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  • UPI ग्रोथ और लोन बिजनेस से Paytm शेयर में 34% तक उछाल की संभावना

    UPI ग्रोथ और लोन बिजनेस से Paytm शेयर में 34% तक उछाल की संभावना


    नई दिल्ली ।
    डिजिटल पेमेंट और फिनटेक सेक्टर में तेज बदलाव के बीच One 97 Communications Ltd एक बार फिर निवेशकों के रडार पर आ गई है। हाल ही में आए तिमाही नतीजों के बाद कंपनी को लेकर बाजार की धारणा काफी सकारात्मक होती दिख रही है। कई बड़े निवेश विश्लेषण संस्थानों ने इस शेयर पर भरोसा जताते हुए इसे “बाय” श्रेणी में बनाए रखा है और आने वाले समय में इसमें मजबूत तेजी की संभावना जताई है।

    कंपनी के कारोबार में सबसे बड़ा योगदान डिजिटल पेमेंट और UPI सेगमेंट का माना जा रहा है। लगातार बढ़ते ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और ग्राहकों की बढ़ती भागीदारी ने कंपनी की स्थिति को मजबूत किया है। इसके साथ ही फाइनेंशियल सर्विसेज, लोन डिस्ट्रीब्यूशन और मर्चेंट सॉल्यूशंस जैसे सेगमेंट भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं, जिससे कुल राजस्व में सुधार देखने को मिला है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी ने हाल के तिमाही नतीजों में स्थिर प्रदर्शन दर्ज किया है। भले ही प्रमोशनल खर्च और कैशबैक योजनाओं के कारण शॉर्ट टर्म में मार्जिन पर दबाव बना रहा हो, लेकिन यूजर ग्रोथ और मार्केट शेयर बढ़ाने की रणनीति लंबे समय में मजबूत परिणाम दे सकती है। इसी रणनीति के चलते डिजिटल पेमेंट बाजार में कंपनी की पकड़ और मजबूत होती दिखाई दे रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी की आय में सुधार का सबसे बड़ा कारण फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस की तेज वृद्धि है। इसके अलावा कोर पेमेंट बिजनेस में भी लगातार मजबूती बनी हुई है, जिससे कुल बिजनेस ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा है। मर्चेंट पेमेंट्स और सब्सक्रिप्शन आधारित सेवाओं से भी कंपनी की आय में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

    एक अहम पहलू यह भी है कि कंपनी का EBITDA पहले के मुकाबले बेहतर स्थिति में पहुंच गया है। जहां पहले कंपनी घाटे में चल रही थी, वहीं अब ऑपरेशनल स्तर पर सुधार देखने को मिला है। यह बदलाव निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है कि कंपनी अब प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    इसके साथ ही कंपनी की बैलेंस शीट भी मजबूत होती दिख रही है। पर्याप्त कैश रिजर्व और बेहतर फाइनेंशियल स्थिति भविष्य की विस्तार योजनाओं को समर्थन दे सकती है। AI आधारित सेवाओं और नए डिजिटल प्रोडक्ट्स के विस्तार को भी कंपनी की अगली ग्रोथ स्टोरी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि प्रतिस्पर्धा और मार्जिन दबाव जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल पेमेंट और फिनटेक सेक्टर में लंबी अवधि की संभावनाएं काफी मजबूत हैं। बढ़ता डिजिटल लेनदेन, कैशलेस इकोसिस्टम और तकनीकी बदलाव इस सेक्टर को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।

    कुल मिलाकर, मौजूदा संकेत बताते हैं कि कंपनी एक बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां से आगे ग्रोथ और स्थिरता दोनों की संभावना बनती दिख रही है। इसी वजह से बाजार में इस स्टॉक को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर अब इसके आने वाले प्रदर्शन पर टिकी हुई है।

  • वैश्विक आपूर्ति बाधाओं से भारत में महंगाई का खतरा, दूसरे दौर के प्रभावों पर गहरी नजर

    वैश्विक आपूर्ति बाधाओं से भारत में महंगाई का खतरा, दूसरे दौर के प्रभावों पर गहरी नजर


    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वैश्विक अनिश्चितताओं और भू राजनीतिक तनावों के बीच देश की मौद्रिक नीति को लेकर बेहद सतर्क और संतुलित रुख अपनाने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक किसी भी प्रकार के जल्दबाजी वाले निर्णय से बच रहा है और आगे की दिशा आर्थिक आंकड़ों और जोखिमों के विस्तृत आकलन के आधार पर तय की जाएगी। उन्होंने इसे वेट एंड वॉच की स्थिति बताया और कहा कि मौजूदा समय में स्थिरता बनाए रखना प्राथमिकता है।

    अपने एक अंतरराष्ट्रीय संबोधन में उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था पर बाहरी दबावों और वैश्विक घटनाक्रमों के संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में जारी तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा और अप्रत्यक्ष प्रभाव भारत की आर्थिक संरचना पर भी पड़ सकता है क्योंकि इस क्षेत्र की भूमिका भारत के व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और विदेशी आय के प्रवाह में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि पश्चिम एशिया भारत के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार क्षेत्र है, जो देश के निर्यात का बड़ा हिस्सा, आयात का महत्वपूर्ण भाग और कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग आधा हिस्सा उपलब्ध कराता है। इसके साथ ही उर्वरक आयात और विदेशी रेमिटेंस में भी इस क्षेत्र का योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह की गहरी आर्थिक निर्भरता के कारण किसी भी प्रकार की आपूर्ति बाधा का प्रभाव व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है।

    आरबीआई गवर्नर ने विशेष रूप से दूसरे दौर के प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक आपूर्ति व्यवधान यदि लंबे समय तक बने रहते हैं तो उनका असर धीरे धीरे कीमतों और उत्पादन लागत पर फैल सकता है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ने की संभावना रहती है। इस प्रकार की स्थिति केवल अस्थायी नहीं होती बल्कि आर्थिक संतुलन को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती है।

    मौद्रिक नीति को लेकर उन्होंने दोहराया कि केंद्रीय बैंक वर्तमान में तटस्थ रुख बनाए हुए है और हाल के महीनों में की गई ब्याज दरों में कटौती के बाद अब स्थिति का गहन मूल्यांकन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति समिति पूरी तरह डेटा आधारित दृष्टिकोण अपनाती है और बदलते आर्थिक संकेतकों के अनुसार लगातार जोखिमों का पुनर्मूल्यांकन करती रहती है ताकि नीति निर्णय संतुलित और प्रभावी बने रहें।

    डिजिटल अर्थव्यवस्था के संदर्भ में उन्होंने देश में बढ़ते डिजिटल लेनदेन की सराहना की और बताया कि यूनिफाइड पेमेंट सिस्टम के माध्यम से लेनदेन में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारत की डिजिटल प्रगति को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि एक नए डिजिटल लोन सिस्टम पर काम चल रहा है जिसका उद्देश्य छोटे किसानों और छोटे व्यवसायों को त्वरित और आसान ऋण उपलब्ध कराना है।

    वित्तीय अनुशासन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि देश का राजकोषीय घाटा पिछले वर्षों की तुलना में लगातार कम हुआ है, जो आर्थिक प्रबंधन में सुधार का संकेत है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सरकारी ऋण अनुपात में भी धीरे धीरे सुधार देखा जा रहा है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिलती है।

  • डिजिटल भुगतान का बढ़ता दबदबा, सरकारी बैंकों ने दिखाया निजी बैंकों से आगे निकलने का दम

    डिजिटल भुगतान का बढ़ता दबदबा, सरकारी बैंकों ने दिखाया निजी बैंकों से आगे निकलने का दम

    नई दिल्ली में जारी रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 में ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड लेनदेन में सरकारी बैंकों ने निजी बैंकों को पीछे छोड़ दिया है। कुल ऑनलाइन लेनदेन में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें सरकारी बैंकों का आंकड़ा 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि निजी बैंकों की वृद्धि केवल 2.7 प्रतिशत रही।

    केयरएज की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जनवरी में क्रेडिट कार्ड खर्च सालाना आधार पर 8.1 प्रतिशत बढ़कर 2.05 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। इसी अवधि में सरकारी बैंकों ने बकाया कार्डों में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो निजी बैंकों की तुलना में काफी अधिक है।

    डिजिटल भुगतान में तेजी का सबसे बड़ा योगदान ई-कॉमर्स का रहा है, जो कुल लेनदेन का 61 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बना। इस बीच, एसबीआई ग्रुप का कार्ड बेस भी मजबूत हुआ और सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 2.19 करोड़ कार्ड धारकों तक पहुँच गया।

    इसके विपरीत विदेशी बैंकों द्वारा जारी क्रेडिट कार्ड में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। रिपोर्ट में इसका कारण उनकी प्रीमियम ग्राहक रणनीतियों से जोड़ा गया है।

    हालांकि, विवेकाधीन खरीदारी में साल के अंत में बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे समग्र वृद्धि में कुछ नरमी के संकेत मिले। महीने-दर-महीने आधार पर खर्च में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष जनवरी में 13.8 प्रतिशत की वृद्धि के उच्च आधार प्रभाव के कारण कम रही।

    कुल बकाया क्रेडिट कार्डों की संख्या जनवरी 2025 में 10.9 करोड़ से बढ़कर जनवरी 2026 में 11.7 करोड़ हो गई। यह सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत और पिछले महीने की तुलना में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इस दौरान कुल बकाया क्रेडिट कार्ड बैलेंस 2.95 लाख करोड़ रुपए रहा।

    निजी क्षेत्र के बैंकों ने कार्ड जारी करने में अग्रणी भूमिका निभाई और सालाना आधार पर 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसका श्रेय उनके मजबूत वितरण नेटवर्क और ई-कॉमर्स तथा फिनटेक प्लेटफॉर्म के साथ सह-ब्रांडेड साझेदारियों को दिया गया है।

    वित्त वर्ष 2026 के अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो क्रेडिट कार्ड पर खर्च में लगभग 13 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई और कुल खर्च 19.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। यह संकेत देता है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन शॉपिंग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और सरकारी बैंकों ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है।
  • फोनपे के ₹12,000 करोड़ IPO को SEBI की मंजूरी, डिजिटल पेमेंट सेक्टर में लिस्टिंग की तैयारी तेज

    फोनपे के ₹12,000 करोड़ IPO को SEBI की मंजूरी, डिजिटल पेमेंट सेक्टर में लिस्टिंग की तैयारी तेज


    नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान और यूपीआई सेवाओं की अग्रणी कंपनी फोनपे को अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम IPO के लिए SEBI से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही कंपनी अब अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस DRHP दाखिल करने की तैयारी में है। अनुमान है कि फोनपे का यह IPO लगभग ₹12,000 करोड़ का होगा, जो भारतीय शेयर बाजार में डिजिटल पेमेंट सेक्टर की मौजूदगी को और मजबूत करेगा।

    इस IPO में कोई नया शेयर जारी नहीं होगा। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल OFS के जरिए लाया जाएगा, यानी कंपनी के मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी का हिस्सा बेचेंगे। कंपनी की अनुमानित वैल्यूएशन 15 बिलियन डॉलर लगभग ₹1.33 लाख करोड़ आंकी गई है। यह पेटीएम के ₹18,000 करोड़ IPO के बाद डिजिटल पेमेंट सेक्टर का भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम होगा।

    IPO के जरिए वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे निवेशक अपनी संयुक्त हिस्सेदारी का लगभग 10% बेच सकते हैं। वर्तमान में वॉलमार्ट का शेयर फोनपे में 73% से अधिक है। IPO प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए कंपनी ने कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटीग्रुप, मॉर्गन स्टेनली और जेपी मॉर्गन जैसे प्रमुख निवेश बैंकों को सलाहकार नियुक्त किया है।फोनपे की सबसे बड़ी ताकत उसका UPI कारोबार है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल डिजिटल भुगतान बाजार में फोनपे की हिस्सेदारी लगभग 45% है, जबकि गूगल पे के पास 35% की हिस्सेदारी है। फोनपे हर महीने लगभग 1,000 करोड़ लेनदेन प्रोसेस करता है, जिनका कुल मूल्य ₹12 लाख करोड़ से अधिक है। कंपनी के पास 53 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।

    फोनपे ने इस साल 16 अप्रैल 2025 को खुद को प्राइवेट से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदला, जो शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले दिसंबर 2022 में कंपनी ने अपना मुख्यालय सिंगापुर से भारत स्थानांतरित किया था और अपने नॉन-पेमेंट कारोबार को अलग सब्सिडियरी में विभाजित किया था।विशेषज्ञों का मानना है कि यह IPO डिजिटल पेमेंट सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा। DRHP दाखिल होने के बाद इश्यू की समयसीमा, मूल्य निर्धारण और निवेशकों की रुचि के बारे में और स्पष्टता सामने आएगी। वैश्विक निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और भारतीय फिनटेक सेक्टर की परिपक्वता को देखते हुए यह इश्यू पब्लिक और संस्थागत निवेशकों दोनों के लिए आकर्षक अवसर होगा।

  • डिजिटल पेमेंट की ओर बढ़ रहा देश… ATM की संख्या घटी, बचत खातों में जमा हुए 3.3 लाख करोड़

    डिजिटल पेमेंट की ओर बढ़ रहा देश… ATM की संख्या घटी, बचत खातों में जमा हुए 3.3 लाख करोड़


    नई दिल्ली।
    भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में एटीएम (ATM) की संख्या में कमी आई है, क्योंकि लोग डिजिटल पेमेंट (Digital payments) की ओर बढ़ रहे हैं। ई-पेमेंट नेटवर्क ने ग्राहकों की नकद निकासी की जरूरत को कम कर दिया है, भले ही बैंक शाखाओं का विस्तार जारी रहा।


    प्राइवेट बैंकों ने एटीएम सबसे ज्यादा घटाए

    रिपोर्ट के मुताबिक, निजी बैंकों ने अपना एटीएम नेटवर्क 79,884 से घटाकर 77,117 कर दिया। वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने मुख्य रूप से ऑफसाइट मशीनें बंद करके अपने एटीएम 134,694 से 133,544 कर दिए।


    व्हाइट लेबल एटीएम बढ़े

    इसके विपरीत, व्हाइट लेबल एटीएम (नॉन-बैंकिंग संस्थाओं द्वारा स्थापित) ऑपरेटरों ने अपनी मौजूदगी बढ़ाई और इनकी संख्या 34,602 से बढ़कर 36,216 हो गई।


    शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतर

    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ग्रामीण, अर्ध-शहरी, शहरी और महानगरीय क्षेत्रों में अपने एटीएम संतुलित रूप से वितरित रखे। हालांकि, निजी और विदेशी बैंक अभी भी अपने एटीएम मुख्य रूप से शहरी और महानगरीय केंद्रों में केंद्रित रखते हैं।


    बैंक शाखाओं का विस्तार जारी

    इस दौरान, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के तेज विस्तार के चलते बैंक शाखाओं की संख्या 2.8 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1,64,000 हो गई। सार्वजनिक बैंकों द्वारा खोली गई दो-तिहाई से अधिक नई शाखाएं ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में थीं, जबकि निजी बैंकों की केवल 37.5 प्रतिशत नई शाखाएं इन क्षेत्रों में खुलीं।

    बचत खातों और जमा राशि में वृद्धि
    बेसिक बचत बैंक जमाखातों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई, जो 2.6 प्रतिशत बढ़कर 72.4 करोड़ खाते हो गए। इन खातों में जमा राशि 9.5 प्रतिशत बढ़कर 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गई। अधिकांश खाते बिजनेस करिस्पॉन्डेंट के माध्यम से संचालित होते हैं, जो जमीनी स्तर पर बैंकिंग पहुंच बढ़ाने में उनकी भूमिका को रेखांकित करता है।


    जमा बीमा कवरेज

    जमा बीमा के संदर्भ में, रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 के अंत तक 97.6 प्रतिशत खाते मौजूदा 5 लाख रुपये के बीमा सीमा के दायरे में थे। हालांकि, बीमाकृत जमा राशि का अनुपात पिछले वर्ष के 43.1 प्रतिशत से थोड़ा घटकर 41.5 प्रतिशत हो गया।


    डिजिटलीकरण है मुख्य कारण

    आरबीआई ने एटीएम संख्या में कमी का कारण भुगतानों के बढ़ते डिजिटलीकरण को बताया है, जिसने ग्राहकों की एटीएम के माध्यम से लेनदेन की आवश्यकता को कम कर दिया है।