Tag: disaster management

  • ट्रंप का बड़ा यू-टर्न! जिस अधिकारी को हटाया था, उसी को फिर सौंपी अमेरिका की आपदा सुरक्षा की कमान

    ट्रंप का बड़ा यू-टर्न! जिस अधिकारी को हटाया था, उसी को फिर सौंपी अमेरिका की आपदा सुरक्षा की कमान



    नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प  ने एक बार फिर बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए पूर्व नेवी सील अधिकारी कैमरन हैमिल्टन को संघीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी यानी फ़ेमा की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। खास बात यह है कि यही कैमरन हैमिल्टन एक साल पहले एजेंसी के अस्थायी प्रमुख पद से हटा दिए गए थे। अब उनकी वापसी ने अमेरिकी राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

    व्हाइट हाउस की ओर से सोमवार को हैमिल्टन के नामांकन की घोषणा की गई। अगर अमेरिकी सीनेट उनकी नियुक्ति को मंजूरी देती है, तो वे आपातकालीन प्रबंधन और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया मामलों में ट्रंप प्रशासन के सबसे अहम सलाहकारों में शामिल होंगे। उन्हें होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के साथ मिलकर अमेरिका की आपदा प्रबंधन रणनीति को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

    कैमरन हैमिल्टन पूर्व नेवी सील अधिकारी रह चुके हैं और सुरक्षा मामलों में उनका लंबा अनुभव माना जाता है। हालांकि पिछले साल उन्हें फ़ेमा के कार्यवाहक प्रमुख पद से हटा दिया गया था। उस समय उन्होंने एजेंसी के अस्तित्व और उसकी जरूरत का खुलकर समर्थन किया था, जबकि ट्रंप प्रशासन लगातार फ़ेमा को कमजोर करने या खत्म करने जैसे संकेत दे रहा था। यही वजह थी कि उनके हटाए जाने को लेकर उस समय काफी विवाद भी हुआ था।

    अब उनकी वापसी ऐसे वक्त में हो रही है जब अमेरिका में प्राकृतिक आपदाओं, तूफानों और आपात स्थितियों से निपटने को लेकर संघीय एजेंसियों की भूमिका पर बहस तेज है। ट्रंप पहले भी फ़ेमा की कार्यप्रणाली की आलोचना कर चुके हैं और कई मौकों पर यह संकेत दे चुके हैं कि राज्यों को आपदा प्रबंधन में ज्यादा जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हैमिल्टन की दोबारा नियुक्ति ट्रंप प्रशासन की नई रणनीति का हिस्सा हो सकती है। एक तरफ ट्रंप फ़ेमा में बड़े बदलाव की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ऐसे व्यक्ति को चुना है जो एजेंसी की कार्यप्रणाली को अंदर से समझता है और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में मजबूत अनुभव रखता है।

    अमेरिका में अब सबकी नजर सीनेट की मंजूरी पर टिकी है। अगर नामांकन को हरी झंडी मिलती है तो कैमरन हैमिल्टन की वापसी अमेरिकी आपदा प्रबंधन व्यवस्था में बड़े बदलावों का संकेत मानी जा सकती है।

  • बरसात से पहले अलर्ट मोड में जबलपुर: आपदा प्रबंधन ट्रेनिंग में 51 जवानों को मिला रेस्क्यू अभ्यास

    बरसात से पहले अलर्ट मोड में जबलपुर: आपदा प्रबंधन ट्रेनिंग में 51 जवानों को मिला रेस्क्यू अभ्यास


    नई दिल्ली । बरसात के मौसम में संभावित बाढ़ और जल आपदाओं से निपटने के लिए मध्यप्रदेश होमगार्ड विभाग ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। भोपाल मुख्यालय के निर्देश पर जबलपुर संभाग में चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जवानों को आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू ऑपरेशन की बारीकियां सिखाई गईं।
    यह प्रशिक्षण जबलपुर के प्रसिद्ध गौरीघाट क्षेत्र में नर्मदा नदी के किनारे आयोजित किया गया, जहां जवानों को वास्तविक परिस्थितियों में अभ्यास कराया गया। 7 मई से 9 मई तक चले इस प्रशिक्षण में कुल 51 होमगार्ड जवानों ने हिस्सा लिया, जो जबलपुर, कटनी, मंडला और नरसिंहपुर जैसे जिलों से चयनित किए गए थे।
    बाढ़ और जल आपदा से निपटने का व्यावहारिक अभ्यास
    प्रशिक्षण के दौरान जवानों को तेज बहाव वाली नदी में सुरक्षित तैरने, फंसे हुए लोगों को निकालने और आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन रक्षा तकनीकों का अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही उन्हें यह भी सिखाया गया कि आपदा के समय कैसे तेजी और सावधानी के साथ राहत कार्य किया जाए।
    जवानों को आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों के उपयोग की भी जानकारी दी गई। इसमें बोट संचालन, चप्पू और ओअर का सही उपयोग, तथा आउटबोर्ड मोटर (OBM) हैंडलिंग जैसी महत्वपूर्ण तकनीकें शामिल थीं। इन अभ्यासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी आपदा की स्थिति में टीम तेजी से और प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर सके।
    SDRF की टीम भी रही शामिल
    इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के जवानों ने भी हिस्सा लिया, जिससे प्रशिक्षण और अधिक प्रभावी बन गया। विशेषज्ञों की निगरानी में जवानों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया।
    डिवीजनल कमांडेंट और जिला सेनानी व प्रशिक्षण प्रभारी नीरज सिंह ठाकुर की देखरेख में यह पूरा प्रशिक्षण संपन्न हुआ। अधिकारियों के अनुसार इस तरह के अभ्यास से जवानों की क्षमता बढ़ती है और आपदा के समय राहत कार्यों में तेजी आती है।
    मानसून से पहले तैयारी तेज
    मौसम विभाग द्वारा मानसून के सामान्य रहने के अनुमान के बीच प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहता है। इसी के तहत प्रदेशभर में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं।

  • ओंकारेश्वर में बड़ा हादसा टला: नाव पलटने से 10 श्रद्धालु डूबे, समय रहते सभी को बचाया गया

    ओंकारेश्वर में बड़ा हादसा टला: नाव पलटने से 10 श्रद्धालु डूबे, समय रहते सभी को बचाया गया


    खंडवा । मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में शुक्रवार को नर्मदा नदी में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। झारखंड से आए श्रद्धालुओं से भरी एक नाव पलट गई, जिससे उसमें सवार 10 लोग डूब गए। हालांकि, समय रहते रेस्क्यू कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इनमें से दो श्रद्धालुओं की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    नौका विहार के दौरान हुआ हादसा

    जानकारी के मुताबिक, झारखंड के रांची से करीब 52 श्रद्धालुओं का समूह ओंकारेश्वर दर्शन के लिए पहुंचा था। दोपहर के समय सभी लोग अलग-अलग नावों में बैठकर नर्मदा नदी में नौका विहार कर रहे थे। इसी दौरान एक नाव में सवार 10 लोग ब्रह्मपुरी घाट से संगम घाट की ओर जा रहे थे।

    चट्टान से टकराने के बाद पलटी नाव

    नवीन घाट के पास नाव अचानक एक चट्टान से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि लकड़ी की नाव का एक हिस्सा टूट गया और उसमें पानी भरने लगा। कुछ ही पलों में नाव असंतुलित होकर पलट गई, जिससे उसमें सवार सभी लोग नदी में गिर गए।

    होमगार्ड की तत्परता से बची जानें

    घटना के समय मौके पर मौजूद होमगार्ड जवानों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। आठ लोगों की हालत सामान्य है, जबकि दो श्रद्धालुओं ने ज्यादा पानी निगल लिया, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई।

    गंभीर घायलों को अस्पताल में भर्ती

    दोनों गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सनावद भेजा गया है। चिकित्सकों के अनुसार उनके फेफड़ों में पानी चला गया है, जिससे उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

    पुलिस कर रही जांच
    खंडवा पुलिस के अनुसार, हादसे में शामिल लोगों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल घटना के कारणों की जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

  • एनडीएमए, एसीएसआईआर और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर ने आपदा प्रबंधन अनुसंधान को मजबूत करने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

    एनडीएमए, एसीएसआईआर और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर ने आपदा प्रबंधन अनुसंधान को मजबूत करने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एनडीएमए वैज्ञानिक एवं नवोन्मेषी अनुसंधान अकादमी एसीएसआईआर और सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर ने आज आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण डीएमआरआर में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य शैक्षणिक कार्यक्रम क्षमता निर्माण नीति अनुसंधान और विज्ञान संचार के माध्यम से भारत को अधिक आपदा-प्रतिरोधी बनाने के लिए एक सहयोगात्मक ढांचा स्थापित करना है।

    इस एमओयू के तहत एनडीएमए के सहयोग से सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर में एसीएसआईआर के तहत आपदा प्रबंधन में पीएचडी कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही डीएमआरआर में संयुक्त अनुसंधान नीति अध्ययन और विज्ञान संचार पहलें संचालित की जाएंगी।

    इस अवसर पर अपने संबोधन में एनडीएमए के सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल ने कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर प्रधानमंत्री के नौ सूत्री एजेंडा के अनुरूप यह समझौता ज्ञापन वैज्ञानिकों और नीति विशेषज्ञों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगा। उन्होंने कहा हम प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों जोखिम संचार और सामुदायिक संपर्क के माध्यम से आपदा तैयारियों को मजबूत कर सकते हैं। आपदा के बाद व्यवस्थित अध्ययन और दस्तावेज़ीकरण से हम हर आपदा से सीखने की संस्कृति को संस्थागत रूप दे सकते हैं।

    एसीएसआईआर के निदेशक प्रोफेसर मनोज कुमार धर ने बताया कि उनके संस्थान में 7 000 से अधिक छात्र नामांकित हैं और यह देश के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों में से एक है। उन्होंने कहा कि यह समझौता ज्ञापन छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए आपदा प्रबंधन चुनौतियों के लिए नवीन और अनुसंधान-आधारित समाधान विकसित करने के नए अवसर खोलेगा। इस पहल से भारत 2047 की दिशा में आपदा-प्रतिरोधी ढांचे को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार होगी।

    सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वानी रायसम ने डीएमआरआर में विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह साझेदारी नीति और जन जागरूकता ढांचों में वैज्ञानिक ज्ञान को एकीकृत करेगी। उनका कहना था कि वैज्ञानिक अनुसंधान को नीति निर्माण के साथ जोड़कर समाज और राष्ट्र के लिए मजबूत और उत्तरदायी समाधान तैयार किए जा सकते हैं।

    इस त्रिपक्षीय सहयोग में गृह मंत्रालय के अधीन एनडीएमए कार्यनीतिक दिशा-निर्देश और विशेषज्ञता प्रदान करेगा एसीएसआईआर शैक्षणिक और अनुसंधान पहलें संचालित करेगा और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर नीति अनुसंधान जन सहभागिता और विज्ञान संचार को बढ़ावा देगा। यह कदम भारत के आपदा प्रबंधन तंत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को एकीकृत करने में मील का पत्थर साबित होगा।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने NDRF के स्थापना दिवस पर जवानों को सराहा; बोले– चुनौतीपूर्ण समय में 'आशा का संचार' है यह बल

    प्रधानमंत्री मोदी ने NDRF के स्थापना दिवस पर जवानों को सराहा; बोले– चुनौतीपूर्ण समय में 'आशा का संचार' है यह बल


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राष्ट्रीय आपदा मोचन बल NDRF के स्थापना दिवस के अवसर पर बल के वीर कर्मियों को नमन किया। प्रधानमंत्री ने संकट की घड़ियों में NDRF के जवानों द्वारा दिखाए जाने वाले अदम्य साहस पेशेवर दक्षता और निस्वार्थ सेवा भाव की सराहना करते हुए उन्हें राष्ट्र का सच्चा रक्षक बताया।

    संकट में अग्रिम पंक्ति के योद्धा प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में लिखा कि NDRF के पुरुष और महिला कर्मियों का दृढ़ संकल्प विपरीत परिस्थितियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय ये जवान सदैव अग्रिम पंक्ति में तैनात रहकर अपने परिश्रम से न केवल मानव जीवन की रक्षा करते हैं और राहत कार्य संचालित करते हैं, बल्कि अत्यंत चुनौतीपूर्ण और निराशाजनक परिस्थितियों में भी आम जनमानस के बीच ‘आशा का संचार’ करते हैं।

    वैश्विक स्तर पर अर्जित किया सम्मान प्रधानमंत्री ने बल की कार्यप्रणाली को सेवा के सर्वोच्च मानकों का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों के दौरान NDRF ने न केवल देश के भीतर आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और तैयारी के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है, बल्कि अपनी कार्यकुशलता के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सम्मान और ख्याति अर्जित की है। चाहे भूकंप हो चक्रवात हो या कोई अन्य प्राकृतिक विपदा, NDRF के जवानों ने हमेशा अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा परमो धर्म के मंत्र को सिद्ध किया है।

    साहस और कर्तव्यनिष्ठा को नमन स्थापना दिवस पर दी गई इस बधाई में प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से जवानों के कौशल और कर्तव्यनिष्ठा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश को अपने इस बल पर गर्व है जो हर विषम परिस्थिति में नागरिकों के लिए सुरक्षा कवच बनकर खड़ा रहता है।उल्लेखनीय है कि NDRF आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है। 2006 में गठित इस बल ने अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से देश के आपदा प्रबंधन तंत्र को एक नई शक्ति प्रदान की है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने NDRF के स्थापना दिवस पर दीं शुभकामनाएँ; बोले- जवानों का साहस और सेवा भाव गर्व का विषय

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने NDRF के स्थापना दिवस पर दीं शुभकामनाएँ; बोले- जवानों का साहस और सेवा भाव गर्व का विषय


    भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल NDRF के स्थापना दिवस के अवसर पर बल के सभी अधिकारियों और जवानों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। सोमवार को जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में NDRF द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों और उनके समर्पण की सराहना की।

    ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ के ध्येय को किया नमन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि NDRF ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ के पावन ध्येय वाक्य के साथ कार्य करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि चाहे भीषण प्राकृतिक आपदा हो या कोई अन्य विषम परिस्थितियाँ, यह बल हमेशा संकट के समय रक्षक बनकर खड़ा रहता है। मुख्यमंत्री ने बल की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में बचाव कार्यों के लिए NDRF का समर्पण अनुकरणीय है।

    साहस और सेवा भाव पर जताया गौरव मुख्यमंत्री ने अपने शुभकामना संदेश में जवानों के जज्बे को सलाम किया। उन्होंने कहा कि NDRF के जवानों का अदम्य साहस, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और निस्वार्थ सेवा भाव न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित करता है। संकट की हर घड़ी में अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की रक्षा करने का उनका संकल्प प्रेरणादायी है। उल्लेखनीय है कि NDRF स्थापना दिवस प्रतिवर्ष 19 जनवरी को मनाया जाता है। देश में आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए इस बल का गठन किया गया था, जिसने समय-समय पर अपनी विशेषज्ञता से हजारों लोगों की जान बचाई है।