Tag: diesel price india

  • भोपाल में पेट्रोल ₹114.65, उज्जैन में डीजल ₹100 के पार-आम जनता पर महंगाई का दबाव बढ़ा

    भोपाल में पेट्रोल ₹114.65, उज्जैन में डीजल ₹100 के पार-आम जनता पर महंगाई का दबाव बढ़ा


    Madhya Pradesh। मध्य प्रदेश में ईंधन की कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल दरों ने न सिर्फ परिवहन व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि महंगाई के नए संकेत भी दे दिए हैं। ताजा बढ़ोतरी के बाद राज्य में पेट्रोल ₹116 प्रति लीटर से ऊपर पहुंच चुका है, जबकि डीजल कई शहरों में ₹100 के आंकड़े को पार कर चुका है।

    राजधानी Bhopal में नए रेट के मुताबिक पेट्रोल ₹114.65 प्रति लीटर और डीजल ₹99.74 प्रति लीटर दर्ज किया गया है। वहीं राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है। Ujjain में डीजल ₹100.11 प्रति लीटर पहुंच गया है, जो इसे प्रदेश का सबसे महंगा शहर बनाता है। यहां पेट्रोल ₹115.03 प्रति लीटर बिक रहा है।

    इसी तरह Indore में पेट्रोल ₹114.54 और डीजल ₹99.57 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। Jabalpur और Gwalior में भी कीमतों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

    तेल कंपनियों ने सिर्फ 11 दिनों के भीतर चार बार कीमतें बढ़ाई हैं। 25 मई को ही पेट्रोल में ₹2.61 और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। इस महीने की पहली बढ़ोतरी 15 मई को हुई थी, उसके बाद 19 मई और 23 मई को भी लगातार रेट बढ़ाए गए। कुल मिलाकर इस छोटे से अंतराल में पेट्रोल-डीजल करीब ₹8 प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।

    इस तेज बढ़ोतरी का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियां, फल और रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी होने की आशंका जताई जा रही है। ट्रक और टेम्पो किराए में बढ़ोतरी से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा, जिसका असर जल्द ही बाजारों में दिखाई दे सकता है।

    किसानों के लिए भी यह बढ़ोतरी चिंता का विषय है क्योंकि ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और अन्य कृषि उपकरणों में डीजल की खपत अधिक होती है। इससे खेती की लागत बढ़ने और अनाज महंगा होने की संभावना है। वहीं बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

    तेल कीमतों में इस उछाल की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान-अमेरिका तनाव के बाद क्रूड ऑयल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। इसी दबाव का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है।

    तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट जारी करती हैं। कीमतों में कच्चे तेल की लागत, रिफाइनिंग खर्च, टैक्स, डीलर कमीशन और राज्य सरकार के वैट का बड़ा योगदान होता है। Madhya Pradesh में वैट अधिक होने के कारण यहां ईंधन की कीमतें कई अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा हैं।

    अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • पेट्रोल महंगा, डीजल-एटीएफ सस्ता? टैक्स स्ट्रक्चर में हुआ बदलाव

    पेट्रोल महंगा, डीजल-एटीएफ सस्ता? टैक्स स्ट्रक्चर में हुआ बदलाव


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े टैक्स ढांचे में अहम बदलाव करते हुए पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) बढ़ा दिया है, जबकि डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर राहत दी गई है। सरकार के इस फैसले को वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

    वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर अब 3 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। वहीं डीजल पर निर्यात शुल्क घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल दोनों पर लागू सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को शून्य कर दिया गया है।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन से घरेलू ईंधन की कीमतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और यह बदलाव केवल निर्यात से जुड़े ढांचे पर लागू होगा। नए आदेश को शनिवार से प्रभावी कर दिया गया है।

    गौरतलब है कि पश्चिम एशिया संकट के बाद पहली बार पेट्रोल निर्यात पर शुल्क लगाया गया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर लगातार बदलावों के बाद अब दरों में कटौती की गई है। डीजल पर पहले 21.5 रुपये प्रति लीटर, फिर 55.5 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि और बाद में 23 रुपये प्रति लीटर तक कमी की गई थी, जिसे अब घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

    इसी तरह एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी कई बार संशोधन किया गया। पहले यह शुल्क 29.5 रुपये प्रति लीटर था, जिसे बढ़ाकर 42 रुपये और फिर 33 रुपये किया गया था। अब इसे घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, विंडफॉल टैक्स ढांचे के तहत यह बदलाव वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने और निर्यात प्रवाह को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया गया है। सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

    पश्चिम एशिया तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक गतिरोध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में भारत का यह टैक्स संशोधन नीति संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • MP में महंगा पेट्रोल-डीजल: यूपी से ₹14 तक ज्यादा रेट, एक्सपर्ट ने बताए कारण

    MP में महंगा पेट्रोल-डीजल: यूपी से ₹14 तक ज्यादा रेट, एक्सपर्ट ने बताए कारण

    भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों ने आम जनता की जेब पर सीधा असर डाला है। ऑयल कंपनियों द्वारा हाल ही में किए गए रेट संशोधन के बाद राज्य में ईंधन की कीमतों में 3 से 3.50 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 15 मई से लागू नई दरों के बाद कई शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम ऐतिहासिक स्तर के करीब पहुंच गए हैं।

    राज्य के पांढुर्णा और मंडला जैसे जिलों में पेट्रोल की कीमत 111.29 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि मैहर, अलीराजपुर और अनूपपुर जैसे इलाकों में डीजल 96.50 रुपए प्रति लीटर तक बिक रहा है। इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में भी पेट्रोल की कीमतें 109 रुपए प्रति लीटर के आसपास पहुंच चुकी हैं।

    पड़ोसी राज्यों से बड़ा अंतर, एमपी सबसे महंगा
    तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में ईंधन की कीमतें पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी अधिक हैं। उत्तर प्रदेश में पेट्रोल करीब ₹14 और डीजल ₹5 प्रति लीटर तक सस्ता मिल रहा है। गुजरात में पेट्रोल लगभग ₹13 और डीजल ₹3 तक कम है। राजस्थान में दोनों ईंधन करीब ₹2 तक सस्ते हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में पेट्रोल की कीमतें लगभग ₹8 तक कम दर्ज की गई हैं। महाराष्ट्र में भी पेट्रोल ₹4 से ₹5 प्रति लीटर तक सस्ता मिल रहा है। इस बड़े अंतर ने राज्य में टैक्स संरचना को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है।

    टैक्स स्ट्रक्चर पर उठे सवाल, एक्सपर्ट्स ने बताया वजह
    विशेषज्ञों के अनुसार मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों की एक बड़ी वजह वैट (VAT) और राज्य करों का अधिक होना है। इसी वजह से ऑयल कंपनियों द्वारा समान बेस प्राइस होने के बावजूद यहां अंतिम कीमत अन्य राज्यों से अधिक हो जाती है।

    विश्लेषकों का मानना है कि अगर टैक्स ढांचे में राहत दी जाए, तो उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से परिवहन, कृषि और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की लागत भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
    पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जनता पर “महंगाई का बोझ” लगातार बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ CNG और गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़े हैं, जिससे आम लोगों का बजट बिगड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार को एक्साइज ड्यूटी और वैट में कमी कर जनता को राहत देनी चाहिए।

    आम जनता पर असर
    पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर ट्रांसपोर्ट, खेती, छोटे व्यापार और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की कतारें और बढ़ी हुई लागत लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं।

    मध्य प्रदेश में ईंधन की कीमतें अब पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी अधिक हो गई हैं, जिससे न सिर्फ आम उपभोक्ता बल्कि पूरा आर्थिक ढांचा प्रभावित हो रहा है। टैक्स नीति और कीमतों के अंतर को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक बहस और तेज होने की संभावना है।