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  • धीरेंद्र शास्त्री पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला, भाई ने बहिष्कार की अपील की, बेटे का रुख अलग…..

    धीरेंद्र शास्त्री पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला, भाई ने बहिष्कार की अपील की, बेटे का रुख अलग…..

    मध्य प्रदेश: के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और उनके छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर नाराजगी जताई है। दिग्विजय सिंह ने शास्त्री को ‘मूर्ख’ कहा, जबकि लक्ष्मण सिंह ने लोगों से उनका बहिष्कार करने की अपील की है। दूसरी ओर, दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह और उनका परिवार धीरेंद्र शास्त्री के अनुयायी बताए जाते हैं। इस घटनाक्रम ने राघौगढ़ राजपरिवार के भीतर अलग-अलग विचारों को सामने ला दिया है।

    दिग्विजय सिंह इन दिनों सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा निकाल रहे हैं। इसी दौरान उनसे धीरेंद्र शास्त्री के बयान को लेकर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने शास्त्री पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘मूर्ख’ कहा। उन्होंने सवाल उठाया कि धीरेंद्र शास्त्री कब से बाबा बन गए। उनका यह बयान शास्त्री की टिप्पणी को लेकर जारी विवाद के बीच सामने आया है।

    इस मामले में दिग्विजय सिंह के साथ मौजूद कंप्यूटर बाबा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को ‘राजनीतिक बाबा’ बताया। साथ ही टिप्पणी करते हुए कहा कि उन पर बोलने से क्या होगा। इस तरह धीरेंद्र शास्त्री के बयान को लेकर राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

    लक्ष्मण सिंह ने भी इस विवाद पर अपना विरोध जाहिर किया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर धीरेंद्र शास्त्री के बहिष्कार की अपील की। लक्ष्मण सिंह ने कहा कि एक प्रखर कथावाचक ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण का अपमान किया है। उनके अनुसार, यह सनातन धर्म का अपमान है और इससे सनातन के स्वाभिमान को ठेस पहुंची है। उन्होंने लोगों से इस मुद्दे पर विरोध जताने की अपील की।

    लक्ष्मण सिंह ने अन्य धर्मों के लोगों से भी इस विरोध में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कथावाचक को कथा नहीं करने देना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से ऐसी कथाओं पर रोक लगाने की मांग भी की। इसके अलावा, उन्होंने दूसरे कथावाचकों से भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा। लक्ष्मण सिंह ने सवाल उठाया कि बड़े-बड़े धामों से जुड़े कथावाचक इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के बयान को शर्मनाक बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    हालांकि, दिग्विजय सिंह और लक्ष्मण सिंह के रुख से अलग जयवर्धन सिंह को धीरेंद्र शास्त्री का अनुयायी बताया जाता है। उनकी पत्नी और बेटा भी शास्त्री के अनुयायी बताए गए हैं। कुछ समय पहले जयवर्धन सिंह ने धीरेंद्र शास्त्री को राघौगढ़ किले में आमंत्रित किया था। उस दौरान वहां धार्मिक आयोजन भी कराया गया था।

    इस प्रकार, धीरेंद्र शास्त्री के बयान को लेकर एक ही परिवार के सदस्यों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां दिग्विजय सिंह ने उनकी आलोचना की और लक्ष्मण सिंह ने बहिष्कार की अपील की, वहीं जयवर्धन सिंह का परिवार उनसे जुड़ा हुआ बताया जाता है। विवाद के केंद्र में भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी है, जिस पर विरोध जताते हुए लक्ष्मण सिंह ने कथाओं पर रोक लगाने और अन्य कथावाचकों से भी आवाज उठाने की मांग की है।

  • करैरा में 27 और 28 अक्टूबर को लगेगा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार, कलयुग के राक्षसों पर कही बड़ी बात

    करैरा में 27 और 28 अक्टूबर को लगेगा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार, कलयुग के राक्षसों पर कही बड़ी बात


    शिवपुरी जिले: 
    के करैरा स्थित बगीचा सरकार मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कलयुग में राक्षसी प्रवृत्तियों के बदलते स्वरूप पर अपनी बात रखी। उन्होंने त्रेतायुग के राक्षसों और वर्तमान समय के नकारात्मक व्यवहार की तुलना करते हुए श्रद्धालुओं से सवाल किया कि पहले राक्षस किस तरह के काम करते थे और आज उनके व्यवहार तथा गतिविधियों में क्या बदलाव आया है। कथा के दौरान उन्होंने जीवन, कर्म और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़े विषयों पर भी अपने विचार साझा किए।

    पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से कथा स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि पहले के समय में राक्षस यज्ञ और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में हड्डियां डालकर बाधा उत्पन्न करते थे। वहीं, आज के दौर में राक्षसी प्रवृत्तियां अलग रूप में दिखाई देती हैं। उनके अनुसार, वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर भ्रामक और नकारात्मक पोस्ट के जरिए लोगों के बीच गलत संदेश फैलाना भी ऐसी प्रवृत्ति का उदाहरण है।

    कथा के दौरान उन्होंने परमात्मा की सर्वव्यापकता का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर को पाने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर के क्रोध और पाप रूपी तृष्णा का त्याग करना चाहिए। उन्होंने जीवन में सुधार के लिए रामायण के विभिन्न पात्रों और प्रसंगों से सीख लेने की बात कही। उनके मुताबिक, रामायण व्यक्ति को सामान्य अवस्था से महान बनने की प्रेरणा देती है, जबकि केवट और शबरी जैसे पात्र विनम्रता और विशिष्टता का संदेश देते हैं।

    उन्होंने सुग्रीव और विभीषण के प्रसंगों के माध्यम से प्रभु की शरण में जाने के महत्व को समझाया। साथ ही हनुमानजी के जीवन और समर्पण का उदाहरण देते हुए साधारण जीवात्मा से आध्यात्मिक रूप से ऊंचे स्तर तक पहुंचने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जीवन में सुधार के लिए रामकथा, कर्मों को बेहतर बनाने के लिए गीता और मृत्यु के विषय को समझने के लिए भागवत का श्रवण महत्वपूर्ण है।

    पंडित शास्त्री ने कथा में एक पौराणिक प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने हनुमानजी को रामचरितमानस का वास्तविक रचयिता बताते हुए कहा कि हनुमानजी ने अपने नाखूनों से पत्थरों पर रामकथा लिखी थी। उनके अनुसार, महर्षि वाल्मीकि के मन में द्वेष उत्पन्न होने की आशंका से हनुमानजी ने उस रचना को समुद्र में विसर्जित कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमानजी के वचन के कारण वाल्मीकि ने कलयुग में गोस्वामी तुलसीदास के रूप में अवतार लेकर रामचरितमानस को जनभाषा में लोगों तक पहुंचाया। यह प्रसंग उन्होंने रामकथा के महत्व को समझाने के लिए सुनाया।

    कथा में श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर चर्चा के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रैलियों में भीड़ जुटाई जाती है, जबकि कथा में सच्चे भक्त पहुंचते हैं। उन्होंने अपने प्रति आकर्षण का श्रेय हनुमानजी को देते हुए कहा कि उनका क्रेज नहीं, बल्कि हनुमानजी का प्रभाव है, जो कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने अधिक भीड़ देखने के इच्छुक लोगों को 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित होने वाले दिव्य दरबार में आने के लिए कहा।

    करैरा में रामकथा के साथ दिव्य दरबार को लेकर भी लोगों की रुचि बनी हुई है। 27 और 28 अक्टूबर को होने वाले आयोजन का उल्लेख करते हुए पंडित शास्त्री ने श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया। कथा के दौरान उनके प्रवचनों में धार्मिक आस्था, जीवन सुधार, कर्म और आधुनिक समय में नकारात्मकता जैसे विषय प्रमुख रहे।

  • धीरेंद्र शास्त्री ने दमोह में हिंदुओं से एकजुट रहने की अपील की, बोले- मुसीबत में घर से नहीं निकले तो सबसे बड़े बुजदिल

    धीरेंद्र शास्त्री ने दमोह में हिंदुओं से एकजुट रहने की अपील की, बोले- मुसीबत में घर से नहीं निकले तो सबसे बड़े बुजदिल


    दमोह जिले:
    बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथयात्रा तीसरे दिन मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हटा से रवाना हुई। यात्रा आगे बढ़ने से पहले धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान गौरीशंकर के दर्शन किए। इसके बाद सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ और राष्ट्रगान हुआ। इस दौरान बच्चों को सनातन धर्म, हिंदू एकता और सामाजिक समरसता से जुड़े सात वचनों का पालन करने की शपथ दिलाई गई।

    यात्रा में अयोध्या की हनुमानगढ़ी के राजू दास महाराज, मलूकपीठ के गंगा दास महाराज, हरिद्वार के मोनी महाराज और चित्रकूट धाम के राधेश्याम महाराज भी धीरेंद्र शास्त्री के साथ मौजूद रहे। हटा से यात्रा रवाना होने के दौरान श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर स्वागत किया। ग्रामीणों ने फूलों से रंगोली बनाई और ढोल-नगाड़ों के साथ यात्रा का अभिनंदन किया। स्वागत के लिए स्कूली छात्राएं भी कलश लेकर खड़ी रहीं।

    इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से सवाल किया कि यदि भविष्य में किसी हिंदू पर मुसीबत आती है, तो क्या वे उसकी मदद के लिए घर से बाहर निकलेंगे। उन्होंने कहा कि यदि संकट के समय भी लोग घर से बाहर नहीं निकलते हैं, तो वे सबसे बड़े बुजदिल हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रथयात्रा का उद्देश्य राजनीति में प्रवेश करना या किसी को वोट दिलवाना नहीं है।

    यात्रा के पहले दिन भी धीरेंद्र शास्त्री ने धर्म के प्रति प्रतिबद्धता और हिंदुओं की एकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि चाहे कितने भी विरोधी सामने आएं, प्राण चले जाने की स्थिति में भी धर्म नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने सनातन धर्म को मानने वालों की एकजुटता को भारत की मजबूती से जोड़ा। यात्रा के दौरान श्रद्धालु जात-पात समाप्त करने और आपसी भाईचारे का संदेश देने वाले नारे लगाते रहे।

    यात्रा में शामिल कुछ युवकों ने भी उत्साह जताते हुए कहा कि कोई आकर यात्रा रोककर दिखाए। बिहार से आए संत ऋषि ने पन्ना में मिले सहयोग और उत्साह की सराहना की। उन्होंने लोगों से अच्छे कार्यों में सहयोग करने, गुरु के साथ जुड़े रहने और उनकी बातों का पालन करने की अपील की।

    सनातन हिंदू एकता रथयात्रा 3.0 रविवार सुबह करीब 11:30 बजे बागेश्वर धाम से शुरू हुई थी। पांच दिनों की इस यात्रा में लगभग 500 किलोमीटर की दूरी तय की जानी है। यात्रा पांच जिलों से होकर गुजरेगी। इसके घोषित उद्देश्यों में सनातन एकता, सामाजिक समरसता, नशामुक्ति और लव जिहाद से मुक्त बुंदेलखंड का संकल्प शामिल है। सोमवार को पन्ना में रात्रि विश्राम के बाद यात्रा सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, राष्ट्रगान और बच्चों को शपथ दिलाने के कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ी।

    यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव भी साझा किए। इंदौर की दीपिका ने कहा कि साधु-संतों और सुंदरकांड मंडल के प्रयासों से ऐसा हिंदू राष्ट्र बनना चाहिए, जो केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि लोगों के विचारों और आचरण में भी दिखाई दे। उन्होंने सभी को समान अधिकार और सम्मान मिलने की बात कही।

    कानपुर के मातृशक्ति सुंदरकांड मंडल की सदस्य संध्या सिंह अपने साथियों के साथ पैदल यात्रा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी इच्छा से गुरु सेवा और हिंदू राष्ट्र के संकल्प के लिए निकली हैं तथा इसे अपनी जिम्मेदारी भी मानती हैं। श्रद्धालु पूजा दुबे ने बताया कि महाराज के आशीर्वाद से उनके परिवार और बेटी को लाभ मिला है। वहीं, सीता व्यास ने कहा कि वह चार साल से धीरेंद्र शास्त्री से जुड़ी हैं और उन्हें देखकर भावुक हो जाती हैं।