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  • मध्य प्रदेश डिजिटल गवर्नेंस में देश में दूसरा स्थान पर, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

    मध्य प्रदेश डिजिटल गवर्नेंस में देश में दूसरा स्थान पर, मुख्यमंत्री ने दी बधाई


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश ने डिजिटल सेवाओं के मामले में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन (एनईएसडीए) रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश ने 1,752 ई-सेवाओं के साथ डिजिटल सेवाएं प्रदान कर देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डिजिटल गवर्नेंस में मध्य प्रदेश के देश में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि हमारे सद्प्रयासों को अब राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है। यह उपलब्धि सुशासन, पारदर्शिता, जनहितैषी और नागरिक-केंद्रित नीतियों के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस में मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन के मानकों के अनुसार यह महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश ने 1,752 ई-सेवाओं के साथ डिजिटल सेवाएं प्रदान करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल होकर पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद गर्व का विषय है कि प्रदेश में 59 अनिवार्य सेवाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है।

    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 1,752 ई-सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन दी जा रही हैं, जिससे लोगों को सरकारी काम के लिए दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ रहे हैं। खास बात यह है कि 59 अनिवार्य सेवाओं को 100 प्रतिशत लागू भी किया गया है। प्रदेश में डिजिटल सेवाओं के विस्तार में काफी तेजी दिखाई है। अब गांव से लेकर शहर तक लोग ऑनलाइन ही कई जरूरी काम आसानी से कर पा रहे हैं, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है।

    राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, ई-सेवाओं की संख्या के आधार पर कर्नाटक ने 2,102 सेवाओं के साथ पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि 1,752 सेवाओं के साथ मध्य प्रदेश दूसरे, 1,645 सेवाओं के साथ छत्तीसगढ़ तीसरे और 1,634 ई-सेवाओं के साथ तमिलनाडु चौथे स्थान पर है।

  • अस्पताल के चक्कर से मिलेगी राहत मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा फैसला जन्म प्रमाण पत्र अब सीधे वॉट्सएप पर

    अस्पताल के चक्कर से मिलेगी राहत मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा फैसला जन्म प्रमाण पत्र अब सीधे वॉट्सएप पर


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश सरकार अब आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा और आधुनिक कदम उठाने जा रही है जिसके तहत जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल स्वरूप दिया जाएगा इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद लोगों को अस्पतालों में लंबी लाइनों में खड़े रहने या बार बार चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि अब महज सात दिनों के भीतर जन्म प्रमाण पत्र सीधे वॉट्सएप के माध्यम से घर बैठे प्राप्त किया जा सकेगा

    यह नई पहल फिलहाल भोपाल के हमीदिया अस्पताल में प्रयोग के तौर पर शुरू की गई थी जहां इसे लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली जिसके बाद सरकार ने इसे पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है इस मॉडल के तहत जन्म के तुरंत बाद अस्पताल द्वारा आवश्यक जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होते ही प्रमाण पत्र सीधे परिजनों के मोबाइल पर भेज दिया जाएगा

    नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो जाएगी अब तक जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए परिजनों को कई बार अस्पताल जाना पड़ता था आवेदन की स्थिति जानने के लिए अलग से प्रयास करने पड़ते थे और कई बार अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता था लेकिन इस डिजिटल मॉडल के लागू होने के बाद यह सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगी और पूरी प्रक्रिया सरल और सुगम बन जाएगी

    सरकार का मानना है कि इस पहल से विशेष रूप से नवजात शिशुओं के माता पिता को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि बच्चे के जन्म के बाद कई अन्य जिम्मेदारियों के बीच दस्तावेजी प्रक्रिया एक बड़ी चुनौती बन जाती थी अब यह काम बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के स्वतः पूरा हो जाएगा और प्रमाण पत्र समय पर उपलब्ध हो जाएगा

    इसके साथ ही यह पहल डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी क्योंकि इससे सरकारी सेवाओं को तकनीक के माध्यम से सीधे नागरिकों तक पहुंचाने का उद्देश्य साकार होगा नई व्यवस्था लागू होने के बाद न केवल सरकारी बल्कि निजी अस्पतालों में भी जन्म पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो जाएगी

    यह कदम प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने के साथ साथ नागरिकों के समय और संसाधनों की भी बचत करेगा साथ ही भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी जैसी समस्याओं पर भी अंकुश लगेगा कुल मिलाकर मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल शासन व्यवस्था को आधुनिक और जनहितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है अब देखना यह होगा कि इसे पूरे प्रदेश में कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ लागू किया जाता है और आम लोगों को इसका कितना लाभ मिल पाता है

  • मध्य प्रदेश पुलिस को डिजिटल गवर्नेंस में मिला राष्ट्रीय सम्मान

    मध्य प्रदेश पुलिस को डिजिटल गवर्नेंस में मिला राष्ट्रीय सम्मान


    भोपाल।
    डिजिटल गवर्नेंस, तकनीक आधारित पुलिसिंग एवं नागरिक सेवा वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए मध्य प्रदेश पुलिस को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित ‘आईटी इंप्लीमेंटेशन फार गवर्नेंस एंड पब्लिक सर्विस डिलेवरी’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

    यह सम्मान रविवार को आयोजित प्रौद्योगिकी सभा पुरस्कार समारोह में सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभावी क्रियान्वयन, नवाचार आधारित प्रशासनिक सुधार तथा नागरिक-केंद्रित सेवाओं को बढ़ावा देने हेतु प्रदान किया गया। मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (एससीआरबी) जयदीप प्रसाद ने यह पुरस्कार प्राप्त किया। समारोह में यह सम्मान एक्सप्रेस कंप्यूटर के एडिटर आरपी श्रीकांत द्वारा प्रदान किया गया।

    डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के माध्यम से सेवा वितरण में सुधार

    पुलिस मुख्यालय द्वारा जानकारी दी गई कि मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी को पुलिस कार्यप्रणाली के विभिन्न आयामों में समाहित करते हुए नागरिक सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ, जवाबदेह एवं समयबद्ध बनाया गया है। राज्य में विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से नागरिकों को पुलिस सेवाओं तक आसान एवं त्वरित पहुंच सुनिश्चित की गई है। ऑनलाइन नागरिक पोर्टल, डिजिटल शिकायत पंजीकरण प्रणाली, विभिन्न सत्यापन सेवाएं तथा अन्य नागरिक उन्मुख सुविधाओं के माध्यम से सेवा वितरण प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी बनाया गया है, जिससे आमजन को त्वरित एवं विश्वसनीय सेवाएं प्राप्त हो रही हैं।

    तकनीक आधारित प्रशासनिक दक्षता एवं पारदर्शिता

    बताया गया कि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, डेटा इंटीग्रेशन एवं तकनीक आधारित मॉनिटरिंग तंत्र के माध्यम से पुलिस प्रशासन की कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। डेटा आधारित विश्लेषण प्रणाली ने अपराध विश्लेषण, सूचना प्रबंधन तथा निर्णय प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक एवं परिणामोन्मुख बनाया है। इन पहलों से सेवा प्रदाय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है, जवाबदेही सुनिश्चित हुई है तथा नागरिकों एवं पुलिस के बीच विश्वास और सहभागिता को मजबूती मिली है।

    सुशासन एवं नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग की दिशा में पहल

    मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा अपनाया गया डिजिटल गवर्नेंस मॉडल प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण, सेवा वितरण की गति में वृद्धि तथा नागरिक सुविधा को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। तकनीक आधारित समाधान न केवल पुलिस सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार कर रहे हैं, बल्कि शासन प्रणाली को अधिक उत्तरदायी एवं पारदर्शी बनाने में भी सहायक सिद्ध हो रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार से नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर प्रबंधन एवं कार्यप्रणाली के मानकीकरण को भी बढ़ावा मिला है।

    राष्ट्रीय स्तर पर नवाचारों की मान्यता

    Technology Sabha Awards देशभर में शासन एवं सार्वजनिक सेवा वितरण में सूचना प्रौद्योगिकी के उत्कृष्ट उपयोग को सम्मानित करने वाला प्रतिष्ठित मंच है। इस मंच पर मध्यप्रदेश पुलिस को प्राप्त यह सम्मान राज्य में लागू डिजिटल पहलों की प्रभावशीलता, नवाचार क्षमता एवं सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता का राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण है।

    स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में निरंतर प्रयास

    मध्य प्रदेश पुलिस तकनीकी नवाचारों के माध्यम से “स्मार्ट पुलिसिंग”, ई-गवर्नेंस तथा नागरिक-केंद्रित सेवा मॉडल को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। डिजिटल नवाचारों के माध्यम से पुलिस सेवाओं को आधुनिक, पारदर्शी एवं जनोन्मुख बनाते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप पुलिसिंग प्रणाली विकसित की जा रही है। यह सम्मान सम्पूर्ण मध्य प्रदेश पुलिस परिवार के सामूहिक प्रयास, नवाचार भावना एवं जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक है। मध्य प्रदेश पुलिस भविष्य में भी तकनीकी उत्कृष्टता एवं नागरिक हित सर्वोपरि के सिद्धांतों के साथ सेवा प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध रहेगी।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026’ में होंगे शामिल, वैश्विक टेक कंपनियों से करेंगे वन-टू-वन चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026’ में होंगे शामिल, वैश्विक टेक कंपनियों से करेंगे वन-टू-वन चर्चा


    भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार 20 फरवरी को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। समिट में वे उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा में शामिल होकर राज्य स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई के उपयोग से आर्थिक विकास को गति देने, डिजिटल सुशासन को मजबूत बनाने और अत्याधुनिक अवसंरचना विकसित करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में एआई कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा संरचना, क्लाउड इकोसिस्टम, जनरेटिव एआई एकीकरण और डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर चर्चा होगी। साथ ही एडवांस्ड सेमीकंडक्टर एक्सीलरेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर विकास और सॉवरेन एआई मॉडलिंग जैसे अत्याधुनिक विषयों पर भी मंथन किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री टियर-2 शहरों से उभर रहे स्टार्ट-अप्स और नवप्रवर्तकों से भी मुलाकात करेंगे। वे एआई आधारित समाधानों पर काम कर रहे युवा उद्यमियों के नवाचारों की जानकारी लेकर उन्हें प्रोत्साहित करेंगे। इससे राज्य में तकनीकी नवाचार और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

    समिट में मध्यप्रदेश का विशेष पवेलियन हॉल-4, प्रथम तल, बूथ संख्या 4F-32 और 4F-34 में AI सशक्त भारत के लिए सक्षम शासन थीम पर स्थापित किया गया है। इस पवेलियन में 14 एआई स्टार्ट-अप, IIT Indore, आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन सहित शैक्षणिक संस्थान और चार प्रमुख शासकीय विभाग भाग ले रहे हैं। यहां शासन में लागू किए जा चुके एआई समाधानों को प्रदर्शित किया जा रहा है, जो पारदर्शिता बढ़ाने, समयबद्ध सेवा वितरण और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली को सशक्त बनाने में सहायक हैं।

    मध्यप्रदेश का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, एमपीएसईडीसी के सहयोग से, इस राष्ट्रीय मंच पर राज्य की योजनाबद्ध और लक्ष्य-आधारित एआई पहलों को प्रस्तुत कर रहा है। मुख्यमंत्री का मानना है कि एआई तकनीक के प्रभावी उपयोग से मध्यप्रदेश आर्थिक प्रगति, निवेश आकर्षण और सुशासन के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।