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  • राम मंदिर के चंदे पर दिग्विजय की पदयात्रा को लेकर हर्षा का बयान, पूछा- पहले मंदिर निर्माण पर उत्साह क्यों नहीं दिखाया

    राम मंदिर के चंदे पर दिग्विजय की पदयात्रा को लेकर हर्षा का बयान, पूछा- पहले मंदिर निर्माण पर उत्साह क्यों नहीं दिखाया


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक प्रस्तावित सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर सवाल उठाए हैं। हर्षा ने दिग्विजय सिंह का सीधे नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा कि जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ था तब वैसा उत्साह और खुशी दिखाई नहीं दी जैसी अब मंदिर के चंदे को लेकर सवाल उठाने में नजर आ रही है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि चुनाव नजदीक आने पर ही भगवान राम की याद क्यों आ रही है और अब उन्हें इंसाफ दिलाने की बात क्यों की जा रही है।

    दशहरे से पहले दिए गए अपने बयान में हर्षा रिछारिया ने कहा कि एक ओर देशभर में विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के एक पूर्व मुख्यमंत्री उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने की तैयारी कर रहे हैं। हर्षा के मुताबिक इस यात्रा का उद्देश्य राम मंदिर के निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब संबंधित नेता भगवान राम को इंसाफ दिलाने का संकल्प लेकर यात्रा पर निकल रहे हैं।

    हर्षा ने राम मंदिर निर्माण से जुड़ी लंबी कानूनी लड़ाई का जिक्र करते हुए विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के फैसले के समय विरोध किया गया था और अतीत में भगवान राम के अस्तित्व तथा रामसेतु को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हर्षा का कहना है कि जब राम मंदिर का निर्माण हुआ तब वैसी खुशी और उत्साह दिखाई नहीं दिया जैसा अब मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर दिखाया जा रहा है। हालांकि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े राजनीतिक विवादों पर अलग-अलग दलों और नेताओं के अपने-अपने विचार रहे हैं।

    अपने बयान में हर्षा ने यात्रा के समय और उसके पीछे की मंशा को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि राम मंदिर बनने के बाद अब अचानक भगवान राम की शरण में जाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। उन्होंने चुनाव नजदीक होने या किसी व्यक्ति को पद दिलाने जैसी संभावनाओं का उल्लेख करते हुए यात्रा के उद्देश्य पर सवाल उठाया। ये हर्षा के राजनीतिक आरोप और उनकी व्यक्तिगत व्याख्या हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा निकालने वाले की मंशा पूरी होगी या नहीं यह उन्हें नहीं पता लेकिन देश के लिए जो उचित होगा वही होना चाहिए।

    बयान के आखिर में हर्षा रिछारिया ने दिग्विजय सिंह को यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि प्रयास करना चाहिए और अंत में हर व्यक्ति राम की शरण में जाता है। उनके इस बयान के बाद दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित पदयात्रा को लेकर राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है।

    दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक करीब 950 से 1000 किलोमीटर की पदयात्रा का ऐलान किया है। यात्रा का उद्देश्य राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को उठाना बताया गया है। प्रस्तावित यात्रा में विभिन्न स्थानों पर लोगों और सामाजिक संगठनों के जुड़ने की संभावना है। हर्षा रिछारिया के बयान ने इस यात्रा को लेकर राजनीतिक बहस को एक नया मोड़ दिया है। अब इस मुद्दे पर संबंधित नेताओं की प्रतिक्रियाओं और यात्रा के दौरान उठाए जाने वाले सवालों पर नजर रहेगी।

  • दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर रोजाना 30 से 50 हजार खर्च का अनुमान, बोले कौन भंडारा करा रहा मुझे नहीं पता

    दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर रोजाना 30 से 50 हजार खर्च का अनुमान, बोले कौन भंडारा करा रहा मुझे नहीं पता


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर को उज्जैन से अपनी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत की। उज्जैन से अयोध्या तक करीब 950 किलोमीटर की इस पदयात्रा को लगभग 70 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यात्रा शुरू होने से पहले दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया। इसके बाद उन्होंने भगवान महाकाल के दर्शन कर यात्रा की शुरुआत की। इस पदयात्रा में साधु संतों सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों कांग्रेस कार्यकर्ताओं विधायकों और महिला प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों के मुताबिक पहले दिन करीब तीन हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान है जबकि आगे के पड़ावों पर रोजाना एक हजार से पंद्रह सौ लोग यात्रा से जुड़ सकते हैं।

    दिग्विजय सिंह ने यह यात्रा मंदिरों में चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू की है। उनका कहना है कि यात्रा के दौरान भोजन नाश्ते चाय और ठहरने की व्यवस्था में अलग-अलग स्थानों पर लोग स्वेच्छा से सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि कौन व्यक्ति किस स्थान पर भंडारा करा रहा है। दिग्विजय सिंह ने अपनी नर्मदा परिक्रमा का उदाहरण देते हुए बताया कि उस दौरान भी कई लोग अपने भंडारे की व्यवस्था यात्रा में शामिल कराने के लिए आग्रह करते थे। उनके अनुसार इस बार भी लोग खुद आगे आकर यात्रियों के भोजन और अन्य जरूरतों का इंतजाम कर रहे हैं।

    यात्रा की व्यवस्थाओं पर प्रतिदिन करीब 30 से 50 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। कांग्रेस विधायक महेश परमार के मुताबिक छोटे ग्रामीण पड़ावों पर खर्च लगभग 20 से 30 हजार रुपये तक रह सकता है जबकि बड़े पड़ावों पर यह राशि 50 से 60 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। करीब 70 दिन की यात्रा के लिए कुल 30 से 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। शुरुआती पड़ावों पर यात्रियों के रुकने भोजन चाय और नाश्ते की व्यवस्था स्थानीय लोगों के सहयोग से की गई है। आयोजकों के मुताबिक रास्ते में लगभग हर तीन किलोमीटर पर चाय और सुबह के नाश्ते के साथ दोनों समय भोजन की व्यवस्था करने के लिए लोग आगे आए हैं।

    यात्रा के दौरान प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलने की योजना है। इसकी तैयारी के लिए दिग्विजय सिंह रोज करीब आठ किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास कर रहे थे। उज्जैन से निकलने के बाद यात्रा तराना और कनासिया होते हुए शाजापुर जिले की ओर बढ़ेगी। इसके बाद यह सारंगपुर खुजनेर राजगढ़ चाचौड़ा आरोन अशोकनगर और चंदेरी सहित कई क्षेत्रों से गुजरेगी। मध्य प्रदेश के बाद यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी और तालबेहट जेरोन ओरछा चिरगांव उरई कालपी कानपुर देहात लखनऊ देहात और बाराबंकी के रास्ते अयोध्या पहुंचेगी। यात्रा का अंतिम पड़ाव राम मंदिर निर्धारित किया गया है।

    इस पदयात्रा के साथ एक विशेष रथ भी चल रहा है। इसमें भगवान राम लक्ष्मण माता सीता और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। रथ में गंगा यमुना शिप्रा कावेरी और नर्मदा नदियों के जल से भरे कलश भी रखे गए हैं। आयोजकों के अनुसार कई संतों ने यात्रा को समर्थन और आशीर्वाद दिया है। महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा सहित अन्य धार्मिक हस्तियों के इसमें शामिल होने की बात कही गई है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का भी समर्थन मिलने की जानकारी आयोजकों ने दी है।

    यात्रा में शामिल होने पहुंचीं फराह खान ने कहा कि वह अपनी इच्छा से इस पदयात्रा में शामिल हुई हैं। उन्होंने मंदिरों से सोने की चोरी और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया। फराह खान के मुताबिक वह शुरुआती पांच से छह दिन यात्रा में रहेंगी और पारिवारिक कार्यक्रम के बाद दोबारा इसमें शामिल होंगी। आयोजकों का कहना है कि रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर लोग यात्रा से जुड़ेंगे। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि करीब 950 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कब अयोध्या पहुंचती है और मंदिरों की व्यवस्था में पारदर्शिता का मुद्दा किस तरह आगे बढ़ता है।