बंद किए गए भारतीय भूमि और समुद्री बंदरगाहों तक पहुंच बहाल करना, दिसंबर में समाप्त हो रही गंगा जल संधि के नवीनीकरण में तेजी लाना और सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों पर भारतीय सीमा सुरक्षा बलों द्वारा गोलीबारी शामिल हैं। वहीं, भारतीय पक्ष का कहना है कि सीमा रक्षक तस्करों और आपराधिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि बांग्लादेशी पक्ष घातक बल के बजाय ऐसे व्यक्तियों की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की वकालत करता है।

    बता दें कि रहमान की यात्रा से पहले भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने सोमवार को ढाका में प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की। उच्चायोग ने सोशल मीडिया पर बताया कि बैठक में दोनों देशों की राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप जन-केंद्रित सहयोग पर जोर दिया गया। वर्मा ने कहा कि भारत बांग्लादेश सरकार और लोगों के साथ ‘पारस्परिक हित और लाभ पर आधारित सकारात्मक, रचनात्मक तथा दूरदर्शी दृष्टिकोण’ अपनाते हुए काम करने का इरादा रखता है।
  • बांग्लादेश के 11वें प्रधानमंत्री बने तारिक रहमान, 25-सदस्यीय मंत्रिमंडल में शामिल एक हिंदू नेता

    बांग्लादेश के 11वें प्रधानमंत्री बने तारिक रहमान, 25-सदस्यीय मंत्रिमंडल में शामिल एक हिंदू नेता


    ढाका। बांग्लादेश में मंगलवार को एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ, जब तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। तारिक रहमान अब बांग्लादेश नेशनल पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय खालिदा जिया के पुत्र के रूप में देश की कमान संभालेंगे। वह बांग्लादेश के 11वें प्रधानमंत्री बने। आम चुनावों में बड़ी जीत के साथ ही उन्होंने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद युनूस की जगह यह पद ग्रहण किया। शपथ ग्रहण समारोह ढाका स्थित संसद भवन के साउथ प्लाजा में शाम 4 बजे आयोजित किया गया। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें शपथ दिलाई।

    नई सरकार के मंत्रियों में शामिल प्रमुख चेहरे हैं:-

    डॉ. खलीलुर रहमान – विदेश मंत्री
    सलाहुद्दीन अहमद – गृह मंत्री
    डॉ. अमीर खसरू महमूद – वित्त एवं योजना मंत्री
    शमा ओबैद – विदेश राज्य मंत्री

    शपथ ग्रहण समारोह में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति भी रही। भारत से लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भाग लिया। इसके अलावा मलेशिया, पाकिस्तान, मालदीव, तुर्की, श्रीलंका के प्रतिनिधि तथा चीन, सऊदी अरब, यूएई और ब्रुनेई को आमंत्रित किया गया।

    कैबिनेट मंत्रियों की सूची

    कुल 25 सदस्यों के मंत्रिमंडल में शामिल हैं:- मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खोशरू महमूद चौधरी, सलाहुद्दीन अहमद, इकबाल हसन महमूद, मेजर रिटायर्ड हाफिज उद्दीन अहमद बीर बिक्रम, अबू जफर मोहम्मद जाहिद हुसैन, डॉ. खलीलुर रहमान, अब्दुल अव्वल मिंटू, काजी शाह मोफज्जल हुसैन कैकोबाद, मिजानुर रहमान मीनू, निताई रॉय चौधरी (हिंदू नेता), खंडेकर अब्दुल मुक्तदिर, अरिफुल हक चौधरी, जहीर उद्दीन स्वपन, मोहम्मद अमीन उर रशीद, अफरोजा खानम रीटा, शाहिद उद्दीन चौधरी एनी, असदुल हबीब दुलु, मोहम्मद असदुज्जमां, जकारिया ताहिर, दीपेन दीवान (अल्पसंख्यक), एएनएम एहसानुल हक मिलन, सरदार मोहम्मद सखावत हुसैन, फकीर महबूब अनम और शेख रबीउल आलम।

    राज्य मंत्रियों में शामिल प्रमुख नाम
    एम रशीदुज्जमां मिल्लत, अनिंद्य इस्लाम अमित, एमडी शरीफुल आलम, शमा ओबैद इस्लाम, सुल्तान सलाहुद्दीन टुकू, बैरिस्टर कैसर कमाल, फरहाद हुसैन आजाद, एमडी अमीनुल हक टेक्नोक्रेट मीर मोहम्मद हेलाल उद्दीन, हबीबुर रशीद, एमडी राजीब अहसन, एमडी अब्दुल बारी, मीर शाहे आलम, जोनायद अब्दुर रहीम साकी, इशराक़ हुसैन, फरजाना शर्मिन, शेख फ़रीदुल इस्लाम, नुरुल हक नूर, यासर खान चौधरी, एम इकबाल हुसैन, एमए मुहिथ, अहमद सोहेल मंजूर, बॉबी हज्जाज और अली नेवाज महमूद खैयाम।

    संसदीय दल का नेता चुना गया

    बीएनपी ने शपथ ग्रहण से पहले संसदीय दल की बैठक में तारिक रहमान को दल का नेता चुना। उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं से भी मुलाकात की, जिनमें जमात-ए-इस्लामी चीफ शफीकुर रहमान और नेशनल सिटीजन पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम शामिल थे।

    चुनाव में बड़ी जीत

    हाल ही में हुए चुनाव में बीएनपी को 297 में से 209 सीटें मिलीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी केवल 68 सीटों तक सीमित रही। शेख हसीना की आवामी लीग इस चुनाव में भाग नहीं ले सकी। अल्पसंख्यक समुदाय से चार उम्मीदवार जीतकर आए, जिनमें दो हिंदू बीएनपी के टिकट पर विजयी रहे। राजनीतिक अस्थिरता और छात्र आंदोलनों के बाद अब नई सरकार के गठन के साथ बांग्लादेश लोकतांत्रिक ढांचे के तहत सुचारू रूप से चलने लगा है।

  • बांग्लादेश की नई BNP सरकार में हिंदू नेता गोयेश्वर चंद्र रॉय को मंत्री बनाए जाने का अनुमान

    बांग्लादेश की नई BNP सरकार में हिंदू नेता गोयेश्वर चंद्र रॉय को मंत्री बनाए जाने का अनुमान


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में हाल ही में हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की है और नई सरकार गठन की तैयारी में है। पार्टी ने निर्वाचित सांसदों की आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी कर दी है। इस बार पार्टी के 4 अल्पसंख्यक सांसद चुने गए, जिनमें दो हिंदू और दो बौद्ध समुदाय के नेता शामिल हैं।

    ढाका-3 सीट से जीतने वाले गोयेश्वर चंद्र रॉय को नई कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना है। 1951 में जन्मे रॉय BNP के स्थायी समिति सदस्य और पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वह खालिदा जिया की BNP सरकार में 1991-1996 के बीच राज्य मंत्री रह चुके हैं और पर्यावरण, वन, मत्स्य एवं पशुपालन मंत्रालयों का प्रभार संभाल चुके हैं। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, गोयेश्वर चंद्र रॉय और उनके समधी निताई रॉय चौधरी ने हाल ही में चुनाव में जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवारों को हराया।

    BNP के प्रधान तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय और अन्य पांच मंत्रालय अपने पास रखने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत निर्वाचित सांसद तीन दिन के भीतर शपथ लेंगे और उसी दिन कैबिनेट गठन की प्रक्रिया पूरी होगी।

    कैबिनेट में कुल 30 से 40 सदस्य शामिल होने की संभावना है। चर्चा के अनुसार, विदेश मंत्री पद के लिए हुमायूं कबीर, वित्त मंत्री के लिए डॉ. रेजा किब्रिया, वाणिज्य मंत्रालय के लिए आमिर खुसरो महमूद चौधरी और कानून मंत्रालय के लिए पूर्व अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमान पर विचार चल रहा है। अन्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी जैसे गृह, स्थानीय सरकार, सड़क परिवहन, स्वास्थ्य और सूचना मंत्रालयों के लिए वरिष्ठ नेताओं के नामों पर चर्चा जारी है।

    गोयेश्वर चंद्र रॉय का BNP और जिया परिवार के साथ गहरा संबंध है और वे बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने अपने भाषणों में बार-बार यह जताया है कि बांग्लादेश में हिंदू या अन्य अल्पसंख्यक नागरिक समान अधिकारों के हकदार हैं।

    इस चुनावी सफलता और कैबिनेट गठन के संकेतों के बीच बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व मजबूत होने की संभावना है। BNP की नई सरकार के गठन के बाद गोयेश्वर चंद्र रॉय की भूमिका पर सभी की नजर रहेगी।