Tag: Digvijaya Singh

  • पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन

    पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में शुक्रवार का दिन राजनीति प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई चर्चित घटनाओं के नाम रहा। कहीं उपचुनाव की तैयारियों के बीच पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की वापसी की अटकलों ने जोर पकड़ा तो कहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चंदे को लेकर अपने ही अंदाज में सियासी संदेश दे दिया। दूसरी ओर नर्मदापुरम जिले में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक का शराब के नशे में क्लासरूम में सोते हुए वीडियो सामने आने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इन सबके बीच मंत्रालय के गलियारों में एक महिला मंत्री और उनके विभाग से जुड़ी चर्चाएं भी खूब सुर्खियां बटोरती रहीं।

    दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बाद पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गए हैं। उनका पुराना शायराना बयान कि समुद्र का पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना मैं लौटकर आऊंगा एक बार फिर चर्चाओं में है। उपचुनाव को लेकर उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने जनता के बीच विनम्रता के साथ स्वीकार किया कि यदि उनसे कोई गलती हुई है तो उसे सुधारेंगे और अपने व्यवहार तथा कार्यशैली में बदलाव लाकर लोगों का विश्वास दोबारा जीतने का प्रयास करेंगे। हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने अब तक उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन राजनीतिक हलकों में नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।

    उधर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर अपने भोपाल स्थित निवास के बाहर एक बड़ा पोस्टर लगा दिया। पोस्टर में साफ लिखा गया है कि भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे के चोरों और चढ़ावा चोरों का उनके घर में प्रवेश निषिद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने का ऐलान भी किया है। उनका कहना है कि यह यात्रा पूरी तरह गैर राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य केवल चंदे में पारदर्शिता की मांग करना है। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल के बीच नर्मदापुरम जिले के केसला क्षेत्र से आई एक घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यहां एक सरकारी स्कूल का शिक्षक शराब के नशे में धुत होकर कक्षा में ही सोता मिला। ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया जबकि शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया। बाद में शिक्षक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में शराब नहीं पीने का वादा किया लेकिन घटना ने सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी।

    इधर मंत्रालय के गलियारों में भी एक महिला मंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि वे अपने विभाग में प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति चाहती हैं ताकि विभागीय कामकाज पर बेहतर नियंत्रण स्थापित हो सके। चर्चा यह भी है कि विभाग में बड़े टेंडर और तबादलों को लेकर मंत्री और विभाग की वरिष्ठ अधिकारी के बीच मतभेद सामने आए हैं। हालांकि इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

    प्रदेश में एक ही दिन सामने आई इन घटनाओं ने साफ कर दिया कि मध्य प्रदेश में राजनीति प्रशासन और व्यवस्था से जुड़े मुद्दे लगातार नए रंग दिखा रहे हैं। आने वाले दिनों में उपचुनाव पदयात्रा और प्रशासनिक फैसलों के साथ इन घटनाओं का असर प्रदेश की सियासत में और अधिक दिखाई दे सकता है।

  • राम मंदिर चंदे पर दिग्विजय का बड़ा अभियान! महाकाल से रामलला तक 1000 किलोमीटर पैदल यात्रा का ऐलान

    राम मंदिर चंदे पर दिग्विजय का बड़ा अभियान! महाकाल से रामलला तक 1000 किलोमीटर पैदल यात्रा का ऐलान


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे की पारदर्शिता को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक अभियान शुरू करने की घोषणा की है। भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर से उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर से अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर तक लगभग 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली जाएगी। उनका कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का प्रचार नहीं बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के श्रद्धालुओं से जुटाए गए चंदे का सार्वजनिक हिसाब मांगना होगा।

    दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का प्रचार नहीं किया जाएगा और वे स्वयं फेसबुक एक्स सहित किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यह अभियान केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग के लिए होगा ताकि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखा जा सके।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपए का योगदान दिया था। उनके पास आज भी चंदे की रसीद और चेक की प्रति सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि देशभर के करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति आस्था के साथ दान दिया था इसलिए यह जानना उनका अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।

    उन्होंने घोषणा की कि 5 या 6 जुलाई को वरिष्ठ अधिवक्ताओं से चर्चा करने के बाद अयोध्या जाकर अदालत में याचिका दायर करेंगे। उनके अनुसार अदालत से अनुरोध किया जाएगा कि राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे का पूरा वित्तीय विवरण सार्वजनिक कराया जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

    दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि उनकी पदयात्रा में उन सभी लोगों का स्वागत होगा जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़े लोग यदि चंदे की पारदर्शिता चाहते हैं तो वे इस यात्रा में शामिल हो सकते हैं। यात्रा के दौरान वे अपनी दान रसीद और चेक की प्रतियां भी साथ लेकर चलेंगे ताकि यह संदेश दिया जा सके कि दानदाताओं को अपने योगदान का हिसाब मांगने का पूरा अधिकार है।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े कुछ ट्रस्टों की आर्थिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उज्जैन के महाकाल मंदिर क्षेत्र में ट्रस्ट द्वारा विकसित गेस्ट हाउस और होटल परियोजना की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी भी धार्मिक ट्रस्ट को जनता से चंदा मिलता है तो उसकी आय और खर्च का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि यदि अदालत में वित्तीय अनियमितता साबित होती है तो वे अपना दान वापस लेकर किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाएंगे जिस पर लिखा होगा कि चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है। दिग्विजय सिंह के इस ऐलान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है।

  • MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह

    MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह


    भोपाल।
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता (Senior Congress leader) दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी के मुद्दे को लेकर दो अक्टूबर (गांधी जयंती) से उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) से अयोध्या (Ayodhya) तक ‘गैर-राजनीतिक’ पदयात्रा करेंगे। सिंह ने इस बात की घोषणा भोपाल में अपने सरकारी आवास के बाहर एक बैनर लगाने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मैंने अपने घर के बाहर एक बैनर लगाया है, जिस पर लिखा है चंदा चोरों का प्रवेश वर्जित है। आगे उन्होंने कहा कि अब यह बैनर सभी मंदिरों के बाहर लगना चाहिए कि चंदा चोरों से सावधान।

    दरअसल सिंह ने अपने घर के बार जो बैनर लगाया उस पर लिखा है, ‘जय सिया राम। हमारी आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए समूचे देश के द्वारा दिए गए चंदा के चोरों एवं चढ़ावा चोरों का मेरे निवास पर प्रवेश निषेध है।’ इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि वह अदालत में वाद दायर कर राम मंदिर के लिए दिया गया अपना चंदा वापस मांगेंगे क्योंकि उनके धन का दुरुपयोग हुआ है।


    ‘पदयात्रा में हर दिन चलूंगा 10 से 15 किमी पैदल’

    कांग्रेस नेता ने कहा, ‘राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के विरोध में मैं दो अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा शुरू करूंगा। यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। इसमें किसी दल का झंडा नहीं रहेगा। भगवान राम में आस्था रखने वाले और राम मंदिर में दान देने वाले सभी लोग इसमें शामिल हो सकते हैं।’ एक प्रश्न के उत्तर में सिंह ने कहा कि यात्रा की दूरी करीब एक हजार किलोमीटर है और वह प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।


    ‘आडवाणी की रथयात्रा के दौरान दिया था चंदा’

    पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा, ‘मैंने लालकृष्ण आडवाणी (वरिष्ठ भाजपा नेता) की रथयात्रा के दौरान चंदा दिया था क्योंकि मुझे भगवान राम और मंदिर पर आस्था है। उस पहले अभियान में एकत्र किए गए चंदे का आज तक कोई हिसाब नहीं दिया गया। उच्चतम न्यायालय के फैसले (जिससे मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ) के बाद फिर से चंदा अभियान चलाया गया।’


    ‘मुकदमा दायर करते हुए वापस मांगूंगा चंदा’

    उन्होंने कहा, ‘मैंने तय किया है कि अयोध्या में मुकदमा दायर करूंगा कि मेरे द्वारा दिया गया चंदा गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। मैं अपना चंदा वापस चाहता हूं।’ सिंह का यह बयान राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की कथित चोरी के आरोपों के संदर्भ में आया, जिनकी जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है।


    ‘महाकाल मंदिर के पास की जमीन RSS को दी गई थी’

    सिंह ने दावा किया कि जब दूसरी बार विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने चंदा अभियान चलाया तो उन्होंने संगठन पर भरोसा नहीं होने के कारण उसमें योगदान नहीं दिया और सीधे 1 लाख 11 हजार रुपए का दान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की चोरी हुई है, उसी तरह उज्जैन में भी महाकाल मंदिर के पास की एक बहुमूल्य भूमि भाजपा की सुंदरलाल पटवा सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दे दी थी।


    ‘होटल के लिए अब उस स्कूल को गिराया जा रहा’
    सिंह ने आगे कहा, ‘मेरी सरकार आने के बाद मैंने इस पर आपत्ति जताई थी।’ उन्होंने आरोप लगाया कि अब वहां संचालित एक स्कूल को होटल बनाने के लिए गिराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वहां ठहरने वाले लोगों को स्वत: वीआईपी दर्शन की सुविधा मिल जाती है और संबंधित संगठन वहां से मिले दान का उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी भी जांच की मांग की जाएगी।

  • दिग्विजय सिंह के 'फैक्ट चेक' से बदला सियासी समीकरण, भाजपा ने की तारीफ तो कांग्रेस में उठे सवाल

    दिग्विजय सिंह के 'फैक्ट चेक' से बदला सियासी समीकरण, भाजपा ने की तारीफ तो कांग्रेस में उठे सवाल


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उज्जैन की एक जमीन से जुड़े मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों पर सवाल उठाने के बाद जहां भाजपा नेताओं ने दिग्विजय सिंह की खुले तौर पर सराहना की, वहीं कांग्रेस के भीतर उनके बयान को लेकर असहजता और विरोध के स्वर भी सुनाई देने लगे।

    वीर भारत न्यास की जमीन से शुरू हुआ विवाद
    पूरा विवाद 24 जून को उस समय शुरू हुआ, जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन ‘वीर भारत न्यास’ को मात्र एक रुपये में आवंटित कर दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी इस ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं और आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    दिग्विजय सिंह ने दस्तावेजों का हवाला देकर रखा अलग पक्ष
    कुछ दिनों बाद उज्जैन दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार संबंधित जमीन किसी निजी ट्रस्ट को नहीं, बल्कि एक सरकारी ट्रस्ट को दी गई थी।

    उन्होंने कहा कि वह किसी भी विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करते हैं। उनके अनुसार संबंधित ट्रस्ट का पदेन अध्यक्ष राज्य का मुख्यमंत्री होता है, इसलिए इसे निजी ट्रस्ट कहना सही नहीं है।

    इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए आरोप लगाने वाले लोगों की कमी नहीं है। बाद में इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई।

    भाजपा विधायक से मिली थी शुरुआती जानकारी
    बड़वानी में मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने बताया कि जिस जानकारी के आधार पर विवाद खड़ा हुआ, वही जानकारी उन्हें भी एक भाजपा विधायक और स्थानीय अखबार के माध्यम से मिली थी। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें पता चला कि संबंधित ट्रस्ट सरकारी स्वरूप का है, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा।

    भाजपा नेताओं ने की सराहना
    दिग्विजय सिंह के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने उनकी तथ्य आधारित टिप्पणी की प्रशंसा की। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि झूठ ज्यादा समय तक नहीं टिकता और दावा किया कि कांग्रेस के आरोपों को उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता ने तथ्यों के आधार पर खारिज कर दिया।

    भाजपा प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने भी कहा कि सार्वजनिक आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है और दिग्विजय सिंह ने यही किया।

    इतना ही नहीं, भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने उनकी कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए उन्हें भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण भी दे डाला। उन्होंने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह भाजपा में आते हैं तो उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाएगा।

    कांग्रेस के भीतर उठे विरोध के स्वर
    दूसरी ओर, कांग्रेस के अंदर इस बयान को लेकर असहमति सामने आई। पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह को प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर आपत्ति थी तो उन्हें यह बात सार्वजनिक मंच की बजाय पार्टी के भीतर उठानी चाहिए थी।

    वहीं, कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि कांग्रेस आखिर कब “दिग्विजय सिंह के नागपाश” से मुक्त होगी।

    साथ आए दिग्विजय और पटवारी, कहा- पार्टी एकजुट
    बढ़ते विवाद के बीच मंगलवार शाम दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी संयुक्त रूप से मीडिया के सामने आए। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश कांग्रेस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार से जुड़े कथित भूमि मामलों और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर पूरी तरह एकजुट होकर संघर्ष कर रही है।

    इस दौरान दिग्विजय सिंह ने अपनी ‘दलाल’ वाली टिप्पणी पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कांग्रेस के किसी नेता, विशेषकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, के लिए इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी उनके लिए पुत्र समान हैं और पार्टी में लंबे सार्वजनिक जीवन के दौरान उन्होंने कभी अपने किसी सहयोगी के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया।

  • एमपी की राजनीति में बयानों का बवाल सीएम की अतिशयोक्ति भरी तारीफ दिग्विजय को भाजपा का ऑफर और विजयवर्गीय का मासूम जवाब चर्चा में

    एमपी की राजनीति में बयानों का बवाल सीएम की अतिशयोक्ति भरी तारीफ दिग्विजय को भाजपा का ऑफर और विजयवर्गीय का मासूम जवाब चर्चा में


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानों और राजनीतिक संकेतों का दौर लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मंच से हुई लंबी प्रशंसा दिग्विजय सिंह को भाजपा में शामिल होने का खुला न्योता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की कथित चिट्ठी पर दिया गया जवाब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इन घटनाओं ने सत्ता और विपक्ष दोनों के बीच सियासी हलचल को और तेज कर दिया है।

    राजगढ़ जिले के सारंगपुर में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन कार्यक्रम के दौरान उस समय दिलचस्प स्थिति बन गई जब मंत्री गौतम टेटवाल ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की लगातार प्रशंसा शुरू कर दी। उन्होंने मुख्यमंत्री को जनप्रिय लोकप्रिय बहुमुखी प्रतिभा के धनी इतिहासकार ज्योतिषाचार्य लेखक साहित्यकार खगोल और भूगोल का जानकार पहलवानों का पहलवान और बाबा महाकाल का लाल जैसी कई उपमाओं से संबोधित किया। इतना ही नहीं उन्होंने प्रदेश में जल संरक्षण और सिंचाई के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री को भागीरथ तक बता दिया। मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री मुस्कुराते रहे लेकिन जब तारीफ का सिलसिला लंबा होता गया तो उन्होंने मंत्री को बीच में ही रोकते हुए आगे बढ़ने का संकेत दिया। कार्यक्रम के बाद यह प्रसंग राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।

    उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर भी एक नया राजनीतिक बयान सामने आया। भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने मीडिया से बातचीत में दिग्विजय सिंह को भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण दे दिया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह धीरे से भाजपा में आ जाएं और जोर का झटका धीरे से दें। विधायक ने यह भी कहा कि जब महाराज भाजपा में आ चुके हैं तो अब राजा भी आ जाएं जिससे दोनों की जोड़ी बन जाएगी। उन्होंने दिग्विजय सिंह को अनुभवी नेता बताते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को उनसे सीख लेने की सलाह भी दी। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    इधर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी एक अलग वजह से सुर्खियों में बने हुए हैं। मुख्यमंत्री को लिखी गई कथित चिट्ठी को लेकर जब मीडिया ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें ऐसी किसी चिट्ठी की जानकारी नहीं है। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्हें पता ही नहीं कि ऐसी सूचना कहां से आई। इससे पहले चर्चा थी कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पिछले कुछ समय से उपेक्षा और सहयोग नहीं मिलने जैसी बातें उठाई थीं। हालांकि उनके ताजा बयान के बाद इस पूरे मामले पर और अटकलें लगने लगी हैं।

    इसी बीच मंत्रालय के भीतर एक वरिष्ठ महिला अधिकारी को लेकर भी प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं जारी हैं। बताया जा रहा है कि उनकी सख्त कार्यशैली के कारण कुछ वरिष्ठ अधिकारी उन्हें हटाने की कोशिश करते रहे लेकिन अब तक सफल नहीं हो पाए। चर्चा यह भी है कि विभाग के शीर्ष अधिकारी का उन पर पूरा भरोसा बना हुआ है जिसके कारण वे अपने पद पर मजबूती से काम कर रही हैं।

    प्रदेश की राजनीति में बयानों और घटनाओं का यह सिलसिला आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री की मंच पर हुई प्रशंसा भाजपा का राजनीतिक न्योता और कथित चिट्ठी पर उठे सवाल सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने हुए हैं।

  • उज्जैन से दिग्विजय सिंह का केंद्र और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा प्रहार बोले चंपत राय पर हो केस दर्ज

    उज्जैन से दिग्विजय सिंह का केंद्र और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा प्रहार बोले चंपत राय पर हो केस दर्ज


    मध्यप्रदेश । उज्जैन दौरे पर पहुंचे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर केंद्र सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किया गया था इसलिए ट्रस्ट की जवाबदेही भी केंद्र सरकार की बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चांदी की ईंटों जेवरात नकदी और विदेशी चंदे के प्रबंधन में गड़बड़ियां हुई हैं जिनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    उज्जैन के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन संगठनों का धर्म और धार्मिक कार्यों से कोई सरोकार नहीं है बल्कि उनका उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के नाम पर सनातन समाज की भावनाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने चंपत राय को संघ का प्रचारक बताते हुए कहा कि उन्हें धार्मिक परंपराओं से कोई संबंध नहीं है और उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

    दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं किया गया और पूजा की प्रक्रिया शास्त्रीय नियमों के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले में ट्रस्ट के सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका की जांच कराई जाए और आवश्यक होने पर उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाए।

    उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल प्रेस वार्ताओं तक सीमित नहीं रखेगी बल्कि गांव गांव और घर घर तक पहुंचाएगी। उन्होंने बताया कि उज्जैन जिले की 609 पंचायतों में कांग्रेस ने दल और मंडल स्तर पर समितियां गठित की हैं जो लोगों के बीच जाकर राम मंदिर दान चोरी के मामले की जानकारी देंगी और पूरे घटनाक्रम को जनता के सामने रखेंगी।

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं और मंदिर की जमीन को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि महाकाल मंदिर की जमीन आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं को दी गई और वहां गेस्ट हाउस बनाए गए जबकि साधु संतों की उपेक्षा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान व्यवस्था में आम श्रद्धालुओं और संत समाज को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    इंदौर उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन के नामकरण को लेकर चल रहे विवाद पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। उनका कहना था कि इस क्षेत्र के नाम में इंदौर का नाम पहले होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को सलाह देते हुए कहा कि प्रशासनिक स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों की जिम्मेदारी आखिरकार सरकार पर ही आती है इसलिए अधिकारियों पर प्रभावी नियंत्रण रखना जरूरी है।

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने कुछ दस्तावेज भी दिखाए और दावा किया कि उनके पास जमीन घोटाले से जुड़े नए साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की पूरी जांच के बाद संबंधित लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे और पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल राहुल गांधी के पोस्टर पर विवाद दिग्विजय सिंह का वीडियो वायरल मंत्री का ऑटो चलाना बना चर्चा का विषय

    मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल राहुल गांधी के पोस्टर पर विवाद दिग्विजय सिंह का वीडियो वायरल मंत्री का ऑटो चलाना बना चर्चा का विषय


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार को कई घटनाएं चर्चा का विषय बनी रहीं। छतरपुर में कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर लगे पोस्टर में राहुल गांधी के हाथ में संविधान की उलटी प्रति दिखाई देने से पार्टी विपक्ष के निशाने पर आ गई। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा जिसमें वह एक मशहूर फिल्मी डायलॉग पूरा नहीं कर सके। दूसरी ओर प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग का ऑटो चलाते हुए वीडियो भी लोगों का ध्यान खींचता रहा।

    छतरपुर में कांग्रेस ने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर प्रेस वार्ता आयोजित की थी। हालांकि कार्यक्रम के मुद्दों से ज्यादा चर्चा मंच पर लगे पोस्टर और बैनर की हुई। पोस्टर में राहुल गांधी के हाथ में संविधान की प्रति उलटी दिखाई दे रही थी। वहीं एक अन्य बैनर में उनके चेहरे पर केक लगा हुआ नजर आया। कांग्रेस नेताओं ने इसे प्रिंटिंग की तकनीकी गलती बताया लेकिन विपक्ष ने इस मुद्दे पर पार्टी की आलोचना की।

    इसी बीच भोपाल में मीसाबंदियों के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले पर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संविधान की सबसे अधिक अनदेखी और दुरुपयोग कांग्रेस के शासनकाल में हुआ है। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद पोस्टर विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।

    उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी एक कार्यक्रम के दौरान अलग कारण से सुर्खियों में रहे। कार्यक्रम की एंकर ने पहले उनसे फिल्मों के शौक के बारे में पूछा जिस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि सिनेमा का शौक किसे नहीं होता। इसके बाद उनसे मशहूर फिल्मी डायलॉग ये ढाई किलो का हाथ पूरा करने के लिए कहा गया। सवाल सुनकर दिग्विजय सिंह हंस पड़े लेकिन उन्होंने डायलॉग पूरा करने के बजाय बात को टाल दिया। इसके बाद उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जाने लगा।

    इधर प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। अपने विधानसभा क्षेत्र में मीसाबंदी रहे बुजुर्ग रामकुमार पटेल से मुलाकात करने पहुंचे सारंग ने कुछ समय के लिए ऑटो की ड्राइविंग सीट संभाली और ऑटो चलाया। उन्होंने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया जिसके बाद यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

    इन घटनाओं के बीच राजनीतिक गलियारों में प्रशासनिक हलचल की भी चर्चा रही। बताया जा रहा है कि एक विभाग में नए डायरेक्टर के रूप में पदभार संभालने वाले युवा आईएएस अधिकारी ने लंबे समय से प्रभाव रखने वाले एक अधिकारी की जिम्मेदारियों और प्रभाव को सीमित करना शुरू कर दिया है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और यह चर्चा राजनीतिक तथा प्रशासनिक हलकों तक सीमित है।

    कुल मिलाकर प्रदेश की राजनीति में एक ही दिन पोस्टर विवाद नेताओं के वायरल वीडियो और प्रशासनिक चर्चाओं ने सियासी माहौल को गर्माए रखा।

  • कांग्रेस में फिर दिखी अंदरूनी कलह! मंच पर दिग्विजय-हरीश चौधरी की कथित तकरार, राज्यसभा विवाद पर गरमाई सियासत

    कांग्रेस में फिर दिखी अंदरूनी कलह! मंच पर दिग्विजय-हरीश चौधरी की कथित तकरार, राज्यसभा विवाद पर गरमाई सियासत


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर काफी गरमाई हुई है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद जहां पार्टी लगातार विरोध दर्ज करा रही है, वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के भीतर की कथित खींचतान भी चर्चा में आ गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी के बीच कथित असहजता नजर आती है।

    वीडियो में दिखाई देता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की ओर संकेत करते हुए कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया को अपनी बात रखने के लिए कहते हैं। इसी दौरान हरीश चौधरी उन्हें रोकते हुए कुछ कहते नजर आते हैं। इसके बाद दिग्विजय सिंह हाथ जोड़कर उनका अभिवादन करते हैं, धन्यवाद कहते हैं और फिर शांत होकर बैठ जाते हैं। हालांकि वीडियो में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं देती, लेकिन उनके हाव-भाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषण शुरू हो गया है।

    इसके बाद जीतू पटवारी कई बार दिग्विजय सिंह से अपनी बात रखने का आग्रह करते दिखाई देते हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह ‘हो गया’ कहकर मना कर देते हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक पर्यवेक्षक अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ इसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद का संकेत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे पार्टी की आंतरिक राजनीति और गुटबाजी से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

    इधर राज्यसभा चुनाव में भाजपा के तीन उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने के बावजूद पार्टी कार्यालय में जश्न का माहौल नहीं दिखाई दिया। प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद नवनिर्वाचित सांसद सीधे पार्टी नेतृत्व से मिलने पहुंचे, लेकिन प्रदेश कार्यालय में सामान्य चुनावी जीत की तरह न तो ढोल-नगाड़े बजे और न ही सार्वजनिक उत्सव देखने को मिला। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर चल रहा कानूनी विवाद इसका एक कारण हो सकता है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंच चुका है। ऐसे में भाजपा की ओर से संयमित रवैया अपनाए जाने की चर्चा हो रही है, हालांकि पार्टी ने इस विषय पर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है।

    इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नामांकन निरस्त होने के मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ अन्याय हुआ है और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि इस मामले में कई संस्थाओं की भूमिका सवालों के घेरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी याचिका पर समय रहते सुनवाई नहीं होने से कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा। उनके इन आरोपों पर भाजपा ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल खड़ा करने वाला बयान बताया है। भाजपा नेताओं ने कहा है कि न्यायालय के संबंध में की गई ऐसी टिप्पणियां अनुचित हैं और मामले पर उचित संज्ञान लिया जाना चाहिए।

    राज्यसभा चुनाव का यह विवाद अब केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके राजनीतिक और संगठनात्मक प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। आने वाले दिनों में न्यायालय की सुनवाई और राजनीतिक दलों की अगली रणनीति पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

  • दिग्विजय सिंह ने बीच कार्यक्रम में जीतू पटवारी को टोका, चर्चा में आया मंच

    दिग्विजय सिंह ने बीच कार्यक्रम में जीतू पटवारी को टोका, चर्चा में आया मंच


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना जिसने सियासी गलियारों में चर्चा का माहौल गर्म कर दिया। कहीं सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर नाराजगी खुलकर सामने आई तो कहीं कांग्रेस के कार्यक्रम में अव्यवस्था ने नेताओं को असहज कर दिया। इन घटनाओं ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के भीतर चल रही हलचलों को उजागर कर दिया।

    गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने अपनी ही सरकार के मंत्री और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाने वाले नेताओं पर खुलकर हमला बोला। खराब बिजली व्यवस्था को लेकर बिजली कंपनी के कार्यालय पहुंचे शाक्य ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें नाकारा तक कह दिया। उन्होंने कहा कि जनता को ऐसे जनसेवक नहीं चाहिए जो केवल दिखावे के काम करें बल्कि ऐसे लोग चाहिए जो ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि कोई मुख्यमंत्री की छवि खराब करेगा तो वे स्वयं भोपाल जाकर मुख्यमंत्री से ऐसे मंत्रियों को हटाने का आग्रह करेंगे।

    शाक्य ने गुना जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभारी मंत्री किसी को भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीब नहीं आने देते। उनके इस बयान ने भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राजनीतिक जानकार इसे मूल भाजपा और सिंधिया समर्थक खेमे के बीच जारी असहजता के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

    उधर विदिशा जिले के सिरोंज में भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा का अलग ही विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। नई सब्जी मंडी में फैली गंदगी और अव्यवस्थाओं से नाराज विधायक सीधे कचरे के ढेर पर जाकर बैठ गए। उन्होंने वहीं से प्रशासनिक अधिकारियों और नगरपालिका अमले को मौके पर बुलाया। अधिकारियों के पहुंचने के बाद विधायक उन्हें पूरे परिसर में घुमाते रहे और सफाई व्यवस्था की बदहाली दिखाते रहे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जब भाजपा सरकार में भाजपा विधायक को ही कचरे में बैठकर विरोध करना पड़े तो स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    इधर उज्जैन जिले की तराना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक महेश परमार भी चर्चा में रहे। राजस्थान से भेड़ चराने आए गड़रिया समुदाय के लोगों से मिलने पहुंचे विधायक ने ऊंट की सवारी की और उनके साथ समय बिताया। उन्होंने चाय पी और ग्रामीण जीवन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की। हालांकि सोशल मीडिया पर इसे लेकर भी मजाकिया टिप्पणियां देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे पेट्रोल और डीजल बचाने का नया तरीका बताया तो कुछ ने मशहूर कहावतों को नए अंदाज में पेश किया।

    राजधानी भोपाल में एनएसयूआई द्वारा आयोजित पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन भी चर्चा का विषय बना रहा। कार्यक्रम के दौरान मंच पर नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमा हो गई जिससे अव्यवस्था की स्थिति बन गई। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शुरुआत में मंच पर जाने से ही इनकार कर दिया। बाद में जब वे संबोधन के लिए पहुंचे तो उन्होंने मंच से ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को कार्यकर्ताओं के कमजोर उत्साह को लेकर टोका। उन्होंने सवाल किया कि जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर हाथ उठाने को कहा गया तो कार्यकर्ताओं ने उत्साह क्यों नहीं दिखाया। इसके बाद जीतू पटवारी को स्वयं कार्यकर्ताओं से समर्थन जताने की अपील करनी पड़ी।

    इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि प्रदेश की राजनीति में केवल विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच ही नहीं बल्कि दोनों दलों के भीतर भी कई तरह की चुनौतियां और असहमतियां मौजूद हैं। आने वाले दिनों में ये घटनाएं राजनीतिक चर्चाओं का अहम विषय बनी रह सकती हैं।

  • मध्य प्रदेश: दिग्विजय सिंह वाली राज्यसभा सीट पर कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का खतरा, 6 विधायक पलटें तो हाथ से जा सकती है सीट

    मध्य प्रदेश: दिग्विजय सिंह वाली राज्यसभा सीट पर कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का खतरा, 6 विधायक पलटें तो हाथ से जा सकती है सीट


    भोपाल । मध्य प्रदेश में 19 जून 2026 को तीन राज्यसभा सीटें खाली होने वाली हैं। इनमें से दो सीटें भाजपा के डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन के नाम हैं जबकि कांग्रेस की सीट पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह  के पास थी। हालांकि दिग्विजय सिंह ने पहले ही राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया है और अपनी सीट खाली करने की घोषणा की है।

    दिग्विजय के इनकार के बाद कांग्रेस के भीतर इस सीट के लिए कई छोटे बड़े नेताओं ने दावेदारी शुरू कर दी है। पार्टी के अंदर इस सीट को जीतने को लेकर टेंशन का माहौल है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता का कहना है कि यदि 6 विधायक क्रॉस वोटिंग कर दें तो यह सीट भाजपा के हाथ में जा सकती है। बताया जा रहा है कि भाजपा विधायकों को अगले चुनाव की टिकट और अन्य ऑफर देकर क्रॉस वोटिंग के लिए प्रेरित कर सकती है।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा हर जगह तोड़फोड़ का प्रयास करती है लेकिन कांग्रेस मजबूत है और राज्यसभा सीट पार्टी की ही रहेगी। वहीं बीजेपी के अभिलाष पांडे का कहना है कि उनके पास पर्याप्त संख्या में विधायक हैं और भाजपा अपने काम पर भरोसा रखती है।

    इस बार तीन सीटों पर चुनाव में 230 विधायक वोटिंग करेंगे। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होगी। कांग्रेस के पास फिलहाल 65 विधायक हैं जिनमें से एक विधायक अब भाजपा के साथ हैं। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन हाईकोर्ट द्वारा शून्य कर दिया गया है इसलिए यदि सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली तो कांग्रेस के पास 63 विधायक ही रहेंगे। ऐसे में यदि 5 से 6 विधायक क्रॉस वोटिंग कर देते हैं तो सीट हाथ से जा सकती है।

    भाजपा के पास विधानसभा में 164 विधायक हैं बीना विधायक के समर्थन से संख्या 165 हो सकती है। इसके अलावा बीएपी के एक मात्र विधायक कमलेश्वर डोडियार का वोट भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    क्रॉस वोटिंग का इतिहास भी सामने है। 2022 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में क्रॉस वोटिंग हुई थी। विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को केवल 79 वोट मिले थे जबकि अपेक्षित संख्या 103 थी। 2020 के राज्यसभा चुनाव में भी दिग्विजय सिंह 52 वोटों की आवश्यकता के बावजूद 57 वोट लेकर जीत गए थे।

    राज्यसभा चुनाव अप्रत्यक्ष होते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक चुनते हैं। हर दो साल में राज्यसभा का एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं। कुल 245 सीटों में से 233 पर अप्रत्यक्ष चुनाव होते हैं। चुनाव में जीत के लिए विधायकों की संख्या और सीटों के आधार पर कोटा तय होता है। एक विधायक का वोट मूल्य 100 माना जाता है।

    इस बार कांग्रेस में दिग्विजय सिंह वाली सीट पर अनुसूचित जाति वर्ग के नेताओं जैसे प्रदीप अहिरवार और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को भी दावेदारी में शामिल किया गया है। पार्टी के भीतर सीट को सुरक्षित करने के लिए रणनीति बनाई जा रही है लेकिन क्रॉस वोटिंग का खतरा लगातार चर्चा में बना हुआ है।