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  • अंकुरित अनाज: सही तरीका और सही व्यक्ति, नहीं तो हो सकता है नुकसान

    अंकुरित अनाज: सही तरीका और सही व्यक्ति, नहीं तो हो सकता है नुकसान


    नई दिल्ली । प्रोटीन और फाइबर शरीर के लिए ऊर्जा, ताकत और मांसपेशियों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, रोजमर्रा के आहार में इनकी पर्याप्त मात्रा शामिल करना अक्सर मुश्किल होता है। ऐसे में लोग अंकुरित अनाज यानी स्प्राउट्स का सहारा लेते हैं, क्योंकि यह पोषण का एक प्राकृतिक और समृद्ध स्रोत माना जाता है। लेकिन आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार अंकुरित आहार का सही सेवन और सही व्यक्ति के लिए ही लाभकारी होता है।

    अंकुरित अनाज कई तरह से शरीर को फायदा पहुंचाते हैं। इनमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स की पर्याप्त मात्रा होती है, जो शरीर की ऊर्जा बढ़ाने, मांसपेशियों को मजबूत करने और कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होती है। लेकिन यदि इसे सही तरीके से नहीं लिया जाए तो यह पाचन संबंधी समस्याओं का कारण भी बन सकता है।

    आयुर्वेद के अनुसार अंकुरित अनाज पचने में थोड़ा भारी होता है और अधिक सेवन से वात दोष और गैस की समस्या बढ़ सकती है। इससे शरीर में रूखापन बढ़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि स्प्राउट्स को हमेशा हल्का पकाकर, घी या तेल के साथ और सीमित मात्रा में ही लिया जाए। ऐसा करने से यह शरीर को ताकत देने के साथ पाचन को भी संतुलित रखता है।

    विशेष रूप से जिन लोगों का पाचन मंद है और कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें अंकुरित आहार से बचना चाहिए। पाचन मंद होने पर अंकुरित अनाज शरीर में ठीक से पच नहीं पाता और पोषण की जगह शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा हो सकते हैं। इसी कारण बच्चे और बुजुर्गों को भी अंकुरित अनाज देने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इन उम्र में पाचन सबसे कमजोर होता है।

    इसके अलावा वात प्रवृत्ति वाले लोग भी इस आहार का सेवन सीमित मात्रा में ही करें। आयुर्वेद में वात दोष को बढ़ाने वाले आहार से बचने की सलाह दी जाती है, और अंकुरित अनाज वात में वृद्धि कर सकता है। इसलिए इसे हल्का पकाकर, घी या तेल के साथ, और उचित मात्रा में लेना ही फायदेमंद होता है।

    अंकुरित अनाज का सेवन करते समय कुछ विशेष उपाय भी ध्यान में रखने चाहिए। सबसे पहले इसे कच्चा खाने से बचें। अंकुरित अनाज को हल्का उबालकर या घी/तेल में पकाकर ही खाना चाहिए। इसके अलावा अंकुरित अनाज को तुरंत ही सेवन करना चाहिए। ज्यादा लंबे समय तक अंकुरित रहने पर इसके पोषक तत्वों पर असर पड़ सकता है।

    इस प्रकार, अंकुरित अनाज का सेवन शरीर के लिए लाभकारी है, लेकिन केवल सही व्यक्ति और सही तरीके से ही। नियमित रूप से नियंत्रित मात्रा में और हल्का पकाकर सेवन करने से यह ऊर्जा, ताकत और पाचन दोनों में सुधार करता है। वहीं, गलत तरीके या अधिक मात्रा में लेने पर यह पाचन और वात दोष जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए स्वास्थ्य और आयुर्वेदिक दृष्टि से स्प्राउट्स को संतुलित, समय पर और विधिपूर्वक ही आहार में शामिल करना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

  • कब्ज का परमानेंट इलाज: किचन से बदलें ये एक चीज़, हफ्तेभर में पेट होगा मक्खन जैसा साफ

    कब्ज का परमानेंट इलाज: किचन से बदलें ये एक चीज़, हफ्तेभर में पेट होगा मक्खन जैसा साफ


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और मैदा कल्चर ने हमारे पाचन तंत्र को सुस्त कर दिया है। कब्ज केवल एक समस्या नहीं, बल्कि बवासीर, गैस और एसिडिटी जैसी बीमारियों की जड़ है। डॉक्टर और डाइटिशियन मानते हैं कि अगर आप अपनी रोटियों का आटा बदल लें, तो बिना दवा के पेट की सफाई संभव है। यहाँ उन 5 प्रकार के आटों की जानकारी दी जा रही है, जो फाइबर से भरपूर हैं और कब्ज को जड़ से खत्म करने की ताकत रखते हैं ।

    चोकर युक्त गेहूं का आटा
    अक्सर हम आटे को छानकर उसका चोकर बाहर फेंक देते हैं जबकि असली फाइबर उसी में होता है। फायदा चोकर आंतों की दीवारों पर जमा गंदगी को झाड़ू की तरह साफ करता है। कैसे खाएं आटे को बिना छाने रोटियां बनाएं।

    मल्टीग्रेन आटा

    जब आप गेहूं में चना सोयाबीन, और मक्का मिलाते हैं, तो यह एक फाइबर बम बन जाता है फायदा यह न केवल कब्ज दूर करता है, बल्कि शरीर को भरपूर प्रोटीन भी देता है प्रो टिप घर पर ही 5 किलो गेहूं में 1 किलो काला चना पिसवाकर मिश्रण तैयार करें।

    ओट्स का आटा

    ओट्स में बीटा-ग्लूकन नामक घुलनशील फाइबर होता है, जो पेट को नरम रखता है। फायदा यह मल को मुलायम बनाता है जिससे पेट साफ होने में दर्द या कठिनाई नहीं होती। उपयोग आप इसे गेहूं के आटे में आधा-आधा मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं।

    रागी या बाजरे का आटा

    मोटे अनाज जैसे रागी बाजरा या ज्वार गुणों की खान हैं। फायदा इनमें गेहूं के मुकाबले कई गुना ज्यादा फाइबर होता है। रागी कैल्शियम का भी बेहतरीन स्रोत है। नोट सर्दियों में बाजरा और गर्मियों में ज्वार या रागी का सेवन सबसे अच्छा माना जाता है।

    जौ का आटा

    प्राचीन समय से ही जौ को पेट के लिए सबसे हल्का और पाचक माना गया है। फायदा यह आंतों की सूजन कम करता है और मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है। हफ्ते भर में असर: अगर आप लगातार 7 दिन जौ की रोटी खाते हैं, तो पुरानी से पुरानी कब्ज में राहत महसूस होगी।

    एक्सपर्ट टिप्स कब्ज मुक्त रहने के लिए

    पानी का भरपूर सेवन: फाइबर तभी काम करेगा जब आप पर्याप्त पानी पिएंगे। बिना पानी के फाइबर भी कब्ज कर सकता है। रात का खाना: सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले खाना खा लें। सेंधा नमक रोटियों के आटे में थोड़ा सेंधा नमक और अजवाइन मिलाने से पाचन और भी तेज होता है। चेतावनी यदि आपको ग्लूटेन से एलर्जी है या कोई गंभीर पेट की बीमारी है, तो आहार में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।