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  • डिजिटल इंडिया से ग्लोबल लीडरशिप तक , पीएम मोदी ने पेरिस में गिनाईं उपलब्धियां कहा आकांक्षाओं का नया भारत भविष्य की दिशा तय कर रहा है

    डिजिटल इंडिया से ग्लोबल लीडरशिप तक , पीएम मोदी ने पेरिस में गिनाईं उपलब्धियां कहा आकांक्षाओं का नया भारत भविष्य की दिशा तय कर रहा है


    नई द‍िल्‍ली । फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित एक भव्य सामुदायिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत की तेजी से बदलती तस्वीर और उसकी वैश्विक भूमिका को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि फ्रांस में बसे भारतीय न केवल दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं बल्कि 21वीं सदी के भारत फ्रांस संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और योगदान भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है और देश ने विकास के कई नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत का सकल घरेलू उत्पाद दोगुना हुआ है जबकि निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और आज देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माण केंद्र बनकर उभरा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का विकास केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की भी एक बड़ी कहानी है। उन्होंने बताया कि देश में एयरपोर्ट की संख्या दोगुनी हुई है और विश्वविद्यालयों की संख्या में भी बड़ा विस्तार हुआ है। हाईवे निर्माण की गति पहले की तुलना में कई गुना बढ़ी है जबकि मेट्रो नेटवर्क ने रिकॉर्ड स्तर पर विस्तार किया है। इन प्रयासों ने देश में कनेक्टिविटी को मजबूत किया है और विकास को नई रफ्तार दी है।

    डिजिटल इंडिया अभियान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने डिजिटल तकनीक को जनसामान्य तक पहुंचाने में बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि देश में करोड़ों नागरिकों को यूनिक डिजिटल हेल्थ आईडी उपलब्ध कराई गई है जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा रहा है। मेडिकल रिकॉर्ड अब सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध हैं जिससे मरीजों और स्वास्थ्य संस्थानों दोनों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक यह कल्पना करना भी कठिन था कि देश के दूरदराज गांवों तक हाई स्पीड इंटरनेट पहुंच जाएगा लेकिन आज यह वास्तविकता बन चुकी है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की आकांक्षाओं का नया दौर है जहां लोगों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। अब लोग केवल मूलभूत सुविधाओं से संतुष्ट नहीं हैं बल्कि बेहतर जीवन स्तर और विश्वस्तरीय सुविधाओं की अपेक्षा रखते हैं। जहां बिजली पहुंची है वहां लोग स्मार्ट जीवनशैली चाहते हैं। जहां रेल पहुंची है वहां हाई स्पीड कनेक्टिविटी की मांग है और जहां इंटरनेट पहुंचा है वहां लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा डिजिटल नवाचार में नेतृत्व की आकांक्षा रखते हैं। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपने नागरिकों के सपनों को साकार करने के साथ साथ भविष्य का मजबूत इकोसिस्टम भी तैयार कर रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में देशों के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गए हैं बल्कि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। दुनिया के देश विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला और स्थिर साझेदारी की तलाश में हैं। ऐसे समय में भारत एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत विकास नवाचार और वैश्विक सहयोग के नए मानक स्थापित करेगा और विश्व मंच पर अपनी भूमिका को और अधिक मजबूत बनाएगा।

  • पीएम स्वनिधि योजना की बड़ी उपलब्धि, 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल सिस्टम से जुड़े, 9 लाख करोड़ के लेनदेन दर्ज

    पीएम स्वनिधि योजना की बड़ी उपलब्धि, 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल सिस्टम से जुड़े, 9 लाख करोड़ के लेनदेन दर्ज

    नई दिल्ली । देश में असंगठित क्षेत्र के आर्थिक सशक्तिकरण और शहरी गरीब तबके के लिए चलाई जा रही पीएम स्वनिधि योजना लगातार महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज कर रही है। इस योजना के तहत अब तक 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जा चुका है, जिससे रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के कारोबार में पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ी है। योजना के तहत किए गए प्रयासों का व्यापक असर यह रहा है कि लाभार्थियों द्वारा अब तक 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए गए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

    इस योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी, जिसका उद्देश्य छोटे और असंगठित व्यापारियों को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना था। समय के साथ यह योजना केवल ऋण सुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल समावेशन और वित्तीय साक्षरता का एक मजबूत माध्यम बन गई है। इसके तहत लाभार्थियों को तीन चरणों में ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को विस्तार दे सकें। योजना की खास बात यह है कि इसमें सरकारी गारंटी के साथ ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे बैंकों और लाभार्थियों दोनों का जोखिम कम होता है।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस योजना के लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थी पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़े हैं, जो देश में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसके साथ ही लाभार्थियों की औसत आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार देखा गया है। कई लाभार्थियों ने बेहतर आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक अपनी पहुंच को भी मजबूत किया है।

    डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इस योजना में कैशबैक प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं, जिसके तहत लाभार्थियों को डिजिटल लेनदेन पर वित्तीय लाभ दिया जाता है। इससे छोटे व्यापारी भी डिजिटल ट्रांजैक्शन अपनाने के लिए प्रेरित हुए हैं और देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। लगभग 46 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, जो इस योजना की सामाजिक समावेशिता को दर्शाता है, जबकि बड़ी संख्या में लाभार्थी वंचित और कमजोर वर्गों से आते हैं।

    सरकार ने इस योजना की उपलब्धियों को देखते हुए इसके विस्तार की घोषणा की है, जिसके तहत इसे अब मार्च 2030 तक जारी रखा जाएगा। इससे अधिक से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को योजना का लाभ मिल सकेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। साथ ही, यूपीआई आधारित क्रेडिट कार्ड सुविधा भी योजना के अगले चरण में शामिल की गई है, जिससे छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिल सकेगी।

    कुल मिलाकर पीएम स्वनिधि योजना देश में सूक्ष्म ऋण प्रणाली और डिजिटल भुगतान के विस्तार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह न केवल आर्थिक मजबूती का माध्यम बन रही है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में भी प्रभावी साबित हो रही है।

  • भारत बना वैश्विक ग्रोथ का नया केंद्र, उभरते ब्रांड्स के साथ बढ़ रहा सहयोग, डिजिटल कॉमर्स और इनोवेशन को मिल रही नई रफ्तार

    भारत बना वैश्विक ग्रोथ का नया केंद्र, उभरते ब्रांड्स के साथ बढ़ रहा सहयोग, डिजिटल कॉमर्स और इनोवेशन को मिल रही नई रफ्तार

    नई दिल्ली ।भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और डिजिटल क्षेत्र में हो रहा विस्तार अब वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में हुए एक उच्च स्तरीय संवाद में यह बात सामने आई कि भारत अब केवल एक उभरता हुआ बाजार नहीं रहा, बल्कि दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन बन चुका है। इस बातचीत में विभिन्न क्षेत्रों के उभरते ब्रांड्स और वैश्विक व्यापार से जुड़े नेतृत्व ने भाग लिया और भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए।

    इस चर्चा का मुख्य केंद्र यह था कि कैसे भारत में तेजी से विकसित हो रहा स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म नए ब्रांड्स को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सौंदर्य, फूड एंड बेवरेज, लाइफस्टाइल, फैशन और पालतू देखभाल जैसे क्षेत्रों से जुड़े कई नए उद्यमियों ने अपने अनुभव और चुनौतियों को साझा किया। इन सभी का उद्देश्य अपने ब्रांड को न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी स्थापित करना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में उपभोक्ता बाजार तेजी से बदल रहा है और डिजिटल तकनीक ने व्यापार करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। अब छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसाय भी बड़े ब्रांड्स के साथ प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता हासिल कर रहे हैं। यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहा है और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।

    इस बातचीत में यह भी सामने आया कि डिजिटल मार्केटप्लेस अब केवल बिक्री का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यवसायों को विस्तार देने, नए ग्राहकों तक पहुंचने और वैश्विक बाजार में प्रवेश करने का एक मजबूत साधन बन चुका है। डेटा आधारित रणनीतियों और तकनीकी सहयोग के जरिए ब्रांड्स अपने विकास को तेज कर रहे हैं।

    वैश्विक स्तर के व्यापार नेतृत्व ने भारतीय उद्यमियों की सोच की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी नवाचार क्षमता और लंबे समय की योजना है। ये ब्रांड्स केवल स्थानीय जरूरतों को पूरा करने पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाने पर ध्यान दे रहे हैं।

    भारत में बढ़ती डिजिटल पहुंच और ई-कॉमर्स की तेजी ने छोटे व्यवसायों के लिए भी बड़े अवसर खोल दिए हैं। आज कोई भी उद्यमी अपने उत्पादों को सीमित क्षेत्र तक ही नहीं बल्कि पूरे देश और दुनिया तक पहुंचा सकता है। यह बदलाव न केवल व्यापार को प्रभावित कर रहा है बल्कि देश की आर्थिक वृद्धि में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

  • स्वास्थ्य सेवा में एआई की नई छलांग: एम्स भोपाल में शुरू हुई डिजिटल नेविगेशन सुविधा, रोजाना 12 हजार मरीजों का सफर होगा आसान।

    स्वास्थ्य सेवा में एआई की नई छलांग: एम्स भोपाल में शुरू हुई डिजिटल नेविगेशन सुविधा, रोजाना 12 हजार मरीजों का सफर होगा आसान।


    मध्य प्रदेश की राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान AIIMS भोपाल ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अक्सर बड़े अस्पतालों के विशाल परिसर और एक जैसी इमारतों के बीच मरीज और उनके परिजन विभाग ढूँढ़ते हुए भटक जाते हैं, लेकिन अब एम्स भोपाल में इस समस्या का अंत होने जा रहा है। संस्थान ने देश की पहली ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI आधारित नेविगेशन प्रणाली’ शुरू की है। इस स्मार्ट तकनीक की मदद से अब रोजाना अस्पताल आने वाले 10 से 12 हजार लोगों को अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए किसी से रास्ता पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    यह आधुनिक प्रणाली बिल्कुल वैसे ही काम करेगी जैसे हम अनजान शहरों में ‘गूगल मैप्स’ का उपयोग करते हैं। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख चौराहों पर विशेष क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। जैसे ही कोई मरीज या परिजन अपने मोबाइल से इस कोड को स्कैन करेगा उसकी स्क्रीन पर पूरे अस्पताल का इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा। यह तकनीक आईआईटी इंदौर की विशेषज्ञ टीम और एक स्थानीय स्टार्टअप के सहयोग से तैयार की गई है, जो वेब और मोबाइल एप दोनों स्वरूपों में उपलब्ध होगी।

    अस्पताल प्रशासन ने इस सिस्टम को बेहद सटीक बनाने के लिए इमारतों के बाहर जीपीएस और भवनों के अंदर ‘रिले उपकरणों’ का उपयोग किया है। चूंकि इमारतों के भीतर जीपीएस सिग्नल कमजोर हो जाते हैं, इसलिए हर 15 मीटर पर विशेष सेंसर लगाए गए हैं जो मोबाइल को बिल्कुल सटीक दिशा संकेत देंगे। यह पायलट प्रोजेक्ट फिलहाल एक महीने के परीक्षण पर है, जिसकी सफलता के बाद इसे पूरे परिसर में स्थायी रूप से लागू कर दिया जाएगा। इस पहल से न केवल मरीजों का कीमती समय बचेगा, बल्कि भ्रम की स्थिति खत्म होने से अस्पताल के स्टाफ पर से भी मार्गदर्शन का अतिरिक्त बोझ कम होगा।

  • PF निकासी होगी अब और आसान, EPFO लाएगा नया मोबाइल एप UPI इंटीग्रेशन के साथ

    PF निकासी होगी अब और आसान, EPFO लाएगा नया मोबाइल एप UPI इंटीग्रेशन के साथ


    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन EPFO अपने करोड़ों सदस्यों के लिए एक नया मोबाइल एप लॉन्च करने की तैयारी में है, जिससे PF की निकासी अब और तेज, आसान और डिजिटल होगी। इस एप में सदस्य सीधे अपने बैंक खाते से लिंक होकर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस UPI के माध्यम से पैसा निकाल सकेंगे। फिलहाल यह प्लेटफॉर्म परीक्षण चरण में है और तकनीकी खामियों को दूर किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, एप का संभावित लॉन्च मार्च–अप्रैल 2026 में किया जा सकता है।

    यह नया एप मौजूदा UMANG प्लेटफॉर्म से अलग होगा और सीधे सदस्य के बैंक खाते से जुड़ा रहेगा। एप के जरिए उपयोगकर्ता अपने पात्र EPF बैलेंस की जानकारी देख पाएंगे और UPI पिन का इस्तेमाल करके राशि सीधे अपने आधार-सीडेड बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके साथ ही पासबुक बैलेंस की जांच और क्लेम स्टेटस देखने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

    EPFO के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में लगभग 100 डमी खातों के माध्यम से परीक्षण चल रहा है। परीक्षण के दौरान लेनदेन की गति, सुरक्षा और डेटा समन्वय की जांच की जा रही है। प्रारंभिक चरण में PF का एक हिस्सा सुरक्षित रहेगा, जबकि शेष पात्र राशि UPI के जरिए निकाली जा सकेगी।

    यह पहल EPFO 3.0 डिजिटल अपग्रेड कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका मकसद क्लेम प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और उपयोगकर्ता के लिए सहज बनाना है। वर्तमान में सदस्य UAN पोर्टल या UMANG एप के माध्यम से क्लेम फाइल करते हैं, जिसमें सत्यापन और स्वीकृति में समय लगता है। महामारी के दौरान शुरू की गई ऑटो-सेटलमेंट प्रणाली ने प्रक्रिया को तेज किया था, लेकिन प्रत्यक्ष त्वरित निकासी की सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं थी।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि UPI इंटीग्रेशन से PF निकासी की प्रक्रिया बैंकिंग सेवाओं के समान सुविधा प्रदान करेगी। सदस्य अब बीमारी, शिक्षा, विवाह या आवास जैसे जरूरी खर्चों के लिए कम समय में धन प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और सेवा वितरण की दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

    EPFO के पास लगभग 8 करोड़ सक्रिय सदस्य हैं और हर वर्ष करोड़ों क्लेम सेटल किए जाते हैं। संगठन के मुताबिक, नई मोबाइल एप सुविधा से सेवा की गुणवत्ता और उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर होगा। हालांकि, EPFO के पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं है, इसलिए निकासी प्रक्रिया सीधे बैंक खातों के माध्यम से ही पूरी की जाएगी।इस एप के आने से EPFO सदस्यों के लिए PF निकासी का समय घटेगा, प्रक्रिया पारदर्शी होगी और डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाने में तेजी आएगी। आने वाले महीनों में यह एप PF के डिजिटल अनुभव को पूरी तरह बदलने की संभावना रखता है।

  • महाकाल मंदिर उज्जैन अब भक्तों को नहीं होगी नकद की चिंतादान से लेकर प्रसाद तक सब कुछ हुआ कैशलेस

    महाकाल मंदिर उज्जैन अब भक्तों को नहीं होगी नकद की चिंतादान से लेकर प्रसाद तक सब कुछ हुआ कैशलेस


    उज्जैन । उज्जैन विश्व के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शुमार भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने एक बड़ी सुविधा शुरू की है। अब देश-विदेश से आने वाले भक्तों को मंदिर में दान देने या अन्य सेवाओं के लिए नकद रखने की अनिवार्यता नहीं होगी। मंदिर समिति ने पूरे परिसर को कैशलेस ट्रांजेक्शन से जोड़ते हुए जगह-जगह क्यूआर कोड और बारकोड लगा दिए हैं।

    इन सेवाओं में मिलेगी कैशलेस सुविधा

    मंदिर प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालु बिना किसी आर्थिक उलझन के बाबा के दर्शन कर सकें। वर्तमान में निम्नलिखित सेवाओं में ई-वॉलेट और डिजिटल भुगतान का लाभ मिल रहा है भस्म आरती बुकिंग ऑनलाइन पोर्टल पर ई-वॉलेट के जरिए बुकिंग पहले से जारी है। शीघ्र दर्शन टिकट सशुल्क दर्शन के लिए काउंटर पर डिजिटल पेमेंट की सुविधा। दान काउंटर मंदिर के विभिन्न दान काउंटरों पर बारकोड के माध्यम से सीधा भुगतान। लड्डू प्रसाद अब महाकाल का सुप्रसिद्ध लड्डू प्रसाद भी ऑनलाइन पेमेंट के जरिए लिया जा सकेगा। धर्मशाला एवं अन्न क्षेत्र महाकालेश्वर और हरसिद्धि धर्मशाला में रुकने का शुल्क और अन्न क्षेत्र का सहयोग भी कैशलेस किया गया है।

    नेटवर्क की चिंता नहीं नकद भुगतान भी रहेगा जारी

    डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ मंदिर समिति ने व्यवहारिकता का भी ध्यान रखा है। अक्सर मंदिर परिसर में भीड़ और तकनीकी कारणों से नेटवर्क की समस्या आ जाती है। इसे देखते हुए समिति ने स्पष्ट किया है कि नकद भुगतान की सुविधा भी अनिवार्य रूप से बनी रहेगी। यदि ई-पेमेंट में कोई तकनीकी खामी आती हैतो दर्शनार्थी पुराने तरीके से भी भुगतान कर सकेंगे ताकि उनकी व्यवस्था प्रभावित न हो।

    मंदिर परिसर में हर जगह उपलब्ध हैं बारकोड

    भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर के प्रमुख स्थानोंविश्राम धाम और कार्यालयों के बाहर बारकोड लगाए गए हैं। श्रद्धालु अपने मोबाइल से किसी भी यूपीआई ऐप जैसे PhonePeGoogle PayPaytm के माध्यम से सुरक्षित रूप से दान राशि जमा कर सकते हैं। इसकी रसीद भी डिजिटल या भौतिक रूप से प्राप्त करने की व्यवस्था की जा रही है।

    प्रशासक का विजन सुलभ और पारदर्शी व्यवस्था

    मंदिर समिति के अनुसारइस कदम से न केवल भक्तों को सुविधा होगीबल्कि मंदिर के कोष और लेखा-जोखा में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। डिजिटल लेन-देन से रिकॉर्ड रखने में आसानी होती है और सुरक्षा की दृष्टि से भी यह बेहतर है। सुविधा दानप्रसादऔर बुकिंग के लिए कैशलेस व्यवस्था। माध्यम बारकोडक्यूआर कोड और ई-वॉलेट। विकल्प डिजिटल के साथ नकद भुगतान की सुविधा भी बरकरार। स्थान महाकालेश्वर मंदिरउज्जैन।

  • अबूझमाड़ में डिजिटल क्रांति की शुरुआत: केंद्र ने 513 नए 4G मोबाइल टावरों को दी मंजूरी

    अबूझमाड़ में डिजिटल क्रांति की शुरुआत: केंद्र ने 513 नए 4G मोबाइल टावरों को दी मंजूरी


    रायपुर/ छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और बस्तर अंचल में लंबे समय तक माओवादी हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास की रफ्तार धीमी रही। लेकिन बीते कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और प्रशासनिक प्रयासों के चलते हालात तेजी से बदले हैं। अब जब बस्तर के करीब 400 गांव हिंसा मुक्त हो चुके हैं, तो केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

    513 नए 4G मोबाइल टावरों को मंजूरी
    केंद्र सरकार ने डिजिटल भारत निधि (Digital Bharat Nidhi) के तहत अबूझमाड़ क्षेत्र में बीएसएनएल के माध्यम से 513 नए 4G मोबाइल टावर लगाने की स्वीकृति दी है। इस फैसले से न केवल संचार व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि यह माओवादी प्रभावित इलाकों में विकास की नई इबारत भी लिखेगा। राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला सुरक्षा और विकास—दोनों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

    सुरक्षा बलों को मिलेगी तकनीकी बढ़त

    अबूझमाड़ और आसपास के इलाकों में पहले से स्थापित 728 मोबाइल टावर बीते कुछ वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी ताकत साबित हुए हैं। मोबाइल नेटवर्क के विस्तार से सुरक्षा बलों को रियल टाइम कम्युनिकेशन, लोकेशन ट्रैकिंग और इंटेलिजेंस इनपुट साझा करने में मदद मिली है।अधिकारियों का कहना है कि अगस्त 2025 में रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद पड़ोसी राज्यों के साथ रियल टाइम सूचना साझा करने की प्रणाली लागू की गई थी। इसके बाद से माओवादियों की गतिविधियों पर नजर रखना और भी आसान हो गया है।

    माओवादियों पर कसा शिकंजा
    सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, माओवादी आमतौर पर मोबाइल फोन के इस्तेमाल से बचते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि डिजिटल फुटप्रिंट के जरिए उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकती है। इसके बावजूद, नेटवर्क विस्तार के बाद किसी भी असामान्य सिग्नल पैटर्न या संदिग्ध गतिविधि को समय रहते पकड़ा जा रहा है।इससे माओवादी संगठनों की मूवमेंट की जानकारी पहले ही मिल जाती है और सुरक्षा बल उन्हें अपने रडार पर बनाए रखने में सफल हो रहे हैं।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान
    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 513 मोबाइल टावरों को मिली मंजूरी का स्वागत करते हुए इसे राज्य के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला छत्तीसगढ़ को डिजिटल रूप से सशक्त, सुरक्षित और समावेशी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

    दुर्गम इलाकों में भी बजेगी मोबाइल की घंटी
    इन नए 4G मोबाइल टावरों की स्थापना से अबूझमाड़ जैसे सुदूर और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों को पहली बार भरोसेमंद मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं मिल सकेंगी। इससे-ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ होंगी रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के नए अवसर मिलेंगे आपातकालीन संचार व्यवस्था मजबूत होगी विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल विस्तार वित्तीय समावेशन को भी गति देगा।

    बैंकिंग और सरकारी सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा
    मजबूत मोबाइल नेटवर्क के चलते ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में-बैंकिंग सेवाएं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) UPI और डिजिटल पेमेंट बीमा और पेंशन योजनाएं आम लोगों तक आसानी से पहुंच सकेंगी। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

    सुरक्षा और विकास की संयुक्त रणनीति
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को साथ-साथ आगे बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। सरकार गठन के बाद अब तक-
    69 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए इनके आसपास के 403 गांवों में 9 विभागों की 18 सामुदायिक सेवाएं 11 विभागों की 25 व्यक्तिमूलक योजनाएं पहुंचाई जा रही हैं यह पहली बार है जब इन दुर्गम इलाकों में सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित हुई है।

    साझा प्रयासों का प्रतिफल
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मोबाइल टावरों की स्वीकृति माओवादी हिंसा उन्मूलन और क्षेत्रीय विकास के साझा प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में स्थायित्व स्थापित हुआ है, वहां अब डिजिटल कनेक्टिविटी और विकास को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।