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  • रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान

    रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को दर्शक आज भी उनकी शानदार अदाकारी दमदार संवाद और बेहतरीन एक्शन के लिए याद करते हैं। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में रोमांस कॉमेडी और एक्शन हर शैली की फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। हालांकि उनकी पहचान केवल बड़े पर्दे तक सीमित नहीं थी। उन्हें करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि वास्तविक जीवन में भी धर्मेंद्र बेहद साहसी और निडर इंसान थे। उनके व्यक्तित्व से जुड़ा ऐसा ही एक किस्सा अभिनेता और निर्देशक सत्यजीत पुरी ने साझा किया जिसने यह साबित किया कि धर्मेंद्र केवल फिल्मों के ही नहीं बल्कि असल जिंदगी के भी सच्चे हीरो थे।

    सत्यजीत पुरी ने एक इंटरव्यू में बताया कि 1990 के दशक में जब फिल्म इंडस्ट्री पर अंडरवर्ल्ड का दबदबा बढ़ रहा था तब कई कलाकारों को धमकी भरे फोन और दबाव का सामना करना पड़ता था। उस दौर में कई लोग खामोश रहना ही बेहतर समझते थे लेकिन धर्मेंद्र का स्वभाव अलग था। उन्होंने कभी भी डर के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया।

    सत्यजीत पुरी के अनुसार एक समय ऐसा भी आया जब अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों ने धर्मेंद्र पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन धर्मेंद्र ने घबराने के बजाय बेहद सख्त और आत्मविश्वास से भरा जवाब दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई उनसे टकराने की कोशिश करेगा तो उनके गांव सनेहवाल के लोग उनके साथ खड़े होंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि उनके पास लड़ने के लिए पूरी फौज जैसी ताकत है और उनसे उलझना किसी के लिए आसान नहीं होगा।

    बताया जाता है कि धर्मेंद्र के इस बेबाक और निडर जवाब के बाद अंडरवर्ल्ड ने दोबारा उन्हें परेशान करने की कोशिश नहीं की। यह घटना आज भी बॉलीवुड के चर्चित किस्सों में गिनी जाती है और धर्मेंद्र के साहस की मिसाल के रूप में सुनाई जाती है।

    धर्मेंद्र का व्यक्तित्व हमेशा सादगी और आत्मसम्मान से जुड़ा रहा। उन्होंने अपने करियर में कभी विवादों के सहारे लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश नहीं की बल्कि अपने काम और व्यवहार से लोगों का दिल जीता। यही वजह रही कि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें बेहद सम्मान की नजर से देखा जाता था।

    धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर में सैकड़ों फिल्मों में अभिनय किया और कई सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा रहे। उनकी जोड़ी कई बड़े सितारों के साथ पसंद की गई लेकिन अमिताभ बच्चन के साथ उनकी फिल्मों को आज भी दर्शक बड़े चाव से देखते हैं। उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और बेहतरीन अभिनय ने उन्हें हिंदी सिनेमा का ही मैन बना दिया।

    24 नवंबर 2025 को धर्मेंद्र के निधन की खबर ने फिल्म जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों को गहरा दुख पहुंचाया। उनके जाने के बाद भी उनकी फिल्में उनके संवाद और उनके साहस से जुड़े किस्से लोगों के दिलों में जिंदा हैं। मरणोपरांत उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया जो भारतीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान का सम्मान था।

    धर्मेंद्र का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्चा नायक केवल पर्दे पर नहीं बल्कि अपने सिद्धांतों साहस और आत्मसम्मान से वास्तविक जीवन में भी पहचाना जाता है। यही कारण है कि उन्हें आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और प्रेरणादायक कलाकारों में गिना जाता है।

  • 'धर्मेंद्र-हेमा मालिनी जैसा निस्वार्थ प्यार अब दुर्लभ', रिश्तों और तलाक पर पहली बार खुलकर बोलीं ईशा देओल

    'धर्मेंद्र-हेमा मालिनी जैसा निस्वार्थ प्यार अब दुर्लभ', रिश्तों और तलाक पर पहली बार खुलकर बोलीं ईशा देओल

    नई दिल्ली। अभिनेत्री ईशा देओल ने पति भरत तख्तानी से अलग होने के बाद पहली बार अपने निजी जीवन और रिश्तों को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने स्वीकार किया कि तलाक के बाद उनकी जिंदगी में प्यार और रोमांस की कमी महसूस होती है, लेकिन इसके बावजूद उनका प्रेम और रिश्तों पर भरोसा आज भी कायम है। ईशा का कहना है कि जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव इंसान की सोच बदल सकते हैं, लेकिन सच्चे प्यार की अहमियत कभी कम नहीं होती।

    ईशा ने बातचीत के दौरान कहा कि वह स्वभाव से बेहद रोमांटिक हैं और आज भी रोमांटिक गीत, प्रेम कहानियां और रिश्तों की भावनात्मक गहराई उन्हें आकर्षित करती है। उनके अनुसार, प्यार किसी भी इंसान के जीवन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और फिलहाल वह इसी एहसास की कमी महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि रोमांस जीवन को खूबसूरत बनाता है और यही कारण है कि वह आज भी प्रेम पर पूरी आस्था रखती हैं।

    अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वैवाहिक जीवन में आई कठिनाइयों या अलगाव का अर्थ यह नहीं है कि प्यार खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि रिश्तों में ब्रेकअप या अलगाव जीवन का हिस्सा हैं और इससे प्रेम के प्रति उनका नजरिया नहीं बदला है। उनके मुताबिक, जीवन में पहले भी ऐसे रिश्ते रहे हैं जो लंबे समय तक नहीं चल सके, लेकिन इन अनुभवों ने उन्हें प्रेम से दूर नहीं किया।

    ईशा देओल ने अपने माता-पिता धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के रिश्ते का जिक्र करते हुए कहा कि बचपन से उन्होंने दोनों के बीच सम्मान, विश्वास और बिना किसी शर्त के प्यार को बेहद करीब से देखा है। उसी रिश्ते ने उनके भीतर प्रेम की परिभाषा गढ़ी। उनका मानना है कि आज के दौर में वैसी गहराई, समर्पण और गरिमा वाले रिश्ते बहुत कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता का रिश्ता हमेशा उनके लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में अच्छे और कठिन दोनों तरह के अनुभवों से गुजरता है। रिश्तों का टूटना निश्चित रूप से भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इससे जीवन रुक नहीं जाता। उनके अनुसार, हर अनुभव इंसान को पहले से अधिक मजबूत और परिपक्व बनाता है तथा भविष्य के लिए नई सीख भी देता है।

    ईशा और व्यवसायी भरत तख्तानी ने वर्ष 2012 में विवाह किया था। दोनों की दो बेटियां हैं और शादी के एक दशक से अधिक समय बाद वर्ष 2024 में दोनों ने अलग होने का फैसला किया। इस निर्णय के बाद दोनों ने अपनी निजी जिंदगी को गरिमा के साथ आगे बढ़ाने की बात कही थी। अलगाव के बाद ईशा ने सार्वजनिक रूप से अपने व्यक्तिगत जीवन पर बहुत कम प्रतिक्रिया दी थी।

    अब लंबे समय बाद उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए यह स्पष्ट किया है कि कठिन दौर के बावजूद वह जीवन और प्यार दोनों को सकारात्मक नजरिए से देखती हैं। उनका मानना है कि सच्चे रिश्ते विश्वास, सम्मान और आपसी समझ पर टिके होते हैं। यही मूल्य उन्होंने अपने परिवार से सीखे हैं और भविष्य में भी वह इन्हीं मूल्यों के साथ जीवन को आगे बढ़ाना चाहती हैं।

  • अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना

    अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे प्रतिष्ठित और स्क्रीन पर तहलका मचाने वाली जोड़ियों का जिक्र होता है, तो अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। सत्तर और अस्सी के दशक में इन दोनों दिग्गज कलाकारों ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा चमत्कारी तालमेल दिखाया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स और दर्शकों के बीच यह माना जाने लगा था कि जिस फिल्म में ये दोनों साथ हैं, उसका सुपरहिट होना तय है। इस ब्लॉकबस्टर जोड़ी की लोकप्रियता का आलम यह था कि इनकी एक कल्ट क्लासिक फिल्म रिलीज के बाद लगातार पांच सालों तक सिनेमाघरों से नहीं उतरी थी, जो अपने आप में एक अटूट कीर्तिमान है। इन दोनों महानायकों ने मुख्य भूमिकाओं से लेकर खास कैमियो रोल्स तक, कुल ९ फिल्मों में एक साथ स्क्रीन शेयर कर सिल्वर स्क्रीन पर अपनी दोस्ती और अभिनय का लोहा मनवाया।

    इस बेमिसाल जोड़ी के करियर और हिंदी सिनेमा के इतिहास में साल १९७५ में आई फिल्म ‘शोले’ एक मील का पत्थर साबित हुई। निर्देशक रमेश सिप्पी की इस एक्शन-ड्रामा फिल्म में जय और वीरू के किरदारों में अमिताभ और धर्मेंद्र ने जिगरी दोस्ती की ऐसी अनूठी मिसाल पेश की, जो आज आधी सदी बीत जाने के बाद भी मुहावरा बनी हुई है। यह फिल्म न केवल उस दौर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी, बल्कि मुंबई के मिनर्वा थिएटर में लगातार पांच सालों तक चलकर इसने इतिहास रच दिया। इसी साल इस सुपरहिट जोड़ी की एक और क्लासिक फिल्म ‘चुपके चुपके’ रिलीज हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी यह बेहतरीन कॉमेडी फिल्म बंगाली सिनेमा की रीमेक थी। फिल्म में दोनों की कॉमिक टाइमिंग कमाल की थी और एसडी बर्मन के संगीत से सजे इसके गाने आज भी चाव से सुने जाते हैं।

    एक्शन और कॉमेडी के बाद इस जोड़ी ने साल १९८० में आई फिल्म ‘राम बलराम’ के जरिए थ्रिलर जॉनर में अपनी धाक जमाई। विजय आनंद द्वारा निर्देशित इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में दोनों ने ऐसे दो भाइयों का किरदार निभाया था, जिनका पालन-पोषण धोखे से उनके माता-पिता के हत्यारे चाचा ने किया था। इसके अलावा यह जोड़ी ऋषिकेश मुखर्जी की ही एक और कल्ट फिल्म ‘गुड्डी’ में भी एक साथ नजर आई थी। हालांकि इस फिल्म में मुख्य भूमिका अभिनेत्री जया बच्चन की थी, लेकिन धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री की असलियत दिखाते हुए इसमें बेहद प्रभावी कैमियो रोल किए थे, जिसने फिल्म की कहानी को एक नया आयाम दिया था।

    सिल्वर स्क्रीन पर नए प्रयोग करने के मामले में भी यह जोड़ी पीछे नहीं रही। साल १९७७ में रिलीज हुई फिल्म ‘चरणदास’ एकमात्र ऐसी अनूठी फिल्म है, जिसमें अमिताभ और धर्मेंद्र दोनों ने कव्वाली गायकों के रूप में एक विशेष और बेहद दिलचस्प भूमिका निभाई थी। आशा भोसले और मुकेश की आवाज में सजे इस फिल्म के कव्वाली गीत आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इसके बाद निर्देशक दुलल गुहा की फिल्म ‘दोस्त’ में भी अमिताभ बच्चन ने ‘आनंद’ नाम के किरदार में एक बेहद प्रभावशाली कैमियो किया था, जहां मुख्य भूमिका में धर्मेंद्र मौजूद थे। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत से सजी इस फिल्म में दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा था।

    इन दोनों सितारों की जुगलबंदी का सिलसिला आगे भी जारी रहा, जिसमें एक हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘जादूगर’ शामिल है। इस रहस्यमयी कहानी में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने क्रमशः वीरेंद्र और फ्रैंक जेम्स की भूमिकाएं निभाकर दर्शकों को चौंका दिया था, जिसकी पृष्ठभूमि एक सुनसान हवेली से जुड़ी थी। इसके बाद फिल्म ‘दिल्लगी’ में भी दोनों का जादू देखने को मिला, जहां अमिताभ बच्चन का रोल भले ही छोटा था, लेकिन एक गंभीर और सीधे-सादे प्रोफेसर की भूमिका निभा रहे धर्मेंद्र के साथ उनकी ऑनस्क्रीन मौजूदगी ने फिल्म की रौनक बढ़ा दी थी। इसके अतिरिक्त इस लिस्ट में एक अन्य फिल्म ‘हम कौन हैं’ का नाम भी प्रमुखता से शामिल है, जिसमें इस महान जोड़ी ने अपने अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

  • 'झिलमिल सितारों का आंगन होगा' गीत के फिल्मांकन के समय कगार पर थी दो बड़े सितारों की जान, धर्मेंद्र की सूझबूझ से बची अभिनेत्री राखी

    'झिलमिल सितारों का आंगन होगा' गीत के फिल्मांकन के समय कगार पर थी दो बड़े सितारों की जान, धर्मेंद्र की सूझबूझ से बची अभिनेत्री राखी

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की यादें जितनी दिलचस्प हैं, उतनी ही रोमांचित करने वाली उनकी शूटिंग से जुड़ी कहानियां भी हैं। सत्तर के दशक में तकनीकों और विशेष प्रभावों की कमी के कारण अक्सर निर्देशकों को वास्तविक लोकेशंस पर जाकर ही जोखिम भरे दृश्य फिल्माने पड़ते थे। ऐसा ही एक अविस्मरणीय और डरा देने वाला वाकया अभिनेता धर्मेंद्र और दिग्गज अभिनेत्री राखी के साथ घटित हुआ था। दोनों कलाकार अपनी एक बेहद मशहूर फिल्म के रोमांटिक गीत की शूटिंग कर रहे थे, जहां अचानक प्रकृति के एक अनपेक्षित खतरे से उनका आमना-सामना हो गया और सेट पर मौजूद सभी लोगों की जान हलक में आ गई थी।

    यह पूरी घटना निर्देशक राजश्री प्रोडक्शंस की साल 1970 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म जीवन मृत्यु के फिल्मांकन के समय की है। इस फिल्म का एक बेहद लोकप्रिय और कालजयी गीत झिलमिल सितारों का आंगन होगा दर्शकों के बीच आज भी उतना ही पसंद किया जाता है। आनंद बक्शी के लिखे और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के मधुर संगीत से सजे इस गीत को महान गायक मोहम्मद रफी और स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। इस बेहद शांत और रोमांटिक मिजाज के गाने को एक खूबसूरत झील के बीच नाव के ऊपर फिल्माया जा रहा था, जहां दोनों मुख्य कलाकार स्क्रिप्ट के अनुसार एक-दूसरे के आकर्षण में पूरी तरह डूबे हुए थे।

    शेड्यूल के मुताबिक जब कैमरे रोल हो रहे थे और धर्मेंद्र व राखी नाव पर सवार होकर रोमांटिक शॉट दे रहे थे, तभी अचानक पानी में कुछ संदिग्ध हलचल शुरू हुई। किनारे पर खड़े क्रू मेंबर्स और कैमरे के पीछे मौजूद टीम ने जब ध्यान से देखा, तो उनके होश उड़ गए क्योंकि एक विशालकाय मगरमच्छ तैरता हुआ सीधे कलाकारों की छोटी सी नाव की तरफ बढ़ रहा था। जंगली जानवर को इतने करीब देखकर सेट पर हड़कंप मच गया और चीख-पुकार मचने की स्थिति पैदा हो गई। नाव बीच पानी में होने के कारण दोनों ही स्टार्स बेहद असुरक्षित स्थिति में थे और जरा सी चूक एक बड़े हादसे में बदल सकती थी।

    ऐसी विपरीत और जानलेवा परिस्थिति में अभिनेता धर्मेंद्र ने गजब के साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। मगरमच्छ को नाव के बिल्कुल करीब पाकर उन्होंने घबराने के बजाय सबसे पहले अभिनेत्री राखी को सुरक्षित करने का प्रयास किया। उन्होंने राखी को पकड़कर धीरे से नाव के उस कोने से हटाया जिसके पास मगरमच्छ मंडरा रहा था और उन्हें सुरक्षित छोर पर ले आए। हालांकि इस भयानक घटना से दोनों ही कलाकार अंदर से काफी डर गए थे, लेकिन पेशेवर प्रतिबद्धता दिखाते हुए उन्होंने स्थिति सामान्य होने के बाद अपना काम जारी रखा और उस खूबसूरत गाने की शूटिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया।

    उल्लेखनीय है कि इसी फिल्म जीवन मृत्यु के जरिए अभिनेत्री राखी ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा था और धर्मेंद्र के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। बाद में इस जोड़ी ने ब्लैकमेल और क्षत्रिय जैसी कई अन्य यादगार फिल्मों में भी साथ काम किया, जिनके गाने जैसे पल पल दिल के पास आज भी एवरग्रीन माने जाते हैं। धर्मेंद्र ने खुद कई सालों बाद एक टेलीविजन रियलिटी शो के मंच पर इस मगरमच्छ वाली घटना का जिक्र करते हुए पुरानी यादों को ताजा किया था। यह किस्सा साबित करता है कि परदे पर दिखने वाले खूबसूरत नजारों के पीछे कलाकारों को कितनी कठिन और खतरनाक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था।

  • धर्मेंद्र की याद में भावनाओं से भर उठा परिवार, पद्म विभूषण सम्मान के बाद ईशा देओल का संदेश वायरल

    धर्मेंद्र की याद में भावनाओं से भर उठा परिवार, पद्म विभूषण सम्मान के बाद ईशा देओल का संदेश वायरल

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने के बाद उनके परिवार के लिए यह क्षण गर्व के साथ-साथ भावनाओं से भी भरा हुआ नजर आया। इस विशेष अवसर पर परिवार की भावनाएं उस समय और गहरी हो गईं जब उनकी बेटी ईशा देओल ने अपने पिता को याद करते हुए एक भावुक संदेश साझा किया। उनकी बातों में पिता के प्रति सम्मान, प्यार और उनकी अनुपस्थिति का दर्द साफ दिखाई दिया। यही वजह है कि यह भावनात्मक संदेश लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

    भारतीय सिनेमा में अपने लंबे और शानदार योगदान के लिए धर्मेंद्र को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण बनकर सामने आया। वर्षों तक बड़े पर्दे पर अपनी अभिनय प्रतिभा से दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले अभिनेता की उपलब्धियों को इस सम्मान के माध्यम से एक नई पहचान मिली। इस सम्मान ने एक बार फिर उनकी कला और योगदान की यादों को ताजा कर दिया।

    सम्मान समारोह के दौरान परिवार की ओर से यह सम्मान ग्रहण किया गया। इस खास मौके पर परिवार के सदस्यों की भावनाएं साफ नजर आईं। इसी बीच ईशा देओल ने अपने पिता को याद करते हुए एक ऐसा संदेश साझा किया जिसने लोगों को भावुक कर दिया। उन्होंने अपने शब्दों में उस कमी को व्यक्त किया जिसे परिवार आज भी महसूस करता है। उनके अनुसार यदि उनके पिता इस पल में मौजूद होते तो यह अवसर और भी खास बन जाता।

    अपने संदेश में उन्होंने एक ऐसी तस्वीर शब्दों के जरिए सामने रखने की कोशिश की जिसमें एक पिता की सहज मुस्कान, उत्साह और परिवार के साथ बिताए जाने वाले विशेष क्षणों की झलक दिखाई देती है। उन्होंने कल्पना की कि अगर वह इस सम्मान समारोह का हिस्सा होते तो अपने खास अंदाज में पूरे परिवार के साथ इस खुशी को साझा करते। इस भावुक अभिव्यक्ति ने लोगों को परिवार के निजी दर्द और भावनात्मक जुड़ाव से जोड़ दिया।

    धर्मेंद्र भारतीय फिल्म उद्योग के उन कलाकारों में शामिल रहे जिन्होंने कई दशकों तक अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने अपने करियर में अनेक यादगार किरदार निभाए और अपनी अलग पहचान बनाई। एक्शन से लेकर भावनात्मक भूमिकाओं तक, उन्होंने हर शैली में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी फिल्मों और अभिनय शैली को आज भी दर्शक उतनी ही दिलचस्पी से याद करते हैं।

    उनकी लोकप्रियता केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके व्यक्तित्व ने भी लोगों को प्रभावित किया। उनके काम और जीवन से जुड़ी कई यादें आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनती हैं। यही कारण है कि उनके सम्मान से जुड़ी हर खबर लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ देती है।

    धर्मेंद्र की विरासत आज भी भारतीय सिनेमा में जीवित है। उनके द्वारा निभाए गए किरदार, उनके संवाद और उनकी फिल्में आज भी नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं। पद्म विभूषण के रूप में मिला यह सम्मान केवल एक कलाकार के योगदान का सम्मान नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के एक सुनहरे अध्याय को श्रद्धांजलि देने जैसा भी माना जा रहा है।

  • पद्म पुरस्कार 2026 में सितारों की चमकेगी शान: धर्मेंद्र, अलका याज्ञनिक, ममूटी और आर माधवन समेत कई नामों को मिलेगा बड़ा सम्मान

    पद्म पुरस्कार 2026 में सितारों की चमकेगी शान: धर्मेंद्र, अलका याज्ञनिक, ममूटी और आर माधवन समेत कई नामों को मिलेगा बड़ा सम्मान


    नई दिल्ली।
    देश के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में गिने जाने वाले पद्म पुरस्कार 2026 को लेकर देशभर में उत्साह का माहौल बना हुआ है। इस वर्ष आयोजित होने वाले सम्मान समारोह में भारतीय सिनेमा, संगीत और रंगमंच जगत से जुड़ी कई चर्चित और प्रभावशाली हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा। लंबे समय से कला और मनोरंजन की दुनिया में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कलाकारों को इस मंच पर सम्मान मिलने जा रहा है, जिसे भारतीय कला जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

    इस वर्ष घोषित पुरस्कारों में कई ऐसे नाम शामिल हैं जिन्होंने दशकों तक अपने अभिनय, संगीत और रचनात्मक कार्यों के जरिए दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। देशभर के कला प्रेमियों के बीच इस बार के पद्म सम्मान को लेकर विशेष उत्सुकता देखने को मिल रही है। सिनेमा और मनोरंजन जगत की लोकप्रिय हस्तियों को इस सूची में शामिल किए जाने से यह आयोजन और अधिक चर्चित हो गया है।

    दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को इस बार मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा ने सिनेमा प्रेमियों को भावुक कर दिया है। हिंदी सिनेमा में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने कई यादगार किरदार निभाए और अपनी दमदार अभिनय शैली से दर्शकों का दिल जीता। उनकी फिल्मों और स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में शामिल किया। यह सम्मान उनके लंबे और उल्लेखनीय योगदान को समर्पित माना जा रहा है।

    दक्षिण भारतीय सिनेमा के चर्चित अभिनेता ममूटी को भी इस वर्ष बड़े सम्मान के लिए चुना गया है। उन्होंने वर्षों तक अपनी अभिनय क्षमता से क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। वहीं अभिनेता आर माधवन का नाम भी इस सूची में शामिल होने से उनके प्रशंसकों में खुशी का माहौल है। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में कई अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए खुद को एक बहुमुखी कलाकार के रूप में स्थापित किया है।

    संगीत जगत से जुड़ी प्रसिद्ध गायिका अलका याज्ञनिक को भी इस बार सम्मान मिलने जा रहा है। उनकी आवाज ने कई दशकों तक संगीत प्रेमियों को प्रभावित किया है। रोमांटिक गीतों से लेकर भावनात्मक प्रस्तुतियों तक उन्होंने अपने गायन से एक अलग पहचान बनाई। वहीं दिवंगत अभिनेता और कॉमेडियन सतीश शाह को मरणोपरांत सम्मान दिए जाने की खबर ने भी लोगों को भावुक कर दिया है। उनकी हास्य शैली और शानदार अभिनय ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बनाया था।

    इसके अलावा थिएटर और टेलीविजन जगत से जुड़े कई अनुभवी कलाकारों को भी इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया है। कला जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यह पुरस्कार केवल उपलब्धियों का सम्मान नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले व्यक्तित्वों को दिया गया एक विशेष सम्मान भी है। पद्म पुरस्कार 2026 का यह आयोजन एक बार फिर भारतीय कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को नई पहचान देने का काम करता नजर आएगा।

  • धर्मेंद्र की याद में भावुक हुए बॉबी देओल, बोले- पापा के बिना जिंदगी में एक ऐसा खालीपन है जो कभी नहीं भर सकता

    धर्मेंद्र की याद में भावुक हुए बॉबी देओल, बोले- पापा के बिना जिंदगी में एक ऐसा खालीपन है जो कभी नहीं भर सकता


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल हाल ही में एक बातचीत के दौरान अपने पिता धर्मेंद्र को याद करते हुए बेहद भावुक नजर आए। बातचीत के दौरान उन्होंने खुलकर बताया कि पिता के जाने के बाद जिंदगी पहले जैसी नहीं रही और उनके बिना हर दिन एक गहरा खालीपन महसूस होता है। बॉबी की आंखों में अपने पिता की याद में आंसू साफ दिखाई दिए। उनका यह भावुक अंदाज देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र सिर्फ उनके पिता ही नहीं थे, बल्कि पूरे परिवार की ताकत और सबसे मजबूत सहारा थे।

    बॉबी देओल ने कहा कि उनके पिता एक ऐसे इंसान थे जिन्हें सिर्फ परिवार ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया प्यार करती थी। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्होंने लोगों के दिलों में अपने पिता के लिए खास सम्मान और अपनापन देखा था। आज भी जब वे कहीं जाते हैं तो लोग धर्मेंद्र को याद कर भावुक हो जाते हैं। बॉबी ने कहा कि उनके पिता की सादगी, प्यार और इंसानियत ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। उन्होंने माना कि जिंदगी में कई रिश्ते बनते हैं, लेकिन पिता जैसी जगह कोई नहीं ले सकता।

    बातचीत के दौरान परिवार और रिश्तों की अहमियत पर भी चर्चा हुई। बॉबी ने कहा कि पिता के जाने के बाद परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे का सहारा बनने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिर भी हर पल उनकी कमी महसूस होती है। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र परिवार को हमेशा एकजुट रखने वाले इंसान थे और हर सदस्य से बेहद प्यार करते थे। उनके जाने के बाद घर का माहौल बदल गया है और कई बार छोटी-छोटी बातें भी उनकी याद दिला देती हैं।

    बॉबी देओल ने अपने पिता की सादगी को याद करते हुए कहा कि धर्मेंद्र को जिंदगी की छोटी-छोटी चीजों में खुशी मिलती थी। उन्हें परिवार के साथ समय बिताना, साधारण खाना खाना और लोगों से प्यार से बात करना बेहद पसंद था। यही वजह थी कि उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति उन्हें दिल से सम्मान देता था। बॉबी ने कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिर्फ अभिनय ही नहीं बल्कि इंसानियत और रिश्तों की अहमियत भी सिखाई।

    उन्होंने यह भी कहा कि एक पिता का जाना सिर्फ परिवार के लिए ही नहीं बल्कि उन सभी लोगों के लिए बड़ा नुकसान होता है जो उनसे जुड़े होते हैं। बॉबी ने स्वीकार किया कि समय के साथ इंसान खुद को संभालना सीख जाता है, लेकिन कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो जिंदगीभर साथ रहते हैं। उनके मुताबिक, पिता की यादें हमेशा उनके दिल में जिंदा रहेंगी और वही यादें उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देती रहेंगी।

    बॉबी देओल का यह भावुक बयान सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। फैंस लगातार धर्मेंद्र को याद कर रहे हैं और बॉबी के प्रति अपना समर्थन जता रहे हैं। इस बातचीत ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि परिवार का रिश्ता कितना गहरा और अनमोल होता है, खासकर एक पिता और बेटे के बीच का संबंध जिंदगीभर इंसान के दिल में जिंदा रहता है।

  • धर्मेंद्र की याद में टूटे बॉबी देओल, कहा-उनके जाने के बाद जिंदगी में खालीपन रह गया, हर बात आज भी याद आती है

    धर्मेंद्र की याद में टूटे बॉबी देओल, कहा-उनके जाने के बाद जिंदगी में खालीपन रह गया, हर बात आज भी याद आती है

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल एक बातचीत के दौरान उस समय भावुक हो गए जब उन्होंने अपने दिवंगत पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को याद किया। एक चर्चित कार्यक्रम में शामिल हुए बॉबी देओल ने अपने पिता के साथ जुड़ी यादों और उनके व्यक्तित्व को साझा करते हुए कहा कि धर्मेंद्र केवल एक बड़े कलाकार ही नहीं बल्कि उनके लिए जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा थे। बातचीत के दौरान कई बार उनका भावुक होना साफ दिखाई दिया, जिससे माहौल भी गंभीर और संवेदनशील हो गया।

    बॉबी देओल ने कहा कि उनके पिता धर्मेंद्र का व्यक्तित्व इतना सरल, स्नेहपूर्ण और प्रभावशाली था कि उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति उन्हें दिल से पसंद करता था। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र के जाने के बाद परिवार ही नहीं बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के जीवन में भी एक गहरा खालीपन आ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है। बॉबी ने कहा कि उनके लिए उनके पिता का हर पहलू खास था, चाहे वह उनका प्यार हो, उनका व्यवहार हो या फिर उनका गुस्सा, जो भी उन्हें मिला वह हमेशा अपनापन ही महसूस कराता था।

    कार्यक्रम के दौरान जब उनसे उनकी पहचान के बारे में सवाल किया गया तो बॉबी देओल ने बेहद सादगी से जवाब दिया कि उनके लिए सबसे बड़ी पहचान उनका नाम या स्टारडम नहीं बल्कि यह है कि वे धर्मेंद्र के बेटे हैं। इस जवाब ने वहां मौजूद माहौल को और भी भावनात्मक बना दिया। उन्होंने कहा कि यह पहचान उनके लिए गर्व की बात है और जीवनभर रहेगी, क्योंकि उनके पिता ने उन्हें केवल अभिनय ही नहीं बल्कि इंसानियत और विनम्रता भी सिखाई है।

    बॉबी देओल ने यह भी साझा किया कि पिता के जाने के बाद भी उनकी यादें उनके हर दिन का हिस्सा बनी रहती हैं और जीवन के हर महत्वपूर्ण क्षण में उन्हें उनकी कमी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि समय भले ही आगे बढ़ रहा हो लेकिन पिता की मौजूदगी का एहसास आज भी उतना ही मजबूत है। इस दौरान उनकी आंखों में भावुकता साफ झलक रही थी और उनके शब्दों में एक बेटे का दर्द और प्रेम दोनों दिखाई दे रहे थे।

    फिल्मी करियर की बात करें तो बॉबी देओल इन दिनों अपनी आगामी परियोजनाओं को लेकर भी चर्चा में हैं, लेकिन इस बातचीत में उनका पूरा ध्यान अपने निजी जीवन और पिता की यादों पर ही केंद्रित रहा। यह बातचीत दर्शाती है कि एक सफल कलाकार होने के बावजूद उनके भीतर एक बेटे का भावनात्मक पक्ष आज भी उतना ही गहरा और संवेदनशील है।

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    बॉबी देओल अपने पिता धर्मेंद्र को याद करते हुए भावुक हो गए और कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी पहचान “धर्मेंद्र का बेटा होना” है।

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  • धर्मेंद्र को रोमांटिक हीरो बनाने वाले गायक: मोहम्मद रफी ने गाए थे 119 अमर गाने

    धर्मेंद्र को रोमांटिक हीरो बनाने वाले गायक: मोहम्मद रफी ने गाए थे 119 अमर गाने


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के Dharmendra को जब भी याद किया जाता है, तो एक मजबूत, गबरू और एक्शन हीरो की छवि सामने आती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनकी यही छवि बदलकर उन्हें रोमांटिक स्टार बनाने में सबसे बड़ा योगदान दिवंगत गायक Mohammed Rafi का रहा है।

    मोहम्मद रफी ने धर्मेंद्र के लिए एक-दो नहीं, बल्कि करीब 119 गाने गाए थे। यह सिलसिला 1961 की फिल्म शोला और शबनम से शुरू हुआ और 1980 के दशक तक लगातार चलता रहा। इन गीतों में लगभग 60 सोलो और 59 डुएट गाने शामिल थे। रफी की आवाज ने धर्मेंद्र के किरदारों को वह भावनात्मक गहराई दी, जिसने दर्शकों के दिलों में उनके लिए खास जगह बना दी।

    फिल्मी दुनिया में अक्सर कहा जाता है कि धर्मेंद्र को रोमांटिक हीरो का दर्जा दिलाने में संगीतकारों की अहम भूमिका रही, लेकिन असली जादू रचा संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और मोहम्मद रफी ने मिलकर। इस जोड़ी ने धर्मेंद्र के लिए 50 से ज्यादा गाने तैयार किए, जिनमें प्रतिज्ञा का मशहूर गाना “मैं जट यमला पगला दीवाना” आज भी बेहद लोकप्रिय है।

    इसके अलावा मदन मोहन के संगीत में जब रफी ने “आप के हसीन रुख पे” जैसे गीत गाए, तो धर्मेंद्र की रोमांटिक छवि और भी निखर गई। यह वही दौर था जब एक्शन फिल्मों के साथ-साथ धर्मेंद्र को एक सॉफ्ट रोमांटिक हीरो के रूप में भी देखा जाने लगा।

    धर्मेंद्र ने खुद एक इंटरव्यू में कहा था कि जब रफी उनके लिए गाते थे, तो उन्हें लगता था जैसे वह खुद गा रहे हों। यह भावना ही उनकी ऑन-स्क्रीन परफॉर्मेंस को और अधिक वास्तविक बना देती थी।

    रफी और धर्मेंद्र की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए। हकीकत का “होके मजबूर मुझे उसने पुकारा होगा”, लोफर का “आज मौसम बड़ा बेईमान है” और दो रास्ते का “सुख के सब साथी” जैसे गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं।

    इन दोनों की जोड़ी ने हर भावना प्यार, दर्द, खुशी और संघर्ष—को आवाज दी। यही कारण है कि आज भी जब ये गीत बजते हैं, तो धर्मेंद्र की मुस्कान और रफी की आवाज एक साथ अमर हो उठती है।

  • “ये धर्मेंद्र और अमिताभ की नकल कर रहा है…” – पहली फिल्म के सेट पर ऋषि कपूर को मिली कड़ी सीख

    “ये धर्मेंद्र और अमिताभ की नकल कर रहा है…” – पहली फिल्म के सेट पर ऋषि कपूर को मिली कड़ी सीख


    नई दिल्ली | कपूर खानदान ने चार पीढ़ियों से दर्शकों को एंटरटेन किया है और आज भी कर रही है। इसी खानदान ने बहुमुखी प्रतिभा के धनी फिल्म निर्माता और एक्टर निकले, लेकिन ऋषि कपूर अपनी फिल्मों के साथ-साथ अपने बेबाक अंदाज के लिए भी जाने गए।

    बात चाहे निजी जिंदगी से जुड़ी हो या देश से, उन्होंने हर मामले पर खुलकर राय रखी, लेकिन बेबाक राय रखने वाले ऋषि कपूर को पहली ही फिल्म बॉबी में बड़ी सीख मिली थी, लेकिन पहले उनके हाथ और पैर बुरी तरीके से फूल गए थे। बता दें कि 30 अप्रैल को अभिनेता ऋषि कपूर की पुण्यतिथि है।

    ऋषि कपूर ने अपने करियर में कई शानदार और रोमांटिक फिल्में दीं, और जब 70-80 के दशक में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र जैसे अभिनेता पर्दे पर सिर्फ एक्शन कर रहे थे, तब ऋषि कपूर ने सिनेमा को म्यूजिकल और रोमांस से भरी फिल्में दीं और हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई, लेकिन पहली फिल्म के दौरान उनके पिता राज कपूर ने उन्हें खुले समंदर में अकेला हाथ- पैर मारने के लिए छोड़ दिया था।

    दरअसल ऋषि कपूर की बतौर मुख्य अभिनेता पहली फिल्म ‘बॉबी’ थी और सेट पर उनके लिए काम करना भी मुश्किल था क्योंकि भले ही वे फिल्मी खानदान से थे, लेकिन सेट पर काम करने का अनुभव नहीं था। सेट पर पिता राज कपूर को पिता कहने की भी इजाजत नहीं थी और वे उन्हें साहब बुलाते थे। इसी फिल्म का पहला गाना शूट होना था और अभिनेता को लगा कि गाना फिल्माने के लिए कोई कोरियोग्राफर बुलाया जाएगा, लेकिन काफी इंतजार करने के बाद सेट पर कोई नहीं आया और राज कपूर ने आदेश दिया कि कोई कोरियोग्राफर नहीं आएगा और जो करना है वो तुम्हें खुद करना है।

    ये सुनकर ऋषि कपूर के हाथ-पैर सुन्न हो गए। पहले तो उन्होंने इनकार किया, लेकिन राज कपूर की एक सीख ने उन्हें जिंदगी की सबसे बड़ी सीख दी। राज कपूर ने कहा कि अगर किसी कोरियोग्राफर को बुलाता तो वो तुम्हें वैसा करने के लिए कहता, जो उसने धर्मेंद्र या अमिताभ ने किया, क्योंकि उसने बहुत सारे लोगों को सिखाया है। ऐसे में लोग कहेंगे कि नया लड़का धर्मेंद्र या अमिताभ की नकल कर रहा है, तो इसलिए जो करना है, वो खुद को करो और पूरी आजादी के साथ करो। उस दिन से लेकर आने वाली फिल्मों में ऋषि कपूर ने गानों की लिप-सिंकिंग, डांस और स्टाइल को खुद से किया और पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाई।