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  • प्रवासी भारतीयों को पीएम मोदी का भावनात्मक संदेश, 'जोड़ा साहिब' की 300 वर्ष पुरानी विरासत का किया उल्लेख, पटना साहिब दर्शन का दिया आग्रह

    प्रवासी भारतीयों को पीएम मोदी का भावनात्मक संदेश, 'जोड़ा साहिब' की 300 वर्ष पुरानी विरासत का किया उल्लेख, पटना साहिब दर्शन का दिया आग्रह


    नई दिल्ली ।
    न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, सिख परंपरा और आध्यात्मिक धरोहर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत केवल आर्थिक विकास की दिशा में ही आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण को भी समान महत्व दे रहा है। इसी क्रम में उन्होंने पवित्र ‘जोड़ा साहिब’ के इतिहास का उल्लेख करते हुए प्रवासी भारतीयों से आग्रह किया कि जब भी वे भारत आएं, श्री पटना साहिब जाकर उसके दर्शन अवश्य करें।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में श्री गुरु ग्रंथ साहिब, चारों साहिबजादों और माता गुजरी के साहस, त्याग और बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, समानता, करुणा और साहस का संदेश दिया है। यही कारण है कि दुनिया के विभिन्न देशों में स्थित गुरुद्वारे आज भी मानव सेवा के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं, जहां जरूरतमंदों को बिना किसी भेदभाव के भोजन, सहायता और सम्मान मिलता है।

    उन्होंने कहा कि संकट के समय भारत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे सम्मान के साथ सुरक्षित भारत लाने का कार्य किया। इसके अलावा जब श्री हरमंदिर साहिब में सेवा से जुड़े कुछ प्रशासनिक विषय सामने आए, तब सरकार ने उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने का प्रयास किया। उन्होंने इसे सरकार की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।

    प्रधानमंत्री ने श्री हेमकुंड साहिब का भी उल्लेख करते हुए कहा कि हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित इस पवित्र तीर्थ तक पहुंचना लंबे समय से श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए वहां तक रोपवे परियोजना विकसित की जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्थलों तक बेहतर संपर्क और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘वीर बाल दिवस’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चारों साहिबजादों और माता गुजरी के अद्वितीय बलिदान की स्मृति को सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाया जाता है। आज यह दिवस देशभर में नई पीढ़ी को साहस, राष्ट्रसेवा और मूल्यों के प्रति समर्पण की प्रेरणा दे रहा है। उन्होंने कहा कि अब देश के विभिन्न हिस्सों के बच्चे भी इस गौरवशाली इतिहास से परिचित हो रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने ‘जोड़ा साहिब’ से जुड़ा एक ऐतिहासिक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोविंद सिंह जी के सेवादार थे और उनके परिवार ने लगभग 300 वर्षों तक गुरु गोविंद सिंह तथा माता साहिब कौर जी के पवित्र ‘जोड़ा साहिब’ को सुरक्षित रखा। विभाजन के समय भी इस धरोहर को सुरक्षित दिल्ली लाया गया। बाद में इसे अधिक से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए श्री गुरु गोविंद सिंह जी के जन्मस्थान श्री पटना साहिब में स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनना उनके लिए सौभाग्य की बात रही। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से अपील की कि भारत यात्रा के दौरान वे श्री पटना साहिब अवश्य जाएं और इस पवित्र धरोहर के दर्शन कर भारतीय सांस्कृतिक विरासत से अपना जुड़ाव और मजबूत करें।

  • ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए बोले पीएम मोदी, न्यूजीलैंड की उपलब्धियों की खुलकर सराहना, कहा- ‘हमने आपसे बहुत कुछ सीखा’

    ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए बोले पीएम मोदी, न्यूजीलैंड की उपलब्धियों की खुलकर सराहना, कहा- ‘हमने आपसे बहुत कुछ सीखा’


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आयोजित भारतीय समुदाय के विशेष कार्यक्रम में दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य की साझेदारी पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड का रिश्ता केवल कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास, मित्रता और साझा मूल्यों की मजबूत नींव पर आधारित है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की कई उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने इस देश से बहुत कुछ सीखा है और आज भी सीखने की यह प्रक्रिया लगातार जारी है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता होने के बावजूद समय के साथ स्वयं को निरंतर बदलता और आधुनिक बनाता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सीखने की क्षमता है। यही कारण है कि देश दुनिया के विभिन्न अनुभवों को अपनाते हुए अपनी विकास यात्रा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसके आकार से नहीं, बल्कि जनकल्याण की भावना और समाज के विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से तय होती है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की लोकतांत्रिक परंपराओं और सामाजिक विकास की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह वही देश है जिसने दुनिया में सबसे पहले महिलाओं को मतदान का अधिकार देकर समानता और लोकतांत्रिक अधिकारों की नई मिसाल पेश की। आज न्यूजीलैंड के विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी उसकी सबसे बड़ी ताकतों में शामिल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भी महिला सशक्तिकरण को विकास का प्रमुख आधार मानते हुए शिक्षा, उद्यमिता, नेतृत्व और आर्थिक भागीदारी के नए अवसर लगातार बढ़ा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में न्यूजीलैंड की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस देश ने कृषि और उससे जुड़े मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से यह साबित किया है कि ग्रामीण क्षेत्र किसी भी राष्ट्र की आर्थिक ताकत बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों पर आधारित कृषि व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और वैश्विक बाजार से जोड़कर न्यूजीलैंड ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। भारत जैसे विशाल कृषि प्रधान देश के लिए यह अनुभव प्रेरणादायक है और इससे कई उपयोगी सीख प्राप्त की जा सकती है।

    उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड ने यह भी सिद्ध किया है कि सीमित घरेलू बाजार होने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और नवाचार के बल पर वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बनाई जा सकती है। भारत भी स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और कृषि आधारित उद्योगों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इस दिशा में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

    प्रधानमंत्री ने भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को भविष्य की साझा यात्रा बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और पारस्परिक सम्मान की भावना लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने भारतीय समुदाय की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत और न्यूजीलैंड शिक्षा, कृषि, व्यापार, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे, जिससे दोनों देशों की साझेदारी और अधिक व्यापक तथा मजबूत बनेगी।

  • मोदी दौरे ने फिर दिखाई भारतीय समुदाय की ताकत, ऑस्ट्रेलिया में व्यापार, निवेश और राजनीतिक प्रभाव को मिली नई पहचान

    मोदी दौरे ने फिर दिखाई भारतीय समुदाय की ताकत, ऑस्ट्रेलिया में व्यापार, निवेश और राजनीतिक प्रभाव को मिली नई पहचान


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई गति देने के साथ-साथ वहां रह रहे भारतीय समुदाय की बढ़ती भूमिका को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। पिछले कुछ वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती आबादी, उनकी आर्थिक भागीदारी और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय उपस्थिति ने दोनों देशों के संबंधों को मजबूत आधार प्रदान किया है। यही कारण है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली रणनीतिक वार्ताओं में भारतीय समुदाय को केवल प्रवासी समूह नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाओं, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाओं, उद्यमिता और शोध जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र वहां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि हजारों पेशेवर विभिन्न उद्योगों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय उद्यमियों ने छोटे और मध्यम उद्योगों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था में निवेश और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    राजनीतिक दृष्टि से भी भारतीय समुदाय का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न राज्यों और स्थानीय निकायों में भारतीय मूल के प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ी है। चुनावों के दौरान प्रमुख राजनीतिक दल भारतीय समुदाय से संवाद को प्राथमिकता दे रहे हैं और उनकी सामाजिक तथा आर्थिक प्राथमिकताओं को अपने एजेंडे में स्थान दे रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय मूल के मतदाता अब वहां की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण समूह के रूप में उभर चुके हैं।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट भी दोनों देशों को जोड़ने वाला सबसे मजबूत सांस्कृतिक माध्यम बना हुआ है। खेल के जरिए दोनों देशों के लोगों के बीच वर्षों से गहरा जुड़ाव बना है। क्रिकेट ने केवल खेल संबंधों को ही मजबूत नहीं किया, बल्कि पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और व्यावसायिक अवसरों को भी नई दिशा दी है। दोनों देशों के बीच खेल सहयोग लगातार बढ़ रहा है और इससे सामाजिक स्तर पर भी निकटता मजबूत हुई है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इससे यह संकेत मिला कि भारत और ऑस्ट्रेलिया केवल व्यापारिक साझेदार ही नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी के रूप में भी अपने संबंधों को नई ऊंचाई देना चाहते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की सफलता केवल आर्थिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यह समुदाय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विश्वास, सामाजिक सहयोग और दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश, शिक्षा, नवाचार और रक्षा सहयोग के विस्तार के साथ भारतीय समुदाय की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने की संभावना है। इसी कारण भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में भारतीय प्रवासी समुदाय को भविष्य की साझेदारी का एक मजबूत और भरोसेमंद स्तंभ माना जा रहा है।

  • आरएसएस के शताब्दी वर्ष में वैश्विक पहुंच बढ़ाने की तैयारी, मोहन भागवत का अमेरिका और ब्रिटेन दौरा जल्द संभव

    आरएसएस के शताब्दी वर्ष में वैश्विक पहुंच बढ़ाने की तैयारी, मोहन भागवत का अमेरिका और ब्रिटेन दौरा जल्द संभव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन अपने सामाजिक और वैचारिक संपर्क को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका और ब्रिटेन के प्रस्तावित दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अगले दो महीनों के भीतर होने वाली इस यात्रा के दौरान वे विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और भारतीय मूल के लोगों से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।

    संघ इस समय अपने 100वें वर्ष के कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। संगठन देशभर के साथ-साथ विदेशों में भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने कार्य, विचार और सामाजिक अभियानों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में संघ प्रमुख की संभावित विदेश यात्रा को संगठन की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार अमेरिका और ब्रिटेन में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल सकती है। इन आयोजनों में भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों, सामुदायिक सहयोग और प्रवासी भारतीयों की भूमिका जैसे विषय प्रमुख रह सकते हैं। यात्रा का उद्देश्य विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना बताया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार अमेरिका के प्रमुख शहरों में कई कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। विशेष रूप से न्यूयॉर्क में एक बड़े सामुदायिक कार्यक्रम की संभावना व्यक्त की जा रही है, जहां भारतीय समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति हो सकती है। हालांकि कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा और आधिकारिक कार्यक्रम सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    इस प्रस्तावित यात्रा में हिंदू स्वयंसेवक संघ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है। यह संगठन विभिन्न देशों में भारतीय संस्कृति, योग, सेवा कार्यों और पारिवारिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार से जुड़ी गतिविधियां संचालित करता है। विदेशों में भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने के लिए यह संगठन लंबे समय से सक्रिय है।

    मोहन भागवत इससे पहले भी विदेश यात्राएं कर चुके हैं। पूर्व में ब्रिटेन में आयोजित कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी रही है, जहां उन्होंने भारतीय मूल के लोगों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया था। ऐसे अनुभवों के आधार पर इस बार के प्रस्तावित दौरे को भी व्यापक जनसंपर्क और सांस्कृतिक संवाद के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में प्रवासी भारतीय समुदाय की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विभिन्न देशों में बसे भारतीय मूल के लोग आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में प्रभावशाली योगदान दे रहे हैं। ऐसे में भारत से जुड़े संगठनों द्वारा उनके साथ नियमित संवाद स्थापित करना रणनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है।

    संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित हो रहे कार्यक्रमों का उद्देश्य संगठन के कार्यों, सेवा गतिविधियों और सामाजिक योगदान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना भी है। इसी कारण विदेशों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय समुदाय के साथ संबंधों को मजबूत करने के एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

    यदि यह यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होती है तो इससे प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद को नई गति मिल सकती है। साथ ही भारत और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव तथा सामाजिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।

  • स्लोवाकिया में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत, भारतीय समुदाय और स्थानीय कलाकारों ने बताया मुलाकात को गर्व और सम्मान का क्षण

    स्लोवाकिया में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत, भारतीय समुदाय और स्थानीय कलाकारों ने बताया मुलाकात को गर्व और सम्मान का क्षण

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया यात्रा ने भारत और मध्य यूरोप के इस महत्वपूर्ण देश के बीच संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है। राजधानी ब्रातिस्लावा पहुंचने पर प्रधानमंत्री का भारतीय समुदाय और स्थानीय नागरिकों द्वारा उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया। इस अवसर पर प्रवासी भारतीयों और स्लोवाक कलाकारों ने उनसे मुलाकात को विशेष सम्मान और गर्व का क्षण बताते हुए अपनी खुशी व्यक्त की।

    ब्रातिस्लावा के प्रमुख आयोजन स्थल पर प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिली। भारतीय समुदाय के सदस्यों ने पूरे उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक अभिनंदन ने आयोजन को विशेष बना दिया। स्थानीय परंपराओं के अनुरूप किए गए स्वागत ने दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को भी प्रदर्शित किया।

    प्रधानमंत्री के स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय उपस्थित रहे। समुदाय के सदस्यों ने कहा कि विदेश में रहते हुए भारत के प्रधानमंत्री से सीधे मिलना उनके लिए भावनात्मक और गर्व का विषय है। कई लोगों ने इसे जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक बताया। उनके अनुसार प्रधानमंत्री की उपस्थिति ने उन्हें अपने देश से और अधिक जुड़ाव का अनुभव कराया।

    प्रवासी भारतीयों ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में भारत की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है और इसका सकारात्मक प्रभाव विदेशों में बसे भारतीयों पर भी दिखाई देता है। समुदाय के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि इस यात्रा से भारत और स्लोवाकिया के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिलने की संभावना भी व्यक्त की।

    कार्यक्रम में स्थानीय स्लोवाक कलाकारों की भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कई कलाकारों ने भारतीय संस्कृति के प्रति अपने सम्मान और रुचि को प्रस्तुतियों के माध्यम से व्यक्त किया। सांस्कृतिक समूहों ने भारतीय संगीत और परंपराओं से प्रेरित कार्यक्रम पेश किए, जिन्हें उपस्थित लोगों ने सराहा। कलाकारों ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री के स्वागत समारोह में शामिल होना उनके लिए एक अनूठा अवसर था।

    विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रीय भावना से जुड़े सांस्कृतिक प्रस्तुतीकरण ने कार्यक्रम को अलग पहचान दी। कलाकारों ने भारतीय संगीत और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को प्रस्तुत करते हुए दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करने का प्रयास किया। प्रस्तुति के बाद कलाकारों ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनके प्रयासों को सराहा गया और उन्हें इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनने का अवसर मिला।

    विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल राजनयिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ संवाद और स्थानीय सांस्कृतिक समूहों की भागीदारी ने इस यात्रा को विशेष आयाम प्रदान किया है। इससे दोनों देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    ब्रातिस्लावा में हुए इस स्वागत समारोह ने यह भी दिखाया कि विदेशों में बसे भारतीय समुदाय का अपने देश के साथ भावनात्मक संबंध कितना गहरा है। वहीं स्थानीय समाज की भागीदारी ने भारत के प्रति बढ़ती रुचि और सम्मान को भी रेखांकित किया। इस यात्रा को भारत-स्लोवाकिया संबंधों के लिए सकारात्मक और यादगार पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

  • मलेशिया में पीएम मोदी का संबोधन: भारत मलेशिया संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाना हमारी प्राथमिकता

    मलेशिया में पीएम मोदी का संबोधन: भारत मलेशिया संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाना हमारी प्राथमिकता


    नई दिल्ली । मलेशिया की राजधानी में प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के बीच गहरे और गतिशील संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने अनवर इब्राहिम के स्वागत के लिए हृदय से आभार जताया और कहा कि मलेशिया ने अपनी परंपराओं और जीवन शैली को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया जो उन्हें हमेशा याद रहेगा। उन्होंने मित्रता की ऊँचाई और गहराई का अनुभव करने की बात कही और इस विशेष स्वागत के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

    पीएम मोदी ने कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें तीसरी बार मलेशिया आने का अवसर मिला है और अनवर इब्राहिम के कार्यकाल में उन्हें चौथी बार मिलने का मौका मिल रहा है। यह दोनों देशों के बीच बढ़ती सक्रियता और सहयोग की गति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों ने जो गति और गहराई हासिल की है वह प्रेरणादायक है और इसके लिए उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री के योगदान को सराहा।

    संबोधन में उन्होंने कहा कि आज भारत और मलेशिया का सहयोग कृषि विनिर्माण क्लीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गहरा हुआ है। इसके साथ ही स्किल डेवलपमेंट और क्षमता निर्माण कैपेसिटी बिल्डिंग में भी दोनों देश अहम साझेदार बन चुके हैं। रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है जो क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

    पीएम मोदी ने मलेशिया को आसियान की सफल अध्यक्षता के लिए बधाई दी और कहा कि मलेशिया के सहयोग से भारत आसियान संबंध और अधिक गहरे होंगे और विस्तार पाएंगे। उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों की असली ताकत पीपल टू पीपल टाई को बताया। भारतीय मूल के लगभग 30 लाख मलेशियाई नागरिक दोनों देशों के बीच एक जीवंत पुल लिविंग ब्रिज हैं। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें मलेशिया में डाइस्पोरा से मिलने का अवसर मिला जहां उन्होंने देखा कि लोगों का प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और प्रेम कितना गहरा है जो उनके लिए गर्व का विषय था।

    सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मित्र देशों का साथ महत्वपूर्ण है यह भी उन्होंने कहा। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत और मलेशिया दोनों मेरिटाइम नेबर्स हैं और उन्हें अपने संबंधों की पूरी क्षमता का उपयोग करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा का मूल संदेश यही है कि भारत मलेशिया के साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाना चाहता है और हर क्षेत्र में सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाना चाहता है। अंत में उन्होंने एक बार फिर स्वागत के लिए मलेशियाई प्रधानमंत्री और उनकी टीम का आभार व्यक्त किया।