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  • वायरल ट्रेंड के पीछे छिपा खतरा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर ऑनलाइन ठगी का नया खेल शुरू

    वायरल ट्रेंड के पीछे छिपा खतरा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर ऑनलाइन ठगी का नया खेल शुरू

    नई दिल्ली ।सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने वाले ट्रेंड और डिजिटल अभियानों का प्रभाव युवाओं के बीच लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन लोकप्रियता और उत्सुकता के इस दौर में साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल के दिनों में एक वायरल डिजिटल ट्रेंड के नाम का इस्तेमाल कर साइबर ठगी का नया मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इसके बाद पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की चेतावनी जारी की है।

    जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कुछ संदिग्ध लिंक तेजी से प्रसारित किए जा रहे हैं। इन संदेशों में आकर्षक शब्दों और भावनात्मक अपील के जरिए लोगों को किसी डिजिटल अभियान या समूह से जुड़ने का निमंत्रण दिया जा रहा है। युवाओं को विशेष रूप से ध्यान में रखकर ऐसे संदेश तैयार किए जा रहे हैं ताकि वे उत्सुकतावश लिंक पर क्लिक कर दें।

    पुलिस का कहना है कि यह केवल एक साधारण लिंक नहीं बल्कि साइबर ठगी का हिस्सा हो सकता है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये कथित लिंक फिशिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन पर क्लिक करता है, उसके मोबाइल या डिजिटल डिवाइस की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके जरिए निजी जानकारी, बैंकिंग विवरण, पासवर्ड और अन्य महत्वपूर्ण डेटा साइबर अपराधियों तक पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है।

    साइबर विशेषज्ञों के अनुसार फिशिंग लिंक आज के समय में ऑनलाइन धोखाधड़ी का सबसे आम तरीका बनते जा रहे हैं। ये लिंक दिखने में सामान्य या भरोसेमंद लग सकते हैं, लेकिन इनके पीछे छिपा उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी हासिल करना होता है। कई मामलों में ऐसे हमलों के जरिए बैंक खातों से रकम निकालने और डिजिटल पहचान के दुरुपयोग जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर ट्रेंड या वायरल अभियान पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता। कई बार लोकप्रिय विषयों का इस्तेमाल करके साइबर ठग लोगों की भावनाओं और उत्सुकता का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि पुलिस और साइबर एजेंसियां लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं।

    विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करनी चाहिए। यदि कोई संदेश अत्यधिक आकर्षक, भावनात्मक या असामान्य वादा करता दिखाई दे तो सतर्क रहना आवश्यक है। इसके अलावा संदिग्ध संदेशों को आगे साझा करने से भी बचना चाहिए।

    डिजिटल दुनिया ने लोगों को जोड़ने के नए अवसर दिए हैं, लेकिन इसके साथ सतर्कता और जागरूकता भी उतनी ही जरूरी हो गई है। एक छोटी सी लापरवाही कई बार आर्थिक और व्यक्तिगत नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में ऑनलाइन सुरक्षा नियमों का पालन करना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

  • टेलीग्राम फ्रॉड का नया मामला: आसान कमाई का झांसा देकर छात्र से लाखों की ठगी

    टेलीग्राम फ्रॉड का नया मामला: आसान कमाई का झांसा देकर छात्र से लाखों की ठगी


    ग्वालियर में ऑनलाइन ठगी का एक और गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पार्ट-टाइम जॉब और आसान मुनाफे का झांसा देकर एक छात्र से करीब 3.50 लाख रुपए हड़प लिए गए। यह मामला शहर के मुरार थाना क्षेत्र का है, जहां साइबर ठगों ने टेलीग्राम ऐप का उपयोग करके पीड़ित को फंसाया। मुरार थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पीड़ित छात्र अमन कुशवाह मुरार के लाल टिपारा इलाके का रहने वाला है और बीबीए की पढ़ाई कर रहा है। अमन के मुताबिक कुछ दिन पहले उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया, जिसमें पार्ट-टाइम ऑनलाइन काम से कमाई का दावा किया गया था। मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद वह सीधे टेलीग्राम ऐप से जुड़ गया और एक ग्रुप में शामिल हो गया।

    ग्रुप में बताया गया कि होटल और अन्य व्यवसायिक संस्थानों को ऑनलाइन रेटिंग देनी होगी और इसके बदले अच्छा भुगतान मिलेगा। शुरुआत में अमन से केवल 300 रुपए जमा कराए गए और टास्क पूरा होने पर उसके अकाउंट में 500 रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। यह छोटा मुनाफा अमन के भरोसे को मजबूत करने का जरिया बना।इसके बाद ठगों ने बड़े टास्क का ऑफर दिया और अमन से 5 हजार रुपए जमा कराए गए। जैसे-जैसे वह टास्क करता गया, उसके अकाउंट में रकम बढ़ती दिखाई देने लगी। हालांकि, जब उसने राशि निकालने की कोशिश की, तो ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हो सका। ग्रुप एडमिन ने कहा कि रकम निकालने के लिए और पैसे जमा करना जरूरी है।

    अकाउंट में बढ़ती रकम के लालच में अमन बार-बार पैसे ट्रांसफर करता गया। अलग-अलग खातों में कुल 3.50 लाख रुपए भेजने के बावजूद उसे पैसा नहीं मिला। इसके अलावा, ठगों ने उस पर और पैसे जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया और टास्क अधूरे रहने पर कोर्ट केस में फंसाने की धमकी भी दी।तब जाकर अमन को ठगी का एहसास हुआ। उसने तुरंत मुरार थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार यह एक संगठित साइबर फ्रॉड का मामला है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया गया है।

    मुरार थाना पुलिस ने बताया कि मामले की जांच में मोबाइल नंबर, बैंक खातों और टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे घर बैठे कमाई या बिना मेहनत मुनाफे के दावों से सतर्क रहें। किसी भी अनजान लिंक या ग्रुप से जुड़ने से पहले पूरी जांच करना बेहद जरूरी है।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फ्रॉड में ज्यादातर छात्र और युवा आसानी से फंस जाते हैं, क्योंकि शुरुआती छोटे मुनाफे का लालच उन्हें बड़ा नुकसान उठाने के लिए प्रेरित करता है। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सतर्क रहने की जरूरत को उजागर किया है।