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  • 500 करोड़ के मानहानि नोटिस पर आदित्य ठाकरे का 25 पेज में जवाब, माफी मांगने और पोस्ट हटाने से किया इनकार

    500 करोड़ के मानहानि नोटिस पर आदित्य ठाकरे का 25 पेज में जवाब, माफी मांगने और पोस्ट हटाने से किया इनकार

    नई दिल्ली ।शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने दिवंगत दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की ओर से भेजे गए 500 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस का 25 पन्नों में जवाब दिया है। जवाब में आदित्य ठाकरे ने नोटिस में लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए माफी मांगने, सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और 500 करोड़ रुपये का मुआवजा देने से इनकार किया है।

    कानूनी जवाब के मुताबिक, 16 सितंबर 2026 को आदित्य ठाकरे के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से अंग्रेजी और मराठी में किए गए दो पोस्ट में सतीश सालियान का नाम नहीं लिया गया था। जवाब में यह भी कहा गया है कि पोस्ट में ऐसा कोई स्पष्ट संदर्भ नहीं था, जिससे सतीश सालियान की पहचान की जा सके।

    आदित्य ठाकरे की ओर से यह भी दोहराया गया है कि वह दिशा सालियान से कभी मिले या उन्हें जानते तक नहीं थे। उन्होंने अपने इस बयान पर कायम रहने की बात कही है। कानूनी जवाब में कहा गया है कि संबंधित पोस्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं था।

    जवाब में दावा किया गया है कि दोनों पोस्ट का संदर्भ उनके नाम को दिशा सालियान की मौत से जोड़ने वाले लंबे समय से चल रहे राजनीतिक और मीडिया अभियान से था। इसमें कहा गया कि कुछ व्यक्तियों और कथित हित समूहों की ओर से उनके नाम को इस मामले से जोड़ने की कोशिशों पर सवाल उठाए गए थे।

    सतीश सालियान की ओर से भेजे गए नोटिस में आदित्य ठाकरे के बयानों और मामले से जुड़े उनके सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताई गई थी। नोटिस में पोस्ट हटाने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और अंग्रेजी तथा मराठी में माफीनामा प्रकाशित करने की मांग की गई थी।

    आदित्य ठाकरे के जवाब में इन सभी मांगों को अस्वीकार कर दिया गया है। उनकी ओर से कहा गया है कि संबंधित पोस्ट में कोई झूठा या मानहानिकारक बयान नहीं दिया गया। 500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग को भी जवाब में खारिज किया गया है।

    कानूनी जवाब में यह भी कहा गया है कि किसी मामले में जांच शुरू होना अपने आप में किसी व्यक्ति की संलिप्तता या अपराध साबित नहीं करता। जवाब में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की बात कही गई है।

    दिशा सालियान की मौत जून 2020 में मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। उनकी मौत के बाद इस मामले को लेकर अलग-अलग तरह के दावे सामने आए और इसे लेकर लंबे समय से जांच तथा कानूनी प्रक्रिया चलती रही है।

    आदित्य ठाकरे की ओर से कहा गया है कि वह दिशा सालियान के पिता के साथ व्यक्तिगत विवाद में नहीं पड़ना चाहते। साथ ही उन्होंने मामले की जांच को तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ने देने की बात कही है।

    25 पन्नों के जवाब में नोटिस वापस लेने की मांग भी की गई है। इस तरह 500 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस पर दोनों पक्षों के बीच कानूनी विवाद अब आगे बढ़ने की स्थिति में है। फिलहाल आदित्य ठाकरे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट वापस लेने या माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है।

  • दिशा सालियान मामले में पिता सतीश सालियन ने आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख से 500 करोड़ रुपये हर्जाना मांगा

    दिशा सालियान मामले में पिता सतीश सालियन ने आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख से 500 करोड़ रुपये हर्जाना मांगा

    नई दिल्ली । दिशा सालियन मामले में उनके पिता सतीश सालियन की ओर से शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे और एनसीपी नेता अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये के हर्जाने का कानूनी नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। नोटिस में दोनों नेताओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की गई है। यह मामला दिशा सालियन की मौत से जुड़ा है, जिनकी 8 जून 2020 को मुंबई में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। दिशा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं।

    सतीश सालियन ने नोटिस में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की मौत की सच्चाई जानने और न्याय की मांग को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई। उनके अनुसार, उनके बारे में ऐसी बातें कही गईं जिनसे उनकी छवि प्रभावित हुई और उनके इरादों पर सवाल उठे। उन्होंने इन बातों को गलत और बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि उनकी मांग का उद्देश्य केवल अपनी बेटी की मौत की सच्चाई सामने लाना है और इसे किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

    नोटिस में आदित्य ठाकरे पर भी सतीश सालियन के न्याय के लिए चल रहे संघर्ष को राजनीति से जोड़कर पेश करने का आरोप लगाया गया है। नोटिस के मुताबिक, इस तरह उनके संघर्ष और उनकी ईमानदारी पर सवाल खड़े हुए। सतीश सालियन ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग की है और उनकी इस लड़ाई को राजनीतिक गतिविधि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    कानूनी नोटिस में दिशा सालियन मामले की सीबीआई जांच को लेकर दिए गए एक बयान का भी उल्लेख किया गया है। इसमें आदित्य ठाकरे के उस कथित बयान का जिक्र है, जिसमें कहा गया था कि सीबीआई ने मामले की जांच की और उन्हें क्लीन चिट दी। नोटिस भेजने वाले पक्ष ने इस दावे को गलत बताया है। इसी क्रम में अनिल देशमुख के 23 मार्च 2025 के कथित बयान का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें दिशा सालियन मामले को आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की साजिश बताया गया था।

    सतीश सालियन ने 500 करोड़ रुपये के हर्जाने के अलावा दोनों नेताओं से बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग की है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि माफी सार्वजनिक रूप से दी जाए और उसे टीवी, अखबार तथा डिजिटल मीडिया में प्रसारित किया जाए। इसके साथ ही वीडियो के माध्यम से माफी देने और उसे दोनों नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी करने की मांग भी रखी गई है।

    इस बीच आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियन से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वह दिशा से कभी नहीं मिले और उन्हें जानते भी नहीं थे। उनके मुताबिक, करीब छह वर्षों से कुछ लोग उनका नाम इस मामले से जोड़ रहे हैं। उन्होंने इसे अपनी छवि खराब करने की कोशिश बताया और कहा कि मामले की आधिकारिक दोबारा जांच को राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।

    मामले में सोमवार को सीबीआई की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसमें हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। दिशा सालियन की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड में एक ऊंची रिहायशी इमारत से गिरने के बाद हुई थी। उनकी मौत को लेकर पहले भी अलग-अलग दावे और आरोप सामने आते रहे हैं।

  • कंगना रनौत ने अधिकारियों को दी नसीहत, कहा जनता के पैसे का दुरुपयोग रोककर योजनाओं का लाभ व्यक्ति तक पहुंचाएं

    कंगना रनौत ने अधिकारियों को दी नसीहत, कहा जनता के पैसे का दुरुपयोग रोककर योजनाओं का लाभ व्यक्ति तक पहुंचाएं

    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक में अधिकारियों के कामकाज को लेकर सख्त रुख अपनाया। केंद्र प्रायोजित योजनाओं और सांसद निधि से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान उन्होंने सरकारी धन के इस्तेमाल, योजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर अधिकारियों से स्पष्ट जवाब मांगा।

    बैठक के दौरान कंगना रनौत ने इस बात पर जोर दिया कि जनता से जुड़े विकास कार्य केवल सरकारी रिकॉर्ड और कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्र सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए योजनाओं की नियमित निगरानी और जमीनी स्तर पर प्रगति की समीक्षा जरूरी है।

    सांसद ने सरकारी धन के उपयोग को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जनता का पैसा गलत हाथों में नहीं जाना चाहिए और किसी भी स्तर पर धन के दुरुपयोग या अनियमितता की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। बैठक में उन्होंने व्यवस्था में निगरानी को मजबूत करने की जरूरत बताई और अधिकारियों से विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने को कहा।

    कंगना ने अधिकारियों से कहा कि सांसद निधि और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उनके मुताबिक विकास कार्यों की गति के साथ उनकी गुणवत्ता पर भी बराबर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे और किसी पात्र व्यक्ति को केवल प्रशासनिक देरी के कारण परेशानी न हो।

    बैठक में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर चर्चा के दौरान सांसद ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की साझा जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से होने वाले हर काम में जवाबदेही जरूरी है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।

    कंगना रनौत का रुख इस बात पर केंद्रित रहा कि विकास योजनाओं की निगरानी केवल बैठकों तक सीमित न रहे। उन्होंने अधिकारियों से जमीनी स्थिति की जानकारी लेने, लंबित कार्यों की समीक्षा करने और निर्धारित समयसीमा के भीतर काम पूरा कराने पर ध्यान देने को कहा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाने की कोशिश को गति मिल सकती है।

    सांसद ने बैठक में यह भी संकेत दिया कि प्रशासनिक स्तर पर काम में ढिलाई को लेकर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ती है। उनका कहना था कि लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनके लिए स्वीकृत धन और योजनाओं का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से समन्वय बनाकर काम करने और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।

    कंगना रनौत इससे पहले भी मंडी की दिशा बैठकों में अधिकारियों के कामकाज को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं। अक्टूबर 2025 में हुई बैठक के दौरान भी उन्होंने अधिकारियों को विकास कार्यों को गंभीरता से लेने और लापरवाही से बचने की नसीहत दी थी। इस बार की बैठक में भी उनका मुख्य जोर सरकारी योजनाओं की निगरानी, सांसद निधि के प्रभावी इस्तेमाल और प्रशासनिक जवाबदेही पर रहा।