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  • धर्मेंद्र के निधन के बाद फिल्मों में वापसी पर हेमा मालिनी ने दिया जवाब, बताया अब किन जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं अभिनेत्री

    धर्मेंद्र के निधन के बाद फिल्मों में वापसी पर हेमा मालिनी ने दिया जवाब, बताया अब किन जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं अभिनेत्री

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी लंबे समय से बड़े पर्दे से दूर हैं, लेकिन उनके प्रशंसकों के बीच आज भी फिल्मों में वापसी को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। हाल ही में उनसे पूछा गया कि क्या वह दोबारा फिल्मों में नजर आने की तैयारी कर रही हैं। अभिनेत्री ने इस सवाल पर स्पष्ट संकेत दिया कि फिलहाल उनका ध्यान अभिनय में वापसी से ज्यादा अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों और परिवार पर है।

    हेमा मालिनी ने बताया कि इस समय वह अपने राजनीतिक दायित्वों में व्यस्त हैं और अपने क्षेत्र के लोगों के लिए काम करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके साथ ही वह अपने बच्चों और नाती-पोतों के साथ भी समय बिताती हैं। उनके अनुसार, परिवार को इस समय उनकी जरूरत है और यही उनकी वर्तमान जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    अभिनेत्री ने धर्मेंद्र की यादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह उनकी यादों के साथ जीवन आगे बढ़ा रही हैं। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की जोड़ी हिंदी सिनेमा की चर्चित जोड़ियों में रही है। दोनों ने लंबे समय तक साथ जीवन बिताया और उनकी निजी जिंदगी हमेशा प्रशंसकों की दिलचस्पी का विषय रही है।

    हेमा मालिनी का फिल्मी करियर कई दशकों तक फैला रहा है। उन्होंने शादी और परिवार की जिम्मेदारियों के बाद भी पूरी तरह काम करना बंद नहीं किया। हालांकि समय के साथ फिल्मों में उनकी सक्रियता कम होती गई। उनकी आखिरी फिल्मों में 2020 में आई शिमला मिर्ची शामिल है। इसके बाद उनका ज्यादा ध्यान सार्वजनिक जीवन और राजनीति से जुड़े कामों पर रहा।

    अभिनेत्री ने यह भी बताया कि शादी और बच्चों की योजना बनाने के बाद उन्होंने फिल्मों की संख्या कम कर दी थी, लेकिन उनका रचनात्मक काम जारी रहा। उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी काम किया और टेलीविजन से जुड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनीं। उन्होंने दिल आशना है का निर्देशन किया था, जबकि टेलीविजन के लिए भी काम किया।

    हेमा मालिनी का कला से जुड़ाव सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। वह लंबे समय से शास्त्रीय नृत्य से जुड़ी हुई हैं और उन्होंने कई नृत्य प्रस्तुतियां तथा बैले तैयार किए। इनमें दुर्गा, महालक्ष्मी, राधा कृष्ण और द्रौपदी जैसे पौराणिक विषयों पर आधारित कार्यक्रम शामिल रहे हैं। अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने मंच पर फिल्मी गीतों के बजाय शास्त्रीय नृत्य को प्राथमिकता दी।

    उनके मुताबिक शास्त्रीय नृत्य से आर्थिक लाभ फिल्मी प्रस्तुतियों की तुलना में कम हो सकता है, लेकिन उन्होंने इसे अपनी पसंद और कला के प्रति प्रतिबद्धता के कारण जारी रखा। इससे उनके अभिनय के अलावा नृत्य के क्षेत्र में उनकी अलग पहचान भी बनी।

    हेमा मालिनी ने अपने फिल्मी करियर से जुड़े कुछ पुराने फैसलों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि राज कपूर की सत्यम शिवम सुंदरम में काम करने का प्रस्ताव उन्हें मिला था, लेकिन उन्होंने भूमिका स्वीकार नहीं की। अभिनेत्री के अनुसार, वह राज कपूर के साथ फिर काम करना चाहती थीं, लेकिन इस विशेष फिल्म को करने के लिए तैयार नहीं थीं।

    फिलहाल हेमा मालिनी ने फिल्मों में वापसी की कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। उनके बयान से यही संकेत मिलता है कि राजनीति, परिवार, नृत्य और धर्मेंद्र की यादों से जुड़ी उनकी वर्तमान जिंदगी में अभिनय की वापसी अभी प्राथमिकता नहीं है। हालांकि भविष्य में कोई उपयुक्त भूमिका मिलने पर उनका फैसला क्या होगा, इस पर उन्होंने कोई निश्चित घोषणा नहीं की है।

  • पिता धर्मेंद्र की सुरक्षात्मक सोच के कारण अधूरा रह गया सनी देओल का पेशेवर रेसर बनने का बड़ा सपना

    पिता धर्मेंद्र की सुरक्षात्मक सोच के कारण अधूरा रह गया सनी देओल का पेशेवर रेसर बनने का बड़ा सपना

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सनी देओल ने अपने निजी जीवन और बचपन की इच्छाओं को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। एक लोकप्रिय टीवी क्विज शो के दौरान दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन से बातचीत करते हुए सनी देओल ने बताया कि वह एक समय पेशेवर फॉर्मूला वन रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे, लेकिन अपने पिता धर्मेंद्र के कारण उनका यह सपना अधूरा ही रह गया।

    सनी देओल हाल ही में अपनी नई फिल्म के प्रचार सिलसिले में सह-कलाकारों आमिर खान और प्रीति जिंटा के साथ पहुंचे थे। बातचीत के दौरान जब अमिताभ बच्चन ने उनके रेसिंग के प्रति जुनून के बारे में पूछा, तो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें तेज ड्राइविंग और थ्रिलर स्पोर्ट्स का बेहद शौक था। हालांकि, पारिवारिक माहौल और पिता के कड़े रुख के चलते वे इसमें आगे नहीं बढ़ सके।

    अभिनेता ने बताया कि उनके पिता धर्मेंद्र बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा बेहद सतर्क और संवेदनशील रहते थे। उस दौर में मोटर स्पोर्ट्स और फॉर्मूला वन रेसिंग जैसे खेलों को काफी जोखिम भरा और खतरनाक माना जाता था। इसी वजह से धर्मेंद्र जी ने उन्हें ऐसे किसी भी खतरनाक खेल में उतरने की अनुमति नहीं दी और उनका यह शौक महज एक इच्छा बनकर रह गया।

    भले ही सनी देओल का रेसिंग ड्राइवर बनने का सपना पूरा न हो सका हो, लेकिन उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक सफल और प्रतिष्ठित अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 1983 में फिल्म ‘बेताब’ से अपने अभिनय सफर की शुरुआत करने वाले सनी ने ‘घायल’, ‘दामिनी’, ‘बॉर्डर’ और ‘गदर’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं, जिनकी बदौलत वे आज भी दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं।

    वर्तमान में सनी देओल अपनी नई रिलीज हुई फिल्म के प्रचार-प्रसार में व्यस्त हैं, जिसका निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है। इस फिल्म में उनके साथ प्रीति जिंटा, करण देओल, शबाना आजमी और अली फजल जैसे मंझे हुए कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इमरान हाशमी की नई एक्शन फिल्म के साथ कड़े मुकाबले का सामना कर रही है।

    मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में सनी देओल के प्रशंसकों के बीच उनकी फिल्मों को लेकर हमेशा से जबरदस्त उत्साह देखने को मिलता रहा है। दर्शक उनके एक्शन और दमदार अभिनय को खूब पसंद करते हैं, और उनके पारिवारिक जीवन से जुड़ी यह नई बात जानकर उनके प्रशंसक काफी प्रभावित दिख रहे हैं।

    फिल्म विश्लेषकों का मानना है कि सनी देओल का यह ईमानदारी भरा स्वीकारोक्ति बयान यह दर्शाता है कि भारतीय परिवारों में माता-पिता की सुरक्षात्मक सोच बच्चों के फैसलों को किस तरह प्रभावित करती है। बहरहाल, सिनेमा जगत में अपने चार दशक लंबे करियर में सनी देओल ने जो मुकाम हासिल किया है, वह बेहद सराहनीय है।

  • 'कौन हैं आप और कहां जा रहे हैं?' केबीसी में अमिताभ बच्चन ने खोला धर्मेंद्र के घर का बड़ा राज..

    'कौन हैं आप और कहां जा रहे हैं?' केबीसी में अमिताभ बच्चन ने खोला धर्मेंद्र के घर का बड़ा राज..


    नई दिल्ली। 
    टेलीविज़न के लोकप्रिय ज्ञान आधारित शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीजन के दौरान भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने प्रिय मित्र और दिवंगत दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को याद करते हुए एक बेहद भावुक और दिलचस्प संस्मरण साझा किया। उन्होंने शो में धर्मेंद्र के सरल स्वभाव, आतिथ्य सत्कार और उनके विशाल हृदय की जमकर सराहना की।

    अमिताभ बच्चन ने बताया कि धर्मेंद्र का निवास स्थान हमेशा हर किसी के लिए खुला रहता था। उनके घर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत बेहद अपनेपन और आत्मीयता के साथ किया जाता था। धर्मेंद्र की इसी दरियादिली का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जब खुद धर्मेंद्र को भी अपने घर में आने-जाने वाले मेहमानों की पूरी संख्या का अंदाजा नहीं रहता था।

    संस्मरण सुनाते हुए उन्होंने बताया कि एक बार धर्मेंद्र ने अपने ही घर की सीढ़ियों पर चार-पांच अनजान लोगों को चढ़ते हुए देखा। जब उन्होंने उत्सुकता से उनसे पूछा कि वे कौन हैं और कहां जा रहे हैं, तो उन लोगों ने बड़ी सादगी से जवाब दिया कि वे गांव से आए हैं। धर्मेंद्र के घर का माहौल ऐसा था जहां कोई भी व्यक्ति बिना किसी हिचकिचाहट के आ-जा सकता था और उनका घर सबके लिए हमेशा खुला रहता था।

    भारतीय सिनेमा में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की जोड़ी को हमेशा से ही गहरी दोस्ती की मिसाल माना जाता रहा है। यद्यपि धर्मेंद्र फिल्म उद्योग में अमिताभ बच्चन से वरिष्ठ थे, लेकिन दोनों के बीच का संबंध बेहद आत्मीय रहा। दोनों कलाकारों ने कई यादगार फिल्मों में एक साथ अभिनय किया है। विशेष रूप से 1975 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ में जय और वीरू के उनके किरदारों ने दर्शकों के दिलों पर ऐसी अमिट छाप छोड़ी कि आज भी सच्ची दोस्ती की मिसाल देने के लिए इन्हीं किरदारों का नाम लिया जाता है।

    गौरतलब है कि दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का निधन नवंबर 2025 में हुआ था। उनके जाने से न केवल उनका परिवार, बल्कि संपूर्ण फिल्म उद्योग और उनके करोड़ों प्रशंसक गहरे शोक में डूब गए थे। हिंदी सिनेमा के कई बड़े कलाकार धर्मेंद्र को अपने अभिभावक और पिता समान मानते थे, और उनकी कमी आज भी पूरी इंडस्ट्री में महसूस की जाती है।

    हाल ही में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रिलीज हुई फिल्म ‘बंटवारा 1947’ में भी धर्मेंद्र के पुत्र और अभिनेता सनी देओल ने अपने पिता को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की है। विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित इस भावुक फिल्म की शुरुआत में ही महान अभिनेता को याद किया गया है।

    अमिताभ बच्चन द्वारा शो के दौरान साझा की गई यह याद दर्शाती है कि धर्मेंद्र केवल पर्दे पर ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी एक महान और बड़े दिल वाले इंसान थे, जिनकी यादें आज भी लोगों के दिलों में तरोताजा हैं।

  • सतना से किसान कांग्रेस का बड़ा ऐलान, MSP और बिजली समेत मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी

    सतना से किसान कांग्रेस का बड़ा ऐलान, MSP और बिजली समेत मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी

    मध्य प्रदेश : में किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर किसान कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सतना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा और जल्द समाधान नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो संगठन सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेगा और विधानसभा का घेराव भी किया जाएगा।

    किसान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किसानों से जुड़ी कई मांगें उठाईं। उन्होंने भारत-अमेरिका कृषि ट्रेड डील को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की। उनका कहना था कि कृषि क्षेत्र से जुड़े फैसलों में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और ऐसे समझौतों से पहले किसानों की चिंताओं को ध्यान में रखना जरूरी है।

    उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को लेकर भी सरकार से ठोस कानून बनाने की मांग की। धर्मेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की उपज को तय समर्थन मूल्य से कम कीमत पर खरीदने और बेचने की स्थिति को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने एमएसपी सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को प्रमुख मुद्दा बताया।

    किसान कांग्रेस ने प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर भी सवाल उठाए। संगठन की मांग है कि सरकार किसानों से मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित करे, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही खेती के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। किसान कांग्रेस ने कृषि कार्यों के लिए 24 घंटे थ्री-फेज बिजली देने की मांग की।

    इसके अलावा कृषि उपज मंडी और सहकारिता चुनावों को लेकर भी संगठन ने सरकार को घेरा। किसान कांग्रेस का कहना है कि पिछले कई वर्षों से लंबित इन चुनावों को जल्द कराया जाना चाहिए, ताकि किसानों से जुड़े संस्थानों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हो सके।

    धर्मेंद्र सिंह चौहान ने भाजपा सरकार पर किसानों से किए गए चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान धान और गेहूं की खरीदी को लेकर जो घोषणाएं की गई थीं, सरकार अब उनसे पीछे हट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान महंगे डीजल, खाद की बढ़ती कीमतों, बिजली बिल और कर्ज जैसी समस्याओं से परेशान हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को मंडियों में उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और सरकार की नीतियां किसानों की परेशानियां कम करने में सफल नहीं हो रही हैं। किसान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार पर किसान कल्याण के दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर होने का आरोप लगाया।

    किसान कांग्रेस ने साफ किया है कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो संगठन प्रदेशभर में किसानों को एकजुट कर आंदोलन करेगा। इसके तहत राजधानी भोपाल में विधानसभा घेराव की चेतावनी भी दी गई है। फिलहाल किसान कांग्रेस के इस ऐलान के बाद प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

  • पापा ने एक हां में बदल दी किस्मत, सनी देओल ने बताया कैसे धर्मेंद्र के भरोसे बनी सुपरहिट फिल्म घायल

    पापा ने एक हां में बदल दी किस्मत, सनी देओल ने बताया कैसे धर्मेंद्र के भरोसे बनी सुपरहिट फिल्म घायल


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल इन दिनों अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म बंटवारा 1947 को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है और इसके साथ ही सनी देओल लगातार प्रमोशन में जुटे हुए हैं। इसी दौरान उन्होंने अपनी सुपरहिट फिल्म घायल से जुड़ा एक ऐसा भावुक किस्सा साझा किया जिसने उनके प्रशंसकों के साथ फिल्म प्रेमियों का भी दिल जीत लिया। सनी ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब इस फिल्म पर कोई निर्माता पैसा लगाने को तैयार नहीं था लेकिन उनके पिता और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र ने उन पर भरोसा जताया और वही भरोसा आगे चलकर भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में से एक की नींव बना।

    सनी देओल ने सोशल मीडिया पर निर्देशक राजकुमार संतोषी के साथ एक वीडियो साझा करते हुए उस दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि युवा राजकुमार संतोषी ने घायल की कहानी लिखी थी और उन्हें इस कहानी पर शुरू से पूरा विश्वास था। दोनों कई निर्माताओं के पास गए लेकिन किसी ने भी फिल्म बनाने में रुचि नहीं दिखाई। लगातार निराशा मिलने के बाद सनी ने फैसला किया कि अब इस कहानी को अपने पिता धर्मेंद्र को सुनाया जाए।

    उस समय धर्मेंद्र जयपुर में फिल्म बंटवारा की शूटिंग कर रहे थे और रामबाग पैलेस में ठहरे हुए थे। सनी देओल राजकुमार संतोषी को लेकर उनके पास पहुंचे। संतोषी ने पूरी कहानी सुनाई और कहानी खत्म होते ही धर्मेंद्र ने बिना किसी हिचकिचाहट के फिल्म बनाने के लिए हामी भर दी। सनी ने बताया कि उनके पिता को सिर्फ कहानी ही नहीं बल्कि इस बात पर भी गर्व था कि उनके बेटे ने इतनी दमदार स्क्रिप्ट को पहचाना और उस पर विश्वास बनाए रखा।

    सनी ने कहा कि घायल की सफलता केवल एक फिल्म की सफलता नहीं थी बल्कि यह उनके पिता के भरोसे और विश्वास की जीत थी। उन्होंने कहा कि अगर उस समय धर्मेंद्र उनका साथ नहीं देते तो शायद घायल कभी बड़े पर्दे तक नहीं पहुंच पाती। यही भरोसा उनके जीवन का सबसे बड़ा संबल बना और आगे चलकर घायल ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल करते हुए भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।

    सनी देओल ने एक और दिलचस्प संयोग का जिक्र करते हुए बताया कि जिस जयपुर शहर में धर्मेंद्र ने बंटवारा की शूटिंग के दौरान घायल के लिए हां कही थी उसी शहर में वर्षों बाद वह अपनी नई फिल्म बंटवारा 1947 का पहला प्रमोशन कर रहे हैं। उनके अनुसार यह महज संयोग नहीं बल्कि जीवन का खूबसूरत चक्र है जो उन्हें पुराने संघर्ष और नई सफलता दोनों की याद दिलाता है।

    बंटवारा 1947 की कहानी भारत विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में सनी देओल एक मुस्लिम व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं जो विभाजन के दौरान पाकिस्तान पहुंच जाता है। वहां जिस घर में वह रहता है उसकी ऊपरी मंजिल पर एक हिंदू महिला रहती है जो अपना घर छोड़ने से इनकार कर देती है। सांप्रदायिक तनाव और दंगों के बीच सनी का किरदार उस महिला और अपने परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाता है। फिल्म में मानवीय रिश्तों और इंसानियत के संदेश को प्रमुखता से दिखाया गया है।

    फिल्म में प्रीति जिंटा पांच साल से अधिक समय बाद अभिनय की दुनिया में वापसी कर रही हैं। करण देओल भी अहम भूमिका में नजर आएंगे और फिल्म में सनी देओल के बेटे का किरदार निभा रहे हैं। इसके अलावा अली फजल अभिमन्यु सिंह खुशी हजारे और कनिका कपूर भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। एआर रहमान के संगीत और जावेद अख्तर के गीतों से सजी इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने बिना किसी कट के मंजूरी दी है। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी यह फिल्म दर्शकों के बीच पहले ही जबरदस्त उत्सुकता पैदा कर चुकी है।

  • मां की एक सलाह ने बदल दी जिंदगी धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि हेमा मालिनी राजनीति में जाएं एक्ट्रेस ने सुनाया दिलचस्प किस्सा

    मां की एक सलाह ने बदल दी जिंदगी धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि हेमा मालिनी राजनीति में जाएं एक्ट्रेस ने सुनाया दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की ड्रीम गर्ल और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता हेमा मालिनी ने अपने राजनीतिक सफर को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया था तब उनके पति और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र इसके पक्ष में नहीं थे। इसका कारण किसी राजनीतिक मतभेद से ज्यादा उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता थी। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान होने वाली भारी भीड़ और लगातार हेलिकॉप्टर से यात्रा करना धर्मेंद्र को हमेशा परेशान करता था।

    हेमा मालिनी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से उन्हें अलग अलग राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए भेजा जाता था जहां हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती थी। ऐसी परिस्थितियों को देखकर धर्मेंद्र हमेशा चिंतित रहते थे। वह बार बार उनसे सुरक्षित रहने की सलाह देते और पूछते कि क्या इतना जोखिम उठाना वास्तव में जरूरी है। चुनाव प्रचार के दौरान हेलिकॉप्टर से लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने पर भी उन्हें काफी चिंता रहती थी। हालांकि हेमा मालिनी का कहना है कि पार्टी की जिम्मेदारी होने के कारण उन्हें अपना दायित्व निभाना पड़ता था।

    उन्होंने बताया कि राजनीति की ओर उनका झुकाव वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ जब उन्होंने अभिनेता और भाजपा नेता विनोद खन्ना के लिए चुनाव प्रचार किया था। उसी दौरान उन्होंने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन और स्नेह देखा। उन्होंने कहा कि जब भी चुनावी सभाओं में विशाल भीड़ उमड़ती थी तो उन्हें विश्वास ही नहीं होता था कि इतने लोग उन्हें देखने और सुनने आए हैं। लोगों का यह प्रेम उनके लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक अनुभव था।

    हेमा मालिनी ने यह भी बताया कि शुरुआत में उन्होंने राजनीति में आने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। लेकिन उनकी मां ने उन्हें समझाया कि अब केवल अभिनय तक सीमित रहने के बजाय देश के लिए भी योगदान देने का समय आ गया है। उनकी मां ने उन्हें बताया कि भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे बड़े और सम्मानित नेता हैं तथा यह अवसर देश सेवा का माध्यम बन सकता है। मां की यह बात उनके मन को छू गई और उन्होंने राजनीति में सक्रिय होने का निर्णय ले लिया।

    एक्ट्रेस ने अपने पहले चुनाव से जुड़ा एक और रोचक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी के सामने स्पष्ट शर्त रखी थी कि यदि वह चुनाव लड़ेंगी तो केवल मथुरा लोकसभा सीट से ही लड़ेंगी क्योंकि वह भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त हैं और मथुरा से उनका विशेष आध्यात्मिक जुड़ाव है। बाद में पार्टी ने उनकी इच्छा का सम्मान किया और उन्हें मथुरा से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने इस दौरान दिवंगत नेताओं सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के सहयोग को भी याद करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

    फिल्मी दुनिया में दशकों तक अपनी अभिनय प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीतने वाली हेमा मालिनी आज राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में मनोरंजन और जनसेवा दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका यह अनुभव बताता है कि परिवार की चिंताओं और व्यक्तिगत दुविधाओं के बावजूद यदि उद्देश्य स्पष्ट हो तो जीवन में नए रास्ते अपनाए जा सकते हैं।

  • 17 साल तक अधर में अटकी रही फिल्म, धर्मेंद्र से शुरू हुआ सफर बॉबी देओल तक पहुंचा, रिलीज के बाद बनी यादगार हिट

    17 साल तक अधर में अटकी रही फिल्म, धर्मेंद्र से शुरू हुआ सफर बॉबी देओल तक पहुंचा, रिलीज के बाद बनी यादगार हिट

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में रही हैं जिनकी कहानी केवल पर्दे तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके निर्माण का सफर भी उतना ही दिलचस्प रहा। वर्ष 2000 में रिलीज हुई फिल्म ‘बिच्छू’ भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म की मूल योजना लगभग 17 वर्ष पहले बनाई गई थी, लेकिन परिस्थितियों के चलते इसका निर्माण बीच में ही रुक गया। बाद में नई टीम और नई स्टारकास्ट के साथ इसे दोबारा शुरू किया गया और रिलीज के बाद फिल्म ने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।

    फिल्म की शुरुआती योजना वर्ष 1983 में तैयार की गई थी। उस समय अभिनेता धर्मेंद्र इस परियोजना से मुख्य अभिनेता के रूप में जुड़े थे और निर्माण की जिम्मेदारी भी उनके पास थी। मुख्य अभिनेत्री के लिए शबाना आज़मी का चयन किया गया था। शुरुआती चरण में फिल्म की शूटिंग भी शुरू हो चुकी थी और पहला शेड्यूल पूरा होने की चर्चा रही। उस दौर में फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार करने की योजना थी और इसे एक अलग शैली की एक्शन-ड्रामा फिल्म के रूप में देखा जा रहा था।

    निर्माण के दौरान परिस्थितियां लगातार बदलती रहीं। निर्देशन से जुड़े बदलाव, निर्माण संबंधी कठिनाइयों और अन्य कारणों के चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। समय के साथ फिल्म पूरी तरह रुक गई और लंबे समय तक इस पर कोई काम नहीं हुआ। कई वर्षों तक यह परियोजना फिल्म उद्योग में अधूरी योजनाओं के उदाहरण के रूप में याद की जाती रही।

    करीब 17 वर्ष बाद इसी कहानी को नए रूप में दोबारा जीवित किया गया। इस बार मुख्य भूमिका में बॉबी देओल को चुना गया, जबकि रानी मुखर्जी फिल्म की नायिका बनीं। दिलचस्प बात यह रही कि जिस किरदार को कभी धर्मेंद्र निभाने वाले थे, वही भूमिका बाद में उनके बेटे बॉबी देओल के हिस्से आई। इस संयोग ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता भी बढ़ा दी और इसे देओल परिवार के लिए एक खास परियोजना माना गया।

    रिलीज के बाद फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। शुरुआती दौर में इसका प्रदर्शन संतोषजनक रहा और समय के साथ इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। टेलीविजन प्रसारण और बाद के वर्षों में भी फिल्म को अच्छी पहचान मिली। आज इसे बॉबी देओल के करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है और उनके अभिनय की भी सराहना की जाती है।

    फिल्म में बॉबी देओल और रानी मुखर्जी के अलावा आशिष विद्यार्थी, फरीदा जलाल, सचिन खेडेकर और मलाइका अरोड़ा सहित कई कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाईं। सभी कलाकारों के अभिनय और फिल्म की तेज रफ्तार कहानी ने इसे दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक्शन और भावनात्मक दृश्यों के संतुलन ने भी फिल्म को अलग पहचान दिलाई।

    सिनेमा जगत में अक्सर ऐसी परियोजनाएं समय और परिस्थितियों के कारण अधूरी रह जाती हैं, लेकिन कुछ कहानियां वर्षों बाद भी अपनी मंजिल तक पहुंचती हैं। ‘बिच्छू’ इसका प्रमुख उदाहरण मानी जाती है। लगभग दो दशक तक रुकी रहने के बावजूद जब यह फिल्म नए कलाकारों के साथ बड़े पर्दे पर आई तो दर्शकों ने इसे स्वीकार किया। यही कारण है कि आज भी इस फिल्म का नाम उन चुनिंदा फिल्मों में लिया जाता है, जिन्होंने लंबे इंतजार के बाद सफलता हासिल कर यह साबित किया कि अच्छी कहानी को समय की सीमाएं रोक नहीं सकतीं।

  • रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान

    रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को दर्शक आज भी उनकी शानदार अदाकारी दमदार संवाद और बेहतरीन एक्शन के लिए याद करते हैं। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में रोमांस कॉमेडी और एक्शन हर शैली की फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। हालांकि उनकी पहचान केवल बड़े पर्दे तक सीमित नहीं थी। उन्हें करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि वास्तविक जीवन में भी धर्मेंद्र बेहद साहसी और निडर इंसान थे। उनके व्यक्तित्व से जुड़ा ऐसा ही एक किस्सा अभिनेता और निर्देशक सत्यजीत पुरी ने साझा किया जिसने यह साबित किया कि धर्मेंद्र केवल फिल्मों के ही नहीं बल्कि असल जिंदगी के भी सच्चे हीरो थे।

    सत्यजीत पुरी ने एक इंटरव्यू में बताया कि 1990 के दशक में जब फिल्म इंडस्ट्री पर अंडरवर्ल्ड का दबदबा बढ़ रहा था तब कई कलाकारों को धमकी भरे फोन और दबाव का सामना करना पड़ता था। उस दौर में कई लोग खामोश रहना ही बेहतर समझते थे लेकिन धर्मेंद्र का स्वभाव अलग था। उन्होंने कभी भी डर के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया।

    सत्यजीत पुरी के अनुसार एक समय ऐसा भी आया जब अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों ने धर्मेंद्र पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन धर्मेंद्र ने घबराने के बजाय बेहद सख्त और आत्मविश्वास से भरा जवाब दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई उनसे टकराने की कोशिश करेगा तो उनके गांव सनेहवाल के लोग उनके साथ खड़े होंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि उनके पास लड़ने के लिए पूरी फौज जैसी ताकत है और उनसे उलझना किसी के लिए आसान नहीं होगा।

    बताया जाता है कि धर्मेंद्र के इस बेबाक और निडर जवाब के बाद अंडरवर्ल्ड ने दोबारा उन्हें परेशान करने की कोशिश नहीं की। यह घटना आज भी बॉलीवुड के चर्चित किस्सों में गिनी जाती है और धर्मेंद्र के साहस की मिसाल के रूप में सुनाई जाती है।

    धर्मेंद्र का व्यक्तित्व हमेशा सादगी और आत्मसम्मान से जुड़ा रहा। उन्होंने अपने करियर में कभी विवादों के सहारे लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश नहीं की बल्कि अपने काम और व्यवहार से लोगों का दिल जीता। यही वजह रही कि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें बेहद सम्मान की नजर से देखा जाता था।

    धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर में सैकड़ों फिल्मों में अभिनय किया और कई सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा रहे। उनकी जोड़ी कई बड़े सितारों के साथ पसंद की गई लेकिन अमिताभ बच्चन के साथ उनकी फिल्मों को आज भी दर्शक बड़े चाव से देखते हैं। उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और बेहतरीन अभिनय ने उन्हें हिंदी सिनेमा का ही मैन बना दिया।

    24 नवंबर 2025 को धर्मेंद्र के निधन की खबर ने फिल्म जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों को गहरा दुख पहुंचाया। उनके जाने के बाद भी उनकी फिल्में उनके संवाद और उनके साहस से जुड़े किस्से लोगों के दिलों में जिंदा हैं। मरणोपरांत उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया जो भारतीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान का सम्मान था।

    धर्मेंद्र का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्चा नायक केवल पर्दे पर नहीं बल्कि अपने सिद्धांतों साहस और आत्मसम्मान से वास्तविक जीवन में भी पहचाना जाता है। यही कारण है कि उन्हें आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और प्रेरणादायक कलाकारों में गिना जाता है।

  • 'धर्मेंद्र-हेमा मालिनी जैसा निस्वार्थ प्यार अब दुर्लभ', रिश्तों और तलाक पर पहली बार खुलकर बोलीं ईशा देओल

    'धर्मेंद्र-हेमा मालिनी जैसा निस्वार्थ प्यार अब दुर्लभ', रिश्तों और तलाक पर पहली बार खुलकर बोलीं ईशा देओल

    नई दिल्ली। अभिनेत्री ईशा देओल ने पति भरत तख्तानी से अलग होने के बाद पहली बार अपने निजी जीवन और रिश्तों को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने स्वीकार किया कि तलाक के बाद उनकी जिंदगी में प्यार और रोमांस की कमी महसूस होती है, लेकिन इसके बावजूद उनका प्रेम और रिश्तों पर भरोसा आज भी कायम है। ईशा का कहना है कि जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव इंसान की सोच बदल सकते हैं, लेकिन सच्चे प्यार की अहमियत कभी कम नहीं होती।

    ईशा ने बातचीत के दौरान कहा कि वह स्वभाव से बेहद रोमांटिक हैं और आज भी रोमांटिक गीत, प्रेम कहानियां और रिश्तों की भावनात्मक गहराई उन्हें आकर्षित करती है। उनके अनुसार, प्यार किसी भी इंसान के जीवन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और फिलहाल वह इसी एहसास की कमी महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि रोमांस जीवन को खूबसूरत बनाता है और यही कारण है कि वह आज भी प्रेम पर पूरी आस्था रखती हैं।

    अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वैवाहिक जीवन में आई कठिनाइयों या अलगाव का अर्थ यह नहीं है कि प्यार खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि रिश्तों में ब्रेकअप या अलगाव जीवन का हिस्सा हैं और इससे प्रेम के प्रति उनका नजरिया नहीं बदला है। उनके मुताबिक, जीवन में पहले भी ऐसे रिश्ते रहे हैं जो लंबे समय तक नहीं चल सके, लेकिन इन अनुभवों ने उन्हें प्रेम से दूर नहीं किया।

    ईशा देओल ने अपने माता-पिता धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के रिश्ते का जिक्र करते हुए कहा कि बचपन से उन्होंने दोनों के बीच सम्मान, विश्वास और बिना किसी शर्त के प्यार को बेहद करीब से देखा है। उसी रिश्ते ने उनके भीतर प्रेम की परिभाषा गढ़ी। उनका मानना है कि आज के दौर में वैसी गहराई, समर्पण और गरिमा वाले रिश्ते बहुत कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता का रिश्ता हमेशा उनके लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में अच्छे और कठिन दोनों तरह के अनुभवों से गुजरता है। रिश्तों का टूटना निश्चित रूप से भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इससे जीवन रुक नहीं जाता। उनके अनुसार, हर अनुभव इंसान को पहले से अधिक मजबूत और परिपक्व बनाता है तथा भविष्य के लिए नई सीख भी देता है।

    ईशा और व्यवसायी भरत तख्तानी ने वर्ष 2012 में विवाह किया था। दोनों की दो बेटियां हैं और शादी के एक दशक से अधिक समय बाद वर्ष 2024 में दोनों ने अलग होने का फैसला किया। इस निर्णय के बाद दोनों ने अपनी निजी जिंदगी को गरिमा के साथ आगे बढ़ाने की बात कही थी। अलगाव के बाद ईशा ने सार्वजनिक रूप से अपने व्यक्तिगत जीवन पर बहुत कम प्रतिक्रिया दी थी।

    अब लंबे समय बाद उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए यह स्पष्ट किया है कि कठिन दौर के बावजूद वह जीवन और प्यार दोनों को सकारात्मक नजरिए से देखती हैं। उनका मानना है कि सच्चे रिश्ते विश्वास, सम्मान और आपसी समझ पर टिके होते हैं। यही मूल्य उन्होंने अपने परिवार से सीखे हैं और भविष्य में भी वह इन्हीं मूल्यों के साथ जीवन को आगे बढ़ाना चाहती हैं।

  • अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना

    अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे प्रतिष्ठित और स्क्रीन पर तहलका मचाने वाली जोड़ियों का जिक्र होता है, तो अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। सत्तर और अस्सी के दशक में इन दोनों दिग्गज कलाकारों ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा चमत्कारी तालमेल दिखाया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स और दर्शकों के बीच यह माना जाने लगा था कि जिस फिल्म में ये दोनों साथ हैं, उसका सुपरहिट होना तय है। इस ब्लॉकबस्टर जोड़ी की लोकप्रियता का आलम यह था कि इनकी एक कल्ट क्लासिक फिल्म रिलीज के बाद लगातार पांच सालों तक सिनेमाघरों से नहीं उतरी थी, जो अपने आप में एक अटूट कीर्तिमान है। इन दोनों महानायकों ने मुख्य भूमिकाओं से लेकर खास कैमियो रोल्स तक, कुल ९ फिल्मों में एक साथ स्क्रीन शेयर कर सिल्वर स्क्रीन पर अपनी दोस्ती और अभिनय का लोहा मनवाया।

    इस बेमिसाल जोड़ी के करियर और हिंदी सिनेमा के इतिहास में साल १९७५ में आई फिल्म ‘शोले’ एक मील का पत्थर साबित हुई। निर्देशक रमेश सिप्पी की इस एक्शन-ड्रामा फिल्म में जय और वीरू के किरदारों में अमिताभ और धर्मेंद्र ने जिगरी दोस्ती की ऐसी अनूठी मिसाल पेश की, जो आज आधी सदी बीत जाने के बाद भी मुहावरा बनी हुई है। यह फिल्म न केवल उस दौर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी, बल्कि मुंबई के मिनर्वा थिएटर में लगातार पांच सालों तक चलकर इसने इतिहास रच दिया। इसी साल इस सुपरहिट जोड़ी की एक और क्लासिक फिल्म ‘चुपके चुपके’ रिलीज हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी यह बेहतरीन कॉमेडी फिल्म बंगाली सिनेमा की रीमेक थी। फिल्म में दोनों की कॉमिक टाइमिंग कमाल की थी और एसडी बर्मन के संगीत से सजे इसके गाने आज भी चाव से सुने जाते हैं।

    एक्शन और कॉमेडी के बाद इस जोड़ी ने साल १९८० में आई फिल्म ‘राम बलराम’ के जरिए थ्रिलर जॉनर में अपनी धाक जमाई। विजय आनंद द्वारा निर्देशित इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में दोनों ने ऐसे दो भाइयों का किरदार निभाया था, जिनका पालन-पोषण धोखे से उनके माता-पिता के हत्यारे चाचा ने किया था। इसके अलावा यह जोड़ी ऋषिकेश मुखर्जी की ही एक और कल्ट फिल्म ‘गुड्डी’ में भी एक साथ नजर आई थी। हालांकि इस फिल्म में मुख्य भूमिका अभिनेत्री जया बच्चन की थी, लेकिन धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री की असलियत दिखाते हुए इसमें बेहद प्रभावी कैमियो रोल किए थे, जिसने फिल्म की कहानी को एक नया आयाम दिया था।

    सिल्वर स्क्रीन पर नए प्रयोग करने के मामले में भी यह जोड़ी पीछे नहीं रही। साल १९७७ में रिलीज हुई फिल्म ‘चरणदास’ एकमात्र ऐसी अनूठी फिल्म है, जिसमें अमिताभ और धर्मेंद्र दोनों ने कव्वाली गायकों के रूप में एक विशेष और बेहद दिलचस्प भूमिका निभाई थी। आशा भोसले और मुकेश की आवाज में सजे इस फिल्म के कव्वाली गीत आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इसके बाद निर्देशक दुलल गुहा की फिल्म ‘दोस्त’ में भी अमिताभ बच्चन ने ‘आनंद’ नाम के किरदार में एक बेहद प्रभावशाली कैमियो किया था, जहां मुख्य भूमिका में धर्मेंद्र मौजूद थे। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत से सजी इस फिल्म में दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा था।

    इन दोनों सितारों की जुगलबंदी का सिलसिला आगे भी जारी रहा, जिसमें एक हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘जादूगर’ शामिल है। इस रहस्यमयी कहानी में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने क्रमशः वीरेंद्र और फ्रैंक जेम्स की भूमिकाएं निभाकर दर्शकों को चौंका दिया था, जिसकी पृष्ठभूमि एक सुनसान हवेली से जुड़ी थी। इसके बाद फिल्म ‘दिल्लगी’ में भी दोनों का जादू देखने को मिला, जहां अमिताभ बच्चन का रोल भले ही छोटा था, लेकिन एक गंभीर और सीधे-सादे प्रोफेसर की भूमिका निभा रहे धर्मेंद्र के साथ उनकी ऑनस्क्रीन मौजूदगी ने फिल्म की रौनक बढ़ा दी थी। इसके अतिरिक्त इस लिस्ट में एक अन्य फिल्म ‘हम कौन हैं’ का नाम भी प्रमुखता से शामिल है, जिसमें इस महान जोड़ी ने अपने अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।