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  • दिग्विजय बोले- 'मुझसे बड़ा सनातनी बताओ', राम मंदिर और EVM मुद्दे को लेकर BJP पर साधा निशाना

    दिग्विजय बोले- 'मुझसे बड़ा सनातनी बताओ', राम मंदिर और EVM मुद्दे को लेकर BJP पर साधा निशाना


    राजगढ़। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को राजगढ़ में अपनी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के दौरान भाजपा पर चंदा चोरी, वोट चोरी और धार्मिक स्थलों में कथित अनियमितताओं को लेकर निशाना साधा। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन की खरीद-फरोख्त पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की। ईवीएम के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि चुनाव हारने से उन्हें फर्क नहीं पड़ता, लेकिन चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए। आजम खान से अपनी मित्रता का जिक्र करते हुए उन्होंने उन्हें अच्छा राजनेता भी बताया।

    जिला मुख्यालय पर रात्रि विश्राम के बाद दिग्विजय सिंह ने मां जालपा देवी के दर्शन किए और नेवज नदी की पूजा की। इसके बाद उनकी यात्रा कालीपीठ मार्ग स्थित दंड जोड़ के भगवान बाबा रामदेव मंदिर पहुंची, जहां उन्होंने प्रेस वार्ता की। सिंह ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म की मूल भावना, धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण करना है। उनके मुताबिक, चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दे भी इसी लड़ाई का हिस्सा हैं।

    राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन की खरीद पर उठाए सवाल

    दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के चंदे और ट्रस्ट की जमीन से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मंदिर के आसपास जमीनों की कीमतें बढ़ने के दौरान कुछ मामलों में भाजपा नेताओं ने सस्ती कीमत पर जमीन खरीदी और 24 घंटे के भीतर उसे राम मंदिर ट्रस्ट को बेच दिया।

    एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि दो करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन अगले ही दिन ट्रस्ट को 18 करोड़ रुपये में बेच दी गई। सिंह ने कहा कि इस मामले में जांच की मांग की गई थी और एसआईटी को प्रमाण सौंपे जाने की बात भी सामने आई, लेकिन जांच नहीं हुई।

    उन्होंने चंदा संग्रह में गड़बड़ी की शिकायत करने वाले आरएसएस के पूर्व प्रचारक महिपाल सिंह का भी उल्लेख किया। वैष्णोदेवी ट्रस्ट, केदारनाथ, ओरछा और उज्जैन के धार्मिक स्थलों का जिक्र करते हुए उन्होंने दान की राशि के पारदर्शी इस्तेमाल की जरूरत बताई।

    EVM पर बोले- हार गए तो हार गए, बैलेट पेपर से चुनाव कराइए

    ईवीएम के विरोध और बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर कांग्रेस की हार से जुड़े सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनका मुद्दा चुनाव में जीत या हार नहीं, बल्कि मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता है। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिक के रूप में मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में होना और अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देना उसका अधिकार है।

    उन्होंने वीवीपैट की पर्ची मतदाता को हाथ में नहीं दिए जाने पर सवाल उठाया और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती दी। सिंह ने कहा, “चुनाव हार गए तो हार गए, चलेगा, कोई बात नहीं। आप बैलेट पेपर से पूरा चुनाव करा दीजिए। जब आप कह रहे हैं कि बैलेट पेपर से कांग्रेस हार रही है, तो हराइए।”

    बोले- भाजपा में मुझसे बड़ा सनातनी बताओ

    भाजपा नेताओं के इस सवाल पर कि उनकी सरकार के समय उन्हें भगवान राम की याद क्यों नहीं आई, दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने रामलीला पूजन में चंदा दिया था और गौ सेवा आयोग का गठन किया था। उन्होंने अपने गृह क्षेत्र राघौगढ़ के 400 साल पुराने राघवजी मंदिर का भी उल्लेख किया।

    इसके बाद उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि कोई ऐसा व्यक्ति बताया जाए, जो उनसे ज्यादा धार्मिक हो। उन्होंने आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद में भी ऐसा व्यक्ति बताने की बात कही।

    सिंह ने दावा किया कि उनकी यात्रा में ऐसे लोग भी शामिल हो रहे हैं, जो किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं। उनके मुताबिक, कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं और आरएसएस के लोगों के संदेश भी आए हैं। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद के बावजूद इन लोगों ने राम मंदिर में चंदे की कथित गड़बड़ी को लेकर उनके सवालों का समर्थन किया है।

    आजम खान को बताया मित्र, बोले- अच्छा राजनेता मानता हूं

    समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के कांग्रेस में आने की संभावना से जुड़े सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि आजम खान से उनकी अच्छी मित्रता है और वह उन्हें अच्छा राजनेता मानते हैं।

    उन्होंने कहा कि आजम खान ने विश्वविद्यालय शुरू किया और अपनी संपत्ति उसमें लगा दी। यूपीए सरकार के दौरान विश्वविद्यालय को मंजूरी दिलाने में उन्होंने अपनी ओर से जितनी मदद संभव थी, की थी। सिंह ने कहा कि आजम खान जिस पार्टी में रहना चाहें, रह सकते हैं। समाजवादी पार्टी उनके गठबंधन का हिस्सा है और वे एक-दूसरे के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते।

    नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बारे में पूछे गए सवाल पर भी दिग्विजय सिंह ने उन्हें अपना मित्र बताया। उन्होंने कहा कि वे विजयवर्गीय को काफी समय से जानते हैं।

    राहुल गांधी की महारैली पर भी रखी बात

    दिल्ली में एक नवंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी की ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि जो नेता दिल्ली जा सकते हैं, वे वहां जाएं और जो नहीं जा सकते, वे उनकी यात्रा में शामिल हों। उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा पहले से निर्धारित थी, इसलिए वह दिल्ली नहीं जा रहे हैं। सिंह ने वोट चोरी को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इसका असर नागरिकों के अधिकारों पर पड़ता है।

    राजगढ़ में भैंस चोरी का मुद्दा भी उठाया

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने राजगढ़ जिले में भैंस चोरी की घटनाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि जिले में भैंस चोरी के मामले बढ़ रहे हैं और जिन लोगों की भैंस चोरी हुई हैं, उनमें अधिकतर कांग्रेसी हैं। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि चोरी हर जगह बढ़ रही है।

    सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा में दिग्विजय सिंह के साथ उनकी पत्नी अमृता सिंह, पूर्व ऊर्जा मंत्री एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह, पूर्व विधायक हेमराज कल्पोनी, बापू सिंह तंवर, यात्रा प्रभारी चंदर सिंह सौंधिया, रामचंद्र दांगी सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे। यात्रा का जगह-जगह फूलों से स्वागत किया गया।

  • जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते

    जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते


    कटनी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के अलग अलग अंदाज चर्चा का विषय बने हुए हैं। कहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साधते नजर आए तो कहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व जन्म का जिक्र कर लोगों का ध्यान खींचा। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अपने कार्यकर्ता को खुद जूते पहनाए जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासी ग्रामीणों के साथ थिरकते दिखाई दिए। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में जनसंपर्क और नेताओं की सार्वजनिक छवि को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

    जीतू पटवारी ने मंच से दिखाया भ्रष्टाचार का कथित रेट कार्ड

    कटनी जिले के बरही में पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक कार्यक्रम के दौरान सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर हमला बोला। हाल ही में एक अधिकारी का वीडियो सामने आया था जिसमें नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार को लेकर बातें कही गई थीं। इसी मुद्दे को उठाते हुए पटवारी मंच पर डस्टबिन फिनाइल की कैन और बल्ब लेकर पहुंचे। उन्होंने इन वस्तुओं की कीमतों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि एक बाल्टी की कीमत एक लाख रुपये फिनाइल की बोतल की कीमत 36 हजार रुपये और बल्ब की कीमत 11 हजार रुपये बताई जा रही है। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए। हालांकि इन कीमतों और आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है।

    पटवारी ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी पर रिश्वत लेने के मामले को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। इसी दौरान बरही में उनकी बाइक रैली भी चर्चा में रही। पटवारी खुद बुलेट चलाते नजर आए लेकिन उनके सिर पर हेलमेट नहीं था। रैली में दूसरे कार्यकर्ताओं के भी बिना हेलमेट होने की बात सामने आई। इस घटना को लेकर यातायात नियमों के पालन पर सवाल उठे।

    दिग्विजय सिंह की यात्रा में राम भजन के साथ सियासी नारे

    पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दशहरे पर उज्जैन से राम नाम के साथ सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा लेकर निकले थे। यह यात्रा अयोध्या तक जाने वाली है। शाजापुर पहुंचने पर दिग्विजय सिंह एक राम भजन पर थिरकते नजर आए। लेकिन यात्रा के दौरान राजनीतिक नारे भी सुनाई दिए। रिपोर्ट के मुताबिक वहां भाजपा के खिलाफ चंदा चोरी और वोट चोरी से जुड़े नारे लगाए गए। दिग्विजय सिंह ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली के लिए लोगों को आमंत्रित भी किया। इससे यात्रा के गैरराजनीतिक होने के दावे और उसके दौरान दिखे राजनीतिक संदेशों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते

    दतिया के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने एक कार्यकर्ता को जूते पहनाने के कारण चर्चा में आए। बताया गया कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ता के बूथ पर भाजपा को हार मिली थी। इसके बाद उसने प्रण लिया था कि जब तक वह अपने बूथ पर पार्टी को जीत नहीं दिलाएगा तब तक जूते चप्पल नहीं पहनेगा। हालिया उपचुनाव में उसके बूथ पर भाजपा को अधिक वोट मिलने के बाद जूते पहनने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नरोत्तम मिश्रा ने खुद कार्यकर्ता को जूते पहनाए और उसके लेस बांधे। यह दृश्य पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ नेताओं के जुड़ाव के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

    सीएम मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के अलग अंदाज

    बड़वानी जिले के सेंधवा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मलखंब का प्रदर्शन देखा और प्रभावित होकर एक बच्चे को अपने कंधे पर बैठा लिया। एक कार्यक्रम में बारेली बोली का जिक्र होने पर उन्होंने इसे सीखने की बात कही और अपने पूर्व जन्म में बारेला होने का उल्लेख किया। उनके इस बयान की चर्चा जनसंपर्क के संदर्भ में हुई।

    वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने संसदीय क्षेत्र के नीलगढ़ गांव पहुंचे जहां विस्थापन से जुड़े मुद्दों के बीच वे आदिवासी ग्रामीणों के साथ बैठे और भोजन किया। वे ग्रामीणों के साथ नाचते थिरकते भी दिखाई दिए। उन्होंने वनों और वन्य प्राणियों की रक्षा के लिए गांव छोड़ने के फैसले को त्याग और प्रकृति के प्रति प्रेम का उदाहरण बताया।

    प्रदेश की इन घटनाओं से साफ है कि राजनीतिक गतिविधियों में भाषणों के साथ नेताओं के व्यवहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरें भी चर्चा का हिस्सा बन रही हैं। कहीं आरोपों के जरिए सरकार को घेरा जा रहा है तो कहीं भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव के जरिए जनता तक पहुंचने की कोशिश दिखाई दे रही है।

  • रावण दहन में शिवराज की मशक्कत से लेकर पटवा की जुबान फिसलने तक, दशहरे पर MP में नेताओं के बयान और वीडियो चर्चा में

    रावण दहन में शिवराज की मशक्कत से लेकर पटवा की जुबान फिसलने तक, दशहरे पर MP में नेताओं के बयान और वीडियो चर्चा में


    भोपाल । मध्यप्रदेश में दशहरे के मौके पर रावण दहन के साथ राजनीति और दिलचस्प घटनाओं की भी खूब चर्चा रही। कहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपने बंगले पर रावण का पुतला जलाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी तो कहीं भाजपा विधायक की जुबान फिसलने से जनता ही रावण बन गई। धार जिले में रावण के पुतले से निकले रॉकेटों ने लोगों को दौड़ने पर मजबूर कर दिया। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन यात्रा पर भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने तीखा राजनीतिक तंज कस दिया। इन घटनाओं के वीडियो और बयान अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।

    शिवराज सिंह चौहान को रावण दहन में करनी पड़ी मशक्कत

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दशहरे पर अपने बंगले में रावण के पुतले का दहन किया। लेकिन पुतले को जलाने की कोशिश उम्मीद के मुताबिक आसान नहीं रही। कई प्रयासों के बाद पुतले में आग लगी। इसके बावजूद धुआं छंटने पर रावण का पुतला दोबारा दिखाई देने लगा और वह पूरी तरह नहीं जल पाया था। हालांकि बाद में पुतला पूरी तरह जलकर खाक हो गया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर चुटकी लेने लगे। लोगों का कहना है कि रावण दहन का वीडियो तो बन गया लेकिन इसके लिए शिवराज सिंह को काफी मेहनत करनी पड़ी।

    भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा ने जनता को ही बता दिया रावण

    भोजपुर से भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा दशहरा कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान ऐसी बात कह गए जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज यहां रावण रूपी जो हमारे सारे लोग यहां पर आए हुए हैं। उनके इस बयान को जुबान फिसलने के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि वह कुछ और कहना चाहते थे लेकिन शब्दों के चयन में चूक हो गई। इसके बाद उनके बयान पर लोगों ने चुटकी ली। कुछ लोगों ने इसे मंच पर बोलते समय हुई सामान्य गलती माना जबकि कुछ ने नाराजगी भी जताई। फिलहाल इस बयान की चर्चा राजनीतिक हलकों में भी हो रही है।

    धार में रावण के पुतले से निकले रॉकेट तो भागने लगे लोग

    धार जिले के टांडा में रावण दहन के दौरान एक अलग ही नजारा देखने को मिला। बताया गया कि राम की भूमिका निभा रहे युवक ने रावण दहन के लिए जलता हुआ तीर चलाया तो पुतले में रखे पटाखे और रॉकेट फूटने लगे। रॉकेट इधर-उधर जाने लगे और कुछ लोगों की ओर बढ़ते दिखाई दिए। इससे मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि इस बार रावण ने भी पलटवार कर दिया। हालांकि ऐसी घटनाएं सार्वजनिक कार्यक्रमों में पटाखों के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत भी याद दिलाती हैं।

    दिग्विजय सिंह को धृतराष्ट्र और बेटे को बताया दुर्योधन

    कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन यात्रा को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज है। गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना धृतराष्ट्र से की और उनके बेटे को दुर्योधन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह अपने बेटे को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से पदयात्रा कर रहे हैं। यह भाजपा विधायक का राजनीतिक आरोप है। यात्रा के उद्देश्य और इसके पीछे की मंशा को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन इस बयान ने मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर परिवारवाद और राजनीतिक विरासत की बहस को हवा दे दी है।

    सत्ताधारी दल के नेताओं की खींचतान में अफसर परेशान

    राज्य में सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खबर के मुताबिक महाकौशल क्षेत्र के एक जिले में बच्चों की सेहत से जुड़े मुद्दे पर भाजपा विधायक प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। मामला कथित तौर पर सत्ताधारी दल के एक पूर्व सांसद के बेटे से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विधायक ने सरकार से शिकायत की है और अब इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि संबंधित जिले और मामले का विस्तृत विवरण सामने नहीं रखा गया है। ऐसे में पूरे प्रकरण पर निष्कर्ष निकालने से पहले प्रशासन की जांच और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।

    कुल मिलाकर दशहरे के दौरान मध्यप्रदेश में धार्मिक उत्सव के साथ राजनीतिक बयान और कई घटनाएं सुर्खियों में रहीं। शिवराज सिंह के रावण दहन से लेकर सुरेंद्र पटवा की जुबान फिसलने और दिग्विजय सिंह पर किए गए तंज तक अलग-अलग मुद्दों ने लोगों का ध्यान खींचा। वहीं प्रशासन और सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों के बीच कथित खींचतान ने शासन व्यवस्था में तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

  • दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा पर सियासी संग्राम तेज, चंदा चोरी के आरोप और बैलेट पेपर की मांग से गरमाई राजनीति, भाजपा सांसद ने उठाए सवाल

    दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा पर सियासी संग्राम तेज, चंदा चोरी के आरोप और बैलेट पेपर की मांग से गरमाई राजनीति, भाजपा सांसद ने उठाए सवाल


    उज्जैन।  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जा रही सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दूसरे दिन राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। बुधवार को तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी से शुरू हुई यात्रा में दिग्विजय सिंह समर्थकों के साथ पैदल चलते नजर आए। हाथ में डंडा लेकर चल रहे दिग्विजय सिंह ने चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दे उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि चंदा चोरी करने वालों को पकड़ा जाए और जेल भेजा जाए। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई।

    दिग्विजय सिंह की यह यात्रा करीब 950 किलोमीटर लंबी है और लगभग 70 दिनों में अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचने का कार्यक्रम है। यात्रा के दूसरे दिन पिंगलेश्वर जोड़ नहारिया जोड़ सायराखेड़ी और देवनखेड़ी होते हुए ताजपुर जोड़ तक पहुंचने की योजना थी। इसके बाद भोजन और विश्राम के लिए रुकने तथा शाम को देवास जिले के सिंदूरिया गांव में पड़ाव डालने का कार्यक्रम प्रस्तावित था। दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा को शिव धाम से राम धाम तक की यात्रा बताया। इस दौरान उन्होंने समर्थकों के साथ बम-बम भोले का उद्घोष किया जबकि समर्थकों ने जय सियाराम के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि सनातनी परंपरा में माता सीता का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    यात्रा को लेकर मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने भी टिप्पणी की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि राम मंदिर के निर्माण के समय वैसा उत्साह दिखाई नहीं दिया जैसा अब मंदिर के चंदे पर सवाल उठाते हुए नजर आ रहा है। इस बयान पर प्रतिक्रिया पूछे जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें छोड़ दीजिए मैं उन्हें जानता भी नहीं। उनके इस जवाब के बाद यात्रा को लेकर चल रही बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में आ गई।

    दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय ने यात्रा को धार्मिक आस्था और स्वाभिमान से जुड़ा अभियान बताया। उनके मुताबिक चढ़ावे की कथित चोरी और धर्म के नाम पर धोखाधड़ी जैसी घटनाओं से सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है। यात्रा के जरिए इन्हीं मुद्दों को उठाकर लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। यात्रा प्रभारी चंदर सिंह सोंधिया के अनुसार यात्रा में स्थायी रूप से शामिल होने के लिए अब तक करीब तीन हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है जबकि अलग-अलग स्थानों पर हजारों लोग इससे जुड़ रहे हैं।

    दिग्विजय सिंह ने राम जन्मभूमि के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा है कि मामले में छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई लेकिन बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। उन्होंने वोट चोरी और नोट चोरी के मुद्दे भी उठाए हैं। यात्रा के दौरान पर्चे बांटने और राष्ट्रपति के नाम रिपोर्ट पेश करने की बात भी कही गई है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी बात जनता तक पहुंचाना और न्याय की मांग करना है। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति में यात्रा से जुड़े संवाद की जिम्मेदारी अमृता राय को सौंपने की बात भी कही है।

    दूसरी ओर उज्जैन से भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया ने इस यात्रा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी बताया। उन्होंने कहा कि सनातन का ध्वज भगवा है लेकिन यात्रा में भगवा ध्वज दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने तिरंगे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश का मान सम्मान और अभिमान है। सांसद ने दिग्विजय सिंह को संत के बजाय राजनेता बताते हुए कांग्रेस के पुराने रुख और भगवान राम से जुड़े विवादों का भी जिक्र किया। इस तरह यात्रा के धार्मिक उद्देश्य और उसके राजनीतिक मायनों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

  • कांग्रेस का झंडा नहीं, सनातन स्वाभिमान का संदेश लेकर निकलेंगे दिग्विजय सिंह, उज्जैन से अयोध्या तक पत्नी के साथ 950 किमी की पदयात्रा

    कांग्रेस का झंडा नहीं, सनातन स्वाभिमान का संदेश लेकर निकलेंगे दिग्विजय सिंह, उज्जैन से अयोध्या तक पत्नी के साथ 950 किमी की पदयात्रा


    उज्जैन । महाकाल से रामलला तक दिग्विजय सिंह की पदयात्रा, पांच पवित्र नदियों का जल लेकर जाएंगे अयोध्या
    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन के महाकाल मंदिर से सत्य-सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत करेंगे। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण पांच पवित्र नदियों के जल से भरे कलश होंगे जिन्हें विशेष रूप से तैयार किए जा रहे रथ में रखकर अयोध्या ले जाया जाएगा। करीब 950 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा का समापन अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में करने की योजना है। यात्रा में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय भी उनके साथ पैदल चलेंगी। आयोजकों के मुताबिक यह यात्रा लगभग 70 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
    यात्रा को लेकर उज्जैन में तैयारियां तेज हो गई हैं। मंगलवार को शिप्रा गार्डन में आयोजित बैठक में आयोजन की रूपरेखा और व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। यात्रा के शुभारंभ के दिन 20 अक्टूबर को सुबह 8 बजे नृसिंह घाट के पास बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन-अर्चन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसमें दिग्विजय सिंह के साथ हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है। धार्मिक अनुष्ठान के बाद कन्या भोज और विशाल भंडारे का आयोजन होगा। इसके बाद पदयात्रा अपने गंतव्य अयोध्या की ओर रवाना होगी।
    आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यात्रा में कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल के झंडे और बैनर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य सत्य धर्म न्याय सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति लोगों को जागरूक करना बताया गया है। इसके साथ ही चंदा चोरी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग भी यात्रा के दौरान उठाई जाएगी। आयोजक इसे किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम के बजाय सामाजिक और धार्मिक जनजागरण की पहल के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
    यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह और अमृता राय प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे। आयोजकों की योजना के अनुसार यात्रा में लगभग 2000 से 3000 लोगों के शामिल होने की व्यवस्था की जा रही है। अलग-अलग पड़ावों पर यात्रा से जुड़ने के लिए लोगों ने पंजीकरण भी कराया है। दिग्विजय सिंह यात्रा की तैयारी के लिए नियमित रूप से पैदल चलने का अभ्यास कर रहे हैं ताकि लंबे सफर के दौरान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ा जा सके।
    उज्जैन जिले में यात्रा का प्रवास पांच दिनों का प्रस्तावित है। पहला पड़ाव कनिपुरा में होगा। इसके बाद यात्रा सिंदूरिया तराना और कनासिया से होते हुए शाजापुर जिले में प्रवेश करेगी। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के शामिल होने की व्यवस्था की जा रही है। इस दौरान धार्मिक आयोजनों और जनसंपर्क के जरिए यात्रा के संदेश को लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।
    यात्रा के लिए विशेष रथ तैयार किया जा रहा है जिसमें पांच पवित्र नदियों के जल से भरे कलश स्थापित किए जाएंगे। भरत पोरवाल के निर्देशन में महावीर जैन और सतीश शर्मा रथ निर्माण का काम कर रहे हैं। इसी क्रम में शिप्रा नदी का जल कल्याणपुरा घाट से एकत्र किया गया। सुरेंद्र सुहाने अभिषेक गौर योगेंद्र सिंह परिहार भरत पोरवाल और नासिर पटेल ने इस प्रक्रिया में भाग लिया। शिप्रा नदी से लाया गया जल फिलहाल राजेंद्र वशिष्ठ के निवास स्थित मंदिर में सुरक्षित रखा गया है। यात्रा के शुभारंभ पर इसे विशेष रथ में स्थापित किया जाएगा। अब सभी की निगाहें 20 अक्टूबर को होने वाले शुभारंभ और उज्जैन से अयोध्या तक निकलने वाली इस लंबी पदयात्रा पर टिकी हैं।
  • 'हिन्दू फारसी शब्द, धर्मग्रंथों में कहीं नहीं', दिग्विजय सिंह क्यों निकाल रहे सनातन यात्रा?

    'हिन्दू फारसी शब्द, धर्मग्रंथों में कहीं नहीं', दिग्विजय सिंह क्यों निकाल रहे सनातन यात्रा?


    मुंबई।
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने जा रहे हैं। यह यात्रा 20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी। यात्रा से पहले दिग्विजय सिंह का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने इसके उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताया है। उन्होंने दावा किया कि ‘हिन्दू’ शब्द फारसी भाषा से आया है और वेद, पुराण तथा उपनिषदों में इसका उल्लेख नहीं मिलता।

    वीडियो में दिग्विजय सिंह ने विश्व हिंदू परिषद (VHP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विनायक दामोदर सावरकर को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘हिन्दू’ शब्द के इस्तेमाल के जरिए हिंदुओं और मुसलमानों तथा हिंदुओं और सिखों के बीच खाई पैदा की गई।

    ‘धर्मग्रंथों में हिन्दू शब्द का इस्तेमाल नहीं’

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि आजकल लोग ‘हिन्दू धर्म’ की जगह ‘सनातन धर्म’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जब से उन्होंने सनातन धर्म शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया, तब से और अधिक लोगों ने भी इस शब्द का प्रयोग शुरू किया है।

    उन्होंने कहा कि ‘हिन्दू’ शब्द फारसी भाषा का है और भारतीय धर्मग्रंथों में इसका उल्लेख नहीं मिलता। दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि वेदों, पुराणों और उपनिषदों में कहीं भी हिन्दू शब्द का इस्तेमाल नहीं हुआ है।

    80 साल की उम्र में उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा

    दिग्विजय सिंह ने वीडियो की शुरुआत में कहा कि लोग उनसे सवाल करते हैं कि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करने की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि उनके लिए उम्र मायने नहीं रखती और वह खुद को अभी 50 साल का महसूस करते हैं।

    उन्होंने बताया कि यात्रा उज्जैन के शिवधाम से अयोध्या के रामधाम तक जाएगी। उनके मुताबिक, यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म के वास्तविक अर्थ, उसके मूल विचार और उसके महत्व को लोगों तक पहुंचाना है।

    VHP और सावरकर पर लगाए आरोप

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में सनातन धर्म को लगातार ‘हिन्दू-हिन्दू’ कहने की परंपरा के लिए विश्व हिंदू परिषद और दामोदर सावरकर को जिम्मेदार माना जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी प्रक्रिया के कारण हिंदुओं और मुसलमानों तथा हिंदुओं और सिखों के बीच विभाजन पैदा हुआ।

    उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी ने सनातन धर्म को अपनाया और उसे अपने जीवन में उतारा।

    ‘पूरी दुनिया को अपना बंधु मानता है सनातन’

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म की मूल भावना में पूरी दुनिया को अपना बंधु मानने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म प्राणियों के कल्याण और अधर्म के नाश की बात करता है तथा विश्व के कल्याण की कामना करता है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि विश्व हिंदू परिषद और RSS मिलकर सनातन धर्म के इस मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ में सनातन धर्म का उद्देश्य और महत्व लोगों को बताया जाएगा। यात्रा 20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या पहुंचेगी।

  • नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में फिर चर्चा, दिग्विजय बोले- रोकना चाहिए था, सोनिया गांधी ने दी अलग राय

    नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में फिर चर्चा, दिग्विजय बोले- रोकना चाहिए था, सोनिया गांधी ने दी अलग राय


    नई दिल्ली। कांग्रेस कार्यसमिति की मंगलवार को हुई बैठक में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से अलग होने का मुद्दा भी चर्चा में आया। बैठक में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन से जाने नहीं देना चाहिए था और अगर वह साथ रहते तो राजनीतिक परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। इस पर सोनिया गांधी ने अलग राय रखते हुए कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन से बाहर जाना ही था।

    नीतीश कुमार पहले विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्होंने गठबंधन से अलग होकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का रुख किया था। मंगलवार की बैठक में उनके इस फैसले और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। सामने आई जानकारी के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन के साथ बने रहते तो सियासी हालात अलग होते।

    दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर सोनिया गांधी ने कहा कि नीतीश कुमार INDIA गठबंधन में रुकना नहीं चाहते थे। उनके मुताबिक, वह गठबंधन से बाहर निकलने के रास्ते तलाश रहे थे। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि उनका बाहर जाना पहले से तय दिशा में था। इस तरह बैठक में नीतीश कुमार के फैसले को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग आकलन सामने आए।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस चर्चा में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर बोलना नहीं चाहते थे, लेकिन नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने की बात सामने रखी। खड़गे के मुताबिक, गठबंधन का संयोजक बनने की उनकी कोशिश भी वास्तविक राजनीतिक प्रतिबद्धता के बजाय दिखावे तक सीमित थी। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार पहले उनसे राज्य की राजनीति में रहने और केंद्र में INDIA गठबंधन को समर्थन देने की बात कह चुके थे।

    नीतीश कुमार के मुद्दे पर हुई यह चर्चा ऐसे समय हुई, जब कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। कांग्रेस ने मतदाता सूची में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कीं। पार्टी की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करने समेत कई मांगें रखी गईं।

    कांग्रेस की बैठक के अगले दिन INDIA गठबंधन की बैठक भी नई दिल्ली में निर्धारित थी। इसमें विपक्षी दलों के नेताओं को चुनाव आयोग, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति पर चर्चा करनी थी। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अन्य घटक दलों के प्रमुख नेताओं की भागीदारी तय थी।

    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बातचीत का एक हल्का-फुल्का पल भी चर्चा में रहा। बैठक में खड़गे ने राहुल गांधी के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि पार्टी उनके पीछे चल रही है। इस पर राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए पूछा कि वे बहुत पीछे तो नहीं हैं। इसके बाद खड़गे ने कहा कि पार्टी उनके साथ चल रही है।

    नीतीश कुमार को लेकर हुई चर्चा ने INDIA गठबंधन के गठन और उसके बाद बदले राजनीतिक समीकरणों को फिर से सामने ला दिया। एक तरफ दिग्विजय सिंह ने उनके गठबंधन में बने रहने को लेकर अलग संभावना व्यक्त की, वहीं सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके अलग होने को उनकी राजनीतिक दिशा से जुड़ा फैसला बताया। इसी बीच विपक्षी दल चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी संयुक्त रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं।

  • MP की सियासत में एक दिन में तीन बड़े सीन ट्रंप के ऐलान से शिवराज ट्रेंड में CM मोहन ने हेमंत को बीच में बैठाया दिग्विजय ने भाजपा पर साधा निशाना

    MP की सियासत में एक दिन में तीन बड़े सीन ट्रंप के ऐलान से शिवराज ट्रेंड में CM मोहन ने हेमंत को बीच में बैठाया दिग्विजय ने भाजपा पर साधा निशाना


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को अलग अलग घटनाओं ने सियासी माहौल को खासा दिलचस्प बना दिया। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ऐलान के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे तो दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन के बीच कथित मनमुटाव की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एक मंच पर साथ नजर आए। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा को लेकर पूछे गए सवाल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा भाड़ में जाए।

    दरअसल ट्रंप ने कहा है कि अगर उनकी रिपब्लिकन पार्टी चुनाव जीतती है तो हर अमेरिकी वयस्क को 5000 डॉलर दिए जाएंगे। इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना से जोड़कर कई पोस्ट और तस्वीरें वायरल होने लगीं। शिवराज समर्थकों ने इसे मामा के मॉडल की वैश्विक चर्चा से जोड़ दिया। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ट्रेंड में आ गए।

    जब उनसे पूछा गया कि सोशल मीडिया पर यह चर्चा है कि ट्रंप भी आपके मॉडल को अपना रहे हैं तो शिवराज ने कहा कि लाड़ली बहना योजना सस्ती लोकप्रियता के लिए नहीं लाई गई थी। उनका कहना था कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को उनका अधिकार और न्याय दिलाना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और लोगों ने ट्रंप के ऐलान को लाड़ली बहना योजना से जोड़कर अपनी राय जाहिर की।

    इधर मध्य प्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन के बीच कथित खटपट की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साथ आकर अलग संदेश देने की कोशिश की। दोनों नेता भाजपा कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक साथ नजर आए। जब दोनों की दोस्ती को लेकर सवाल किया गया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी दोस्ती तो पहले से ही प्रगाढ़ है। इस दौरान दोनों नेता मुस्कुराते दिखाई दिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के घर पहुंचे। वहां दोनों के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। इसके बाद दोनों एक ही वाहन से भाजपा कार्यालय पहुंचे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष को बीच की कुर्सी पर बैठने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आप प्रदेश अध्यक्ष हैं इसलिए यहां बैठिए। इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    उधर दतिया में कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपनी सनातन स्वाभिमान यात्रा को लेकर जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान भाजपा की ओर से यात्रा पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर उनसे सवाल किया गया। पत्रकार के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा भाड़ में जाए और इसके बाद वहां से चले गए।

    इसी बीच सागर के जहरीली शराबकांड की न्यायिक जांच से जुड़ी फाइल को लेकर भी मंत्रालय के गलियारों में चर्चा है। सरकार ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग बनाने का ऐलान किया है लेकिन दावा किया जा रहा है कि जांच से संबंधित फाइल वल्लभ भवन की चौथी मंजिल पर पिछले कुछ दिनों से आगे नहीं बढ़ी है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार जांच का ऐलान कर चुकी है तो प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • MP में शिक्षक भर्ती को लेकर दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान, 5 सितंबर से भूख हड़ताल की चेतावनी; पदवृद्धि की मांग पर अड़े अभ्यर्थी

    MP में शिक्षक भर्ती को लेकर दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान, 5 सितंबर से भूख हड़ताल की चेतावनी; पदवृद्धि की मांग पर अड़े अभ्यर्थी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती 2025 को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। भोपाल के नीलम पार्क में पदवृद्धि की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे अभ्यर्थियों के बीच बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात की और उनकी मांगों को जायज बताते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की। दिग्विजय सिंह ने इस दौरान सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अभ्यर्थियों की मांगों पर शिक्षक दिवस तक कोई निर्णय नहीं लिया गया तो वे खुद 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में शिक्षा और स्वास्थ्य हमेशा महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार करने के लिए बड़ी संख्या में स्कूल खोले गए थे। उनके मुताबिक करीब 45 हजार नए स्कूल खोले गए और शिक्षकों की भर्ती का अधिकार भोपाल से स्थानीय स्तर पर दिया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की कमी को पूरा करना था।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने मौजूदा शिक्षक भर्ती व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था और सिलेबस में बदलाव का सीधा असर उन शिक्षकों पर पड़ रहा है जिन्होंने वर्षों तक पुराने पाठ्यक्रम के आधार पर विद्यार्थियों को पढ़ाया है। अब उन्हें नए सिलेबस के अनुसार परीक्षा देने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब शिक्षकों के पद खाली हैं तो उन रिक्त पदों पर भर्ती क्यों नहीं की जा रही है।

    दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता शिक्षा और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय दूसरे राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर ज्यादा है। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर भी निशाना साधा और कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि 80 वर्ष की उम्र में भी वे खुद को नौजवान मानते हैं और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़े रहेंगे।

    इस दौरान पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी उनके साथ मौजूद रहे। प्रदर्शन स्थल पर महिला अभ्यर्थियों ने दिग्विजय सिंह को राखी भी बांधी। अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों और आंदोलन की स्थिति से पूर्व मुख्यमंत्री को अवगत कराया। दिग्विजय सिंह ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए वे प्रयास करेंगे।

    नीलम पार्क में वर्ग 2 माध्यमिक और वर्ग 3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। एक दिन पहले आंदोलनकारी अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद आंदोलन और तेज हो गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर अलग अलग स्तर पर आंदोलन कर रहे हैं लेकिन अब तक सरकार की ओर से ठोस समाधान नहीं निकला है।

    अभ्यर्थी 21 अगस्त को भी भोपाल में बड़ा प्रदर्शन कर चुके हैं। प्रदेशभर से आए अभ्यर्थियों ने डीपीआई कार्यालय के सामने प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बाद रैली निकाली और नीलम पार्क पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। बुधवार को इस आंदोलन का छठवां दिन रहा।

    अभ्यर्थियों का कहना है कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच कई चरणों में आंदोलन किए गए लेकिन पदवृद्धि की मांग पर सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब वे तत्काल निर्णय की मांग कर रहे हैं। वहीं दिग्विजय सिंह की 24 घंटे की भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद शिक्षक भर्ती का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की सियासत में गरमाता नजर आ रहा है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या फैसला लेती है।

  • पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन

    पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में शुक्रवार का दिन राजनीति प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई चर्चित घटनाओं के नाम रहा। कहीं उपचुनाव की तैयारियों के बीच पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की वापसी की अटकलों ने जोर पकड़ा तो कहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चंदे को लेकर अपने ही अंदाज में सियासी संदेश दे दिया। दूसरी ओर नर्मदापुरम जिले में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक का शराब के नशे में क्लासरूम में सोते हुए वीडियो सामने आने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इन सबके बीच मंत्रालय के गलियारों में एक महिला मंत्री और उनके विभाग से जुड़ी चर्चाएं भी खूब सुर्खियां बटोरती रहीं।

    दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बाद पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गए हैं। उनका पुराना शायराना बयान कि समुद्र का पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना मैं लौटकर आऊंगा एक बार फिर चर्चाओं में है। उपचुनाव को लेकर उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने जनता के बीच विनम्रता के साथ स्वीकार किया कि यदि उनसे कोई गलती हुई है तो उसे सुधारेंगे और अपने व्यवहार तथा कार्यशैली में बदलाव लाकर लोगों का विश्वास दोबारा जीतने का प्रयास करेंगे। हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने अब तक उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन राजनीतिक हलकों में नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।

    उधर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर अपने भोपाल स्थित निवास के बाहर एक बड़ा पोस्टर लगा दिया। पोस्टर में साफ लिखा गया है कि भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे के चोरों और चढ़ावा चोरों का उनके घर में प्रवेश निषिद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने का ऐलान भी किया है। उनका कहना है कि यह यात्रा पूरी तरह गैर राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य केवल चंदे में पारदर्शिता की मांग करना है। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल के बीच नर्मदापुरम जिले के केसला क्षेत्र से आई एक घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यहां एक सरकारी स्कूल का शिक्षक शराब के नशे में धुत होकर कक्षा में ही सोता मिला। ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया जबकि शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया। बाद में शिक्षक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में शराब नहीं पीने का वादा किया लेकिन घटना ने सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी।

    इधर मंत्रालय के गलियारों में भी एक महिला मंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि वे अपने विभाग में प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति चाहती हैं ताकि विभागीय कामकाज पर बेहतर नियंत्रण स्थापित हो सके। चर्चा यह भी है कि विभाग में बड़े टेंडर और तबादलों को लेकर मंत्री और विभाग की वरिष्ठ अधिकारी के बीच मतभेद सामने आए हैं। हालांकि इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

    प्रदेश में एक ही दिन सामने आई इन घटनाओं ने साफ कर दिया कि मध्य प्रदेश में राजनीति प्रशासन और व्यवस्था से जुड़े मुद्दे लगातार नए रंग दिखा रहे हैं। आने वाले दिनों में उपचुनाव पदयात्रा और प्रशासनिक फैसलों के साथ इन घटनाओं का असर प्रदेश की सियासत में और अधिक दिखाई दे सकता है।