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  • धीरेंद्र शास्त्री की राम-कृष्ण तुलना पर मचा विवाद, बोले हमारे राम सीधे तुम्हारे कृष्ण टेढ़े, सफाई में कहा प्रेम भाव में कही बात

    धीरेंद्र शास्त्री की राम-कृष्ण तुलना पर मचा विवाद, बोले हमारे राम सीधे तुम्हारे कृष्ण टेढ़े, सफाई में कहा प्रेम भाव में कही बात


    शिवपुरी । बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए ऐसी टिप्पणी की है जिस पर विवाद खड़ा हो सकता है। शिवपुरी जिले के करैरा में 29 अक्टूबर को आयोजित श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने कहा कि हमारे राम सीधे हैं जबकि तुम्हारे कृष्ण टेढ़े हैं। उन्होंने भगवान कृष्ण की वेशभूषा और उनकी प्रसिद्ध त्रिभंग मुद्रा का जिक्र करते हुए कई टिप्पणियां कीं। इतना ही नहीं उन्होंने भगवान कृष्ण के बांसुरी बजाने और गोवर्धन पर्वत उठाने की तुलना भगवान राम के धनुष चलाने और हनुमान जी के पर्वत उठाकर लाने से भी की।

    कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भगवान कृष्ण की तस्वीरों में वे कई बार कमर और गर्दन को झुकाकर खड़े दिखाई देते हैं। उनके मुताबिक भगवान कृष्ण का नाम भी टेढ़ा है और उनका खड़ा होने का अंदाज भी अलग है। इसके विपरीत उन्होंने भगवान राम को सीधे खड़े होने वाला और सरल स्वरूप वाला बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं से पूछा कि वहां रामजी को मानने वाले कितने लोग बैठे हैं। इस दौरान उन्होंने राम और कृष्ण के भक्तों के बीच तुलना करते हुए अपनी बात आगे बढ़ाई।

    धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान कृष्ण की बांसुरी का जिक्र करते हुए कहा कि बांसुरी बजाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है क्योंकि कलाकार भी बांसुरी बजा लेते हैं। उन्होंने कथा में मौजूद बांसुरी वादक की ओर इशारा करते हुए उससे धुन बजाने को कहा। इसके बाद कलाकार ने कुछ देर तक बांसुरी बजाई। शास्त्री ने कहा कि बांसुरी बजाना तो खेल है लेकिन धनुष चलाना आसान काम नहीं है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने भगवान राम के धनुष धारण करने और उनके पराक्रम को भगवान कृष्ण की बांसुरी से जोड़कर तुलना की।

    उन्होंने भगवान कृष्ण के गाय चराने और गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा का भी उल्लेख किया। शास्त्री ने कहा कि गाय चराना कोई बड़ी बात नहीं है। इसके बाद उन्होंने बंदरों को नचाने का जिक्र करते हुए कहा कि यह भी आसान काम नहीं है। गोवर्धन पर्वत उठाने की घटना पर उन्होंने कहा कि लोग कहेंगे कि हमारे भगवान पर्वत उठा लेते हैं लेकिन इसमें क्या बड़ी बात है। हमारे भगवान के चेले ने तो पूरा पर्वत ही उड़ा दिया। यहां उनका इशारा भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी की ओर था जिन्होंने रामायण की कथा में संजीवनी बूटी लाने के लिए पर्वत का हिस्सा उठा लिया था।

    हालांकि अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनकी बात का अर्थ भगवान श्रीकृष्ण का विरोध करना नहीं है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि वे ठाकुर जी के विरोधी हैं। बाद में अपने बयान पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि कृष्ण जी टेढ़े हैं और रामजी सीधे हैं तो इसमें गलत क्या कहा। उन्होंने दावा किया कि यह बात उन्होंने प्रेम भाव में कही थी। उनके मुताबिक जिससे ज्यादा प्रेम होता है उससे इस तरह की बातें भी की जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके नाम में भी कृष्ण शब्द जुड़ा हुआ है।

    धीरेंद्र शास्त्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब धार्मिक कथावाचकों के बयानों पर पहले भी विवाद होते रहे हैं। इससे पहले जून 2024 में कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने राधारानी के विवाह को लेकर टिप्पणी की थी। उनके बयान पर ब्रज क्षेत्र में नाराजगी सामने आई थी। विवाद बढ़ने के बाद प्रदीप मिश्रा बरसाना पहुंचे थे और राधारानी मंदिर में नाक रगड़कर माफी मांगी थी।

    अब धीरेंद्र शास्त्री की राम और कृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर उन्होंने इसे प्रेम और भक्ति की भावना से कही गई बात बताया है तो दूसरी ओर भगवान के दोनों स्वरूपों की तुलना को लेकर बहस शुरू हो गई है। फिलहाल उनके बयान और सफाई को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने का इंतजार है।

  • भगवान कृष्ण पर धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी से विवाद, वायरल वीडियो पर बवाल; कथाओं के बहिष्कार की मांग

    भगवान कृष्ण पर धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी से विवाद, वायरल वीडियो पर बवाल; कथाओं के बहिष्कार की मांग


    शिवपुरी।
    बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश के करेरा में कथा सुनाने के दौरान उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण की तुलना करते हुए कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने उनकी भाषा और टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। वहीं, दामोदर यादव ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सनातनी और यादव समाज के लोगों से उनकी कथाओं का बहिष्कार करने की अपील की है।

    ‘तुम्हारे वाले तीन जगह से टेढ़े हैं…’

    करेरा में कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की मुद्रा का जिक्र करते हुए कहा, “तुम अपने वाले ठाकुर जी की एक भी फोटो देख लो, खड़े भी होते हैं तो तीन जगह से टेढ़े।” इसके बाद उन्होंने हंसते हुए भगवान कृष्ण की त्रिभंग मुद्रा का वर्णन किया। उन्होंने कहा, “पांव के ऊपर पांव, कमर लचकाए, खपड़िया ऐसी करे… टेढ़ी खपड़िया करके बंशी बजाए रहे।”

    इसके विपरीत भगवान राम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके आराध्य सीधे खड़े होते हैं, उनका नाम, चलना और रूप भी सीधा है। उन्होंने अयोध्या को सीधा और वृंदावन को टेढ़ा बताते हुए दोनों की तुलना की। इस दौरान उन्होंने बांसुरी और धनुष का जिक्र करते हुए कहा, “बंसी का बजाना खेल भी है, धनुष का चलाना खेल नहीं।” उन्होंने बांसुरी बजाने को लेकर भी टिप्पणी की।

    कथाओं के बहिष्कार और पुतले जलाने की अपील

    वीडियो वायरल होने के बाद दामोदर यादव ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सनातनी और यादव समाज के लोगों से उनकी कथाओं का बहिष्कार करने की अपील की। साथ ही पूरे प्रदेश में धीरेंद्र शास्त्री के पुतले जलाने का आह्वान किया।

    यादव ने अपने बयान में कहा कि जरूरत पड़ने पर धीरेंद्र शास्त्री को खुद भी सुधारने की कोशिश की जाएगी। उनके इस बयान के बाद विवाद और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    धीरेंद्र शास्त्री की यात्रा और कथाओं पर भी उठाए सवाल

    दामोदर यादव ने धीरेंद्र शास्त्री की सनातन एकता यात्रा और उनकी कथाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी यात्रा और कथाओं को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है और इसी वजह से वह इस तरह के बयान दे रहे हैं।

    यादव ने कहा कि यदि धीरेंद्र शास्त्री को मीडिया में चर्चा में रहने का शौक है तो उन्हें इसके लिए बेहतर काम करने चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ऐसा नहीं करने पर उन्हें सुधार दिया जाएगा।

    इस पूरे मामले में एक ओर धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध जताया जा रहा है, तो दूसरी ओर दामोदर यादव की बहिष्कार और पुतले जलाने की अपील ने विवाद को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम दे दिया है।

  • आश्रमों की सुरक्षा को लेकर साध्वी हर्षानंद ने उठाए सवाल, बोलीं घर पर रहकर पूजा करो, क्यों आश्रम की राजनीति में पड़ना

    आश्रमों की सुरक्षा को लेकर साध्वी हर्षानंद ने उठाए सवाल, बोलीं घर पर रहकर पूजा करो, क्यों आश्रम की राजनीति में पड़ना


    नई दिल्ली। महिलाओं से अकेले बागेश्वर धाम नहीं आने की अपील के बाद अब साध्वी हर्षानंद गिरि का बयान सामने आया है। उन्होंने आश्रमों में महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। साध्वी ने अपने बयान में किसी विशेष संत या आश्रम का नाम नहीं लिया है लेकिन उनकी टिप्पणी को हाल ही में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से श्रद्धालुओं को दी गई सुरक्षा संबंधी सलाह से जोड़कर देखा जा रहा है।

    साध्वी हर्षानंद ने कहा कि यदि किसी आश्रम में रहने वाले सेवादारों पर ही भरोसा नहीं किया जा सकता तो ऐसे स्थान पर अपने बच्चों और परिवार को भेजने को लेकर लोगों को खुद सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर आश्रम को गलत नहीं कहा जा सकता लेकिन जब किसी जगह की सुरक्षा को लेकर मन में दुविधा हो तो ऐसी स्थिति में वहां जाने से बचना भी एक विकल्प हो सकता है।

    उन्होंने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि यदि उन्हें सुरक्षित रहना है तो अपने घर पर रहकर मंत्र जाप और पूजा पाठ कर सकते हैं। उनके मुताबिक धार्मिक आस्था के लिए किसी आश्रम में लंबे समय तक रुकना जरूरी नहीं है। लोग मंदिर में दर्शन करें और इसके बाद अपने घर लौट सकते हैं।

    साध्वी ने आश्रमों की व्यवस्था और वहां होने वाली गतिविधियों को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोगों को आश्रम की राजनीति और विवादों में पड़ने के बजाय अपनी धार्मिक साधना पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि जिन लोगों ने आश्रम बनाए हैं अगर वे ही वहां की पूरी व्यवस्था को संभालने में सक्षम नहीं हैं तो आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

    यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 3 अक्टूबर की रात श्रद्धालुओं खासकर महिलाओं को सतर्क रहने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि महिलाएं अकेली धाम पर न आएं। अगर किसी महिला को अकेले आना पड़े तो उसे किसी अनजान व्यक्ति या धाम के सेवादार पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।

    धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं से यह भी कहा था कि मंदिर परिसर और निर्धारित हॉल के अलावा दूसरी जगहों पर जाने से बचें। उन्होंने बताया था कि बागेश्वर धाम के करीब पांच किलोमीटर के पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। उनके मुताबिक वह मंदिर और हॉल की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी ले सकते हैं लेकिन पूरे क्षेत्र को लेकर ऐसी गारंटी नहीं दी जा सकती।

    उन्होंने श्रद्धालुओं से धाम में लंबे समय तक रुकने से बचने और अपने सामान तथा सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेने की अपील भी की थी। शास्त्री ने धार्मिक स्थलों पर सामने आने वाली कुछ घटनाओं का संदर्भ देते हुए कहा था कि वह नहीं चाहते कि किसी अप्रिय घटना के कारण बागेश्वर धाम या श्री बालाजी महाराज की बदनामी हो।

    धीरेंद्र शास्त्री की अपील और साध्वी हर्षानंद की प्रतिक्रिया के बीच मुख्य मुद्दा धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सामने आया है। दोनों बयानों में श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने की बात कही गई है हालांकि साध्वी हर्षानंद ने आश्रमों में जाने को लेकर व्यापक सवाल उठाए हैं।

    ऐसे मामलों में किसी भी घटना या आरोप को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। फिलहाल दोनों संतों की ओर से सामने आए बयानों ने धार्मिक स्थलों पर महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है। श्रद्धालुओं के लिए भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर सतर्क रहना और किसी अनजान व्यक्ति पर तुरंत भरोसा नहीं करना महत्वपूर्ण सावधानी मानी जा सकती है।

  • एक कुर्ता ढाई साल पहनते थे बाबा बागेश्वर लुधियाना में सुनाई संघर्ष की कहानी तो भावुक होकर रो पड़े

    एक कुर्ता ढाई साल पहनते थे बाबा बागेश्वर लुधियाना में सुनाई संघर्ष की कहानी तो भावुक होकर रो पड़े


    नई दिल्ली। बाबा बागेश्वर के नाम से प्रसिद्ध धीरेंद्र शास्त्री का एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है जिसमें वह मंच पर श्रद्धालुओं के सामने भावुक होकर रोते हुए नजर आ रहे हैं। लुधियाना में कथा के दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए दुनिया की हकीकत और अपने जीवन के संघर्षों का जिक्र किया। बातचीत के दौरान उनका गला भर आया और आंखों से आंसू छलक पड़े। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि दुनिया पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह जगत बड़ा अजीब है। यहां कई बार मुर्दों को उठाया जाता है और जिंदा लोगों को गिराया जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कई बार जाने वाले व्यक्ति की पूजा होती है लेकिन जो सामने मौजूद है उसकी कोई परवाह नहीं करता।

    धीरेंद्र शास्त्री ने लुधियाना के लोगों से कहा कि वह वहां से जा रहे हैं और जाते समय उन्हें एक बात जरूर कहना चाहते हैं। उन्होंने आर्थिक स्थिति को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि जिसके पास पैसा नहीं होता उसे समाज में अक्सर वह सम्मान नहीं मिलता जो संपन्न व्यक्ति को मिलता है। उन्होंने मंच से मौजूद लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े और अमीर लोग आसानी से मंच तक पहुंच जाते हैं जबकि गरीब व्यक्ति भीड़ में खड़ा रहकर सिर्फ ताली बजाता रह जाता है। इसी दौरान उन्होंने अपने जीवन के उन दिनों को याद किया जब उनके परिवार ने बेहद कठिन परिस्थितियों में समय बिताया था।

    अपने संघर्ष को याद करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि उन्होंने गरीबी के दिन देखे हैं और भगवान से प्रार्थना की कि किसी को ऐसे दिन न देखने पड़ें। उन्होंने अपने बचपन के बारे में बताते हुए कहा कि वह करीब 15 साल तक भीख मांगने की स्थिति में रहे। उनका परिवार एक छोटी सी झोपड़ी में रहता था जहां माता पिता भाई बहन सभी साथ रहते थे। घर में उजाले के लिए बल्ब तक नहीं था। कभी कोई मिट्टी का तेल दे देता तो उसी से दीपक जलाकर रात गुजरती थी।

    उन्होंने बताया कि आज भले ही उनके पहनावे में बदलाव दिखाई देता हो लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उनके पास पहनने के लिए सीमित कपड़े होते थे। एक कुर्ता लंबे समय तक पहनना पड़ता था। रक्षाबंधन की याद साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी बहन के पास मिठाई खरीदने के पैसे नहीं होते थे इसलिए वह चीनी से उनका मुंह मीठा कराती थी। इन पुरानी यादों को बताते हुए वह मंच पर भावुक हो गए।

    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि गरीबी से बड़ी परेशानी शायद ही कोई हो। उन्होंने लोगों को अपनी मां की सीख भी बताई कि इस दुनिया से कुछ मांगने के बजाय उस ईश्वर से मांगना चाहिए जिसने पूरी दुनिया बनाई है। उनकी यह बात सुनकर कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु भी भावुक नजर आए। सोशल मीडिया पर सामने आए इस वीडियो में उनके संघर्ष की कहानी और मंच पर छलके आंसुओं ने लोगों का ध्यान खींचा है।

  • ‘बंगाली अपनी पसंद का खाना खाएंगे’, धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर BJP प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार

    ‘बंगाली अपनी पसंद का खाना खाएंगे’, धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर BJP प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार


    नई दिल्ली। दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बंगाल से बाहर का कोई व्यक्ति राज्य के लोगों के खान-पान और पहनावे को लेकर फैसला नहीं सुना सकता। उनके मुताबिक बंगाल की अपनी सांस्कृतिक परंपराएं हैं और लोगों की भोजन संबंधी आदतों को किसी के कहने पर नहीं बदला जा सकता।

    धीरेंद्र शास्त्री ने हाल में कहा था कि जो लोग खुद को धार्मिक बताते हैं, लेकिन दुर्गा पूजा पंडाल के पीछे मांसाहारी भोजन बनाते हैं, उन्हें धार्मिक नहीं बल्कि पाखंडी कहा जाना चाहिए। उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों से मांसाहारी भोजन छोड़ने की अपील भी की थी। इसी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए समिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल की परंपराओं और खान-पान को बाहर से आकर तय नहीं किया जा सकता।

    ‘बंगाली वही खाएंगे जो खाते आए हैं’

    समिक भट्टाचार्य ने कहा, “मुझे अपनी मर्जी से जीने दें, बंगाली वहीं खाएंगे जो वे खाते आए हैं। क्या बंगाली मछली और मांस नहीं खा सकते?”

    उन्होंने बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि मां काली को बकरे और मांस का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा रही है। उनके मुताबिक अष्टमी पर लुची (पूरी) और नवमी पर बकरे का मांस खाने की भी बंगाल में पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है।

    भट्टाचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम अष्टमी पर लुची (पूरी) और नवमी पर बकरे का मांस खाना जारी रखेंगे। कोई भी बंगाल के लोगों को ये नहीं बता सकता कि उन्हें क्या खाना चाहिए।”

    धीरेंद्र शास्त्री का सम्मान, लेकिन राय थोपने के खिलाफ

    बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वह धीरेंद्र शास्त्री का सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी व्यक्तिगत राय को पूरे बंगाली समाज पर लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कोई संत या डॉक्टर लोगों को शाकाहारी भोजन अपनाने की सलाह दे सकता है, लेकिन किसी बाहरी व्यक्ति को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि बंगाल के लोग क्या खाएं या क्या पहनें।

    इस बयान के साथ ही दुर्गा पूजा के दौरान खान-पान को लेकर शुरू हुई बहस ने बंगाल की स्थानीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को लेकर राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

  • बंगाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, बोले- ‘ये अकबर का नहीं, रघुवर का है देश’; धर्मांतरण पर भी दिया बयान

    बंगाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, बोले- ‘ये अकबर का नहीं, रघुवर का है देश’; धर्मांतरण पर भी दिया बयान


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में कथा के लिए पहुंचे बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने धर्मांतरण और घर वापसी के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया। हावड़ा में आयोजित कथा के दौरान उन्होंने कहा, “यह देश अकबर का नहीं, रघुवर यानी भगवान राम का है।” उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में अब तक जिन लोगों का धर्मांतरण हुआ है, उनकी जल्द ही घर वापसी कराई जाएगी।

    धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो उनके बंगाल आने का विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे थे कि बाबा को बंगाल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, लेकिन अब वे बंगाल आ चुके हैं। मंच से सीएम शुभेंदु की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जनता को उनके विचारों, संस्कृति और हिंदुत्व की बातों पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कोलकाता का पत्ता-पत्ता ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंजेगा।

    ‘बाबर वाले नहीं, रघुवर वाले बैठे हैं’

    सीमा के रास्ते देश में आने वाले लोगों को लेकर भी शास्त्री ने सख्त तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि सीमा के सहारे भारत में घुसने वाले ‘देशद्रोही’ यह बात कान खोलकर सुन लें कि अब यहां बाबर वाले नहीं, रघुवर वाले बैठे हैं। उन्होंने कहा, “छेड़ोगे तो छोड़ा नहीं जाएगा।”

    हालांकि, इसी दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई मुसलमानों या ईसाइयों से नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोध उन लोगों से है जो भारत का खाते हैं और पाकिस्तान का गाते हैं। अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म में तीनों के पूजा-पद्धति के रास्ते अलग नजर आते हैं, लेकिन अंत में सबका बाप कन्हैया लाल ही निकलता है। इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने बंगाल के लोगों से मिलजुलकर रहने की अपील की और कहा, “कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे।”

    बॉर्डर इलाकों में कथा करने की इच्छा

    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अभी हावड़ा में कथा हुई है, लेकिन आगे वह पश्चिम बंगाल के उन इलाकों में भी कथा करना चाहते हैं, जो सीमा से सटे हुए हैं। उनका दावा है कि इन क्षेत्रों में धर्मांतरण अधिक हुआ है। उन्होंने राम और मां काली से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे इलाकों तक सनातन की आवाज पहुंचनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि केवल सरकार बदलने से किसी प्रदेश का पूरी तरह कायाकल्प नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए लोगों के भीतर भी बदलाव जरूरी है। उन्होंने ‘मन परिवर्तन’ पर जोर देते हुए कहा कि जब सनातनी एकजुट होंगे और हर व्यक्ति के मन में राम का भाव जागेगा, तभी बंगाल में वास्तविक रामराज्य की नींव मजबूत होगी।

    ‘दिक्कत है तो बांग्लादेश चले जाएं’

    अपने संबोधन में पड़ोसी देश बांग्लादेश का जिक्र करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जिन्हें भारत में रहने में परेशानी महसूस होती है, वे वहां जा सकते हैं। भाषण के अंत में उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है और न ही वे किसी विशेष राजनीतिक चेहरे के समर्थक हैं। उनका कहना था कि वे पहले भी सनातन के थे, आज भी सनातन के हैं और आगे भी सनातन के ही रहेंगे।

  • Gen-Z आंदोलन पर धीरेंद्र शास्त्री का संदेश, विरोध करें, लेकिन गाली-गलौज नहीं, संवाद और मर्यादा रहे

    Gen-Z आंदोलन पर धीरेंद्र शास्त्री का संदेश, विरोध करें, लेकिन गाली-गलौज नहीं, संवाद और मर्यादा रहे


    कटनी। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर एवं कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हाल में चर्चा में रहे Gen-Z आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और विरोध जताने का अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान अपशब्दों और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

    कटनी के कुठला क्षेत्र में अपने शिष्यों द्वारा निर्मित ‘बागेश्वर बालाजी’ मठ के कार्यक्रम में पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं से भारतीय संस्कृति और मर्यादा के अनुरूप संवाद करने की अपील की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में समसामयिक मुद्दों पर भी अपने विचार रखे।

    ‘विरोध हो, लेकिन मर्यादा के साथ’
    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी के परिवार या मां-बहन के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग भारतीय संस्कृति और सभ्यता के अनुरूप नहीं है। उनका कहना था कि असहमति व्यक्त करते समय भी भाषा और व्यवहार की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।

    युवाओं से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील
    उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। ऐसे में युवाओं को विवाद और कटुता के बजाय संवाद, शांति और संयम का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी बात प्रेमपूर्ण और शालीन भाषा में रखें।

    सावन और कांवड़ यात्रा पर भी दी सलाह
    धीरेंद्र शास्त्री ने सावन माह और कांवड़ यात्रा का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं से भगवान शिव की भक्ति पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के नाम पर ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए जिससे किसी की भावनाएं आहत हों या समाज में विवाद की स्थिति पैदा हो।

    संयम और संस्कार पर दिया जोर
    उन्होंने कांवड़ यात्रियों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि आचरण ऐसा होना चाहिए जिससे धर्म और समाज की गरिमा बनी रहे। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी संस्कृति, संस्कार, आपसी प्रेम और सामाजिक सद्भाव में निहित है, जिसे हर हाल में सुरक्षित रखना चाहिए।

  • छत्रपति शिवाजी महाराज पर बयान से विवाद, रितेश देशमुख का तीखा रिएक्शन—‘ऐसी बातें स्वीकार नहीं’

    छत्रपति शिवाजी महाराज पर बयान से विवाद, रितेश देशमुख का तीखा रिएक्शन—‘ऐसी बातें स्वीकार नहीं’

    नई दिल्ली। छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए गए एक बयान के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला उस समय और गर्मा गया जब अभिनेता और फिल्ममेकर रितेश देशमुख ने इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। रितेश ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए साफ शब्दों में कहा कि महान ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के बारे में इस तरह की बातें किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकतीं।

    जानकारी के अनुसार, हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़ा एक कथन सामने आया था, जिसे लेकर विवाद शुरू हो गया।

    इस कथन में महाराज के संघर्ष और उनके निर्णयों को लेकर टिप्पणी की गई थी, जिसे उनके समर्थकों और इतिहास से जुड़े जानकारों ने गलत और भ्रामक बताया। इसके बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया और अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    रितेश देशमुख, जो खुद शिवाजी महाराज के जीवन और विचारों से गहरी प्रेरणा लेने की बात करते रहे हैं, इस बयान से काफी आहत नजर आए। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्वों की विरासत को कमजोर करने या गलत तरीके से पेश करने की कोशिशें स्वीकार नहीं की जाएंगी। उनके अनुसार, शिवाजी महाराज केवल एक ऐतिहासिक नाम नहीं, बल्कि प्रेरणा और स्वाभिमान का प्रतीक हैं, जिनका सम्मान हर हाल में बनाए रखना जरूरी है।

    विवाद बढ़ने के बाद संबंधित पक्ष की ओर से स्पष्टीकरण और खेद व्यक्त किया गया। कहा गया कि बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है और किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का उद्देश्य नहीं था। इसके बावजूद मामला शांत होता नहीं दिखा और सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर बहस जारी रही।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर टिप्पणी करते समय कितनी सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इतिहास से जुड़े विषय केवल तथ्यों के आधार पर ही प्रस्तुत किए जाने चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी या विवाद से बचा जा सके।

    इसी बीच, रितेश देशमुख अपनी आगामी ऐतिहासिक फिल्म को लेकर भी चर्चा में हैं, जिसमें वह छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार में नजर आने वाले हैं। फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही उत्सुकता बनी हुई है, और यह विवाद इसे और अधिक सुर्खियों में ले आया है।

    पूरा मामला अब सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह इतिहास, भावनाओं और अभिव्यक्ति की सीमाओं पर एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है।

  • हिंदू 4 बच्चे पैदा करें, शादी के बाद मैं भी आबादी बढ़ाऊंगा… बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री का बयान

    हिंदू 4 बच्चे पैदा करें, शादी के बाद मैं भी आबादी बढ़ाऊंगा… बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री का बयान


    नई दिल्ली । धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुओं को कम से कम चार बच्चे पैदा करने की सलाह दी है. उन्होंने ये भी बताया कि जब उनकी शादी होगी तो वो भी हिंदुओं की आबादी बढ़ाने में अपना योगदान देंगे. बागेश्वर धाम सरकार ने इस दौरान अजमेर शरीफ की दरगाह जाने वाले हिंदुओं को सलाह दी को वो सनातन का ही पालन करें.
    आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बाद अब बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुओं की घटती आबादी को लेकर चिंता जताई है. जहां भागवत ने हिंदुओं को तीन बच्चे पैदा करने के लिए कहा था वहीं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुओं को 4 बच्चे पैदा करने की सलाह दी है.

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हनुमान कथा के लिए तीन दिवसीय पुष्कर दौरे पर गए हैं. इस दौरान उन्होंने कई अलग अलग मुद्दों पर अपने विचार साझा किए. इस दौरान उन्होंने भारतीय मुसलमानों की घर वापसी को लेकर भी अपनी राय दी है.

    हिंदुओं की घटती आबादी को लेकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कहा ‘ये बहुत वैश्विक विषय है खासकर भारत का बहुत बड़ा मुद्दा है. घटते हिंदू बढ़ते मजहबी देश को बर्बाद करने के परिस्थिति पर जा रहा है
    ‘शादी के बाद हम भी हिंदुओं की आबादी..

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आगे कहा ‘हिंदूओं को कम से कम चार बच्चे पैदा करना चाहिए. हमारी तो शादी नहीं हुई तो हम पर तो अभी लोग कमेंट करेंगे ही कि बाबा आपका क्या योगदान है. जब हमारा ब्याह हो जाएगा तो हम भी हिंदुओं की आबादी बढ़ाने में योगदान देंगे

    मुसलमानों की घर वापसी पर बोले बाबाधाम सरकार

    भारतीय मुसलमानों की घर वापसी के सवाल पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दावा किया कि उनके पूर्वज हिंदू थे. उन्होंने कहा एक फिल्म आई थी अमर अकबर एंथनी उसमें आखिर में तीनों का बाप कन्हैयालाल निकला था. उन्हें अगर ये बात समझ आ जाए तो घर वापसी हो जाएगी

    हिंदुओं को अजमेर की दरगाह पर ना जाने की सलाह

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अजमेर शरीफ की दरगाह जाने वाले हिंदू धर्म के लोगों से अपील की. उन्होंने कहा सबके अपने अपने विचार हैं लेकिन सनातनों से मैं एक प्रार्थना करूंगा कि गीता में कृष्ण भगवान ने कहा कि अपने धर्म में ही चलना जीना सही है. दूसरे धर्म मजहब में उनकी सेवा उन्हें करने दो. हमें अपनी श्रद्धा भावना से भक्ति करनी चाहिए और हमें लगता है हिंदुओं में भगवानों की कमी नहीं है