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  • खेलों में सफलता की राह आसान बना सकती हैं घर की ये 3 दिशाएं, वास्तु संतुलन से बढ़ सकता है आत्मविश्वास और प्रदर्शन

    खेलों में सफलता की राह आसान बना सकती हैं घर की ये 3 दिशाएं, वास्तु संतुलन से बढ़ सकता है आत्मविश्वास और प्रदर्शन

    नई दिल्ली । खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन केवल प्रतिभा, कड़ी मेहनत और नियमित अभ्यास पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि कई लोग मानते हैं कि सकारात्मक वातावरण और ऊर्जा भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर या प्रशिक्षण स्थल की दिशाओं का संतुलन व्यक्ति के आत्मविश्वास, मानसिक शक्ति और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से खेल जगत से जुड़े लोगों के लिए दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-दक्षिण-पूर्व और दक्षिण दिशा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार ये तीनों दिशाएं मिलकर अग्नि तत्व का क्षेत्र बनाती हैं। अग्नि तत्व को ऊर्जा, उत्साह, साहस और सक्रियता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यदि यह क्षेत्र संतुलित और दोषमुक्त हो तो खिलाड़ी के भीतर प्रतिस्पर्धा की भावना मजबूत होती है और वह अपने लक्ष्य पर अधिक एकाग्रता के साथ काम कर पाता है। इससे मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास में भी सकारात्मक वृद्धि हो सकती है।

    दक्षिण-दक्षिण-पूर्व दिशा को विशेष रूप से साहस और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इस दिशा का संतुलित होना खिलाड़ी को कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखने और बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकता है। कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में बैठकर भोजन करना भी लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की बात कही जाती है।

    दक्षिण दिशा को यश, सम्मान और पहचान की दिशा माना जाता है। वास्तु मान्यता के अनुसार यदि इस दिशा में किसी प्रकार का दोष हो तो व्यक्ति को अपनी मेहनत के अनुरूप सफलता या पहचान मिलने में कठिनाई आ सकती है। वहीं यदि यह दिशा संतुलित रहे तो खेल के क्षेत्र में उपलब्धियों के साथ सामाजिक सम्मान और पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ने की बात कही जाती है। हालांकि सफलता के लिए निरंतर अभ्यास और प्रदर्शन सबसे महत्वपूर्ण आधार बने रहते हैं।

    दक्षिण-पूर्व दिशा को संसाधनों और आर्थिक स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रशिक्षण, उपकरण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जरूरत होती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा का संतुलन व्यक्ति को संसाधनों के बेहतर उपयोग और आर्थिक सहयोग प्राप्त करने में सहायक माना जाता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र को व्यवस्थित और सकारात्मक बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    अग्नि कोण में रसोई का होना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह अग्नि तत्व के स्वाभाविक स्वरूप के अनुरूप माना जाता है। वहीं इस क्षेत्र में जल तत्व से जुड़ी वस्तुएं, अत्यधिक नीले या काले रंग का उपयोग तथा अनावश्यक पानी की व्यवस्था करने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसी मान्यताओं के अनुसार इससे ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है।

    वास्तु शास्त्र को मानने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि जो युवा या पेशेवर खिलाड़ी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें अपने घर या अभ्यास स्थल की इन दिशाओं को स्वच्छ, व्यवस्थित और वास्तुदोष से मुक्त रखने का प्रयास करना चाहिए। हालांकि यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि खेलों में सफलता का सबसे बड़ा आधार नियमित अभ्यास, अनुशासन, उचित प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प ही है, जबकि वास्तु संबंधी उपाय व्यक्तिगत आस्था और मान्यता का विषय हैं।

  • भारतीय सिनेमा के इतिहास में चेतन आनंद का अनूठा प्रयोग: कान्स फिल्म फेस्टिवल से लेकर काव्यात्मक संवादों तक दर्ज की अमिट छाप

    भारतीय सिनेमा के इतिहास में चेतन आनंद का अनूठा प्रयोग: कान्स फिल्म फेस्टिवल से लेकर काव्यात्मक संवादों तक दर्ज की अमिट छाप

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में प्रयोगधर्मिता और रचनात्मकता के कई दौर आए हैं, लेकिन सत्तर के दशक में किया गया एक अनोखा प्रयोग आज भी फिल्म समीक्षकों और दर्शकों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है। उस दौर में जब बॉलीवुड के निर्देशक पारंपरिक ढर्रे से अलग हटकर कुछ नया करने का प्रयास कर रहे थे, तब एक ऐसी फिल्म का निर्माण हुआ जिसके सभी संवाद पूरी तरह से काव्यात्मक थे। आज के दौर में जहां दर्शक यथार्थवादी और प्रामाणिक सिनेमा की मांग करते हैं, वहीं वर्ष 1970 में रिलीज हुई इस फिल्म में किरदारों का आपस में केवल शायरी और कविता के माध्यम से बात करना उस समय एक बड़ा जोखिम माना जा रहा था। इसके बावजूद, इस अनूठे प्रयोग ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े, बल्कि एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जिसे आज तक कोई दूसरा फिल्मकार दोहरा नहीं सका है।

    इस ऐतिहासिक और अनूठी फिल्म के निर्माण के पीछे भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक चेतन आनंद का विजन था। चेतन आनंद को अक्सर लोग केवल प्रसिद्ध अभिनेता देव आनंद के भाई के रूप में याद करते हैं, जबकि हकीकत यह है कि वह स्वयं वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले एक महान फिल्मकार थे। उनकी निर्देशकीय क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महान फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे भी उन्हें अपनी प्रेरणा मानते थे। चेतन आनंद ने वर्ष 1946 में अपनी फिल्म नीचा नगर के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर वह ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी, जिसे आज तक कोई दूसरी हिंदी फिल्म हासिल नहीं कर सकी है। उनकी इस कलात्मक प्रस्तुति को प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल में सर्वोच्च सम्मान यानी ग्रैंड प्राइज से नवाजा गया था, जिसने वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा की पहचान बनाई थी।

    कान्स फिल्म फेस्टिवल में मिली इस अभूतपूर्व कामयाबी के बाद सत्यजीत रे ने स्वयं चेतन आनंद को पत्र लिखकर यह स्वीकार किया था कि इस वैश्विक सम्मान ने ही उन्हें फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उतरने का हौसला दिया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाने के बाद चेतन आनंद ने सिनेमाई दुनिया में एक और नया मील का पत्थर स्थापित करने का संकल्प लिया। उन्होंने एक ऐसी प्रेम कहानी पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया, जिसका पूरा स्क्रीनप्ले और हर एक संवाद साधारण बोलचाल के बजाय कविता की शक्ल में हो। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए उन्होंने फिल्म उद्योग के सबसे दिग्गज और गंभीर अभिनेताओं को अनुबंधित किया, जिनमें राज कुमार, पृथ्वीराज कपूर और प्राण जैसे दिग्गज नाम शामिल थे। इन दिग्गज कलाकारों के अभिनय और काव्यात्मक संवादों के अनूठे संगम ने पर्दे पर एक जादुई माहौल तैयार कर दिया था।

    चेतन आनंद अपनी फिल्मों में वास्तविकता और दृश्यों की प्रामाणिकता को लेकर बेहद गंभीर रहते थे। इस फिल्म के एक खास दृश्य के लिए उन्हें सरसों के खेतों की प्राकृतिक लाइटिंग और पीले रंग के बैकग्राउंड की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने स्थानीय किसानों को अतिरिक्त धन राशि देकर समय से पहले सरसों की फसल उगाने का आग्रह किया था, ताकि फिल्म की शूटिंग के दौरान प्राकृतिक दृश्य बिल्कुल सटीक मिल सकें। मूल रूप से यह फिल्म लगभग तीन घंटे से अधिक लंबी तैयार हुई थी, लेकिन संपादन की मेज पर इसे दर्शकों के अनुकूल चुस्त रखते हुए दो घंटे बीस मिनट का किया गया। जब यह फिल्म हीर रांझा के नाम से सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो इसके अनोखे प्रारूप को देखकर शुरुआत में लोग चौंक गए, लेकिन देखते ही देखते इसने कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और आज भी यह भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित और लीक से हटकर बनी फिल्मों में शीर्ष पर गिनी जाती है।

  • PM मोदी ने की गुजरातियों की तारीफ, वडोदरा में बोले- यहां समाज समय की दिशा को जल्दी पहचानता है

    PM मोदी ने की गुजरातियों की तारीफ, वडोदरा में बोले- यहां समाज समय की दिशा को जल्दी पहचानता है


    वडोदरा।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) सोमवार को गुजरात (Gujarat) के वडोदरा शहर में थे, जहां उन्होंने पटेल समुदाय द्वारा निर्मित ‘सरदार धाम हॉस्टल’ (Sardar Dham Hostel) का उद्घाटन किया और इसके बाद एक सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) के कारण उपजे वैश्विक तेल संकट के बीच एकबार फिर लोगों से ईंधन और खाने के तेल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन एवं इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने और सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की। साथ ही उन्होंने एक बार फिर लोगों से आग्रह किया कि जहां संभव हो वहां घर से काम करने की कोविड-कालीन व्यवस्था को अपनाएं और विदेश यात्रा को भी सीमित करें। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने गुजरात की धरती और यहां के लोगों की जमकर तारीफ की और इसे भविष्य को पहचानने वाली धरती बताया।

    अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि ‘गुजरात की एक बहुत बड़ी विशेषता रही है, कि यहां समाज हमेशा समय की दिशा को जल्दी पहचानता है। परिवर्तन को अवसर में बदलना, नई संभावनाओं को अपनाना और भविष्य की तैयारी समय रहते शुरू करना ये गुजरात की कार्य संस्कृति का हिस्सा रहा है। आज जब दुनिया फ्यूचर टेक्नोलॉजीज की ओर बढ़ रही है, तब गुजरात भी नई गति के साथ आगे बढ़ रहा है। सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग, एयरोस्पेस, एडवांस इंजीनियरिंग, ग्रीन एनर्जी, फाइनेंशियल सर्विसेस हर क्षेत्र में गुजरात अपनी नई पहचान बना रहा है।’


    ‘ग्लोबल सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिश’

    आगे उन्होंने कहा, ‘साणंद में मेड इन इंडिया सेमीकंडक्टर्स बन रहे हैं, केयर्न सेमीकंडक्टर प्लांट में भी प्रोडक्शन शुरू हो चुका है, धोलेरा और सूरत में भी नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ रहे हैं। हमारा भारत और हमारा गुजरात ग्लोबल सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बने, हम इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।’


    पीएम ने बताया वडोदरा में हो रहे कितने काम

    आगे उन्होंने वडोदरा का जिक्र करते हुए कहा, ‘आने वाले समय में वडोदरा की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आज यहां बने मेट्रो कोचेज दूसरे देशों तक निर्यात हो रहे हैं। सांवली में आधुनिक रेल सिस्टम कोचेज का निर्माण हो रहा है। इंजीनियरिंग, हैवी मशीनरी, कैमिकल्स और फार्मा, पावर इक्विपमेंट्स और MSME, ऐसे कई सेक्टर्स में आज वडोदरा मैन्यूफेक्चरिंग का मजबूत केंद्र बन चुका है। यहां की गतिशक्ति यूनिवर्सिटी ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक की फील्ड में प्रोफेशनल्स तैयार कर रही है, अब एयरोस्पेस सेक्टर में भी वडोदरा नई पहचान बनाने जा रहा है। यहां एयरक्राफ्ट मैन्यूफेक्चरिंग प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है।


    ‘भारत भी दुनिया पर पड़ रहे असर से अछूता नहीं’

    इसके बाद उन्होंने पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए कहा, ‘साथियों गुजरात और देश में विकास के प्रयासों के बीच एक और विषय संवेदनशील होता जा रहा है, पिछले कुछ वर्षों में दुनिया लगातार अस्थिर परिस्थितियों से गुजर रही है। पहले कोरोना का संकट, फिर वैश्विक आर्थिक चुनौतियां और अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, इन सारी परिस्थितियों का असर लगातार पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। जब हमने मिलकर कोरोना के संकट का मुकाबला कर लिया तो इस संकट से भी अवश्य पार पा जाएंगे।’


    वेकेशन और वेडिंग के लिए विदेश जाने से बचने को कहा

    आगे उन्होंने उच्च व उच्च मध्यमवर्गीय लोगों की छुट्टियां मनाने व डेस्टिनेशन वेडिंग (यानी शादी के लिए किसी खास जगह पर जाने) के लिए विदेश जाने की आदत का जिक्र करते हुए कहा कि, ‘जैसे ही छुट्टियां शुरू होती हैं, बच्चों के हाथों में विदेश जाने के टिकट थमा दिए जाते हैं। आजकल विदेश यात्रा का चलन है। अक्सर ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ का चलन भी बढ़ रहा है। यहां ऐसे कई लोग हैं जो अब मुझे निमंत्रण नहीं भेजते, पहले वे ऐसा करते थे क्योंकि वे अपनी शादियां विदेश में करते थे, लेकिन अब उन्होंने यह सिलसिला बंद कर दिया है।

    आगे पीएम ने कहा, ‘विदेश में ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ का यह चलन तेजी से बढ़ रहा है, हालांकि, इस बात पर भी गौर करें कि इसमें काफी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। खुद से यह सवाल पूछें, क्या भारत के भीतर ऐसी कोई जगह नहीं है जहां हम अपनी छुट्टियां बिता सकें, जहां हम अपने बच्चों को अपने इतिहास के बारे में पढ़ाएं, जहां हम अपने स्थानों पर गर्व महसूस कर सकें? यह बेहद जरूरी है कि हम अपनी छुट्टियां यहीं भारत में ही मनाएं और तो और जहां तक शादियों की बात है, मैं नहीं मानता हूं कि हमारे लिए अपने भारत से ज्यादा सुंदर या पवित्र जगह कोई और हो सकती है। जब हम यहां पर शादी करते हैं तो पूर्वजों की मिट्टी भी हमें आशीर्वाद देती है। वेडिंग के लिए भी भारत में अनेक स्थान हैं, उन्हें हम चुनें।’


    ‘पाटीदार भाइयों को शादी के लिए खास सलाह’

    आगे प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं तो आप सब पाटीदार भाइयों को तो कहूंगा आपको तो अब शादी ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर जाकर करना चाहिए। आपकी हर शादी में सरदार साहब खुद आशीर्वाद देने के लिए मौजूद रहेंगे। वहीं पर आपने, जैसे हरिद्वार व ऋषिकेश में आप शांति के लिए जगह बना रहे हैं ना, वैसे ही आप ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ में शादी के लिए जगह बना दीजिए। जैसे हाल के वर्षों में सरदार साहब के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और हमारा एकता नगर पर्यटन का इतना बड़ा केंद्र बनकर उभरा है कि हम यह तय कर सकते हैं कि हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को वहां लेकर जाएं।’