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  • सिनेमाई मर्यादा और सेट अनुशासन पर गंभीर सवाल: जब इंटीमेट सीन्स के दौरान नियंत्रण खो बैठे थे दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना

    सिनेमाई मर्यादा और सेट अनुशासन पर गंभीर सवाल: जब इंटीमेट सीन्स के दौरान नियंत्रण खो बैठे थे दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में कलाकारों की कला और उनके किरदारों की हमेशा प्रशंसा की जाती है, लेकिन कई बार सेट पर घटित कुछ अप्रत्याशित और असहज करने वाली घटनाएं वर्षों बाद भी गंभीर चर्चाओं का विषय बन जाती हैं। सत्तर और अस्सी के दशक के शीर्ष अभिनेताओं में शुमार दिवंगत सुपरस्टार विनोद खन्ना से जुड़े कुछ पुराने विवाद इस समय गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। एक वरिष्ठ मनोरंजन पत्रकार द्वारा हाल ही में दिए गए साक्षात्कार के अनुसार, फिल्मों में रोमांटिक और संवेदनशील दृश्यों को फिल्माते समय विनोद खन्ना अक्सर अपने अभिनय में इस कदर डूब जाते थे कि वे पूरी तरह से अपना नियंत्रण खो बैठते थे। इसका खामियाजा उनके साथ काम करने वाली समकालीन और नवोदित अभिनेत्रियों को शारीरिक और मानसिक पीड़ा के रूप में भुगतना पड़ा था।

    यह पहली बड़ी घटना फिल्म ‘प्रेम धरम’ के निर्माण के दौरान सामने आई थी, जिसका निर्देशन जाने-माने फिल्म निर्माता महेश भट्ट कर रहे थे। इस फिल्म के एक मुख्य दृश्य में विनोद खन्ना और अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया के बीच एक बेहद संवेदनशील और इंटीमेट दृश्य को फिल्माया जा रहा था। जैसे ही कैमरे ने काम करना शुरू किया, अभिनेता दृश्य के प्रभाव में इस कदर खो गए कि उन्हें आसपास के माहौल का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रहा। दृश्य की समाप्ति पर जब निर्देशक महेश भट्ट ने लाउडस्पीकर के माध्यम से बार-बार ‘कट’ बोला, तब भी विनोद खन्ना नहीं रुके। डिंपल कपाड़िया उस समय फिल्म उद्योग में बहुत नई थीं और वे निर्देशक के निर्देश और अभिनेता के इस व्यवहार के बीच पूरी तरह असमंजस में फंस गईं। आखिरकार, स्थिति को नियंत्रण से बाहर होते देख निर्देशक और सेट पर मौजूद चार-पांच क्रू सदस्यों को खुद आगे आकर दोनों को अलग करना पड़ा था।

    इसके बाद, साल 1988 में रिलीज हुई फिल्म ‘दयावान’ के सेट पर एक और अधिक गंभीर वाकया हुआ, जिसने फिल्म जगत को स्तब्ध कर दिया था। इस फिल्म में विनोद खन्ना के साथ मुख्य भूमिका में अभिनेत्री माधुरी दीक्षित थीं, जो उस समय उम्र और अनुभव में अभिनेता से काफी छोटी थीं। फिल्म के एक गीत के दौरान दोनों के बीच एक बेहद नजदीकी किसिंग सीन फिल्माया जाना तय हुआ था। इस दौरान अभिनेता ने एक बार फिर अपना आपा खो दिया और निर्देशक द्वारा दृश्य समाप्त करने की घोषणा के बाद भी वे नहीं रुके।

    यह स्थिति तब और अधिक दर्दनाक हो गई जब उत्तेजना के प्रवाह में आकर विनोद खन्ना ने सह-अभिनेत्री के होठों को दांतों से काट लिया। घाव इतना गहरा था कि माधुरी दीक्षित के होठों से तत्काल खून बहने लगा, जिसे देखकर सेट पर उपस्थित सभी लोग सन्न रह गए। इसके बाद ही अभिनेता होश में आए और पीछे हटे। इस पूरे वाकये ने युवा अभिनेत्री को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया था। अपमान और दर्द से भरी माधुरी दीक्षित तुरंत सेट छोड़कर अपनी वैनिटी वैन में चली गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं। इस कटु अनुभव का उनके मन पर इतना गहरा असर हुआ कि उन्होंने भविष्य में कभी भी फिल्मों में इस तरह के अत्यधिक इंटीमेट दृश्यों को न करने की शपथ ले ली थी। सिनेमाई सेटों पर सुरक्षा और गरिमा के लिहाज से यह ऐतिहासिक संदर्भ आज भी प्रासंगिक माना जाता है।