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  • तकनीक और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम: गुजरात में स्व-गणना शुरू, राज्यभर में जनगणना प्रक्रिया को मिला नया आयाम

    तकनीक और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम: गुजरात में स्व-गणना शुरू, राज्यभर में जनगणना प्रक्रिया को मिला नया आयाम

    नई दिल्ली ।  गुजरात में जनगणना-2027 की तैयारियों के बीच एक नए डिजिटल युग की शुरुआत देखने को मिल रही है, जहां स्व-गणना प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया है और राज्य सरकार ने नागरिकों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की है। इस पहल के तहत लोगों को यह सुविधा दी गई है कि वे अपने घर और परिवार से जुड़ी आवश्यक जानकारी स्वयं ऑनलाइन माध्यम से दर्ज कर सकें, जिससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी बल्कि डेटा संग्रह अधिक सटीक और पारदर्शी भी बन सकेगा। इस महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत राज्य के शीर्ष नेतृत्व द्वारा स्वयं अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर की गई, जिससे यह संदेश दिया गया कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है जिसमें हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नागरिकों के पास एक निश्चित अवधि के भीतर अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर होगा, जिसके बाद फील्ड स्तर पर घर-घर जाकर सत्यापन और विस्तृत सर्वेक्षण का कार्य किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है और पहली बार जनगणना को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिक आधुनिक स्वरूप दिया गया है, जिससे डेटा संग्रह की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार की उम्मीद है।

    इस व्यवस्था के तहत लोगों से उनके आवास, परिवार के सदस्यों, उपलब्ध सुविधाओं और जीवन स्तर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी ली जा रही है, ताकि नीति निर्माण और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। सरकार का मानना है कि जब वास्तविक और सटीक डेटा उपलब्ध होगा, तो सामाजिक कल्याण योजनाओं को अधिक लक्षित और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा। इसी के साथ पारंपरिक घर-घर सर्वेक्षण की प्रक्रिया भी जारी रखी गई है ताकि उन लोगों तक भी पहुंच सुनिश्चित हो सके जो डिजिटल माध्यम का उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं। फील्ड स्तर पर नियुक्त कर्मचारी मोबाइल तकनीक के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और त्रुटियों की संभावना कम होगी।

    राज्य में इस स्व-गणना प्रक्रिया को लेकर लोगों में जागरूकता और भागीदारी बढ़ रही है, और बड़ी संख्या में परिवार इस डिजिटल पहल से जुड़कर अपनी जानकारी दर्ज कर रहे हैं। यह कदम न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाता है बल्कि नागरिकों को भी एक सरल और सुरक्षित माध्यम प्रदान करता है जिसके जरिए वे सीधे इस राष्ट्रीय प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। जनगणना को लेकर यह नया दृष्टिकोण आने वाले समय में देशभर में डेटा प्रबंधन और नीति निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है, क्योंकि यह पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करता है और विकास योजनाओं को अधिक वास्तविक आधार प्रदान करता है।

  • डिजिटल जनगणना 2027 पर पीएम मोदी का जोर भोपाल में सीएम मोहन यादव ने मन की बात के जरिए जोड़ा संवाद

    डिजिटल जनगणना 2027 पर पीएम मोदी का जोर भोपाल में सीएम मोहन यादव ने मन की बात के जरिए जोड़ा संवाद


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को एक अलग ही माहौल देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 133वें संस्करण का जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ सामूहिक श्रवण किया। वीआईपी रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित इस कार्यक्रम में आमजन की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली जिससे यह एक जनसंवाद का मंच बन गया।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मन की बात आज देशवासियों के दिलों में अपनी खास जगह बना चुका है और यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि करोड़ों लोगों को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए समाज के प्रेरक कार्यों नवाचारों और सकारात्मक प्रयासों को सामने लाया जाता है जिससे लोगों को नई दिशा और प्रेरणा मिलती है।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए 2027 में होने वाली डिजिटल जनगणना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने इसे दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना बताते हुए कहा कि इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से की जाएगी। घर घर जाकर जानकारी एकत्र करने वाले कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप होगा जिसमें नागरिकों की जानकारी सीधे दर्ज की जाएगी।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि इस बार नागरिकों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी जा रही है। कर्मचारी के आने से लगभग 15 दिन पहले यह सुविधा शुरू होगी जिससे लोग अपने समय अनुसार जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद उन्हें एक विशेष आईडी मिलेगी जिसे वे कर्मचारी के आने पर दिखाकर अपनी जानकारी की पुष्टि कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया सरल होगी और समय की बचत भी होगी।

    उन्होंने जानकारी दी कि जिन राज्यों में स्व गणना का कार्य पूरा हो चुका है वहां घरों के सूचीकरण का काम भी शुरू हो गया है और अब तक करीब 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का मकान सूचीकरण किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में बढ़ चढ़कर भाग लें क्योंकि यह केवल सरकारी कार्य नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उपस्थित युवाओं और आमजनों से आत्मीय संवाद भी किया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान और स्वरोजगार जैसे विषयों पर चर्चा की और बताया कि राज्य सरकार महिलाओं की शिक्षा सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों से भी मुलाकात की और उनसे संवाद कर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के महत्व और बड़ों के सम्मान की सीख दी तथा उनके साथ समय बिताया।

    कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की बात देश को सकारात्मक दिशा देने का एक अनूठा प्रयास है। उन्होंने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी बन रहा है और जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया जा रहा है।

    कुल मिलाकर भोपाल में आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ एक रेडियो प्रसारण नहीं बल्कि जनसंवाद और जनभागीदारी का उदाहरण बनकर सामने आया जिसमें सरकार और जनता के बीच संवाद को मजबूत करने की झलक देखने को मिली।