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  • महेश भट्ट का संघर्ष: मां को सहारा देने के लिए कलम उठाई, फिर सिनेमा को बनाया अपनी पहचान

    महेश भट्ट का संघर्ष: मां को सहारा देने के लिए कलम उठाई, फिर सिनेमा को बनाया अपनी पहचान

    नई दिल्ली । 20 वर्ष का एक लड़का मां को आर्थिक सहारा देने के लिए रोजगार की तलाश में निकला। कलम चलाने की प्रतिभा थी और उसी की राह पकड़ी। विज्ञापन लिखने शुरू किए। मगर, उस लड़के की जिंदगी में तमाम अनुभव थे। इमोशंस थे। उन भावनाओं को व्यक्त कर पाने का हुनर था। इसके लिए उसने सिनेमा को माध्यम बनाया। कुछ अपने निजी अनुभवों पर तो कुछ समाज के अनुभवों पर ऐसा सिनेमा रचा, जो दर्शकों के दिलों को छूने लगा। आज दुनिया उस लड़के को नामी निर्देशक महेश भट्ट के रूप में जानती है, जिनका आज जन्मदिन है।

    मां की मदद के लिए साधी थी कलम

    महेश भट्ट इंडस्ट्री के चर्चित निर्देशक, निर्माता और स्क्रीनराइटर हैं। उनका जन्म 20 सितंबर 1948 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता का नाम नानाभाई भट्ट और मां का नाम शिरीन मोहम्मद अली है। महेश भट्ट ने अपनी स्कूली पढ़ाई डॉन बॉस्को हाई स्कूल, माटुंगा से की है। महेश शुरू से ही प्रतिभा के धनी हैं, वे ना सिर्फ एक होनहार छात्र थे, बल्कि अपनी मां के कामों में भी इन्होंने शुरू से मदद की। बहुत ही कम उम्र में वे पैसे भी कमाने लगे थे। उन्होंने स्कूल के दिनों में ही नौकरी शुरू की। वहीं, महेश भट्ट ने 20 साल की उम्र में विज्ञापनों के लिए लिखना शुरू कर दिया था। उनके मुताबिक, परिवार को आर्थिक रूप से सहारा देने के लिए उन्होंने यह शुरुआत की।

    26 की उम्र में बतौर निर्देशक शुरुआत

    अपने संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए महेश भट्ट ने फिल्मी उद्योग में कदम रखा। महेश ने स्मिता पाटिल और विनोद खन्ना के सेक्रेटरी के रूप में काम किया। निर्देशन की बात करें तो महेश भट्ट ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1970 में आई डॉक्यूमेंट्री ‘संकट’ के निर्देशन से की थी। मगर, सिनेमा की दुनिया में बतौर निर्देशक महेश भट्ट ने फिल्म ‘मंजिलें और भी हैं’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। तब उनकी उम्र महज 26 साल थी।

    ‘कब्जा’ से निर्माता की कुर्सी पर बैठे

    पांच दशक से अधिक के करियर में महेश भट्ट ने कई चर्चित और हिट फिल्मों का निर्देशन किया है। कई प्रोड्यूस की हैं। वहीं, 100 से ज्यादा फिल्मों की कहानी को बतौर स्क्रिप्ट राइटर उन्होंने आकार दिया है। निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद उन्होंने 1987 में अपने भाई मुकेश भट्ट के साथ विशेष फिल्म्स के बैनर तले फिल्म ‘कब्जा’ के साथ निर्माता की भूमिका निभाई। अपने अब तक के फिल्मी करियर में महेश भट्ट ने ‘अर्थ’, ‘आशिकी’, ‘सारांश’ जैसी एक से बढ़कर एक फिल्में बनाई हैं।

    महेश की फिल्म ‘सारांश’ को 14वें मॉस्को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में दिखाया गया था। यह उस साल के सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के लिए अकादमी पुरस्कार के लिए भारत की ओर से थी। 1986 की फिल्म ‘नाम’ उनकी पहली व्यावसायिक सिनेमाई फिल्म थी। वे ‘लहू के दो रंग’, ‘अभिमन्यु’, ‘अर्थ’, ‘सारांश’, ‘आशिकी’, ‘डैडी’, ‘दिल है के मानता नहीं’ और ‘हम हैं राही प्यार के’ जैसी 80 से ज्यादा फिल्मों का निर्देशन और प्रोडक्शन कर चुके हैं।

    छोटे पर्दे पर भी दिखाया दमखम

    फिल्मों के अलावा महेश भट्ट ने छोटे पर्दे पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने ‘स्वाभिमान’, ‘कभी कभी’ और ‘नामकरण’ जैसे कई चर्चित टीवी सीरियल्स का भी निर्देशन किया है।

    महेश भट्ट को उनकी फिल्मों के लिए काफी पुरस्कार दिए गए। सबसे पहले उन्हें 1984 में फिल्म ‘अर्थ’ के लिए फिल्मफेयर बेस्ट स्क्रीन प्ले अवार्ड दिया गया। इसके बाद 1985 में फिल्म ‘सारांश’ को बेस्ट स्टोरी अवार्ड दिया गया। 1994 में ‘हम हैं राही प्यार के’ के लिए महेश को नेशनल फिल्म अवार्ड दिया गया। 1999 में उनकी फिल्म ‘जख्म’ को फिल्मफेयर बेस्ट स्टोरी अवार्ड दिया गया।

    फिल्मों में दिखा निजी जिंदगी का प्रतिबिंब

    महेश भट्ट ऐसे निर्देशक हैं, जिनके विचार कई बार लोगों को चौंकाते हैं। उनकी निजी विचारधारा की तरह उनकी फिल्मों के विषय और फिल्में दर्शकों को चौंकाती रही हैं। कभी विवाद हुए तो कभी आलोचना। उतार-चढ़ावों के बीच तारीफें भी खूब मिलीं। उन्होंने 70-80 के दशक में समाज के ऐसे विषयों पर फिल्में बनाने का साहस किया, जिन पर लोग बातें भी दबी जुबान से करते हों। आलोचनाओं से बेफिक्र रहते हुए उन्होंने बोल्ड विषयों को चुना। वे अपनी फिल्मों में नए प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं।

    बेहद खुले विचारों वाले महेश भट्ट ने समाज की बंदिशों को तोड़ समाज की सोच बदलने वाली फिल्में बनाईं। उन्होंने ‘जहर’, ‘मर्डर 2’, ‘जिस्म 2’ जैसी फिल्में बनाकर अपना नाम बॉलीवुड के बोल्ड विषयों पर फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर में शामिल कर लिया। महेश भट्ट ने कई फिल्मों में अपनी निजी जिंदगी को परदे पर भी उतारा है।

    पूजा भट्ट को लेकर विवादित बयान पर हुआ था हंगामा

    विवादों से भी महेश भट्ट का नाता रहा है। महेश अपनी बेटी पूजा भट्ट को लेकर भी विवादों में रहे। पूजा भट्ट के साथ एक फोटोशूट को लेकर काफी आलोचना हुई थी। एक इंटरव्यू में महेश भट्ट ने अपनी बेटी को लेकर विवादित बयान भी दिया था। बहरहाल महेश भट्ट कितने भी विवादों में रहे हों लेकिन वो उसे गंभीरता से नहीं लेते। आज भी वो हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से राय रखते हैं।

    महेश भट्ट की निजी जिंदगी और शादी

    महेश भट्ट की निजी जिंदगी की बात करें तो उनकी पहली शादी किरण भट्ट (लोरिएन ब्राइट) से हुई। किरण से महेश कॉलेज के दिनों में मिले और प्यार हो गया। महेश भट्ट और किरण भट्ट के दो बच्चे पूजा भट्ट और राहुल भट्ट हैं। हालांकि, किरण भट्ट के साथ महेश भट्ट का रिश्ता टूट गया। इसके बाद उन्होंने सोनी राजदान से शादी रचाई। सोनी राजदान के साथ महेश भट्ट की दो बेटियां आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट हैं।

    महेश भट्ट का वर्क फ्रंट

    महेश भट्ट के वर्क फ्रंट की बात करें तो वे फिल्म ‘नाम-टू लिव इज वॉर’ को लेकर चर्चा में हैं। इसमें वीर पहाड़िया अहम भूमिका में नजर आएंगे। महेश भट्ट इस फिल्म को पेश कर रहे हैं। वहीं, निर्देशन की कमान सिद्धांत सचदेव के कंधों पर है।

  • अभिनेता सनी देओल ने गदर 3 के संभावित विचार पर दी प्रतिक्रिया, पोते की बीवी लाने के सुझाव को बताया दिलचस्प

    अभिनेता सनी देओल ने गदर 3 के संभावित विचार पर दी प्रतिक्रिया, पोते की बीवी लाने के सुझाव को बताया दिलचस्प


    नई दिल्ली । 
    बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता सनी देओल ने अपनी प्रसिद्ध फिल्म फ्रेंचाइजी के अगले भाग को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक दिलचस्प प्रतिक्रिया दी है। हाल ही में अपनी नई फिल्म की रिलीज के बाद आयोजित एक विशेष बातचीत के दौरान जब उनसे गदर 3 के संभावित कथानक को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे हास्यप्रद और विचारणीय बताया। अभिनेता ने संकेत दिया कि फिल्म निर्माण के इस विचार को निर्देशक के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।

    बातचीत के दौरान एक प्रशंसक की टिप्पणी का हवाला दिया गया, जिसमें पहली और दूसरी फिल्म के घटनाक्रमों की तुलना करते हुए तीसरी किश्त की संभावित कहानी पर चुटकी ली गई थी। इस टिप्पणी में कहा गया था कि पहली फिल्म में मुख्य पात्र अपनी पत्नी को वापस लाने सीमा पार गया था, जबकि दूसरी फिल्म में पुत्र और उसकी पत्नी का संदर्भ था। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए प्रशंसक ने पूछा कि क्या तीसरे भाग में पोते और उसकी पत्नी की कहानी देखने को मिलेगी। इस पर अभिनेता ने सहजता से हंसते हुए प्रतिक्रिया दी कि यह विचार बुरा नहीं है और वे इस बारे में निर्देशक अनिल शर्मा से बात करेंगे।

    गदर फ्रेंचाइजी भारतीय सिनेमा के इतिहास में व्यावसायिक दृष्टिकोण से अत्यंत सफल रही है। वर्ष 2001 में प्रदर्शित हुई इसकी पहली किश्त ने बॉक्स ऑफिस पर अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की थी। इसके दो दशक से अधिक समय बाद वर्ष 2023 में इसका दूसरा भाग दर्शकों के सामने आया, जिसने कमाई के कई नए कीर्तिमान स्थापित किए। दोनों ही फिल्मों का निर्देशन अनिल शर्मा द्वारा किया गया था और दोनों में ही मुख्य पात्र तारा सिंह की भूमिका को दर्शकों का भरपूर स्नेह मिला।

    फिल्म के मुख्य चरित्र तारा सिंह पर चर्चा करते हुए अभिनेता ने कहा कि यह किरदार लोगों के दिलों के बेहद करीब रहा है। यह एक सकारात्मक और भावनात्मक जुड़ाव महसूस कराने वाली फिल्म श्रृंखला रही है, जिसे हर वर्ग के दर्शकों ने सराहा है। यही कारण है कि इस फ्रेंचाइजी के हर नए विचार को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी रहती है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के सिनेमा प्रेमियों के बीच इस फ्रेंचाइजी का विशेष आकर्षण हमेशा से रहा है।

    हालांकि, फिल्म के तीसरे भाग की आधिकारिक पुष्टि को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। पूर्व में दिए गए बयानों में निर्देशक अनिल शर्मा ने स्पष्ट किया था कि वे गदर 3 का निर्माण तभी करेंगे जब उनके पास एक अत्यंत प्रभावशाली और मजबूत पटकथा होगी। उन्होंने कहा था कि कहानी का स्तर पहली और दूसरी फिल्म से भी अधिक दमदार होना अनिवार्य है, तभी इसके निर्माण का औचित्य साबित होगा।

    वर्तमान में अभिनेता की नई फिल्म सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है, जिसे दर्शकों की ओर से प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। इसके साथ ही गदर 3 को लेकर सामने आए इस बयान ने एक बार फिर से सिनेमाई गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह प्रशंसक का विचार वाकई किसी आधिकारिक पटकथा का रूप ले पाता है या नहीं।

  • मिस वर्ल्ड की ग्लैमरस छवि बदलकर ऐश्वर्या राय को बनाया ताल की मानसी, निर्देशक सुभाष घई ने पुरानी यादें कीं ताजा

    मिस वर्ल्ड की ग्लैमरस छवि बदलकर ऐश्वर्या राय को बनाया ताल की मानसी, निर्देशक सुभाष घई ने पुरानी यादें कीं ताजा

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की कल्ट क्लासिक फिल्मों में शुमार संगीत आधारित रोमांटिक ड्रामा फिल्म ताल के प्रदर्शन को 27 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। इस अवसर पर फिल्म के निर्माता एवं निर्देशक सुभाष घई ने फिल्म निर्माण और कलाकारों के चयन से जुड़े कई दिलचस्प और अनसुने संस्मरण साझा किए हैं। उन्होंने विशेष रूप से अभिनेत्री ऐश्वर्या राय और अभिनेता अक्षय खन्ना की कास्टिंग के दौरान आई चुनौतियों और अनुभवों के बारे में विस्तार से चर्चा की।

    सुभाष घई ने बताया कि फिल्म में मुख्य महिला किरदार मानसी के लिए एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो न केवल अभिनय में निपुण हो बल्कि जटिल नृत्य शैलियों को भी सहजता से पर्दे पर उतार सके। उस समय ऐश्वर्या राय मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने के बाद सौंदर्य और ग्लैमर जगत में एक स्थापित पहचान बना चुकी थीं। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर सरोज खान ने सुभाष घई को इस भूमिका के लिए ऐश्वर्या राय का नाम सुझाया था।

    फिल्म में ऐश्वर्या राय के किरदार को प्रामाणिक बनाने के लिए सुभाष घई ने उनकी सौंदर्य प्रतियोगिता वाली छवि को पूरी तरह बदलने का निर्णय लिया था। उन्होंने अभिनेत्री से कहा था कि फिल्म के शुरुआती हिस्से में उन्हें बिना किसी मेकअप के एक साधारण और सहज ग्रामीण युवती के रूप में दिखना होगा। इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य उनकी ग्लैमरस छवि को हटाकर दर्शक का ध्यान पूरी तरह उनके अभिनय और किरदार की गहराई पर केंद्रित करना था।

    फिल्म में मुख्य अभिनेता के रूप में अक्षय खन्ना के चयन का किस्सा भी काफी दिलचस्प है। सुभाष घई के अनुसार, अक्षय खन्ना के पिता और दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना उन्हें अपने साथ लेकर आए थे। अक्षय खन्ना के चेहरे की गंभीरता और उनके अभिनय में मौजूद गहराई को देखते हुए सुभाष घई ने उन्हें इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चुन लिया। उस समय अक्षय खन्ना अपने करियर के शुरुआती चरण में थे, लेकिन इस फिल्म ने उन्हें रातोंरात बड़ा स्टार बना दिया।

    वर्ष 1999 में रिलीज हुई फिल्म ताल न केवल अपनी मनोरम कहानी और शानदार अभिनय के लिए जानी जाती है, बल्कि एआर रहमान द्वारा तैयार किए गए इसके सदाबहार संगीत ने भी इतिहास रचा था। अनिल कपूर, ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना के अभिनय से सजी इस फिल्म को भारत के साथ-साथ विदेशों में भी भारी व्यावसायिक सफलता मिली थी। फिल्म के गीत आज भी दर्शकों और संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

    इस कल्ट क्लासिक फिल्म के 27 साल पूरे होने के अवसर पर सुभाष घई द्वारा साझा की गई इन यादों ने एक बार फिर हिंदी सिनेमा के उस सुनहरे दौर को ताजा कर दिया है। ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना के करियर के लिए यह फिल्म एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई थी, जिसने उन्हें उद्योग में एक मजबूत पहचान दिलाई।