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  • योगी सरकार ने शुरू की जनगणना-2027 की ऐतिहासिक शुरुआत, डिजिटल और जातीय गणना से बदलेगा विकास का चेहरा

    योगी सरकार ने शुरू की जनगणना-2027 की ऐतिहासिक शुरुआत, डिजिटल और जातीय गणना से बदलेगा विकास का चेहरा



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनगणना-2027 के प्रथम चरण की शुरुआत करते हुए इसे देश के समग्र और सुनियोजित विकास की मजबूत आधारशिला बताया। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने “हमारी जनगणना, हमारा विकास” के संकल्प के साथ मकान सूचीकरण और गणना कार्य का शुभारंभ किया।

    जनगणना को बताया विकास का आधार
    सीएम योगी ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या का आंकलन नहीं, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और सामाजिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का आधार है। उन्होंने कहा कि सटीक डेटा से ही अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाया जा सकता है।

    पहली बार डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया
    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना की जा रही है। इसके तहत 7 से 21 मई 2026 तक नागरिकों को स्वगणना (self-enumeration) की सुविधा दी गई है, जिसमें लोग ऑनलाइन अपने विवरण दर्ज कर सकेंगे।इसके बाद जनगणना कर्मी घर-घर जाकर सत्यापन और सूचीकरण करेंगे, जबकि दूसरे चरण में व्यक्तिगत जनगणना की जाएगी।

    जातीय गणना और वन ग्राम भी शामिल
    सीएम योगी ने कहा कि इस बार जनगणना में पहली बार जातीय गणना को भी शामिल किया गया है। साथ ही वन ग्रामों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जिससे व्यापक और समावेशी डेटा तैयार किया जा सके।

    विशाल स्तर पर होगा कार्य
    उन्होंने बताया कि यह कार्य उत्तर प्रदेश के 75 जिलों, 18 मंडलों, 350 तहसीलों और हजारों ग्राम व नगर निकायों में किया जाएगा। इस प्रक्रिया में करीब 5.25 लाख कर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें प्रगणक, सुपरवाइजर और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री की अपील
    योगी आदित्यनाथ ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे जनगणना को राष्ट्रीय दायित्व समझकर इसमें पूरी भागीदारी करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।जनगणना-2027 का यह डिजिटल और विस्तृत मॉडल भारत में डेटा आधारित प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे विकास योजनाओं को और अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

  • डिजिटल जनगणना की शुरुआत, एमपी में 16 से 30 अप्रैल तक स्व गणना अभियान शुरू

    डिजिटल जनगणना की शुरुआत, एमपी में 16 से 30 अप्रैल तक स्व गणना अभियान शुरू


    भोपाल । मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ हो गया है जहां मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे राष्ट्र और प्रदेश के विकास की नींव बताते हुए नागरिकों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की है। राजधानी भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ऑनलाइन स्व गणना प्रक्रिया की शुरुआत की और स्वयं पोर्टल पर पंजीकरण कर इस अभियान का शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि जनगणना केवल आंकड़ों को इकट्ठा करने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह देश के भविष्य को दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके पीछे उपलब्ध आंकड़े कितने सटीक और व्यापक हैं। ऐसे में जनगणना देश की रीढ़ के समान है जो विकास की पूरी संरचना को मजबूती प्रदान करती है।

    प्रदेश में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक ऑनलाइन स्व गणना का कार्य किया जाएगा जिसमें नागरिक स्वयं अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 1 मई से 30 मई तक मकान सूचीकरण की प्रक्रिया चलेगी जो पूरी तरह आधुनिक तकनीक के माध्यम से संचालित होगी। इस बार की जनगणना को विशेष रूप से डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है ताकि आंकड़ों की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह जनगणना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाने का आधार बनेगी। इसके जरिए यह समझा जा सकेगा कि विकास की योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रही हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में पूरी ईमानदारी और सटीकता के साथ अपनी जानकारी दर्ज करें ताकि सही आंकड़ों के आधार पर योजनाएं तैयार की जा सकें।

    उन्होंने जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे राष्ट्र निर्माण का एक पवित्र दायित्व निभा रहे हैं। उनका परिश्रम और सटीक कार्य देश के विकास को नई दिशा देगा। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति भी रही जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई।

    डिजिटल तकनीक के इस व्यापक उपयोग के साथ मध्यप्रदेश में जनगणना की यह प्रक्रिया न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगी बल्कि नागरिकों की भागीदारी को भी आसान बनाएगी। अब यह देखना अहम होगा कि प्रदेश के लोग इस पहल में कितनी सक्रियता से हिस्सा लेते हैं और इसे कितना सफल बनाते हैं।