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  • फ्री नहीं रहने वाला डिजिटल पेमेंट…. UPI से लेनदेन पर लगेगा शुल्क! संसद में आया बिल

    फ्री नहीं रहने वाला डिजिटल पेमेंट…. UPI से लेनदेन पर लगेगा शुल्क! संसद में आया बिल


    नई दिल्ली।
    मोदी सरकार (Modi Government) ने अपनी लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface-UPI) सिस्टम पर व्यापारियों से शुल्क वसूलने की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है। मंगलवार को संसद (Parliament) में भुगतान कानूनों में प्रस्तावित बदलाव पेश किए गए, जिससे यह संभावना और बढ़ गई है। हालांकि यह शुल्क व्यापारियों पर लगेगा, ग्राहकों पर नहीं, फिर भी यह बदलाव डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) को प्रभावित कर सकता है।

    जानकारी के मुताबिक नीति निर्माता दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। पहला विकल्प है कि एक निश्चित राशि से अधिक के लेनदेन पर MDR लगाया जाए। दूसरा विकल्प है कि व्यापारी के वार्षिक कारोबार के आधार पर शुल्क तय किया जाए। सूत्रों के अनुसार, एक प्रस्ताव के तहत केवल बड़े व्यापारियों से शुल्क लिया जाएगा, जबकि उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए UPI भुगतान मुफ्त रहेगा।


    कितना लग सकता है चार्ज

    सरकारी सूत्र के अनुसार, एक प्रस्ताव में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक सालाना कारोबार वाले व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% MDR लगाने की बात कही गई है। जेफरीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन व्यापारियों की कुल लेनदेन संख्या का केवल 4% हैं, लेकिन कुल लेनदेन मूल्य का लगभग 67% इन्हीं से आता है।


    संशोधन विधेयक पेश

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन विधेयक पेश किया। उद्योग और नियामक सूत्रों के अनुसार, इस संशोधन से डिजिटल पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का कानूनी आधार बनेगा।

    हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि शुल्क कितना होगा और यह किन लेनदेन पर लागू होगा। सरकारी सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी। वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक और राष्ट्रीय भुगतान निगम ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।


    UPI का बाजार में दबदबा

    UPI दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्कों में से एक है। जुलाई में इसके जरिए 23.6 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये वॉलमार्ट की फोनपे और गूगल की गूगल पे इस सिस्टम पर हावी हैं।


    फ्री UPI पर क्यों लगने जा रहा लगाम

    रॉयटर्स के मुताबिक उद्योग के अधिकारियों का लंबे समय से कहना है कि डिजिटल पेमेंट में ग्रोथ को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि UPI ट्रांजैक्शन पर पेमेंट कंपनियों को कोई शुल्क नहीं मिलता। इससे उनकी निवेश करने की क्षमता सीमित हो जाती है।


    MDR क्या होता है?

    MDR वह शुल्क है, जो व्यापारी बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के लिए देते हैं। भारत में क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर लगभग 1.5% MDR लगता है, जबकि डेबिट कार्ड पर 0.9% तक का शुल्क होता है, लेकिन UPI लेनदेन पर अभी व्यापारियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

  • UPI का दबदबा कायम, जुलाई में रिकॉर्ड 23.66 अरब ट्रांजैक्शन से डिजिटल पेमेंट ने पकड़ी नई रफ्तार

    UPI का दबदबा कायम, जुलाई में रिकॉर्ड 23.66 अरब ट्रांजैक्शन से डिजिटल पेमेंट ने पकड़ी नई रफ्तार


    नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में यूपीआई के माध्यम से किए गए लेनदेन की संख्या में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान कुल 23.66 अरब यानी 2366 करोड़ से ज्यादा यूपीआई ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए। वहीं, इन डिजिटल लेनदेन का कुल मूल्य 19 प्रतिशत बढ़कर 29.88 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

    आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई महीने में हर दिन औसतन 76.3 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन किए गए। वहीं, प्रतिदिन औसतन 96,383 करोड़ रुपए का डिजिटल भुगतान यूपीआई प्लेटफॉर्म के जरिए हुआ। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में लोग तेजी से नकदी आधारित भुगतान से डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ रहे हैं।

    इससे पहले जून 2026 में भी यूपीआई ने शानदार प्रदर्शन किया था। जून में यूपीआई के जरिए 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे, जो पिछले साल की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक थे। इस दौरान कुल लेनदेन राशि 28.92 लाख करोड़ रुपए रही थी। जून में रोजाना औसतन 75.7 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे।

    सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत आधार बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2021-22 में यूपीआई के जरिए 4,595.61 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनका कुल मूल्य 84.16 लाख करोड़ रुपए था। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 में लेनदेन की संख्या बढ़कर 8,371.44 करोड़ और कुल मूल्य 139.15 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया।

    वित्त वर्ष 2023-24 में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 13,112.95 करोड़ रही, जबकि कुल लेनदेन मूल्य 199.95 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यूपीआई के जरिए 18,586.60 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए और इनका कुल मूल्य बढ़कर 260.56 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

    डिजिटल भुगतान के इस विस्तार को भारत की वित्तीय समावेशन नीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। यूपीआई ने छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े कारोबारियों तक भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाया है। मोबाइल फोन के जरिए कुछ सेकंड में होने वाले भुगतान ने देश में डिजिटल लेनदेन की संस्कृति को तेजी से बढ़ावा दिया है।

    वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने हाल ही में लोकसभा में बताया था कि एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) भारत की डिजिटल भुगतान तकनीक को दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। एनआईपीएल कई देशों के साथ साझेदारी कर भारतीय भुगतान प्रणाली के वैश्विक विस्तार को बढ़ावा दे रही है।

    इन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के चलते भारतीय नागरिक विदेशों में भी यूपीआई आधारित भुगतान कर पा रहे हैं। साथ ही, अन्य देशों को भी रियल टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित करने में मदद मिल रही है। वर्तमान में यूपीआई संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका समेत आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है।

    तेजी से बढ़ते यूपीआई उपयोग से साफ है कि भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी मजबूत स्थिति बना रहा है। आने वाले समय में यूपीआई के और अधिक देशों तक विस्तार की संभावना है, जिससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • डिजिटल भारत की नई रफ्तार: अब टोल कटेगा ऑटोमैटिक, न रुकना पड़ेगा न कतार में लगना होगा

    डिजिटल भारत की नई रफ्तार: अब टोल कटेगा ऑटोमैटिक, न रुकना पड़ेगा न कतार में लगना होगा

    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाला समय एक बड़े तकनीकी बदलाव का संकेत लेकर आ रहा है। देश में टोल प्लाजा व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और बाधारहित बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। इस नई व्यवस्था के तहत अब वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और न ही लंबी कतारों का सामना करना पड़ेगा। पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक तकनीक पर आधारित होगा, जिससे यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज हो जाएगी।
    नई व्यवस्था में FASTag और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अहम भूमिका होगी। अभी तक टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के पास रुककर स्कैनिंग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, लेकिन भविष्य की प्रणाली में इन भौतिक बाधाओं को हटाया जा रहा है। हाईवे पर लगाए जाने वाले हाई-टेक कैमरे और सेंसर तेज रफ्तार में गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट और फास्टैग को तुरंत पहचान लेंगे। जैसे ही वाहन निर्धारित क्षेत्र से गुजरेंगे, टोल शुल्क अपने आप जुड़े बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से कट जाएगा। यह प्रक्रिया इतनी तेज होगी कि ड्राइवर को इसका अनुभव भी लगभग नहीं होगा।
    इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत और ईंधन की खपत में कमी के रूप में सामने आएगा। बार-बार रुकने और चलने की प्रक्रिया खत्म होने से ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी। साथ ही, राजमार्गों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और मैनुअल हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा।
    नई प्रणाली के साथ नियमों को भी और सख्त बनाया गया है। अब टोल भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यमों पर आधारित होगा। नकद भुगतान का विकल्प धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। यदि किसी वाहन में वैध फास्टैग नहीं है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो चालक को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में टोल प्लाजा पर प्रवेश भी रोका जा सकता है। इसके अलावा UPI आधारित QR कोड स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक भुगतान संभव हो सके।
    हालांकि, इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य पूरे हाईवे नेटवर्क को कैशलेस और पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इससे न केवल लेनदेन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि यात्रा प्रणाली भी अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनेगी। लेकिन यह भी सच है कि जिन लोगों के पास डिजिटल साधनों की सुविधा नहीं है, उन्हें शुरुआती दौर में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
    यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने फास्टैग को सक्रिय और अपडेट रखें। इसके साथ ही बैंक खाते से लिंकिंग और पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए UPI एप्लिकेशन तैयार रखना भी आवश्यक माना जा रहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में भुगतान में बाधा न आए।
    इस पूरी पहल का उद्देश्य केवल टोल संग्रह को सरल बनाना नहीं है, बल्कि देश के राजमार्गों को एक स्मार्ट और फ्यूचर-रेडी सिस्टम में बदलना है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय परिवहन प्रणाली को एक नई दिशा देगी, जहां यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि पूरी तरह डिजिटल और व्यवस्थित भी होगी।
  • MP क्रूज हादसा: 29 यात्रियों की नाव पलटी, 9 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी..

    MP क्रूज हादसा: 29 यात्रियों की नाव पलटी, 9 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी..


    नई दिल्ली।
    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाला समय एक बड़े तकनीकी बदलाव का संकेत लेकर आ रहा है। देश में टोल प्लाजा व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और बाधारहित बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। इस नई व्यवस्था के तहत अब वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और न ही लंबी कतारों का सामना करना पड़ेगा। पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक तकनीक पर आधारित होगा, जिससे यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज हो जाएगी।

    नई व्यवस्था में FASTag और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अहम भूमिका होगी। अभी तक टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के पास रुककर स्कैनिंग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, लेकिन भविष्य की प्रणाली में इन भौतिक बाधाओं को हटाया जा रहा है।

    हाईवे पर लगाए जाने वाले हाई-टेक कैमरे और सेंसर तेज रफ्तार में गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट और फास्टैग को तुरंत पहचान लेंगे। जैसे ही वाहन निर्धारित क्षेत्र से गुजरेंगे, टोल शुल्क अपने आप जुड़े बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से कट जाएगा। यह प्रक्रिया इतनी तेज होगी कि ड्राइवर को इसका अनुभव भी लगभग नहीं होगा।

    इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत और ईंधन की खपत में कमी के रूप में सामने आएगा। बार-बार रुकने और चलने की प्रक्रिया खत्म होने से ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी। साथ ही, राजमार्गों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और मैनुअल हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा।

    नई प्रणाली के साथ नियमों को भी और सख्त बनाया गया है। अब टोल भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यमों पर आधारित होगा। नकद भुगतान का विकल्प धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। यदि किसी वाहन में वैध फास्टैग नहीं है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो चालक को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में टोल प्लाजा पर प्रवेश भी रोका जा सकता है।

    इसके अलावा UPI आधारित QR कोड स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक भुगतान संभव हो सके।

    हालांकि, इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य पूरे हाईवे नेटवर्क को कैशलेस और पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इससे न केवल लेनदेन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि यात्रा प्रणाली भी अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनेगी। लेकिन यह भी सच है कि जिन लोगों के पास डिजिटल साधनों की सुविधा नहीं है, उन्हें शुरुआती दौर में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

    यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने फास्टैग को सक्रिय और अपडेट रखें। इसके साथ ही बैंक खाते से लिंकिंग और पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए UPI एप्लिकेशन तैयार रखना भी आवश्यक माना जा रहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में भुगतान में बाधा न आए।

    इस पूरी पहल का उद्देश्य केवल टोल संग्रह को सरल बनाना नहीं है, बल्कि देश के राजमार्गों को एक स्मार्ट और फ्यूचर-रेडी सिस्टम में बदलना है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय परिवहन प्रणाली को एक नई दिशा देगी, जहां यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि पूरी तरह डिजिटल और व्यवस्थित भी होगी।

  • कैशलेस भारत की नई उड़ान, यूपीआई बना दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम

    कैशलेस भारत की नई उड़ान, यूपीआई बना दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम

    नई दिल्ली। भारत में डिजिटल भुगतान का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण यूपीआई की लगातार बढ़ती रफ्तार है। अप्रैल महीने में यूपीआई ने एक बार फिर ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। इस दौरान कुल लेनदेन की संख्या लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 22 अरब से अधिक पहुंच गई, जबकि कुल लेनदेन मूल्य 29 लाख करोड़ रुपए से ऊपर दर्ज किया गया। यह आंकड़े देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और लोगों की बढ़ती डिजिटल निर्भरता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

    आज स्थिति यह है कि छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक, हर जगह यूपीआई भुगतान एक सामान्य प्रक्रिया बन चुका है। लोग नकद लेनदेन की बजाय मोबाइल के जरिए तुरंत भुगतान करना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मान रहे हैं। इस बदलाव ने न केवल भुगतान प्रणाली को सरल बनाया है, बल्कि लेनदेन की गति और पारदर्शिता को भी बढ़ाया है।

    अप्रैल के दौरान रोजाना होने वाले यूपीआई लेनदेन में भी लगातार वृद्धि देखी गई। हर दिन औसतन करोड़ों ट्रांजैक्शन इस माध्यम से पूरे किए गए, जो यह दिखाता है कि यह प्रणाली अब दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। चाहे किराने की दुकान हो, ऑनलाइन शॉपिंग हो या फिर सेवाओं का भुगतान, यूपीआई हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बना चुका है।

    इस वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण इसकी सरल प्रक्रिया और तत्काल भुगतान सुविधा है। केवल मोबाइल नंबर या QR कोड के जरिए कुछ ही सेकंड में लेनदेन पूरा हो जाता है, जिससे समय की बचत होती है और कैश संभालने की परेशानी भी खत्म हो जाती है। इसके अलावा बैंकिंग सिस्टम से सीधा जुड़ाव इसे अधिक सुरक्षित बनाता है।

    पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई ने जिस तेजी से विकास किया है, वह देश की डिजिटल प्रगति का एक महत्वपूर्ण संकेत है। जहां पहले डिजिटल भुगतान सीमित स्तर पर उपयोग होता था, वहीं अब यह प्रणाली देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनती जा रही है। इससे न केवल वित्तीय समावेशन बढ़ा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिला है।

    अप्रैल के ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत तेजी से कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और यूपीआई इस बदलाव का सबसे मजबूत आधार बन चुका है। आने वाले समय में इसके और विस्तार की संभावना है, जो देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाएगा।

  • बदल गया टोल टैक्स चुकाने का तरीका, बिना टोल प्लाजा के कटेगा टोल..

    बदल गया टोल टैक्स चुकाने का तरीका, बिना टोल प्लाजा के कटेगा टोल..


    नई दिल्ली। Toll Tax Without Toll Plaza: देश में हाईवे नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और रोज लाखों वाहन लंबी दूरी तय करते हैं. लेकिन टोल प्लाजा पर रुकना यात्रियों के सफर को स्लो कर देता है. फास्टैग के बाद भी कई जगह कतारें, जाम और समय की बर्बादी आम है. अब इस परेशानी का समाधान नई तकनीक से किया जा रहा है.

    देश का पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ गुजरात के सूरत में शुरू किया गया है. यहां वाहन बिना रुके निकल जाएंगे और टोल अपने आप कट जाएगा. इस सिस्टम में हाई रिजोल्यूशन कैमरे, जीपीएस और ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. यानी अब टोल देने का तरीका पूरी तरह डिजिटल और स्मूथ होने जा रहा है. जान लें पूरी खबर.

    बिना टोल प्लाजा के टोल कलेक्शन
    नए टोल प्लाजा सिस्टम में टोल प्लाजा पर बैरियर नहीं होगा. सड़क पर लगे हाई रिजोल्यूशन कैमरे हर गुजरने वाले वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे. अगर गाड़ी पर फास्टैग नहीं भी है. तब भी नंबर प्लेट के जरिए वाहन की पहचान हो जाएगी. सिस्टम इसे टोल उल्लंघन के तौर पर दर्ज करेगा और वाहन मालिक को ई चालान भेजा जाएगा.

    हर लेन में रडार और लिडार आधारित कैमरे 360 डिग्री रिकॉर्डिंग करेंगे. पूरा डेटा कंट्रोल रूम और एनएचएआई सर्वर पर रियल टाइम दर्ज होगा. यानी कोई भी वाहन बिना पेमेंट के नहीं निकल सकेगा. यह टेक्नोलॉजी दुबई, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से ही इस्तेमाल की जा रही है

    फास्टैग है लेकिन बैलेंस कम है तो क्या होगा?
    अगर आपकी गाड़ी में फास्टैग लगा है लेकिन उसमें बैलेंस कम है या ब्लैकलिस्टेड है. तब भी सिस्टम उसे पहचान लेगा. ऐसे मामलों में वाहन को डिफॉल्टर के रूप में दर्ज किया जाएगा. वाहन मालिक को एसएमएस और ऐप के जरिए अलर्ट मिलेगा. तय समय के भीतर रिचार्ज न करने पर ई चालान जारी होगा.

    जानबूझकर टोल चोरी करने की कोशिश करने वालों पर भी यह सिस्टम नजर रखेगा. कैमरे हर एंगल से रिकॉर्डिंग करते हैं. इसलिए बच निकलना मुश्किल होगा. आने वाले समय में यह बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम देश के बाकी हाईवे पर भी लागू किया जा सकता है. इससे सफर तेज और आसान हो जाएगा.