Tag: digestion health tips

  • समर सुपरफूड करेला: शुगर कंट्रोल से लेकर डाइजेशन तक फायदेमंद

    समर सुपरफूड करेला: शुगर कंट्रोल से लेकर डाइजेशन तक फायदेमंद


    नई दिल्ली गर्मी के मौसम में ही शरीर में कई तरह की समस्याएं बढ़ती हैं जैसे पाचन खराब होना, ब्लड शुगर की कमी, थकान और कमजोरी। ऐसे में करेला (करेला) एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, करेले का नियमित सेवन न केवल गर्मी से राहत देता है, बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत भी बनाता है।

    पोषक तत्व सेपूर्ती

    आयुष मंत्रालय के अनुसार, करेला विटामिन ए, बी और सी, बीटा कैरोटीन, आयरन, ड्रैगन, पोटेशियम, मैग्नीशियम और मैग्नीज जैसे कई आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर है। ये तत्व शरीर को ऊर्जा प्रदान के साथ-साथ इमामत सिस्टम को भी मजबूत बनाते हैं।

    शराब में मिलावट

    डायबिटीज के इलाज के लिए करेला को बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। गर्मियों में जब शुगर लेवल बढ़ने का खतरा सबसे ज्यादा होता है, तब करेले का सब्जी या सब्जी नियमित रूप से लेना आश्चर्यजनक साबित होता है।

    पाचन तंत्र को बनाए रखें

    गर्मी में अपच, गैस, कब्ज और पेट दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में करेला पाचन क्रिया को सुधारने और पेट को साफ रखने में मदद मिलती है। यह पेट दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए जाना जाता है।

    शरीर को ठंडा और ठंडा रखा जाता है

    करेला प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है, जो शरीर की अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालने में मदद करता है। यह डिहाइड्रेशन से प्रमाणित है और समुद्र तट पर शरीर को ठंडक प्रदान करता है।

    प्रतिरक्षा और वजन नियंत्रण

    करेले में मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। साथ ही यह खून को साफ करता है और मेटाबॉलिज्म को तेज गति से वजन को नियंत्रित में रखने में भी मदद करता है।

    सेवन का सही तरीका

    गर्मियों में सुबह खाली पेट करेले का प्लांट सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। इसके अलावा आप करेले की सब्जी, सूखा या अन्य प्रकार के करेले भी अपने आहार में शामिल कर सकते हैं. हालाँकि, अगर आपको किसी तरह की एलर्जी या अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो इसका सेवन पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • आयुर्वेद का नियम तोड़ा तो बढ़ेंगी बीमारियां भोजन के साथ फल खाने से बचें

    आयुर्वेद का नियम तोड़ा तो बढ़ेंगी बीमारियां भोजन के साथ फल खाने से बचें

    नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। शादी समारोह, पार्टियों और होटलों में भोजन के साथ फल परोसना एक आम चलन बन चुका है। लोग इसे हेल्दी समझकर बिना सोचे-समझे खा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद इस आदत को सही नहीं मानता और इसे पाचन के लिए हानिकारक बता सकता है।

    आयुर्वेद के अनुसार हर खाद्य पदार्थ की अपनी तासीर और पाचन समय होता है। दाल, रोटी, चावल जैसे पके हुए भोजन को पचने में समय लगता है, जबकि फल हल्के होते हैं और जल्दी पच जाते हैं। जब इन दोनों को एक साथ खाया जाता है तो पाचन तंत्र भ्रमित हो जाता है। फल पहले पचने की कोशिश करते हैं, जबकि भारी भोजन को अधिक समय चाहिए होता है। इस असंतुलन के कारण भोजन पेट में रुककर सड़ने लगता है, जिससे गैस, कब्ज, एसिडिटी और भारीपन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

    इसके अलावा, होटलों या फंक्शन्स में परोसे जाने वाले फल अक्सर ठंडे या स्टोर किए हुए होते हैं। ऐसे फल पाचन अग्नि को कमजोर कर देते हैं, जिससे खाना ठीक से नहीं पच पाता। आयुर्वेद में पाचन अग्नि को शरीर का मूल आधार माना गया है और इसके कमजोर होने से कई रोग जन्म ले सकते हैं।

    आयुर्वेद यह भी कहता है कि भोजन केवल स्वाद के लिए नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें समय, मात्रा और संयोजन का विशेष महत्व होता है। गलत संयोजन को विरुद्ध आहार कहा जाता है, जो लंबे समय में शरीर में विषैले तत्वों के जमाव का कारण बन सकता है।

    फल खाने का सही समय सुबह या शाम माना गया है। सुबह खाली पेट फल खाना सबसे ज्यादा लाभकारी होता है, क्योंकि उस समय पाचन तंत्र साफ और सक्रिय होता है। हालांकि सुबह खट्टे फलों से बचना चाहिए, क्योंकि ये गैस और जलन बढ़ा सकते हैं। शाम को भी सूरज ढलने से पहले फल खाए जा सकते हैं, लेकिन भोजन और फल के बीच कम से कम एक घंटे का अंतर रखना जरूरी है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि फल को दूध या दही के साथ नहीं खाना चाहिए। आयुर्वेद इसे विरुद्ध आहार मानता है और इससे पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

    यदि आप फल और भोजन दोनों का पूरा पोषण लेना चाहते हैं तो इन्हें अलग-अलग समय पर खाना ही बेहतर है। छोटी-सी यह आदत आपके पाचन को बेहतर बना सकती है और कई बीमारियों से बचाने में मदद कर सकती है।