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  • अमेरिका के ग्रीन कार्ड नियमों में बदलाव पर सस्पेंस खत्म: DHS का स्पष्ट संदेश, प्रवासियों को नहीं छोड़ना होगा देश

    अमेरिका के ग्रीन कार्ड नियमों में बदलाव पर सस्पेंस खत्म: DHS का स्पष्ट संदेश, प्रवासियों को नहीं छोड़ना होगा देश

    नई दिल्ली । अमेरिका में ग्रीन कार्ड नियमों को लेकर हाल ही में फैली असमंजस की स्थिति पर अब अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्टता देते हुए बड़ा बयान जारी किया है, जिससे वहां रह रहे लाखों प्रवासियों, विशेषकर भारतीय समुदाय को बड़ी राहत मिली है। पिछले कुछ दिनों में जारी एक प्रशासनिक घोषणा के बाद यह धारणा बन गई थी कि ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले अधिकांश लोगों को प्रक्रिया पूरी होने तक अमेरिका छोड़कर अपने देश लौटना पड़ सकता है, लेकिन अब अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कोई नया या व्यापक नीति परिवर्तन नहीं है, बल्कि मौजूदा प्रक्रियाओं की सामान्य व्याख्या है। इस स्पष्टीकरण के बाद स्थिति काफी हद तक साफ हो गई है और प्रवासियों के बीच बनी अनिश्चितता समाप्त होती दिख रही है।

    दरअसल विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं से जुड़ी एक हालिया जानकारी के बाद यह आशंका फैल गई कि ग्रीन कार्ड आवेदकों को अमेरिका में रहकर प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति नहीं मिलेगी और उन्हें अपने देश लौटकर इंतजार करना होगा। इस खबर ने प्रवासी समुदायों में चिंता बढ़ा दी थी, खासकर उन लोगों के बीच जो लंबे समय से अमेरिका में नौकरी और परिवार के साथ स्थायी निवास की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। कई आव्रजन विशेषज्ञों ने भी इस सूचना को लेकर सवाल उठाए और अधिक स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग की।

    अब अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने अपने बयान में कहा है कि अधिकारियों के पास पहले से ही यह अधिकार मौजूद है कि वे प्रत्येक मामले का अलग-अलग मूल्यांकन करें और परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लें। विभाग के अनुसार हालिया निर्देश केवल मौजूदा अधिकारों की याद दिलाने के लिए जारी किए गए थे, न कि किसी नए नियम को लागू करने के लिए। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकांश ग्रीन कार्ड आवेदकों को पहले की तरह ही अमेरिका में रहकर प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति मिलती रहेगी और इसमें कोई व्यापक बदलाव नहीं किया गया है।

    व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस पूरे मामले को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इसे किसी बड़े नीतिगत बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल पहले से मौजूद नियमों और प्रक्रियाओं की पुनः पुष्टि है, ताकि आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और अधिकारियों को अपने विवेकाधिकार के उपयोग में मदद मिल सके।

    हालांकि विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे वीजा शर्तों का उल्लंघन या आव्रजन नियमों का पालन न करना, अलग निर्णय लिया जा सकता है, लेकिन यह हर मामले पर लागू होने वाला कोई सार्वभौमिक नियम नहीं होगा। इसी वजह से विशेषज्ञ अब भी कुछ अतिरिक्त स्पष्टता की आवश्यकता बता रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव भारतीय प्रवासियों पर देखने को मिल रहा है, जो अमेरिका में बड़ी संख्या में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इस स्पष्टता के बाद उन्हें राहत मिली है कि उन्हें आवेदन के दौरान देश छोड़ने की आवश्यकता नहीं होगी और वे अपने काम, परिवार और जीवन को बिना बाधा जारी रख सकेंगे। लंबे समय से चली आ रही प्रतीक्षा अवधि को देखते हुए यह निर्णय उनके लिए स्थिरता और सुरक्षा का संकेत माना जा रहा है।

  • अमेरिका में 16 साल तक अवैध रूप से रहने पर गुजरात के कारोबारी पर बड़ा एक्शन, 15 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना

    अमेरिका में 16 साल तक अवैध रूप से रहने पर गुजरात के कारोबारी पर बड़ा एक्शन, 15 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना


    नई दिल्ली। अमेरिका में लंबे समय तक अवैध रूप से रहने के मामले में एक भारतीय मूल के गुजराती कारोबारी पर बड़ी कार्रवाई की गई है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने उस पर करीब 1.8 मिलियन डॉलर यानी लगभग 15 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला इमिग्रेशन नियमों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है।

    मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में हुई एंट्री

    जानकारी के मुताबिक, यह कारोबारी मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में दाखिल हुआ था और पिछले 16 वर्षों से वहां अवैध रूप से रह रहायह मामला इमिग्रेशन नियमों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है।

    मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में हुई एंट्री

    जानकारी के मुताबिक, यह कारोबारी मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में दाखिल हुआ था और पिछले 16 वर्षों से वहां अवैध रूप से रह  था। जांच में सामने आया कि उसे कई साल पहले ही देश छोड़ने का आदेश दिया गया था, लेकिन उसने इस आदेश का पालन नहीं किया और लगातार अमेरिका में ही बना रहा।

    रोजाना जुर्माना बढ़ता गया

    इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट के तहत जारी नोटिस में कहा गया है कि डिपोर्टेशन ऑर्डर का पालन न करने की स्थिति में उस पर रोजाना जुर्माना लगाया गया। यह जुर्माना 998 डॉलर प्रतिदिन के हिसाब से तय किया गया, जो समय के साथ बढ़ते-बढ़ते लगभग 1.8 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

    सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा कार्रवाई

    अमेरिकी प्रशासन अवैध प्रवासियों के खिलाफ हाल के वर्षों में सख्त रुख अपनाए हुए है। इस मामले को भी उसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें लंबे समय तक आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाता है।

    मामला चर्चा में क्यों है?

    यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जुर्माने की रकम बेहद बड़ी है और यह साफ संकेत देता है कि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम नियमों के उल्लंघन को लेकर बेहद सख्त कार्रवाई कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में संदेश दिया जाता है कि डिपोर्टेशन ऑर्डर की अनदेखी करना गंभीर आर्थिक परिणाम ला सकता है।