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  • भारत-वानुअतु रिश्तों को नई मजबूती मार्गेरिटा और वानुअतु विदेश मंत्री की अहम मुलाकात

    भारत-वानुअतु रिश्तों को नई मजबूती मार्गेरिटा और वानुअतु विदेश मंत्री की अहम मुलाकात


    नई दिल्ली ।
    प्रशांत क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक सक्रियता को नई गति देते हुए पबित्रा मार्गेरिटा ने पोर्ट विला में जेवियर इमैनुएल हैरी से महत्वपूर्ण बैठक की जिसमें दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई इस दौरान भारत ने वानुअतु के विकास में एक भरोसेमंद साझेदार बने रहने की अपनी बढ़ती दोहराई

    बैठक के बाद मार्गेरिटा ने सोशल पर साझा संदेश में कहा कि भारत और वानुअतु के संबंध आपसी विश्वास और साझा मूल्यों पर आधारित हैं और दोनों देशों के बीच साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है उन्होंने कहा कि विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षमता निर्माण और क्लाइमेट रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सकारात्मक बातचीत हुई

    इस बैठक में बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को भी अहम विषय के रूप में उठाया गया जहां दोनों पक्षों ने वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया भारत ने स्पष्ट किया कि वह वानुअतु के विकासात्मक प्रयासों में सतत सहयोगी बना रहेगा

    अपने दौरे के दौरान मार्गेरिटा ने वानुअतु में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का भी दौरा किया यह संस्थान भारत के सहयोग से विकसित किया गया है जिसका मकसद लोकल युवाओं में डिजिटल स्किल को बढ़ावा देना और टेक्निकल कैपेसिटी को मजबूत करना है उन्होंने इसे भारत वानुअतु मित्रता का एक मजबूत सिंबल बताया

    मार्गेरिटा का यह दौरा उनके टर्म का पहला ऑफिशियल वानुअतु दौरा है जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को और गहराई करने की उम्मीद जताई उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक मित्रता और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए यह दौरा महत्वपूर्ण साबित होगा यह यात्रा 22 से 25 अप्रैल तक वानुअतु और तुवालु के ऑफिशियल दौरे का हिस्सा है जिसमें वह दोनों देशों के टॉप लीडरशिप और सीनियर अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रही हैं

    विदेश मंत्रालय के अनुसार यह पहल पैसिफिक आइलैंड्स देशों के साथ भारत के बढ़ते संबंधों और विकास सहयोग की नीति को दिखाता है यह प्रयास फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन के तहत आगे बढ़ रहा है जो भारत और पैसिफिक आइलैंड्स देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने का प्रमुख मंच बन चुका है

    इस पूरी पहल से साफ है कि भारत न केवल अपने पड़ोसी क्षेत्रों बल्कि दूरस्थ द्वीपीय देशों के साथ भी संतुलित और सतत भागीदारी को प्राथमिकता दे रहा है जो ग्लोबल कॉन्टिनेंटलिज्म में उसकी एक्टिव रोल को बरकरार है

  • PM मोदी 7–8 फरवरी को जाएंगे मलेशिया, रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत

    PM मोदी 7–8 फरवरी को जाएंगे मलेशिया, रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत


    नई दिल्‍ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 और 8 फरवरी 2026 को मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर मलेशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर यह प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया की तीसरी यात्रा होगी, वहीं दूसरी ओर अगस्त 2024 में भारत मलेशिया संबंधों को समग्र रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिए जाने के बाद उनकी यह पहली मलेशिया यात्रा होगी। ऐसे में इस दौरे से दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    विदेश मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता होगी। इस बातचीत में भारत-मलेशिया संबंधों के सभी अहम पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। दोनों नेता न केवल अब तक हुए सहयोग की समीक्षा करेंगे, बल्कि भविष्य में आपसी हितों के लिए सहयोग की नई रूपरेखा भी तय करेंगे।

    द्विपक्षीय वार्ता के साथ विविध कार्यक्रम

    प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहेगी। वे मलेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी संवाद करेंगे। मलेशिया में भारतीय प्रवासियों की बड़ी और प्रभावशाली आबादी है, जो दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री उद्योग और व्यापार जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे, जिससे व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    इस यात्रा के दौरान 10वां भारत-मलेशिया सीईओ फोरम आयोजित किया जाना भी तय है। यह मंच दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट नेताओं को एक साथ लाएगा, जहां वे निवेश के नए अवसरों, व्यापारिक साझेदारियों और आर्थिक सहयोग को लेकर विचार-विमर्श करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फोरम भारत-मलेशिया आर्थिक संबंधों को और मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों की मजबूत नींव

    भारत और मलेशिया के रिश्ते केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे ऐतिहासिक, सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों की गहरी नींव है। सदियों पुराने संपर्कों के चलते दोनों देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास का स्तर हमेशा ऊंचा रहा है। मलेशिया में लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो दुनिया में भारतीय प्रवासियों का तीसरा सबसे बड़ा समुदाय है। यह प्रवासी समुदाय दोनों देशों के रिश्तों को सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर और अधिक मजबूत बनाता है।
    भारतीय मूल के लोग मलेशिया की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति और संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि भारत और मलेशिया के रिश्तों में पीपल-टू-पीपल कॉन्टैक्ट एक केंद्रीय तत्व रहा है।

    बहुआयामी और विस्तारशील संबंध

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत-मलेशिया संबंध बहुआयामी हैं और समय के साथ लगातार विस्तार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस आगामी यात्रा के दौरान व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा सहयोग, समुद्री सहयोग, डिजिटल और वित्तीय प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक समीक्षा की जाएगी।

    खासतौर पर रक्षा और समुद्री सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच साझेदारी को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत और मलेशिया का सहयोग बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा डिजिटल तकनीक, फिनटेक और स्टार्टअप जैसे उभरते क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।

    भविष्य की दिशा तय करेगी यात्रा

    प्रधानमंत्री मोदी की यह मलेशिया यात्रा न केवल मौजूदा सहयोग की समीक्षा का अवसर होगी, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भारत-मलेशिया संबंधों की दिशा और प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट करेगी। अगस्त 2024 में संबंधों को समग्र रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद यह यात्रा दोनों देशों के लिए उस साझेदारी को जमीन पर उतारने का एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।