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  • पेट्रोल-डीजल पर ड्यूटी कटौती से सरकार पर बढ़ा आर्थिक दबाव: जनता को राहत देने की कीमत ₹1 लाख करोड़, वित्त मंत्री ने रखी बड़ी तस्वीर

    पेट्रोल-डीजल पर ड्यूटी कटौती से सरकार पर बढ़ा आर्थिक दबाव: जनता को राहत देने की कीमत ₹1 लाख करोड़, वित्त मंत्री ने रखी बड़ी तस्वीर


    नई दिल्ली। देश में बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से उठाए गए कदम का अब आर्थिक असर भी सामने आने लगा है। पेट्रोल और डीजल पर करों में कटौती के बाद जहां उपभोक्ताओं को कुछ राहत महसूस हुई है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी खजाने पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही है। आर्थिक मोर्चे पर यह फैसला एक संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें जनता को तत्काल राहत और राजस्व पर पड़ने वाले असर के बीच सरकार को संतुलन साधना पड़ रहा है।

    हाल के समय में वैश्विक हालातों ने ऊर्जा बाजारों पर गहरा असर डाला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए ऐसी परिस्थितियां अतिरिक्त चुनौती पैदा करती हैं। ऐसे समय में ईंधन की बढ़ती कीमतें सीधे आम आदमी और व्यापारिक गतिविधियों दोनों को प्रभावित करती हैं। इसी कारण सरकार ने कीमतों के दबाव को कम करने के लिए ईंधन पर लगने वाले करों में राहत देने का रास्ता चुना।

    सरकार के इस फैसले से देशभर में ईंधन की कीमतों पर कुछ हद तक नियंत्रण दिखाई दिया, जिससे परिवहन लागत और दैनिक खर्चों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने की कोशिश की गई। हालांकि आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस प्रकार की राहत का सीधा असर सरकारी आय पर भी पड़ता है। राजस्व में कमी का प्रभाव भविष्य की आर्थिक योजनाओं और विकास परियोजनाओं पर भी दिखाई दे सकता है। इसलिए ऐसे फैसले केवल उपभोक्ताओं को राहत देने तक सीमित नहीं होते बल्कि उनके दीर्घकालिक आर्थिक परिणाम भी होते हैं।

    वित्तीय मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मौजूदा आर्थिक चुनौतियां केवल घरेलू कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक परिस्थितियों से भी प्रभावित हैं। विदेशी बाजारों में लगातार हो रहे बदलाव, कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक मुद्रा बाजार की अस्थिरता जैसे कारक भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहे हैं। ऐसे माहौल में नीति निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे आम लोगों को राहत देने के साथ आर्थिक स्थिरता भी बनाए रखें।

    इसके अलावा उद्योग और व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में भी समय पर भुगतान और वित्तीय अनुशासन पर जोर दिया जा रहा है। छोटे और मध्यम उद्योगों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, ताकि आर्थिक गतिविधियों की गति प्रभावित न हो। विशेषज्ञ मानते हैं कि अर्थव्यवस्था की मजबूती केवल बड़े फैसलों से नहीं बल्कि छोटे स्तर पर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने से भी तय होती है।

    इस बीच ईंधन कीमतों में लगातार हो रहे बदलाव ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियां किस दिशा में जाती हैं, इसका सीधा असर भारत के ऊर्जा बाजार और आर्थिक स्थिति पर देखने को मिल सकता है। फिलहाल सरकार राहत और आर्थिक संतुलन के बीच रास्ता निकालने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।

  • दुनिया में ईंधन महंगा, लेकिन भारत ने संभाली रफ्तार, पेट्रोल-डीजल कीमतों में राहत भरी तस्वीर

    दुनिया में ईंधन महंगा, लेकिन भारत ने संभाली रफ्तार, पेट्रोल-डीजल कीमतों में राहत भरी तस्वीर

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति पर बढ़ते दबाव का असर अब दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि अन्य तेल आयातक देशों की तुलना में काफी कम रही है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब कई देश ईंधन संकट और महंगाई की दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं।

    मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल आपूर्ति मार्गों पर असर पड़ा है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित होने से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इसका सीधा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ा और देश में तेल कंपनियों ने मई महीने के दौरान कई बार कीमतों में बदलाव किया। इन संशोधनों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग साढ़े सात प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि यह वृद्धि अन्य देशों की तुलना में काफी सीमित मानी जा रही है।

    राजधानी में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईंधन कीमतों में बदलाव के कारण आम उपभोक्ताओं पर असर महसूस किया जा रहा है, लेकिन वैश्विक तुलना में भारत की स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है। दुनिया के कई देशों में पेट्रोल की कीमतें पहले ही बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं और कई अर्थव्यवस्थाओं में उपभोक्ताओं को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।

    विकसित देशों और यूरोप के कई हिस्सों में ईंधन की कीमतें काफी ऊंची बनी हुई हैं। कई देशों में पेट्रोल और डीजल के दाम भारतीय बाजार की तुलना में काफी अधिक हैं। वहीं भारत के पड़ोसी देशों में भी ईंधन कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कम आय वाले कई देशों में पेट्रोल की कीमतें तेजी से ऊपर पहुंची हैं, जिससे वहां महंगाई का दबाव और बढ़ गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने ईंधन कीमतों को लेकर अपेक्षाकृत संतुलित रणनीति अपनाई है। अन्य बड़े आयातक देशों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी लागत का सीधा बोझ उपभोक्ताओं पर डाल दिया, जबकि भारत में वृद्धि नियंत्रित स्तर पर देखने को मिली। इसी कारण देश में कीमतों में वृद्धि की रफ्तार सीमित रही है।

    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा संकट के इस दौर में ईंधन की कीमतें आने वाले समय में भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रह सकती हैं। फिलहाल भारत में हालात अन्य देशों की तुलना में कुछ हद तक नियंत्रित दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति में बदलाव भविष्य में नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकता है। ऐसे में देश की नजरें अब वैश्विक तेल बाजार की अगली दिशा पर टिकी हुई हैं।

  • पेट्रोल-डीजल पर समान कर और आर्थिक राहत के लिए सांसद पात्रा ने जीएसटी परिषद में चरणबद्ध योजना की मांग की

    पेट्रोल-डीजल पर समान कर और आर्थिक राहत के लिए सांसद पात्रा ने जीएसटी परिषद में चरणबद्ध योजना की मांग की

    नई दिल्ली।पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर तेज हो रही है। राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात कर विस्तृत प्रस्ताव सौंपा और इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर संरचित और व्यापक चर्चा शुरू करने की अपील की। उनके अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल करना केवल कर सुधार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आम जनता, उद्योग और परिवहन क्षेत्र में आर्थिक संतुलन स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

    डॉ. पात्रा ने अपने प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 279ए(5) का हवाला देते हुए कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों को भविष्य में जीएसटी के दायरे में लाने का प्रावधान पहले से मौजूद है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि पहले भी इस विषय पर जीएसटी परिषद में चर्चा हुई थी, लेकिन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई की चुनौतियों को देखते हुए अब इस पर नए सिरे से व्यावहारिक और संतुलित विचार करना आवश्यक है।

    सांसद ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा असर महंगाई, परिवहन लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च, कृषि उत्पादन लागत, एमएसएमई सेक्टर के संचालन और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। वर्तमान में अलग-अलग राज्यों में वैट की अलग-अलग दरें होने के कारण जीएसटी का उद्देश्य—एक समान कर और एकीकृत बाजार—पूरी तरह पूरा नहीं हो पा रहा है। उनके अनुसार, यदि पेट्रोल-डीजल को चरणबद्ध तरीके से जीएसटी में शामिल किया जाता है तो माल ढुलाई और सप्लाई चेन की लागत में कमी आएगी, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और आम लोगों, किसानों तथा ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को राहत मिलेगी।

    ओडिशा को उदाहरण के रूप में लेते हुए सांसद पात्रा ने बताया कि यह राज्य खनन, उद्योग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। यदि यहां के उद्योग और व्यवसाय जीएसटी के तहत समान कर व्यवस्था का लाभ उठाएं, तो न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता और पारदर्शिता मिलेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राज्यों को मिलने वाले राजस्व पर ध्यान रखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों को तुरंत जीएसटी में शामिल करने की बजाय चरणबद्ध और संतुलित मॉडल अपनाया जाए।

    डॉ. पात्रा ने जीएसटी परिषद को सुझाव दिया कि इसके लिए अलग जीएसटी स्लैब, राज्यों के लिए ट्रांजिशनल मुआवजा, सीमित अवधि का उपकर (सेस) और वित्तीय स्थिरता के लिए तय फॉर्मूला तैयार करने पर विचार किया जाए। उन्होंने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर सभी राज्यों के साथ व्यापक चर्चा कराई जाए और एक तकनीकी व वित्तीय विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाए, जो चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल करने का मॉडल तैयार कर सके और राष्ट्रीय सहमति बनाने में मदद करे।

    डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाना केवल कर सुधार नहीं होगा, बल्कि यह देश में आर्थिक संतुलन, उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और आम लोगों को महंगाई से राहत देने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। उनका मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, आपूर्ति श्रृंखला की लागत कम होगी और भारत का एकीकृत बाजार अधिक प्रभावी तरीके से काम करेगा।

  • भारत में पड़ोसी देशों से सस्ता पेट्रोल, पाकिस्तान-श्रीलंका-नेपाल में कीमतें काफी ज्यादा

    भारत में पड़ोसी देशों से सस्ता पेट्रोल, पाकिस्तान-श्रीलंका-नेपाल में कीमतें काफी ज्यादा



    नई दिल्ली(New Delhi)। 
    भारत में हाल के दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद पड़ोसी देशों की तुलना में भारत में ईंधन अभी भी अपेक्षाकृत सस्ता बताया जा रहा है। मौजूदा रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में पेट्रोल की औसत कीमत लगभग 101 रुपये प्रति लीटर है।

    वहीं पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत करीब 142 रुपये प्रति लीटर है, जो भारत से लगभग 41 रुपये अधिक है। इसी तरह Sri Lanka में पेट्रोल लगभग 140 रुपये प्रति लीटर और Nepal में करीब 136 रुपये प्रति लीटर बताया जा रहा है, जो भारत की तुलना में क्रमशः 39 और 35 रुपये ज्यादा है।

    अन्य पड़ोसी और वैश्विक देशों की बात करें तो बांग्लादेश, म्यांमार और चीन में भी पेट्रोल भारत से महंगा बताया जा रहा है। वहीं अमेरिका और यूरोपीय देशों में ईंधन की कीमतें और अधिक हैं, जबकि हांगकांग को दुनिया में सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाला देश माना जाता है, जहां कीमतें 400 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव के कारण ईंधन दरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड के दाम बढ़ने से कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रभावित हो रही हैं, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।

  • वैश्विक संकट के बीच भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर कई देशों में 85 प्रतिशत तक उछाल के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत

    वैश्विक संकट के बीच भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर कई देशों में 85 प्रतिशत तक उछाल के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत

    नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जहां कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है वहीं भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में वृद्धि दर्ज की जा रही है इसके बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिलती नजर आ रही है

    दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है आंकड़ों के अनुसार यूएई में डीजल की कीमतों में लगभग 85 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी डीजल की कीमतें 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ी हैं वहीं कनाडा पाकिस्तान फ्रांस श्रीलंका और ब्रिटेन जैसे देशों में यह वृद्धि 35 से 50 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से भू राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण मानी जा रही है

    पेट्रोल की कीमतों का रुझान भी इसी प्रकार का रहा है पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में सबसे अधिक लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है जबकि अमेरिका और यूएई में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है अन्य देशों जैसे कनाडा श्रीलंका और चीन में भी पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है हालांकि ब्राजील और रूस जैसे देशों में यह वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही है

    इसके विपरीत भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें वर्ष की शुरुआत के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं डीजल की कीमत लगभग 87 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत करीब 94 रुपए प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है यह स्थिरता ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब वैश्विक बाजार में अस्थिरता अपने चरम पर है और कई देश महंगाई के दबाव से जूझ रहे हैं

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कीमतों को नियंत्रित रखने में सरकारी नीतियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की रणनीति का महत्वपूर्ण योगदान है तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से ईंधन की खरीद इस तरह कर रही हैं जिससे खुदरा कीमतों को स्थिर रखा जा सके हालांकि इसके चलते कंपनियों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ सकता है

    आर्थिक विश्लेषण यह भी संकेत देता है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ती हैं तो भारतीय तेल कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है अनुमान के अनुसार यदि कीमतें 135 से 165 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहती हैं तो पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 18 रुपए और डीजल पर लगभग 35 रुपए तक का नुकसान हो सकता है इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से लागत में करीब 6 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हो सकती है

    कुल मिलाकर वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि जहां वैश्विक बाजार में अस्थिरता और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है वहीं भारत में संतुलित नीतियों और प्रबंधन के चलते ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में सफलता मिली है यह न केवल उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है बल्कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक साबित हो रही है

  • मप्र में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक, खाद्य मंत्री बोले- अफवाहों पर न दें ध्यान

    मप्र में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक, खाद्य मंत्री बोले- अफवाहों पर न दें ध्यान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, पीएनजी और सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। किसी प्रकार की कमी नहीं हैं। लोग अफवाहों पर ध्यान न दें।

    खाद्य मंत्री राजपूत ने सोमवार को एक बयान में कहा कि देश में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और देश व प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रही हैं। इससे पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति निरंतर बनी हुई है और किसी प्रकार की रुकावट की स्थिति नहीं है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पीएनजी कनेक्शन लेने का भी आग्रह किया, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम हो और स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

    मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश के बॉटलिंग प्लांट में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त भंडार बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के अनुरूप एलपीजी सिलेंडरों का निरंतर वितरण किया जा रहा है। कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा निर्धारित प्राथमिकता क्रम और आवंटन प्रतिशत के आधार पर गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सतत रूप से की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। उपभोक्ताओं की मांग को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय तक कार्य कर रहे हैं तथा जिला स्तर तक बॉटलिंग प्लांट और वितरकों के पास उपलब्धता एवं वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश की सभी ऑयल कंपनियों के पास पेट्रोल और डीजल (एमएस/एचएसडी) का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। रिटेल आउटलेट्स (पेट्रोल पंपों) पर भी पेट्रोल और डीजल की किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। कंपनियों के डिपो से पेट्रोल और डीजल की लगातार आपूर्ति की जा रही है और स्थिति पूरी तरह सामान्य है। बढ़ी हुई मांग को देखते हुए ऑयल कंपनियों के डिपो अतिरिक्त समय तक कार्य कर रहे हैं जिससे मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

    खाद्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए निरंतर कार्रवाई की जा रही है। अब तक 2,110 स्थानों पर जांच की गई है, जिसमें 2,933 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए तथा 9 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके अतिरिक्त 391 पेट्रोल पंपों की जांच की गई, जिसमें एक प्रकरण दर्ज कर एफआईआर कराई गई है। प्रदेश के सभी जिला आपूर्ति नियंत्रकों और ऑयल कंपनियों के अधिकारियों को पेट्रोल पंपों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) संस्थाओं द्वारा घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन से संबंधित मांग एवं शिकायतों के पंजीयन और उनके निराकरण के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। प्रदेश के जिन शहरों में पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है, वहां पाइपलाइन के आसपास के घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। अन्य जिलों में पाइपलाइन विस्तार के बाद पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही सीजीडी संस्थाओं को विभिन्न अनुमतियां प्राप्त करने के लिए सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की सुविधा भी प्रदान की गई है। इन संस्थाओं द्वारा संबंधित शहरों के लिए दूरभाष नंबर भी जारी किए गए हैं, जिन पर उपभोक्ता संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इनमें अवंतिका गैस लिमिटेड द्वारा पीथमपुर, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर के लिए संपर्क नंबर उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि गैल गैस लिमिटेड द्वारा देवास, रायसेन, शाजापुर और सीहोर के लिए संपर्क सुविधा दी गई है।

    इसी प्रकार नवेरिया गैस लिमिटेड द्वारा धार, थिंक गैस द्वारा भोपाल, राजगढ़ और शिवपुरी, आईओसीएल द्वारा गुना, मऊगंज, रीवा, अशोकनगर और मुरैना, बीपीसीएल द्वारा मैहर, सतना, शहडोल, सीधी और सिंगरौली तथा गुजरात गैस लिमिटेड द्वारा उज्जैन, देवास, इंदौर, रतलाम और झाबुआ क्षेत्रों के लिए दूरभाष नंबर जारी किए गए हैं, जिनके माध्यम से उपभोक्ता अपनी मांग या शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

    उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आवश्यकता अनुसार ही पेट्रोल और डीजल की खरीद करें तथा अनावश्यक संग्रह से बचें। ऑयल कंपनियों ने भी यह स्पष्ट किया है कि एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, पीएनजी और सीएनजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

  • पेट्रोल-डीजल और LPG की कोई कमी नहीं… सरकार का दावा- भारत के पास 2 माह का ईंधन भंडार

    पेट्रोल-डीजल और LPG की कोई कमी नहीं… सरकार का दावा- भारत के पास 2 माह का ईंधन भंडार


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में पेट्रोल, डीजल ( Petrol-Diesel Crisis) और एलपीजी गैस (LPG gas) को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच सरकार ने दावा किया है कि पेट्रोलियम पदार्थों की कोई कमी नहीं है। सरकार ने बयान जारी कर कहा कि भारत के पास करीब 60 दिन का ईंधन भंडार है। ऐसे में लोगों को घबराने और दहशत में खरीदारी करने की जरूरत नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि दुनिया के कई देश जहां मूल्य वृद्धि, सीमित आपूर्ति, ऑड-इवेन प्रतिबंध और जबरन स्टेशन बंद करने जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कुछ देशों ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित किया है, पर भारत में ऐसे किसी भी उपाय की जरूरत नहीं है।

    मंत्रालय ने कहा, भारत की कुल भंडार क्षमता 74 दिनों की है। पश्चिम एशिया संकट के 27वें दिन भी वास्तविक भंडार करीब 60 दिनों का है। इसमें कच्चे तेल का भंडार, उत्पाद भंडार और भूमिगत गुफाओं में रणनीतिक भंडारण शामिल है। भारत के भंडार के खत्म या अपर्याप्त होने के किसी भी दावे को पूरी तरह से गलत बताया।

    सरकार का दावा है देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है। घरेलू एलपीजी उत्पादन में 40% की वृद्धि हुई है, जिससे रोज एलपीजी उत्पादन 50 टीएमटी हो गई है। यह हमारी जरूरत का करीब 60% है, क्योंकि देश में गैस की कुल जरूरत 80 टीएमटी है। इससे आयात की जरूरत 30 टीएमटी रह गई है। अमेरिका, रूस समेत कई देशों से 800 टीएमटी एलपीजी कार्गो पहले से सुरक्षित हैं और भारत के कई टर्मिनलों पर पहुंच रहे हैं।

    सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों प्रतिदिन 50 लाख से अधिक एलपीजी सिलेंडर की सफलतापूर्वक आपूर्ति कर रही हैं। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं के घबराहट में एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की मांग 89 लाख सिलेंडर से घटकर 50 लाख के आसपास रह गई है। तेल कंपनियां गैस सिलेंडर की आपूर्ति कर रही है।

    पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ हुए
    सरकार का कहना है, पाइपलाइन प्राकृतिक गैस (पीएनजी) को देश में बढ़ावा दिया जा रहा है। घरेलू पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं। भारत अपनी प्रतिदिन 191 मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर की दैनिक जरूरत में से रोज 92 मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर प्राकृतिक गैस का घरेलू उत्पादन करता है। ऐसे में एलपीजी के मुकाबले पीएनजी के आयात के मामले में कम निर्भर है। नए घरेलू पीएनजी कनेक्शन भी दिए जा रहे हैं।


    भ्रम फैलाने पर कार्रवाई

    कुछ शरारती तत्वों द्वारा गलत सूचना फैलाई जा रही है और कुछ स्वार्थी तत्व इसे बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे लोगों में चिंता पैदा हो रही है। मंत्रालय सभी से आग्रह करता है कि वे ईंधन और गैस की उपलब्धता संबंधी जानकारी के लिए केवल सरकारी सूचनाओं पर भरोसा करें। सरकार जानबूझकर दहशत फैलाने वालों पर कार्रवाई करेगी।

  • नेपाल में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों में भारी वृद्धि, जानें कितनी बढ़ी कीमतें

    नेपाल में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों में भारी वृद्धि, जानें कितनी बढ़ी कीमतें


    काठमांडू।
    ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध (Iran and US-Israeli War) के साथ खाड़ी देशों की वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए नेपाल (Nepal) में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी वृद्धि (Increase Petroleum Products Prices) की घोषणा की गई है.

    नेपाल ऑयल निगम की रविवार देर रात तक चली बैठक में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया गया. निगम द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और आपूर्ति प्रबंधन में आ रही चुनौतियों के कारण यह निर्णय लिया गया है. नई दरें आज रात 12 बजे से लागू कर दी गई हैं।

    नए मूल्य समायोजन के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 31 रुपये प्रति लीटर, डीजल में 54 रुपये प्रति लीटर तथा एलपीजी गैस में 296 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है।

    मूल्य वृद्धि के बाद अब पेट्रोल की कीमत 188 रुपये प्रति लीटर, डीजल की कीमत 196 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी गैस का मूल्य 2,126 रुपये प्रति सिलेंडर तय किया गया है। निगम ने कहा है कि हाल के समय में मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

    प्रेस विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि नेपाल जैसे पेट्रोलियम उत्पादन न करने वाले देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मूल्य वृद्धि का सीधा असर पड़ता है. इससे पहले भी वैश्विक परिस्थितियों के कारण आपूर्ति प्रणाली प्रभावित हुई थी और निगम को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को भुगतान करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था.

    निगम ने मौजूदा समय में भी नेपाल को निरंतर पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति जारी रखने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का आभार व्यक्त किया है। नेपाल ऑयल निगम ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में यह समायोजन किया गया है, ताकि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखा जा सके।

  • देश में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं… सरकार उठा रही ऐहतियाती कदम

    देश में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं… सरकार उठा रही ऐहतियाती कदम

    पश्चिम एशिया संकट (West Asian Crisis) के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल व एलपीजी की कीमतों (Crude Oil and LPG Prices) में उछाल के बीच सरकार (Government) ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार का दावा है कि भारत में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं है। पर रसोई गैस (LPG) और पीएनजी की घरेलू सप्लाई को तरजीह देने के लिए कुछ एहतियाती उपाय किए हैं। इनमें कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में कमी और घरेलू गैस का बुकिंग टाइम बढ़ाना शामिल है।


    बुकिंग अवधि बढ़ाई

    सरकार ने घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि भी 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है। मतलब यह कि गैस सिलेंडर सप्लाई के अगले 25 दिन तक उपभोक्ता दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर पाएंगे। हालांकि, सरकार की दलील है कि आम उपभोक्ता एक वर्ष में औसतन सात सिलेंडर इस्तेमाल करता है। ऐसे में वह एक सिलेंडर को तकरीबन 50 दिन इस्तेमाल करता है। ऐसे में 25 दिन की बुकिंग अवधि से कोई मुश्किल नहीं आएगी।


    फिलहाल दाम नहीं बढ़ेंगे

    सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की कोई संभावना नहीं है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, पर अभी वह स्थिति नहीं आई है कि कीमतों में इजाफा किया जाए। उनके मुताबिक कच्चे तेल की कीमत 120 -125 डॉलर के आसपास रहती है, तो तेल कंपनियों पर खास दबाव नहीं पड़ेगा। पर कीमत ऊपर चली जाती है, तो वह अलग स्थिति होगी।


    घरेलू पीएनजी को तरजीह

    सरकार का कहना है कि घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं को भी गैस की कोई मुश्किल नहीं आएगी। गैस का ज्यादातर हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। ऐसे में सरकार ने कुछ उद्योगों को उपलब्धता के आधार पर गैस मुहैया कराने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम उठाना जरूरी है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ज्यादा दिन तक बंद रहता है, तो एलएनजी को लेकर दबाव की स्थिति बन सकती है।


    कमर्शियल एलपीजी कम

    पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच सरकार ने घरेलू एलपीजी सप्लाई को बरकरार रखने के लिए होटल और उद्योगों में एलपीजी की सप्लाई में कमी लाने का फैसला किया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी क्योंकि, इस वक्त घरेलू उपभोक्ताओं को वक्त पर रसोई गैस उपलब्ध कराना सरकार और तेल कंपनियों की पहली प्राथमिकता है।


    कमर्शियल एलएनजी के दामों में बढ़ोतरी

    पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कमर्शियल एलएनजी की कीमतों में इजाफा उनकी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है। ऐसे में कमर्शियल एलएनजी के दामों में वृद्धि पर सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। यह सवाल किए जाने पर कि क्या इसका असर सीएनजी की कीमतों पर भी होगा, उन्होंने कहा कि सीएनजी प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। उस पर प्रभाव की संभावना कम है।


    रिफाइनरी एलपीजी उत्पादन बढ़ाए

    पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने एक बार फिर सभी रिफाइनरी को दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद का उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि ज्यादा से ज्यादा एलपीजी का उत्पादन किया जाए। इसके साथ सरकार अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया से भी एलपीजी खरीद रही है। सरकार का कहना है कि इन देशों से गैस के आयात को और तेज किया गया है।


    अमेरिका का रुख करेगा तय

    पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का ज्यादा असर अमेरिका के बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका में पेट्रोल डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय होते हैं। ऐसे में अमेरिकी उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ना लाजिमी है। ऐसे में अमेरिका युद्ध को लंबा खींचने का निर्णय करता है, तो उसके उपभोक्ताओं को इसकी ज्यादा कीमत चुकानी होगी।