Tag: discrimination

  • हिंदू समूह की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने पर भड़के एफिल टावर कर्मचारी, एक दिन बंद रहा टावर

    हिंदू समूह की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने पर भड़के एफिल टावर कर्मचारी, एक दिन बंद रहा टावर

    नई दिल्ली ।पेरिस के प्रसिद्ध एफिल टावर को सोमवार को कर्मचारियों की हड़ताल के कारण एक दिन के लिए बंद करना पड़ा। हड़ताल की वजह एक हिंदू धार्मिक समूह की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाए जाने का मामला बताया जा रहा है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर लिंग के आधार पर भेदभाव किया गया और महिलाओं को हटाकर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को लगाया गया।

    घटना का संबंध बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था यानी BAPS के एक प्रतिनिधिमंडल की एफिल टावर यात्रा से बताया गया है। समूह में 100 से अधिक संत और अन्य सदस्य शामिल थे। यात्रा से पहले महिला कर्मचारियों को उनके निर्धारित कार्यस्थलों से हटाने का निर्णय लिया गया था। इस फैसले से कर्मचारियों में नाराजगी पैदा हुई और बाद में उन्होंने विरोध स्वरूप हड़ताल कर दी।

    एफिल टावर की जिम्मेदारी संभालने वाली कंपनी एसईटीई के अनुसार, धार्मिक समूह की ओर से अनुरोध किया गया था कि उनके दौरे के दौरान महिलाओं से बातचीत कम से कम हो। कंपनी ने कहा कि उसने इस तरह की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, घटनाक्रम के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाए जाने के बाद विवाद बढ़ गया।

    कर्मचारियों की ओर से इस मामले को कार्यस्थल पर लैंगिक भेदभाव से जोड़कर देखा गया। उनका कहना था कि किसी धार्मिक या सांस्कृतिक समूह की पसंद के आधार पर महिला कर्मचारियों को उनके काम से हटाना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारियों ने सोमवार को काम रोक दिया, जिसके चलते एफिल टावर आने वाले पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    इस विवाद के बाद BAPS से जुड़े पेरिस स्थित हिंदू मंदिर की ओर से भी खेद जताया गया। संस्था ने कहा कि यदि उनके प्रतिनिधिमंडल की वजह से किसी व्यक्ति को ठेस पहुंची है या किसी तरह की परेशानी हुई है तो उन्हें इसका अफसोस है। संस्था ने यह भी बताया कि प्रतिनिधिमंडल में 100 से अधिक लोग शामिल थे और बड़ी संख्या को देखते हुए यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी से बचने के लिए व्यवस्थाएं पहले से तय की गई थीं।

    पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि कंपनी को इस तरह की शर्तें स्वीकार नहीं करनी चाहिए थीं। विवाद ने धार्मिक स्वतंत्रता, कार्यस्थल पर समानता और महिला कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है।

    एफिल टावर पेरिस की पहचान से जुड़ी दुनिया की सबसे प्रसिद्ध संरचनाओं में से एक है। सीन नदी के किनारे स्थित यह टावर करीब 330 मीटर ऊंचा है। इसका निर्माण 1887 से 1889 के बीच कराया गया था। इसे 1889 में आयोजित विश्व मेले के लिए तैयार किया गया था। यह आयोजन फ्रांसीसी क्रांति की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया था।

    इस विशाल टावर का डिजाइन गुस्ताव एफिल से जुड़ा है और उन्हीं के नाम पर इसे एफिल टावर कहा गया। शुरुआत में इसे प्रदर्शनी के लिए तैयार किया गया था, लेकिन समय के साथ यह पेरिस और फ्रांस की सबसे बड़ी पहचान बन गया। आज दुनियाभर से लाखों पर्यटक इसे देखने पहुंचते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण इसका एक दिन बंद रहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया।

  • भेदभाव-स्वार्थ त्यागकर देश के लिए समर्पित हों, तभी भारत संपूर्ण मानवता को शांति-समृद्धि का मार्ग दिखाएगाः मोहन भागवत

    भेदभाव-स्वार्थ त्यागकर देश के लिए समर्पित हों, तभी भारत संपूर्ण मानवता को शांति-समृद्धि का मार्ग दिखाएगाः मोहन भागवत


    जैसलमेर ।
    राजस्थान के जैसलमेर में दादा गुरुदेव आचार्य श्री जिनदत्त सूरी के 871वें चादर महोत्सव के अवसर पर सामाजिक समरसता का अनुपम दृश्य देखने को मिला। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जैन और सनातन परंपरा के संतों सहित समाज के सभी वर्गों के लोगों का संगम हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम पूर्णतः समरसता और सामाजिक एकता के भाव पर आधारित था, जिसमें गच्छाधिपति जिनमणिप्रभ सागर के नेतृत्व में धर्म, तीर्थ एवं संस्कृति की रक्षा का संकल्प दोहराया गया।

    इस अवसर पर डॉ. भागवत ने समाज से केवल उपदेशों तक सीमित न रहकर आचरण में परिवर्तन लाने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से कहा कि अपने मित्रों और परिचितों के दायरे में विभिन्न जातियों, पंथों, भाषाओं और प्रदेशों के लोगों को शामिल करें। जब हम सुख-दुख, खान-पान और सामाजिक जीवन साझा करेंगे, तभी वास्तविक सामाजिक शक्ति प्रकट होगी।

    डॉ. भागवत ने भारतीय संस्कृति की चिरंतनता, विविधता में एकता और सामाजिक समरसता पर प्रकाश डाला। उन्होंने दादा गुरुदेव आचार्य जिन दत्त सूरी की 871 वर्ष पुरानी चादर को भारत की सनातन संस्कृति की जीवटता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह चादर उस सत्य का प्रतीक है जिसे न अग्नि जला सकती है, न शस्त्र काट सकते हैं और न ही जल भिगो सकता है। यह हमारे पूर्वजों द्वारा पहचाने गए उस शाश्वत सत्य का प्रमाण है जो सर्वत्र विद्यमान है। उन्होंने सभी को यह संकल्प दिलाया कि यदि हम आपसी भेदभाव और स्वार्थ को त्यागकर देश के लिए समर्पित हो जाएं, तो भारत न केवल परम वैभव संपन्न राष्ट्र बनेगा बल्कि एक विश्वगुरु के रूप में संपूर्ण मानवता को शांति और समृद्धि का मार्ग दिखाएगा।

    डॉ. भागवत ने जैन दर्शन के अनेकांतवाद सिद्धांत की सराहना करते हुए कहा कि सत्य इतना व्यापक है कि उस तक पहुंचने के मार्ग अलग-अलग होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि विविधता वास्तव में एकता का शृंगार और उत्सव है, न कि विभाजन का कारण।

    अपने भाषण में उन्होंने एक रेल यात्रा की मार्मिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि समाज में झगड़े और संघर्ष इसलिए होते हैं क्योंकि लोग एक-दूसरे को पहचान नहीं पाते और अपने एकत्व के भाव को भूल जाते हैं। जब मनुष्य यह समझ जाता है कि हम सब एक ही चेतना के अंश हैं, तब स्वार्थ और भेदभाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि लीग ऑफ नेशंस और संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी वैश्विक संस्थाएं युद्धों को नहीं रोक सकतीं। इसके लिए मानव के भीतर करुणा और एकात्मता का भाव होना आवश्यक है।

    इस अवसर पर गच्छाधिपति जिन मणिप्रभसागर महाराज ने कहा कि समरसता ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। भारत का ध्वज पूरे विश्व में सम्मानपूर्वक लहराने के लिए सभी संप्रदायों के संतों को एकता और अहिंसा का मार्ग अपनाना होगा। उन्होंने भगवान महावीर और भगवान राम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में जातिवाद और छुआछूत का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने युवाओं को सही दिशा देने और समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर संघ और समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान चादर महोत्सव की स्मृति में डाक टिकट, विशेष सिक्के और दादा गुरुदेव पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया गया। महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, संयोजक तेजराज गुलेचा तथा पद्म भूषण डॉ. डीआर मेहता सहित अनेक समाजसेवियों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।