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  • खाना खाते ही सीने में जलन और गले में खट्टापन तो न करें नजरअंदाज डॉक्टर की सलाह से जानें क्या खाएं क्या नहीं

    खाना खाते ही सीने में जलन और गले में खट्टापन तो न करें नजरअंदाज डॉक्टर की सलाह से जानें क्या खाएं क्या नहीं


    नई दिल्ली। सीने या गले में जलन खट्टी डकार और मुंह में खट्टा स्वाद महसूस होना कई लोगों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन चुका है। आमतौर पर इसे एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है। इसमें पेट का एसिड ऊपर की ओर खाने की नली में पहुंच जाता है जिससे सीने और गले में जलन महसूस हो सकती है। कई बार लोग इससे राहत पाने के लिए तुरंत दवा ले लेते हैं लेकिन अगर समस्या बार बार हो रही है तो केवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय अपनी खानपान की आदतों और दिनचर्या पर ध्यान देना भी जरूरी है।

    एसिडिटी बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। बहुत ज्यादा खाना जल्दी जल्दी खाना तला भुना और अधिक तेल वाला भोजन ज्यादा चाय कॉफी या कैफीन वाले पेय पीना कार्बोनेटेड ड्रिंक लेना और भोजन के तुरंत बाद लेट जाना इसके लक्षणों को बढ़ा सकता है। लंबे समय तक खाली पेट रहने और भोजन का समय लगातार बदलने से भी कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है। इसलिए सबसे पहले यह पहचानना जरूरी है कि कौन सी चीजें आपके लक्षणों को बढ़ाती हैं।

    अगर आपको बार बार एसिडिटी होती है तो बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन से दूरी बनाना फायदेमंद हो सकता है। लाल मिर्च काली मिर्च हरी मिर्च और बहुत तीखी चटनी कुछ लोगों में सीने की जलन और एसिड रिफ्लक्स को बढ़ा सकती हैं। इसी तरह पकौड़े समोसे पूरी कचौरी फ्रेंच फ्राइज और दूसरी डीप फ्राइड चीजें भी परेशानी बढ़ा सकती हैं। अधिक फैट वाला भोजन पेट को लंबे समय तक भरा रख सकता है और कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स के लक्षण बढ़ सकते हैं।

    चाय कॉफी एनर्जी ड्रिंक कोला और दूसरे कैफीन वाले पेय भी कुछ लोगों में एसिडिटी को ट्रिगर कर सकते हैं। संतरे या दूसरे बहुत खट्टे फलों का जूस और शराब भी कुछ लोगों में जलन बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा चॉकलेट पेपरमिंट टी मिंट कैंडी और मिंट वाली च्युइंग गम से भी कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे खाद्य पदार्थों को पूरी तरह छोड़ना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होता लेकिन अगर किसी खास चीज को खाने के बाद लगातार लक्षण बढ़ते हैं तो उससे दूरी बनाना बेहतर है।

    एसिडिटी के दौरान डाइट में हल्के और कम एसिड वाले फल शामिल किए जा सकते हैं। केला पपीता तरबूज खरबूजा और नाशपाती जैसे फल कई लोगों के लिए अपेक्षाकृत हल्के विकल्प हो सकते हैं। इनमें पानी और फाइबर भी पाया जाता है जो संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। बहुत खट्टे फलों के बजाय ऐसे विकल्प चुनना कुछ लोगों के लिए अधिक आरामदायक हो सकता है।

    अनाज में ओट्स दलिया पोहा उबले या हल्के पके चावल और साबुत गेहूं जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं। इन्हें कम तेल और हल्के मसालों के साथ खाना बेहतर रहता है। प्रोटीन के लिए मूंग दाल टोफू सोयाबीन और सीमित मात्रा में पनीर जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं। भोजन को कम तेल में तैयार करना और एक बार में बहुत ज्यादा खाने के बजाय संतुलित मात्रा में भोजन करना भी मददगार हो सकता है।

    पानी की पर्याप्त मात्रा लेना भी जरूरी है। सादा पानी प्राथमिक विकल्प है जबकि कुछ लोगों को नारियल पानी छाछ या सौंफ का पानी भी आरामदायक लग सकता है। साथ ही भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचना और नियमित समय पर भोजन करने की कोशिश करना जरूरी है। अगर सीने में जलन लगातार बनी रहती है बार बार होती है या निगलने में परेशानी उल्टी वजन कम होना अथवा सीने में तेज दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य एसिडिटी समझकर नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से सलाह लें। खानपान में बदलाव व्यक्ति की समस्या और ट्रिगर के अनुसार अलग हो सकते हैं इसलिए लंबे समय से परेशानी होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

  • हर सुबह पेट रहेगा पूरी तरह साफ डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड पाचन होगा मजबूत और दिनभर रहेंगे ऊर्जावान

    हर सुबह पेट रहेगा पूरी तरह साफ डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड पाचन होगा मजबूत और दिनभर रहेंगे ऊर्जावान


    नई दिल्ली । सुबह पेट साफ न होना आज के समय में बड़ी संख्या में लोगों की आम समस्या बन गई है। इसके कारण दिनभर भारीपन गैस पेट फूलना और थकान जैसी परेशानियां बनी रहती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय यदि खानपान और जीवनशैली में सही बदलाव किए जाएं तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है। संतुलित आहार पर्याप्त पानी और नियमित दिनचर्या पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार कब्ज या सुबह पेट साफ न होने का सबसे बड़ा कारण भोजन में फाइबर की कमी है। फाइबर आंतों की गति को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है और मल को आसानी से बाहर निकालने में सहायक होता है। इसके अलावा पर्याप्त पानी न पीना लंबे समय तक बैठे रहना शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित खानपान भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। इसलिए सबसे पहले इन कारणों को समझना और उन्हें सुधारना जरूरी है।

    सुबह उठने के बाद एक से दो गिलास गुनगुना पानी पीना पाचन तंत्र को सक्रिय करने का आसान तरीका माना जाता है। इससे आंतों की गतिविधि बढ़ सकती है और मल त्याग में सहायता मिल सकती है। कई विशेषज्ञ रात में मुनक्का या सूखे अंजीर को पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाने की सलाह भी देते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

    पपीता भी पाचन के लिए लाभकारी फलों में माना जाता है। इसमें फाइबर के साथ पपेन नामक एंजाइम पाया जाता है जो भोजन को पचाने में सहायता करता है। इसके अलावा नाश्ते में ओट्स या गेहूं का दलिया शामिल करना भी अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि इनमें घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक मेथी और बथुआ को नियमित भोजन का हिस्सा बनाना भी फायदेमंद माना जाता है। इनमें फाइबर के साथ पानी की मात्रा भी अच्छी होती है जिससे कब्ज की समस्या कम हो सकती है। दोपहर के भोजन के साथ दही या छाछ का सेवन भी लाभकारी माना जाता है क्योंकि इनमें मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया आंतों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं और पाचन प्रक्रिया को मजबूत बनाते हैं।

    सिर्फ खानपान ही नहीं बल्कि नियमित शारीरिक गतिविधि भी बेहद जरूरी है। रोजाना कम से कम तीस मिनट पैदल चलना हल्का व्यायाम करना या योग का अभ्यास करना आंतों की प्राकृतिक गति को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। साथ ही समय पर भोजन करना और पर्याप्त नींद लेना भी पाचन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    हालांकि यदि कब्ज की समस्या लंबे समय तक बनी रहे लगातार पेट दर्द हो मल में खून आए अचानक वजन कम होने लगे या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही खानपान पर्याप्त पानी नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अधिकांश लोग पाचन संबंधी समस्याओं से राहत पा सकते हैं और हर सुबह बेहतर महसूस कर सकते हैं।

  • गर्मी में नींबू पानी से राहत या परेशानी? जानें क्यों कुछ लोगों को होती है पेट फूलने की समस्या

    गर्मी में नींबू पानी से राहत या परेशानी? जानें क्यों कुछ लोगों को होती है पेट फूलने की समस्या


    नई दिल्ली ।  गर्मी के मौसम में नींबू पानी को एक प्राकृतिक और ताजगी देने वाला पेय माना जाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ विटामिन C की पूर्ति भी करता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति के शरीर पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता और कुछ लोगों को इसके सेवन के बाद सूजन या पेट फूलने जैसी समस्या का अनुभव हो सकता है।

    चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, नींबू पानी में मौजूद साइट्रिक एसिड कुछ संवेदनशील लोगों के पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। जिन लोगों को पहले से गैस, एसिडिटी या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्या होती है, उनमें नींबू पानी के सेवन से पेट में भारीपन, गैस और ब्लोटिंग यानी सूजन की शिकायत बढ़ सकती है।

    हालांकि, सामान्य परिस्थितियों में नींबू पानी शरीर के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने, पाचन सुधारने और गर्मी में थकान कम करने में मदद करता है। लेकिन इसका अत्यधिक या गलत समय पर सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नींबू पानी हमेशा संतुलित मात्रा में और हल्के गुनगुने या सामान्य तापमान के पानी में लिया जाना चाहिए। बहुत अधिक खट्टा या चीनी युक्त नींबू पानी भी शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे सूजन जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है।

    इसके अलावा, खाली पेट अत्यधिक नींबू पानी का सेवन कुछ लोगों में एसिडिटी को बढ़ा सकता है, जो आगे चलकर पेट में सूजन और असहजता का कारण बनता है। इसलिए इसे हमेशा समझदारी और संतुलन के साथ लेना चाहिए।

    डॉक्टरों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को नींबू पानी पीने के बाद बार-बार सूजन या पेट दर्द की समस्या हो रही है, तो उसे इसका सेवन कम कर देना चाहिए या चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, नींबू पानी गर्मी में एक बेहतरीन पेय है, लेकिन इसका असर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर यह लाभकारी है, जबकि असंतुलित सेवन सूजन जैसी परेशानी का कारण बन सकता है।

  • दही के साथ ये चीजें खाना पड़ सकता है भारी, पेट की गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है

    दही के साथ ये चीजें खाना पड़ सकता है भारी, पेट की गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है


    नई दिल्ली। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ आंतों के स्वास्थ्य को भी सुधारता है। लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके से और सही खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए।

    दूध और दही साथ में खाने से बचें
    दूध और दही दोनों ही डेयरी उत्पाद हैं, लेकिन इन्हें एक साथ या एक ही समय पर खाने से पाचन पर असर पड़ सकता है। इससे गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं क्योंकि दोनों अलग-अलग तरीके से पचते हैं।

    मछली और दही का कॉम्बिनेशन भी नुकसानदायक
    आयुर्वेद और एक्सपर्ट्स के अनुसार मछली और दही को साथ में नहीं खाना चाहिए। दोनों ही प्रोटीन से भरपूर होते हैं और इन्हें एक साथ लेने पर पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे अपच और त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    तला-भुना और ऑयली खाना बढ़ा सकता है परेशानी
    दही के साथ ज्यादा तला-भुना या ऑयली फूड लेने से पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे पेट में भारीपन, सुस्ती और अपच जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

    अचार और फर्मेंटेड फूड्स से दूरी रखें
    दही को अचार या अन्य फर्मेंटेड फूड्स के साथ खाना भी सही नहीं माना जाता। दोनों में बैक्टीरिया की मात्रा अधिक होती है, जिससे आंतों का संतुलन बिगड़ सकता है और पेट खराब हो सकता है।

    कुछ फलों के साथ भी न खाएं दही
    तरबूज, खरबूजा जैसे अधिक पानी वाले फलों के साथ दही का सेवन भी नुकसान पहुंचा सकता है। इससे डाइजेस्टिव सिस्टम प्रभावित होता है और गैस या फर्मेंटेशन की समस्या हो सकती है।

    एक्सपर्ट्स की सलाह
    विशेषज्ञों का कहना है कि दही को हमेशा हल्के और संतुलित भोजन जैसे रोटी, खिचड़ी या सब्जियों के साथ ही खाना चाहिए। सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाकर ही दही के पूरे स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।

  • बच्चों की सेहत को लेकर अलर्ट रहें पेट दर्द और पाचन समस्या के संकेतों को समझें समय रहते इलाज करें

    बच्चों की सेहत को लेकर अलर्ट रहें पेट दर्द और पाचन समस्या के संकेतों को समझें समय रहते इलाज करें


    नई दिल्ली । बच्चों की सेहत और उनका सही विकास पूरी तरह उनके पोषण और पाचन तंत्र की स्थिति पर निर्भर करता है। आज की व्यस्त जीवनशैली में माता-पिता अक्सर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े छोटे संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या का रूप ले सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के पाचन स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है क्योंकि उनका पाचन तंत्र अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार बच्चों में पाचन संबंधी समस्याएं आम हैं, लेकिन शुरुआती लक्षणों को समझकर समय पर इलाज किया जाए तो बड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है। बच्चों में कब्ज, दस्त, पेट दर्द और एसिडिटी जैसी समस्याएं सबसे ज्यादा देखने को मिलती हैं, जिन्हें अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

    कब्ज एक आम समस्या है जिसमें बच्चा कठोर मल त्याग करता है या शौच के समय रोने लगता है। कई बार बच्चा शौच करने से डरने लगता है, जो आगे चलकर आदत बन सकती है। वहीं दस्त की स्थिति में बच्चे को बार बार पतला मल आता है जिससे शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है और बच्चा सुस्त और कमजोर दिखाई देने लगता है।

    इसके अलावा पेट में जलन और एसिडिटी भी बच्चों में पाचन समस्या का बड़ा संकेत है। इस स्थिति में बच्चा पेट में जलन की शिकायत करता है, खट्टी डकारें आती हैं और कभी कभी उल्टी जैसी समस्या भी हो सकती है। भोजन असहजता या फूड इनटॉलरेंस भी एक महत्वपूर्ण संकेत है, जिसमें दूध, गेहूं या कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से पेट फूलना, दर्द या एलर्जी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

    कृमि संक्रमण भी बच्चों में एक आम लेकिन गंभीर समस्या है जो साफ सफाई की कमी के कारण होती है। इसमें बच्चा बार बार पेट दर्द की शिकायत करता है, भूख कम हो जाती है, वजन नहीं बढ़ता और कई बार नींद में दांत पीसने की आदत भी देखी जाती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि माता पिता को बच्चों के व्यवहार और स्वास्थ्य में होने वाले छोटे बदलावों पर भी नजर रखनी चाहिए। अगर बच्चा लगातार पेट दर्द, उल्टी, दस्त या कब्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहा हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। घरेलू उपायों से आराम न मिलने पर तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है।

    साथ ही बच्चों को स्वच्छता की आदतें सिखाना, उबला या साफ पानी देना और संतुलित आहार उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है। नियमित रूप से हाथ धोने की आदत भी उन्हें कई संक्रमणों से बचा सकती है। समय पर ध्यान और सही देखभाल से बच्चों को स्वस्थ और मजबूत बनाया जा सकता है।

  • गोंद कतीरा का गलत सेवन पाचन तंत्र पर डाल सकता है नकारात्मक असर..

    गोंद कतीरा का गलत सेवन पाचन तंत्र पर डाल सकता है नकारात्मक असर..

    नई दिल्ली:गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडा रखने और लू से बचाव के लिए लोग अक्सर प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं। इनमें गोंद कतीरा को विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है, जो शरीर को ठंडक देने और गर्मी के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसका गलत तरीके से सेवन करने पर यह फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है और पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    जानकारों के अनुसार सबसे बड़ी गलती यह होती है कि कई लोग गोंद कतीरा को पूरी तरह से भिगोए बिना या कम समय के लिए भिगोकर ही सेवन कर लेते हैं। यह तरीका शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकता है क्योंकि अधपका या सूखा गोंद कतीरा पेट में जाकर फूल सकता है, जिससे पेट में भारीपन, गैस, ऐंठन और अपच जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    सही तरीका यह बताया जाता है कि गोंद कतीरा को हमेशा पर्याप्त समय देकर पानी में भिगोना चाहिए। आमतौर पर एक से दो चम्मच मात्रा को रातभर लगभग आठ से दस घंटे तक पानी में रखने पर यह पूरी तरह फूलकर जेली जैसी बनावट में बदल जाता है। इसके बाद ही इसका सेवन करना सुरक्षित माना जाता है।

    भीगे हुए गोंद कतीरा को ठंडाई, शरबत, दूध या अन्य पारंपरिक पेय में मिलाकर लिया जा सकता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ साथ गर्मी से राहत पहुंचाने में भी मदद करता है। गर्म मौसम में इसका संतुलित सेवन शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में सहायक माना जाता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इसकी मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अत्यधिक सेवन करने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है और अन्य शारीरिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए सामान्य रूप से सीमित मात्रा में ही इसका उपयोग करना सुरक्षित माना जाता है।

    इसके अलावा सही तरीके से उपयोग करने पर गोंद कतीरा शरीर की ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है और कुछ हद तक जोड़ों तथा हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही विधि और संतुलित मात्रा में लिया जाए।

    गर्मियों में प्राकृतिक उपाय अपनाते समय सावधानी बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत जानकारी या गलत तरीका किसी भी फायदेमंद चीज को नुकसानदायक बना सकता है।

  • सुबह खाली पेट ये 5 मिनट का योग, पाचन से जुड़ी परेशानियों को देगा अलविदा

    सुबह खाली पेट ये 5 मिनट का योग, पाचन से जुड़ी परेशानियों को देगा अलविदा


    नई दिल्ली । आज की तेज़-तर्रार लाइफस्टाइल और अनियमित खानपान ने पेट की समस्याओं को आम बना दिया है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 की थीम “Stand with Science” के अनुसार पवनमुक्तासन एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी योगासन माना जा रहा है।

    संस्कृत में पवन का अर्थ है वायु और मुक्त का अर्थ है छोड़ना। इस आसन का उद्देश्य शरीर में फंसी हानिकारक गैस और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना है। जब आप घुटनों को धीरे-धीरे छाती की ओर दबाते हैं, तो यह पेट के अंगों पर हल्का दबाव डालता है जिससे पाचन अग्नि तेज होती है और भोजन का अवशोषण बेहतर होता है।

    पवनमुक्तासन के लाभ

    गैस, कब्ज और ब्लोटिंग से राहत – यह वात विकारों को कम करता है, पुरानी कब्ज और एसिडिटी को दूर करता है और आंतों की कार्यक्षमता बढ़ाता है।

    वेट लॉस में मदद – पेट, जांघों और कमर के आसपास की जिद्दी चर्बी कम करने में सहायक।

    पेल्विक और प्रजनन अंगों के लिए लाभकारी – महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता कम करने में मदद करता है।

    पीठ और रीढ़ की हड्डी के लिए लाभकारी – लंबे समय तक बैठने वाले लोगों के लिए रीढ़ की लचीलापन बढ़ाता है और निचले हिस्से के दर्द को कम करता है।

    कैसे करें पवनमुक्तासन

    योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।

    गहरी सांस लेते हुए दाएं घुटने को मोड़कर छाती के पास लाएं।

    हाथों की उंगलियों को जोड़कर घुटने को पकड़ें।

    सांस छोड़ते हुए सिर उठाकर नाक को घुटने से छूने की कोशिश करें।

    इसी प्रक्रिया को बाएं पैर और फिर दोनों पैरों के साथ दोहराएं।

    इसे सुबह खाली पेट करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है।

    सावधानियाँ

    उच्च रक्तचाप, हर्निया, स्लिप डिस्क या हाल ही में पेट की सर्जरी कराए लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

    गर्भवती महिलाएं इसे न करें।

    केवल 5 मिनट का यह योगासन रोजाना करने से न केवल पाचन सुधारता है बल्कि पेट, कमर और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाकर महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करता है।

  • घर पर बनाएं नींबू का चटपटा-चटकारेदार अचार: आसान और फटाफट रेसिपी

    घर पर बनाएं नींबू का चटपटा-चटकारेदार अचार: आसान और फटाफट रेसिपी


    नई दिल्ली । नींबू का अचार सिर्फ खाने का स्वाद ही बढ़ाता है बल्कि यह पाचन के लिए भी बेहद लाभकारी होता है। भारतीय खाने में अचार की खास जगह है चाहे पराठे हों या चावल दी दा अचार खाने का मज़ा दुगना कर देता है। गर्मियों में नींबू का अचार बनाना एक परंपरा जैसी हो गई है। खट्टा मीठा और मसालेदार यह अचार खाने में चटपटा और पाचन के लिए हितकारी होता है। अगर आप भी घर पर नींबू का अचार बनाना चाहते हैं तो यहां आसान रेसिपी नोट कर लें।

    सामग्री

    नींबू 500 ग्राम पतले छिलके वाले और रसीले ,नमक 50 ग्राम लगभग 4 बड़े चम्मच ,काला नमक 1 बड़ा चम्मच,लाल मिर्च पाउडर 2 बड़े चम्मच तीखापन स्वाद अनुसार ,हल्दी पाउडर 1 छोटा चम्मच,अजवाइन 1 बड़ा चम्मच हथेलियों से रगड़कर ,भुना हुआ जीरा पाउडर 1 बड़ा चम्मच,हींग आधा छोटा चम्मच

    बनाने की विधि
    नींबू की तैयारी: नींबू को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें। ध्यान रहे कि नींबू पर कोई नमी न रहे नहीं तो अचार जल्दी खराब हो सकता है। काटना: प्रत्येक नींबू को 4 या 8 टुकड़ों में काट लें। आप चाहें तो नींबू का रस अंदर ही रहने दें या थोड़ा रस अलग से निचोड़कर ऊपर डाल सकते हैं। मसाले मिलाना: एक बड़े सूखे बर्तन में नींबू के टुकड़े डालें। अब इसमें नमक काला नमक हल्दी लाल मिर्च पाउडर अजवाइन जीरा पाउडर और हींग डालें।

    मिक्स करना: चम्मच या हाथों से नींबू और मसालों को अच्छे से मिलाएं ताकि हर टुकड़े पर मसाला लग जाए। अगर आप खट्टा मीठा स्वाद चाहते हैं तो इस समय थोड़ा गुड़ या चीनी भी मिला सकते हैं। धूप दिखाना: तैयार अचार को एक कांच के सूखे जार में भरें। इसे 4 5 दिनों तक धूप में रखें। दिन में एक बार जार को हल्का हिलाएं ताकि मसाले और रस अच्छी तरह मिल जाए। इस तरह आपका चटपटा और चटकारेदार नींबू का अचार तैयार हो जाएगा। इसे पराठे चावल या स्नैक्स के साथ परोसें और खाने का स्वाद दोगुना करें।

  • सुबह उठते ही मुंह का खट्टा या कड़वा स्वाद पेट की बीमारी का संकेत हो सकता है जानिए कारण और उपाय

    सुबह उठते ही मुंह का खट्टा या कड़वा स्वाद पेट की बीमारी का संकेत हो सकता है जानिए कारण और उपाय


    नई दिल्ली।सुबह की शुरुआत आमतौर पर ताजगी और ऊर्जा से भरी होती है क्योंकि रात के समय शरीर खुद को संतुलित करता है लेकिन यदि सुबह उठते ही मुंह में खट्टा या कड़वा स्वाद महसूस हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए यह स्वाद पेट से जुड़ी किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता हैविशेषज्ञों के अनुसार मुंह से जुड़ी अधिकतर परेशानियों का सीधा संबंध पेट से होता है यदि पाचन तंत्र ठीक है तो मुंह में दुर्गंध या कड़वापन जैसी समस्याएं अपने आप कम हो जाती हैं लेकिन यदि यह परेशानी रोजाना हो रही है तो यह पेट में एसिड बढ़ने का संकेत हो सकता है

    आधुनिक चिकित्सा में इस स्थिति को एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है जबकि आयुर्वेद इसे पित्त दोष की वृद्धि से जोड़कर देखता है आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में पित्त असंतुलित होता है तो अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है जिससे पेट की समस्याओं के साथ साथ हड्डियों और जोड़ों में भी कमजोरी आने लगती है मुंह के खट्टे या कड़वे स्वाद के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे देर रात भोजन करना शराब और तंबाकू का सेवन लिवर का सही तरीके से काम न करना पाचन अग्नि का कमजोर पड़ जाना और लंबे समय तक भूखा रहना गलत खान पान की आदतें भी पेट में एसिड बढ़ाने का बड़ा कारण बनती हैं

    आयुर्वेद में इस समस्या के प्रभावी समाधान बताए गए हैं पेट से जुड़ी गड़बड़ियों को दूर करने के लिए त्रिफला चूर्ण को बेहद लाभकारी माना गया है रात को गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण लेने से सुबह पेट साफ रहता है और पित्त शांत होता हैखान पान की समय सारिणी में बदलाव करना भी जरूरी है देर रात भोजन करने से बचें और सूर्यास्त के आसपास खाना खा लें भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचें कुछ देर टहलें और सोते समय बाईं करवट लें विज्ञान भी मानता है कि बाईं करवट सोने से पेट का एसिड ऊपर की नली में नहीं चढ़ता और हृदय तक रक्त प्रवाह बेहतर रहता है

    तांबे के बर्तन में रखा पानी पेट के अम्ल को शांत करने में मदद करता है इसकी तासीर ठंडी होती है और यह शरीर को डिटॉक्स भी करता है इसके अलावा सौंफ और मिश्री का सेवन या उनका पानी पीने से पाचन सुधरता है और मुंह की दुर्गंध भी कम होती हैविशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अत्यधिक तनाव और चिंता से पेट में एसिड का उत्पादन सामान्य से कई गुना बढ़ जाता है इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना भी पेट की सेहत के लिए बेहद जरूरी है