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  • UPI और दक्षिण कोरियाई पेमेंट सिस्टम के बीच ऐतिहासिक करार, लेन-देन होगा अब और भी आसान!

    UPI और दक्षिण कोरियाई पेमेंट सिस्टम के बीच ऐतिहासिक करार, लेन-देन होगा अब और भी आसान!


    नई दिल्ली। भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI अब एक और बड़े देश में अपनी पहुंच बनाने जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने-अपने इलेक्ट्रॉनिक भुगतान सिस्टम को जोड़ने पर सहमति जताई है। इस पहल के बाद भारतीय नागरिक जल्द ही दक्षिण कोरिया में भी अपने UPI आधारित ऐप्स के जरिए आसानी से भुगतान कर सकेंगे, जिससे विदेशी यात्रा और लेनदेन पहले से अधिक सरल हो जाएंगे।

    इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के लोकल QR कोड आधारित भुगतान सिस्टम को आपस में जोड़ना है। इसका सीधा फायदा यात्रियों, छात्रों और कामकाजी लोगों को मिलेगा, जो एक देश से दूसरे देश में जाते समय डिजिटल भुगतान की सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद भारतीय उपयोगकर्ता दक्षिण कोरिया में वहां के QR कोड स्कैन कर अपने UPI ऐप से सीधे भुगतान कर सकेंगे। इसी तरह दक्षिण कोरिया के नागरिक भारत में भी इसी सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

    यह पहल डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके तहत तकनीकी एकीकरण, सुरक्षा मानक, मुद्रा विनिमय और संचालन व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम किया जाएगा। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही यह सुविधा आम उपयोगकर्ताओं के लिए पूरी तरह से उपलब्ध हो पाएगी।

    भारत में UPI पहले से ही डिजिटल लेनदेन का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। देश के भीतर इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और अब इसका अंतरराष्ट्रीय विस्तार इसे वैश्विक पहचान दिला रहा है। इस कदम से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है और नकद रहित लेनदेन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

    डिजिटल भुगतान के अलावा इस समझौते के दौरान दोनों देशों ने आपसी सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर भी चर्चा की है। इनमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शिक्षा, तकनीकी सहयोग और रचनात्मक उद्योग शामिल हैं। दोनों देशों ने फिल्म, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों के बीच संबंध मजबूत करने पर सहमति जताई है, जिससे आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

    इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापारिक संबंधों को भी विस्तार देने का लक्ष्य तय किया है। आने वाले वर्षों में व्यापार को दोगुना करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए एआई, सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण और वित्तीय तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।

    इस डिजिटल पेमेंट एकीकरण को एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा आसान होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की फिनटेक क्षमता भी मजबूत होगी। यह पहल भविष्य में अन्य देशों के साथ भी इसी तरह के समझौतों का रास्ता खोल सकती है।

  • एनपीसीआई ने श्रीलंका में यूपीआई की स्वीकार्यता का विस्तार किया, अर्थव्यवस्था के साथ पर्यटकों को होगा फायदा

    एनपीसीआई ने श्रीलंका में यूपीआई की स्वीकार्यता का विस्तार किया, अर्थव्यवस्था के साथ पर्यटकों को होगा फायदा


    नई दिल्ली। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की अंतरराष्ट्रीय इकाई एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट लिमिटेड (एनआईपीएल) ने मंगलवार को कहा कि वह श्रीलंका में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की स्वीकार्यता में विस्तार कर रहा है। एनपीसीआई ने आगे कहा कि इससे भारतीय यात्रियों के लिए श्रीलंका में भुगतान का अनुभव अच्छा होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    भारत में 700 मिलियन से अधिक क्यूआर टचपॉइंट्स के साथ, प्लेटफॉर्म की इंटरऑपरेबल आर्किटेक्चर वैश्विक प्रणालियों के साथ एकीकरण को सक्षम बनाती है, जिसमें श्रीलंका का लंकापे-संचालित लंकाक्यूआर इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है।

    पर्यटन क्षेत्र के लिए भारत श्रीलंका का सबसे बड़ा स्रोत बाजार बना हुआ है। 2024 में 4.16 लाख से अधिक भारतीय पर्यटकों श्रीलंका गए थे, यह आंकड़ा 2025 में बढ़कर 5.31 लाख हो गया। इस स्थिर वृद्धि ने घूमने, खरीदारी, शादियों और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए द्वीप पर आने वाले भारतीय यात्रियों के लिए सुविधाजनक और विश्वसनीय भुगतान समाधानों की मांग को बढ़ा दिया है।

    एनपीसीआई ने कहा, “एनआईपीएल और लंकापे के बीच सहयोग के माध्यम से, भारतीय पर्यटक अब यूपीआई-सक्षम ऐप का उपयोग करके लंकाक्यूआर कोड को स्कैन करके पूरे श्रीलंका में डिजिटल भुगतान कर सकते हैं, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हो जाएगी।”

    यह सेवा प्रमुख प्रतिष्ठानों, जिनमें होटल चेन, खुदरा दुकानें और सुपरमार्केट शामिल हैं, में उपलब्ध है।

    इस सेवा की व्यापक स्वीकृति के लिए, एनआईपीएल श्रीलंका के घरेलू भुगतान ढांचे के अनुरूप, श्रीलंका के केंद्रीय बैंक, अधिग्रहण करने वाले बैंकों और व्यापारियों जैसे प्रमुख हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

    एनपीसीआई के अनुसार, इस पहल से यात्रियों और व्यापारियों दोनों को लाभ होने की उम्मीद है। पर्यटकों को वास्तविक समय में भुगतान, पारदर्शी विनिमय दरें और एक परिचित भुगतान इंटरफेस की सुविधा मिलेगी, वहीं श्रीलंकाई व्यवसाय एक बड़े डिजिटल ग्राहक आधार का लाभ उठा सकेंगे, नकदी प्रबंधन में सुधार कर सकेंगे और भौतिक मुद्रा पर निर्भरता कम कर सकेंगे।

    एनपीसीआई इंटरनेशनल के एमडी और सीईओ रितेश शुक्ला ने कहा कि कंपनी सीमा पार लेनदेन को सरल बनाने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए अंतर-संचालनीय भुगतान गलियारों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

    उन्होंने कहा, “यूपीआई के बढ़ते उपयोग के साथ, हमारा लक्ष्य आतिथ्य, खुदरा और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भुगतान स्वीकृति को बढ़ाना है, जिससे व्यवसायों के लिए मूल्य सृजित हो और समग्र यात्रा अनुभव बेहतर हो।

  • बाजार अस्थिरता के कारण फोनपे ने फिलहाल रोकी आईपीओ लिस्टिंग की तैयारी

    बाजार अस्थिरता के कारण फोनपे ने फिलहाल रोकी आईपीओ लिस्टिंग की तैयारी

    नई दिल्ली:  PhonePe ने सोमवार को घोषणा की कि उसने मौजूदा भू-राजनीतिक संघर्षों और बाजार की अस्थिरता के कारण अपनी सार्वजनिक बाजार में लिस्टिंग प्रक्रिया को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। कंपनी ने कहा कि वैश्विक पूंजी बाजारों में स्थिरता आने के बाद वह इस प्रक्रिया को फिर से शुरू करेगी।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Sameer Nigam ने कहा कि वे प्रभावित क्षेत्रों में जल्द शांति बहाल होने की उम्मीद करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी भारत में सार्वजनिक लिस्टिंग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    कंपनी के अनुसार 30 सितंबर 2025 तक फोनपे के 65 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं और इसका डिजिटल भुगतान नेटवर्क देशभर में 4.7 करोड़ से अधिक व्यापारियों तक पहुंच चुका है।

    इस बीच कंपनी डिजिटल भुगतान सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नए फीचर भी लॉन्च कर रही है। इसी साल जनवरी में फोनपे पेमेंट गेटवे ने वीजा और मास्टरकार्ड कार्ड लेनदेन के लिए फोनपे पीजी बोल्ट फीचर लॉन्च करने की घोषणा की थी।

    यह समाधान डिवाइस टोकनाइजेशन तकनीक का उपयोग करता है, जिससे उपयोगकर्ताओं और व्यापारी भागीदारों को एक सुरक्षित और तेज इन-ऐप चेकआउट अनुभव मिलता है। इस सुविधा के तहत यूजर्स फोनपे ऐप पर अपने कार्ड को एक बार टोकनाइज कर सकते हैं और बाद में किसी भी जुड़े हुए मर्चेंट प्लेटफॉर्म पर उसी सेव किए गए कार्ड का उपयोग कर सकते हैं।

    इस सिस्टम में सुरक्षित टोकन संवेदनशील कार्ड विवरण की जगह ले लेता है, जिससे उसी डिवाइस पर किए जाने वाले बाद के लेनदेन में बार-बार सीवीवी दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे भुगतान प्रक्रिया तेज और सरल हो जाती है।

    फोनपे के मर्चेंट बिजनेस के चीफ बिजनेस ऑफिसर Yuvraj Singh Shekhawat ने कहा कि वीजा और मास्टरकार्ड के लिए फोनपे पीजी बोल्ट फीचर का लॉन्च लाखों भारतीयों के लिए डिजिटल भुगतान को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने कहा कि डिवाइस टोकनाइजेशन के जरिए उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और वन-क्लिक भुगतान का अनुभव मिलेगा, जबकि व्यापारियों को बेहतर सफलता दर और कम ट्रांजैक्शन ड्रॉप-ऑफ के साथ अपने कारोबार को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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  • भारत का डिजिटल पेमेंट मॉडल दुनिया के विकासशील देशों के लिए बना मिसाल: रिपोर्ट

    भारत का डिजिटल पेमेंट मॉडल दुनिया के विकासशील देशों के लिए बना मिसाल: रिपोर्ट


    नई दिल्ली। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने आधुनिक इतिहास में सबसे महत्वाकांक्षी फिनटेक (फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी) परिवर्तन में से एक को अंजाम दिया है, जिसकी बदौलत देश आज दुनिया के सबसे उन्नत डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में से एक बन गया है। यह मॉडल अब अन्य विकासशील देशों के लिए भी एक उदाहरण बन रहा है।
    अजरबैजान स्थित न्यूज डॉट एजेड की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का मॉडल दिखाता है कि सरकारी नीतियां, तकनीकी नवाचार और व्यापक मोबाइल कनेक्टिविटी मिलकर किस तरह एक प्रभावी भुगतान ढांचा तैयार कर सकती हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति ने वैश्विक स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित किया है। अर्थशास्त्री और तकनीकी विशेषज्ञ इसे अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक सफल मॉडल के रूप में अध्ययन कर रहे हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल पहचान प्रणाली, तेजी से बढ़ती मोबाइल कनेक्टिविटी, आधुनिक पेमेंट प्लेटफॉर्म और सरकार की सहायक नीतियों के संयोजन ने दुनिया के सबसे बड़े और कुशल डिजिटल इकोसिस्टम में से एक को जन्म दिया है।

    रिपोर्ट में सरकार की योजनाओं की सराहना करते हुए कहा गया कि वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और लाखों लोगों को डिजिटल पहचान उपलब्ध कराने वाले सरकारी कार्यक्रमों ने इस व्यवस्था की मजबूत नींव तैयार की।

    साथ ही सस्ते स्मार्टफोन और तेजी से बढ़ती मोबाइल इंटरनेट सेवाओं ने डिजिटल भुगतान को बड़े पैमाने पर अपनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस (पीएम-वानी) कार्यक्रम के जरिए सार्वजनिक इंटरनेट सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है।

    फरवरी 2026 तक इस पहल के तहत 4,09,111 वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जा चुके हैं, जिन्हें 207 PDO एग्रीगेटर और 113 ऐप प्रदाता सपोर्ट कर रहे हैं। इसका उद्देश्य खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सस्ती और तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।

    इन सभी विकासों ने बड़े स्तर पर डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार के लिए जरूरी माहौल तैयार किया।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल पहचान को बैंकिंग और मोबाइल सेवाओं से जोड़ने से वित्तीय संस्थान उपयोगकर्ताओं की पहचान सुरक्षित तरीके से सत्यापित कर सकते हैं और लेनदेन को तेजी से प्रोसेस कर सकते हैं।

    यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने नकदी पर निर्भरता कम करने में भी मदद की है, जिससे वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है और आर्थिक लेनदेन अधिक कुशल हुए हैं।

    सरकार ने हाल ही में एक बयान में कहा कि जनवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, यूपीआई के जरिए हर महीने लगभग 28.33 लाख करोड़ रुपए के लेनदेन होते हैं। इस दौरान 21.7 अरब डिजिटल ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए, जो मोबाइल फोन के माध्यम से शून्य लागत पर रियल-टाइम भुगतान की सुविधा देते हैं और शहरों से लेकर गांवों तक तथा हर आय वर्ग में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।