Tag: Dhanteras

  • धनतेरस से भाई दूज तक अपनाएं ये 5 वास्तु उपाय, दिवाली पर घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनाए रखने में मिलेगी मदद

    धनतेरस से भाई दूज तक अपनाएं ये 5 वास्तु उपाय, दिवाली पर घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनाए रखने में मिलेगी मदद

    नई दिल्ली । दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई करने के साथ ही दीपक, रंगोली और फूलों से सजावट करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। वहीं, वास्तु शास्त्र में भी धनतेरस से लेकर भाई दूज तक कुछ विशेष बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इन उपायों को अपनाने से घर का वातावरण साफ-सुथरा, सकारात्मक और खुशनुमा बना रहता है।

    इस वर्ष दिवाली 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। दीपावली से पहले धनतेरस, छोटी दिवाली और अन्य पर्वों की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। ऐसे में घर की व्यवस्था और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, पांच दिवसीय दीपावली पर्व के अलग-अलग दिनों में कुछ खास उपाय अपनाए जा सकते हैं।

    धनतेरस से दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर घर के मुख्य द्वार को साफ-सुथरा रखना शुभ माना जाता है। मुख्य दरवाजे को फूलों या तोरण से सजाया जा सकता है। इससे घर का प्रवेश स्थान सुंदर और व्यवस्थित दिखाई देता है।

    इस दिन सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदने की परंपरा भी है। खरीदारी के बाद नए सामान को साफ जगह पर रखना चाहिए। घर में धन रखने वाली तिजोरी और अलमारी को भी व्यवस्थित करना चाहिए। वास्तु मान्यताओं में इसे घर में समृद्धि का वातावरण बनाए रखने से जोड़कर देखा जाता है।

    छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी पर घर की सफाई का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन घर के कोनों, खिड़कियों और दरवाजों के आसपास जमा धूल-मिट्टी को साफ करना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का उत्तर-पूर्व दिशा वाला हिस्सा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, साफ और व्यवस्थित रखना शुभ माना जाता है। शाम के समय घर में दीपक जलाने और मुख्य द्वार पर रंगोली बनाने की भी परंपरा है। घर में अनावश्यक सामान और कबाड़ जमा नहीं होने देना चाहिए।

    दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। पूजा से पहले घर के पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। इसके बाद देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित कर दीपक, फूल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री तैयार रखनी चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर के उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा स्थल होना शुभ माना जाता है। हालांकि, पूजा की व्यवस्था करते समय घर में उपलब्ध जगह और परिवार की परंपराओं का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    शाम को पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार, खिड़कियों और बालकनी में दीपक जलाकर रोशनी की जाती है। धन रखने वाली अलमारी और तिजोरी को भी व्यवस्थित रखना चाहिए। घर में पर्याप्त रोशनी और साफ-सफाई का ध्यान रखने से त्योहार का माहौल बेहतर बनता है।

    दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की परंपरा है। कई घरों में अन्नकूट तैयार कर भगवान को भोग लगाया जाता है। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, इस दिन रसोई की सफाई करनी चाहिए और अनाज तथा खाद्य सामग्री को व्यवस्थित रखना चाहिए। भोजन बनाते समय स्वच्छता का ध्यान रखने के साथ घर में लगे तुलसी सहित अन्य पौधों की देखभाल भी करनी चाहिए।

    भाई दूज दीपावली पर्व का अंतिम महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दिन बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। परिवार के सदस्य एक साथ समय बिताते हैं और खुशियां साझा करते हैं। इस दिन घर को साफ-सुथरा रखने और परिवार के बीच प्रेमपूर्ण वातावरण बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, सम्मान और विश्वास इस पर्व का मुख्य संदेश है।

    दिवाली की सजावट के दौरान टूटे-फूटे और अनुपयोगी सामान को हटा देना चाहिए। पूजा स्थल को साफ रखें और दीपक ऐसी जगह जलाएं, जहां आग लगने का खतरा न हो। बिजली की झालरों और सजावटी लाइटों के तारों की भी जांच कर लेनी चाहिए। इन सावधानियों और पारंपरिक उपायों के साथ त्योहार की तैयारियां अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाई जा सकती हैं।

  • धनतेरस से पहले महायोग…. 01 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र, इस अबूझ मुहूर्त का अक्षय तृतीया जैसा पुण्य

    धनतेरस से पहले महायोग…. 01 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र, इस अबूझ मुहूर्त का अक्षय तृतीया जैसा पुण्य


    नई दिल्ली।
    एक नवंबर को पड़ रहा रवि पुष्य नक्षत्र (Ravi Pushya Nakshatra) का मुहूर्त अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) जितना ही बहुत खास होने वाला है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक रविवार की सुबह 10:37 से लेकर अगले दिन दो नवंबर को सुबह 9.04 बजे तक जो मर्जी, वो खरीदें, इससे घर-परिवार में लंबे समय के लिए खुशहाली आएगी। खासतौर से उनके लिए जो किसी रस्म या शादी की खरीदारी करने जा रहे हैं।

    ज्योतिषाचार्य प्रो. बिहारी लाल शर्मा बताते हैं कि रवि पुष्य (Ravi Pushya) अबूझ मुहूर्त (Auspicious Moment) है। ऐसे मुहूर्त अक्षय तृतीया और भटली नवमी भी होते हैं। इस दिन सोना-चांदी, घर, जमीन और गाड़ी खरीदना अच्छा है। स्थायी समृद्धि के लिए रवि पुष्य में खरीदारी अद्भुत लाभ देती है।

    ज्योतिषाचार्य प्रो. सुभाष पांडेय के मुताबिक एक नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र पर घर की साज-सज्जा और नए कपड़े खरीदने का सबसे उत्तम मुहूर्त है। इससे घर में समृद्धि और काम में स्थायित्व होगा। हालांकि चार नवंबर को आभूषण खरीदने का मुहूर्त बन रहा है। वहीं छह नवंबर को धनतेरस पर चांदी, सोना और पीतल के बर्तन खरीदने का बेहतर मुहूर्त तय किया गया है।


    अशुभ काल में खरीदने पर होता है नुकसान

    प्रो. पांडेय ने बताया कि प्रो. पांडेय के अनुसार, इंसान के जीवन में शरद ऋतु या ठंड के समय खरीद करना काफी उत्तम माना गया है। यह काल 21 अक्तूबर के बाद से ही शुरू हो चुका है जो कि दीपावली और बनारस में देव दीपावली तक चलेगा। ज्योतिष शास्त्र में तिथि, वार, नक्षत्र, योग से शुभ काल (मुहूर्त) तय करने की बात कही गई है। दरअसल, भौतिक या आध्यात्मिक जीवन में शुभ समय का बहुत बड़ा महत्व है। जिस तरह अनुष्ठानों में शुभ मुहूर्त की जरूरत होती है वैसे ही भौतिक वस्तुओं को शुभ मुहूर्त में खरीदने पर उसका स्थायित्व बढ़ जाता है। अशुभ काल में खरीदने पर नुकसान हो सकता है।


    सुबह 10:37 से शुरू होगा रवि पुष्य योग

    रवि पुष्य योग एक नवंबर को सुबह 10:37 से दो नवंबर को सुबह 09.04 तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग एक को सुबह 06:33 से दो को सुबह 04:30 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:42 से 12:27 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 05:36 बजे से 06:02 बजे तक रहेगा। इस नक्षत्र पर बृहस्पति, शनि और चंद्रमा का प्रभाव होता है।

  • धनतेरस-दिवाली से पहले सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव, जानिए 24 से 14 कैरेट तक के ताजा रेट..

    धनतेरस-दिवाली से पहले सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव, जानिए 24 से 14 कैरेट तक के ताजा रेट..

    नई दिल्ली ।धनतेरस और दिवाली से पहले सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव अहम बना हुआ है। घरेलू सर्राफा बाजार से लेकर वायदा कारोबार तक दोनों कीमती धातुओं के भाव में बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में त्योहारों के लिए आभूषण खरीदने या सोने-चांदी में निवेश करने की योजना बना रहे लोगों की नजर ताजा दरों पर है। बाजार में कीमतों की दिशा अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, डॉलर की मजबूती और रुपये की स्थिति से प्रभावित हो रही है।

    गुरुवार, 29 अक्टूबर को कारोबार शुरू होने से पहले मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 105 रुपये यानी 0.07 प्रतिशत गिरकर 1,43,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,43,705 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, बुलियन बाजार के उपलब्ध आंकड़ों में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,44,000 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,054 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतों में 700 रुपये की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला 24 कैरेट सोना सभी करों सहित 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। खुदरा बाजार के एक अन्य मूल्य आकलन के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव 1,44,100 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट का 1,32,100 रुपये और 18 कैरेट का 1,08,110 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

    इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन के 28 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 999 शुद्धता वाले 24 कैरेट सोने की दर 1,42,707 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 916 शुद्धता वाले 22 कैरेट सोने का भाव 1,30,720 रुपये और 750 शुद्धता वाले 18 कैरेट सोने की कीमत 1,07,030 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। वहीं, 585 शुद्धता वाले 14 कैरेट सोने का भाव 83,484 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। इन दरों में अलग-अलग बाजारों, करों और आभूषणों पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क के कारण अंतर हो सकता है।

    चांदी की कीमतों में भी मिला-जुला रुख दिखाई दिया। गुरुवार को बाजार खुलने से पहले एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव 125 रुपये यानी 0.06 प्रतिशत बढ़कर 1,94,450 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। पिछले सत्र में यह 1,94,325 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। बुलियन बाजार के आंकड़ों में चांदी की कीमत 1,94,990 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। वहीं, 28 अक्टूबर तक के उपलब्ध आंकड़ों में 999 शुद्धता वाली चांदी का भाव 1,93,442 रुपये प्रति किलोग्राम था।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को चांदी 1.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। दूसरी ओर, खुदरा बाजार के कुछ आकलनों में इसका भाव 2.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी में गिरावट दर्ज की गई और यह 1.23 प्रतिशत टूटकर 53.75 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती नजर आई। अलग-अलग समय और बाजारों के आंकड़ों के कारण चांदी की कीमतों में अंतर दिखाई दे रहा है।

    घरेलू बाजार पर रुपये की कमजोरी का भी असर पड़ रहा है। बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसे गिरकर 95.28 प्रति डॉलर पर आ गया। डॉलर की मजबूती और सऊदी अरब की रास तनुरा तेल रिफाइनरी पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। रुपये के कमजोर होने से सोने का आयात महंगा पड़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी के बावजूद घरेलू कीमतों को सहारा मिल सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व और फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के नीतिगत फैसलों पर भी है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के जिंस मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले से पहले वैश्विक बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। मिराए एसेट शेयरखान के प्रवीण सिंह ने कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को बाजार के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

    मांग के मामले में भी भारत और चीन के खरीदारों का रुख अलग दिखाई दे रहा है। उपलब्ध बाजार आकलन के अनुसार, चीन में कुछ परिवार कीमतों में नरमी का लाभ उठाकर खरीदारी कर रहे हैं, जबकि भारत में कई खरीदार त्योहारों से पहले और गिरावट की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं। धनतेरस और दिवाली पर खरीदारी करने वालों के लिए कैरेट, शुद्धता और स्थानीय भाव की तुलना करना महत्वपूर्ण है। आभूषण खरीदते समय सोने की कीमत के साथ मेकिंग चार्ज और लागू करों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

  • नवंबर 2026 में दिवाली, धनतेरस, छठ पूजा और देव दीपावली समेत जानें सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों की तारीखें

    नवंबर 2026 में दिवाली, धनतेरस, छठ पूजा और देव दीपावली समेत जानें सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों की तारीखें

    नई दिल्ली । नवंबर 2026 का महीना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से खास रहने वाला है। इस दौरान धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ पूजा जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाएंगे। इसके अलावा देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह, कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक जयंती जैसे महत्वपूर्ण पर्व भी इसी महीने पड़ेंगे। व्रत और त्योहारों की तारीखों की जानकारी पहले से होने पर लोग अपनी धार्मिक तैयारियां और पूजा-पाठ की योजनाएं व्यवस्थित कर सकते हैं। नवंबर के कैलेंडर में महीने की शुरुआत से लेकर अंतिम सप्ताह तक कई महत्वपूर्ण तिथियां शामिल हैं।

    महीने की शुरुआत 1 नवंबर को अहोई अष्टमी, राधा कुंड स्नान और कालाष्टमी के साथ होगी। इसके बाद 5 नवंबर को रमा एकादशी, कृष्ण पद्मनाभ द्वादशी और गोवत्स द्वादशी मनाई जाएगी। 6 नवंबर को धनतेरस, धनत्रयोदशी, यम दीपम और शुक्र प्रदोष व्रत पड़ेंगे। धनतेरस को दीपावली पर्व की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है।

    धनतेरस की तिथि को लेकर दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 9 बजकर 30 मिनट पर शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसके अगले दिन 7 नवंबर को काली चौदस, हनुमान पूजा और मासिक शिवरात्रि के पर्व पड़ेंगे।

    8 नवंबर, रविवार को दिवाली मनाई जाएगी। इस अवसर पर घरों में दीप जलाने और माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह लगभग 11 बजकर 28 मिनट पर शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर लगभग 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी, काली पूजा, केदार गौरी व्रत और कमला जयंती भी सूची में शामिल हैं। 9 नवंबर को अन्वाधान और कार्तिक अमावस्या के पर्व बताए गए हैं।

    10 नवंबर को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, बलि प्रतिपदा और गुजराती नववर्ष मनाया जाएगा। इसके अगले दिन 11 नवंबर को भाई दूज, यम द्वितीया, चित्रगुप्त पूजा और चंद्र दर्शन होंगे। 13 नवंबर से छठ पर्व की शुरुआत होगी। इसी दिन नागुला चविथी और लाभ चतुर्थी भी पड़ेंगे। 14 नवंबर को लाभ पंचमी और 15 नवंबर को छठ पूजा का दूसरा दिन तथा स्कंद षष्ठी मनाई जाएगी।

    महीने के मध्य में 16 नवंबर को वृश्चिक संक्रांति और जैन अष्टाह्निका का प्रारंभ होगा। 17 नवंबर को गोपाष्टमी, मंडला पूजा प्रारंभ और मासिक दुर्गाष्टमी पड़ेंगे। 18 नवंबर को अक्षय नवमी, आंवला नवमी और जगद्धात्री पूजा मनाई जाएगी।

    20 नवंबर को देवउठनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी और भीष्म पंचक का प्रारंभ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और चातुर्मास का समापन होता है। 21 नवंबर को तुलसी विवाह, योगेश्वर द्वादशी, गुरुवायुर एकादशी और वैष्णव देवोत्थान एकादशी मनाई जाएगी। 22 नवंबर को विश्वेश्वर व्रत और रवि प्रदोष व्रत पड़ेंगे।

    23 नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी, मणिकर्णिका स्नान और कार्तिक चौमासी चौदस मनाई जाएगी। 24 नवंबर को देव दीपावली, गुरु नानक जयंती, कार्तिक पूर्णिमा और पुष्कर स्नान के पर्व पड़ेंगे। इसी दिन भीष्म पंचक का समापन भी होगा। 25 नवंबर को मार्गशीर्ष मास का प्रारंभ, रोहिणी व्रत और इष्टि होंगे। महीने के अंतिम प्रमुख व्रतों में 27 नवंबर को गणाधिप संकष्टी और मार्गशीर्ष गणेश चतुर्थी शामिल हैं।