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  • कैलाश खेर के नाम पर संगीत सहयोग का झांसा देकर लाखों की ठगी का आरोप..

    कैलाश खेर के नाम पर संगीत सहयोग का झांसा देकर लाखों की ठगी का आरोप..


    नई दिल्ली।मनोरंजन जगत से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर के नाम का गलत इस्तेमाल कर एक गीतकार से लाखों रुपये की ठगी किए जाने का आरोप लगाया गया है। यह मामला न केवल डिजिटल भरोसे की कमजोरी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह पहचान और प्रसिद्ध हस्तियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को आसानी से निशाना बनाया जा रहा है।

    संगीत सहयोग के नाम पर रची गई ठगी की योजना
    पीड़ित गीतकार चैतन्य गोविंद कन्हैया, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और वर्तमान में मुंबई में रहते हैं, एक परिचित के माध्यम से आरोपी से जुड़े थे। आरोपी ने खुद को ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जो कैलाश खेर से उनका गाना रिकॉर्ड करवा सकता है। शुरुआती बातचीत के दौरान कुछ ऐसी स्थितियां बनाई गईं जिससे पीड़ित का विश्वास धीरे धीरे मजबूत होता गया और उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि यह अवसर पूरी तरह वास्तविक है।

    ऑनलाइन बातचीत और मुलाकात से बढ़ा भरोसा
    आरोपी ने कथित रूप से पीड़ित की ऑनलाइन बातचीत एक ऐसे व्यक्ति से करवाई, जिसे कैलाश खेर बताया गया। बातचीत के दौरान यह आश्वासन दिया गया कि आगे की प्रक्रिया उनके मैनेजर के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके बाद दोनों के बीच व्यक्तिगत मुलाकात भी हुई, जहां रिकॉर्डिंग और कॉन्ट्रैक्ट को अंतिम रूप देने के नाम पर वित्तीय मांग की गई। इस दौरान पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि यह एक पेशेवर संगीत प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

    एडवांस भुगतान के बाद टूटा भरोसा
    विश्वास में आकर पीड़ित ने आरोपी द्वारा बताए गए खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। भुगतान के बाद आरोपी ने संपर्क बनाए रखना बंद कर दिया। जब पीड़ित ने दबाव बनाना शुरू किया, तो उन्हें एक चेक दिया गया जो बाद में बाउंस हो गया। इस घटना के बाद उन्हें संदेह हुआ और जब उन्होंने वास्तविक मैनेजमेंट टीम से संपर्क किया, तो सामने आया कि इस तरह की किसी भी परियोजना या बातचीत की कोई पुष्टि नहीं थी।

    पुलिस में शिकायत और जांच शुरू
    सच्चाई सामने आने के बाद पीड़ित ने संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस तरह की ठगी में और कौन कौन शामिल हो सकता है।

    डिजिटल युग में बढ़ते फ्रॉड पर चेतावनी
    यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि डिजिटल और पेशेवर संपर्कों में बिना पूरी पुष्टि के किसी भी वित्तीय लेनदेन से बचना चाहिए। खासकर जब मामला किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ा हो, तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है।

  • RBI ने जारी किया ‘कस्टमर लायबिलिटी फ्रेमवर्क’, डिजिटल भुगतान सुरक्षित बनाने बड़ा कदम

    नई दिल्ली में डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ग्राहकों को सुरक्षा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पेश किया है। इस प्रस्तावित नियम के तहत यदि किसी ग्राहक के साथ डिजिटल ट्रांजैक्शन के दौरान धोखाधड़ी होती है और वह इसे समय पर बैंक या संबंधित संस्था को सूचित करता है, तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये तक मुआवजा मिल सकता है।

    आरबीआई ने इसे कस्टमर लायबिलिटी इन डिजिटल ट्रांजैक्शंस नाम से जारी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल भुगतान में होने वाली धोखाधड़ी से ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाना और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज करना है। केंद्रीय बैंक ने इस मसौदे पर आम जनता, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से 6 अप्रैल 2026 तक सुझाव मांगे हैं।

    ड्राफ्ट के अनुसार यदि किसी ग्राहक के साथ 50,000 रुपये तक का डिजिटल फ्रॉड होता है और वह तुरंत इसकी सूचना देता है, तो उसे नुकसान की राशि का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25,000 रुपये (जो भी कम हो) वापस मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर 10,000 रुपये के फ्रॉड पर लगभग 8,500 रुपये और 40,000 रुपये के फ्रॉड पर अधिकतम सीमा के कारण 25,000 रुपये वापस मिलेंगे।

    आरबीआई का मानना है कि इस व्यवस्था से ग्राहकों का भरोसा डिजिटल भुगतान प्रणाली पर बढ़ेगा। ड्राफ्ट का प्रस्ताव है कि मुआवजा व्यवस्था लागू होने के एक वर्ष तक प्रभावी रहे और इसके बाद अनुभव और प्रतिक्रिया के आधार पर समीक्षा की जाए।

    केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा नियम 2017 में जारी किए गए थे। तब से डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल पेमेंट और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के तरीके काफी बदल चुके हैं। साथ ही साइबर अपराध और इलेक्ट्रॉनिक फ्रॉड के नए प्रकार तेजी से बढ़े हैं। पुराने नियमों को अपडेट करने की जरूरत इसलिए महसूस की गई।

    ड्राफ्ट फ्रेमवर्क का एक अहम उद्देश्य यह भी है कि शिकायतों के निपटारे में लगने वाले समय को कम किया जाए। कई मामलों में ग्राहकों को धोखाधड़ी के बाद अपनी राशि वापस पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। नए नियम लागू होने के बाद बैंकों और वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी और शिकायत निपटान तेजी से होगा।

    आरबीआई ने मसौदा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किया है। बैंक, एनबीएफसी और आम नागरिक ईमेल के माध्यम से सुझाव भेज सकते हैं। सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे। यह कदम देश के डिजिटल भुगतान तंत्र को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • डिजिटल फ्रॉड के शिकार हुए तो मिलेगी राहत, RBI देगा 25 हजार रुपये तक का मुआवजा

    डिजिटल फ्रॉड के शिकार हुए तो मिलेगी राहत, RBI देगा 25 हजार रुपये तक का मुआवजा

    नई दिल्ली। देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के मामलों के बीच आम बैंक ग्राहकों को राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। अब यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है।

    दरअसल, इसी साल फरवरी में RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए ग्राहकों को सुरक्षा देने के लिए इस योजना की घोषणा की थी। इसके तहत धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन की स्थिति में पीड़ित ग्राहक को शर्तों के साथ मुआवजा दिया जाएगा।

    एक बार ही मिलेगा मुआवजा

    RBI के प्रस्ताव के मुताबिक किसी ग्राहक को जीवन में केवल एक बार ही यह क्षतिपूर्ति दी जाएगी। यह भी तभी संभव होगा जब जांच में यह पाया जाए कि धोखाधड़ी जानबूझकर नहीं हुई और ग्राहक ने अनजाने में अपना पैसा गंवाया है।

    गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि अगर किसी ग्राहक के साथ धोखाधड़ी हो जाती है, चाहे उसमें उसकी गलती हो या किसी और की, तब भी बिना ज्यादा सवाल पूछे 25,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है, बशर्ते ट्रांजैक्शन अनजाने में हुआ हो।

    ग्राहक को भी उठाना होगा कुछ नुकसान

    प्रस्ताव के अनुसार धोखाधड़ी की कुल राशि का 15 प्रतिशत हिस्सा खाताधारक को खुद वहन करना होगा। वहीं, अगर ठगी की रकम इससे ज्यादा है, तब भी मुआवजे की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये ही रहेगी।

    कब से लागू होगा नियम

    यह प्रस्तावित नियम 1 जुलाई 2026 या उसके बाद किए गए इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर लागू होंगे। केंद्रीय बैंक ने इस मसौदे पर 6 अप्रैल 2026 तक सभी हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।

    मुआवजा पाने के लिए जरूरी शर्त

    इस योजना का लाभ लेने के लिए पीड़ित ग्राहक को

    धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन की जानकारी अपने बैंक को देनी होगी

    साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करनी होगी

    यह शिकायत 5 कैलेंडर दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा

    ग्राहक सुरक्षा नियमों में भी बदलाव

    RBI ने डिजिटल बैंकिंग में ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नियमों में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव भी दिया है। ड्राफ्ट के अनुसार OTP, PIN, CVV, पासवर्ड या अन्य इलेक्ट्रॉनिक ऑथेंटिकेशन के जरिए मंजूर किए गए ट्रांजैक्शन को अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन माना जाएगा।

    इसमें ऐसे मामलों को भी शामिल किया जाएगा, जहां ठग खुद को वैध प्राप्तकर्ता बताकर या दबाव बनाकर ग्राहकों से पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।
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