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  • शिवपुरी में रास्ते के पुराने विवाद ने लिया हिंसक रूप, मारपीट में 35 वर्षीय महिला की मौत..

    शिवपुरी में रास्ते के पुराने विवाद ने लिया हिंसक रूप, मारपीट में 35 वर्षीय महिला की मौत..

    शिवपुरी जिले: में रास्ते को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद ने शुक्रवार को हिंसक रूप ले लिया। बदरवास थाना क्षेत्र के ग्राम खजूरी में दो पक्षों के बीच हुए झगड़े और मारपीट में 35 वर्षीय महिला की मौत हो गई। घटना में महिला का बेटा और उसकी सास भी घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद गांव में सनसनी फैल गई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

    जानकारी के अनुसार, ग्राम खजूरी में रास्ते को लेकर दोनों पक्षों के बीच पिछले करीब 10 वर्षों से विवाद चला आ रहा था। लंबे समय से जारी इस विवाद को लेकर शुक्रवार को एक बार फिर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। शुरुआत में उनके बीच कहासुनी हुई, लेकिन देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस दौरान हुई हिंसा में भूरिया पत्नी फेरन जाटव, उम्र 35 वर्ष, गंभीर रूप से घायल हो गईं।

    मारपीट के दौरान भूरिया के सिर में चोट लगी। चोट इतनी गंभीर थी कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना में उनके परिवार के दो अन्य सदस्य भी घायल हुए हैं। इनमें उनकी सास रामवती पत्नी गंगाराम जाटव और पुत्र राहुल, जो फेरन जाटव के बेटे हैं, शामिल हैं। दोनों को चोटें आने के बाद उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में घायलों की स्थिति के बारे में विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रास्ते को लेकर चल रहा पुराना विवाद शुक्रवार को किस परिस्थिति में दोबारा भड़का और मारपीट की नौबत कैसे आई। साथ ही घटना में शामिल लोगों की भूमिका और विवाद के दौरान हुई घटनाओं के क्रम की भी जांच की जा रही है।

    ग्राम खजूरी में रास्ते को लेकर करीब एक दशक से विवाद चला आ रहा था। इतने लंबे समय से जारी विवाद का इस तरह हिंसक घटना में बदल जाना गंभीर मामला है। शुक्रवार को हुए झगड़े में एक महिला की जान चली गई, जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य घायल हो गए। घटना के बाद गांव में चर्चा का माहौल है और लोग पूरे घटनाक्रम को लेकर जानकारी जुटा रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद के दौरान किन परिस्थितियों में मारपीट हुई और महिला के सिर में चोट कैसे लगी। मामले में आरोपियों की भूमिका तथा घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रास्ते के पुराने विवाद को ही इस झगड़े की वजह बताया गया है। जांच पूरी होने के बाद घटना से संबंधित विस्तृत तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

    गांव में रास्ते जैसे स्थानीय विवादों को लेकर लंबे समय तक तनाव बने रहने से आपसी टकराव की आशंका बनी रहती है। खजूरी की इस घटना में विवाद का परिणाम एक महिला की मौत और दो लोगों के घायल होने के रूप में सामने आया है। हालांकि, घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है।

  • जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में पत्नी-बच्चे को कैंप में लाने को लेकर विवाद, CISF जवान ने 4 साथियों पर बरसाईं गोलियां, मौत

    जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में पत्नी-बच्चे को कैंप में लाने को लेकर विवाद, CISF जवान ने 4 साथियों पर बरसाईं गोलियां, मौत


    कठुआ।
    जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) कैंप में चार जवानों की हत्या के मामले में विवाद की वजह सामने आई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आरोपी हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार सिंह का अपनी पत्नी लेडी हेड कांस्टेबल पूजा देवी और बच्चे को लेकर कुछ कर्मियों से विवाद हुआ था। कहासुनी के बाद अवधेश ने अपनी सर्विस रायफल से चार साथियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। घटना में चार CISF कर्मियों की मौत हो गई।

    मृतकों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

    पत्नी और बच्चे को कैंप में लाने को लेकर हुआ विवाद

    पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, अवधेश कुमार की पत्नी पूजा देवी लेडी हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं। बताया गया है कि जब अवधेश ड्यूटी पर रहते थे, तब पूजा देवी अपने बच्चे के साथ क्वार्टर गार्ड में आती थीं। यूनिट प्रशासन ने बच्चे के साथ क्वार्टर गार्ड में प्रवेश करने या वहां रुकने की अनुमति नहीं दी थी।

    इसी बात को लेकर अवधेश कुमार की संबंधित कर्मियों से कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने के बाद वह क्वार्टर गेट के पास स्थित ऑपरेशंस सेक्शन के कार्यालय में पहुंचा, जहां चारों CISF कर्मी मौजूद थे।

    रायफल से कर दी ताबड़तोड़ फायरिंग

    बताया जा रहा है कि कार्यालय में पहुंचते ही अवधेश कुमार सिंह ने अपनी रायफल से चारों कर्मियों पर फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से चारों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए पास के NHPC अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के मुताबिक, शुरुआती तौर पर घटना के पीछे मामूली कहासुनी और पत्नी-बच्चे से जुड़े विवाद की बात सामने आई है। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    सेवा-II पावर प्रोजेक्ट में तैनात थे जवान

    यह घटना कठुआ जिले के पहाड़ी क्षेत्र बसोहली के हट्ट मस्का इलाके में स्थित सेवा-II हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के CISF कैंप में हुई। इस पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा के लिए CISF जवानों की तैनाती की गई है।

    घटना की सूचना मिलते ही बसोहली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और आरोपी अवधेश कुमार सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पुलिस गोलीकांड के कारणों और घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है।

  • सतना के धवारी में प्रेम प्रसंग के शक पर चाकूबाजी, महिला के साथ रह रहे युवक पर पति ने किया हमला

    सतना के धवारी में प्रेम प्रसंग के शक पर चाकूबाजी, महिला के साथ रह रहे युवक पर पति ने किया हमला

    मध्य प्रदेश: के सतना शहर के धवारी गली नंबर-2 में प्रेम प्रसंग के शक को लेकर विवाद के बाद चाकूबाजी की घटना सामने आई है। आरोप है कि एक महिला के पति ने उसके साथ रह रहे युवक पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में युवक घायल हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए हड़कंप की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि महिला के पति और उसके साथ रह रहे युवक के बीच विवाद के बाद मामला हिंसक हो गया। इसी दौरान युवक पर चाकू से हमला किए जाने की बात सामने आई है।

    घायल युवक को घटना के बाद जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार कराया जा रहा है। घटना को लेकर पुलिस मामले की जांच कर रही है और विवाद की परिस्थितियों को समझने के लिए संबंधित लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है।

    मामले में महिला प्रियंका चौधरी ने अपने ससुराल पक्ष पर भी आरोप लगाए हैं। महिला के मुताबिक उसके ससुराल वाले उस पर शक करते थे और इसी बात को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई थी।

    प्रियंका का कहना है कि इसी विवाद के चलते उसके पति अमित, सास और ससुर ने उसे घर से बाहर निकाल दिया था। इसके बाद वह उस युवक के साथ किराए के कमरे में रहने लगी, जिसके साथ संबंधों को लेकर उसके ससुराल पक्ष की ओर से उस पर शक किए जाने की बात सामने आई थी।

    बताया जा रहा है कि महिला के पति अमित को जब उसके साथ रह रहे युवक के बारे में जानकारी मिली, तो विवाद बढ़ गया। इसी दौरान युवक पर चाकू से हमला किए जाने का आरोप है। हमले में युवक को चोट आई और उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया।

    घटना के बाद महिला ने कहा कि वह अपने प्रेमी के साथ ही रहना चाहती है। उसके इस बयान के बाद मामला और चर्चा में आ गया है। हालांकि, घटना से जुड़े सभी आरोपों और परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। जांच के दौरान चाकूबाजी की वास्तविक वजह, घटना के समय मौजूद परिस्थितियों और महिला, उसके पति तथा घायल युवक के बीच विवाद से जुड़े आरोपों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    फिलहाल पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद किस परिस्थिति में बढ़ा और चाकू से हमला किस घटनाक्रम के दौरान हुआ। घायल युवक का उपचार जिला अस्पताल में जारी है, जबकि मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ और अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है।

  • विजय को PM कैंडिडेट बनाने की मांग से कांग्रेस नाराज, अब TVK की सहयोगी दलों की बुलाई गई है बैठक

    विजय को PM कैंडिडेट बनाने की मांग से कांग्रेस नाराज, अब TVK की सहयोगी दलों की बुलाई गई है बैठक


    चेन्नई। तमिलनाडु में सत्ता के गठबंधन के बीच अब राष्ट्रीय राजनीति को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष का प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने की मांग TVK के भीतर तेज हो रही है। पार्टी नेताओं के इन बयानों से उसकी प्रमुख सहयोगी कांग्रेस असहज है। इसी बीच TVK ने 9 सितंबर को सहयोगी दलों की बैठक बुलाई है, जिसे मौजूदा राजनीतिक तनाव के बीच काफी अहम माना जा रहा है।

    TVK सरकार में मंत्री आधव अर्जुन, राज मोहन और आर. निर्मल कुमार ने CPI(M), CPI और MDMK को बैठक में शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि गठबंधन की सबसे बड़ी सहयोगी कांग्रेस को बैठक में बुलाया गया है या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। बैठक का एजेंडा भी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है।

    PM पद को लेकर क्यों गरमाया मामला?
    बैठक ऐसे समय हो रही है जब TVK के कुछ विधायक खुले तौर पर विजय को 2029 के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग कर रहे हैं। विधायक कनिमोझी ने दावा किया कि 2029 में विजय TVK की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इसका फैसला दिल्ली नहीं बल्कि तमिलनाडु करेगा।

    कनिमोझी ने विजय को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव लाने वाला नेता बताते हुए एक और बड़ा दावा किया। उनके मुताबिक राहुल गांधी अंततः विजय की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के समर्थन से ही विजय मुख्यमंत्री बने हैं और आगे राहुल ही उनका हाथ पकड़कर उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाएंगे।

    रानीपेट की विधायक आई. ताहिरा, ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार समेत TVK के कई अन्य नेताओं ने भी विजय की राष्ट्रीय भूमिका की पैरवी की है।

    कांग्रेस ने साफ किया- राहुल गांधी ही पसंद
    TVK नेताओं के बयानों पर कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि 2029 के प्रधानमंत्री पद को लेकर उसकी पसंद राहुल गांधी हैं। कांग्रेस विधायक दल की नेता थरहाई कथबर्ट ने विजय को PM उम्मीदवार बनाने के अभियान को TVK के कुछ पहली बार चुने गए विधायकों का ‘फैन माइंडसेट’ करार दिया।

    कांग्रेस का कहना है कि विजय पहले ही राहुल गांधी को गठबंधन का उम्मीदवार स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में कुछ विधायकों के व्यक्तिगत बयान पार्टी की तय रणनीति नहीं माने जा सकते।

    तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने भी विजय की PM दावेदारी से जुड़े बयानों को मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का चुनाव आखिरकार देश के मतदाता ही करेंगे।

    कांग्रेस का साथ जरूरी, अपने दम पर बहुमत नहीं
    विजय की सरकार की मजबूरी यह है कि TVK के पास अकेले बहुमत नहीं है। सरकार कांग्रेस, वामपंथी दलों, VCK और IUML के समर्थन पर टिकी है। TVK की सबसे बड़ी सहयोगी कांग्रेस के राज्य सरकार में पांच विधायक और दो मंत्री हैं।

    ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर विजय और राहुल गांधी को लेकर टकराव लंबा खिंचता है तो इसका असर राज्य सरकार की स्थिरता पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि 9 सितंबर की बैठक को गठबंधन के भीतर पैदा हुई तल्खी कम करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

    INDIA ब्लॉक में नहीं, फिर भी कांग्रेस सरकार में
    TVK अभी औपचारिक रूप से INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं बनी है। इसके बावजूद तमिलनाडु में कांग्रेस उसकी सरकार का हिस्सा है। इससे दोनों दलों को राज्य में साथ काम करते हुए राष्ट्रीय राजनीति में अलग-अलग रुख अपनाने की गुंजाइश मिलती है।

    हालांकि विजय को PM बनाने की मांग और कांग्रेस की राहुल गांधी को लेकर स्पष्ट पसंद ने गठबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब बड़ा सवाल यही है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले क्या राज्य में विजय-कांग्रेस की साझेदारी राष्ट्रीय नेतृत्व की महत्वाकांक्षाओं के टकराव के बावजूद कायम रह पाएगी?

  • राजस्थान HC विवाद…. कॉलेजियम का बड़ा फैसला…. चीफ जस्टिस के लिए की नए नाम की सिफारिश

    राजस्थान HC विवाद…. कॉलेजियम का बड़ा फैसला…. चीफ जस्टिस के लिए की नए नाम की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) के कार्यवाहक चीफ जस्टिस (Acting Chief Justice) संजीव प्रकाश शर्मा (Sanjeev Prakash Sharma) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने सोमवार शाम बड़ा फैसला लिया। कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की है। इस बीच जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा छुट्टी पर चले गए हैं। यह सिफारिश ऐसे समय हुई है जब राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ वकीलों का विरोध तेज हो गया है। इसी दिन जस्टिस शर्मा ने न्यायिक कार्य से खुद को अलग कर लिया।


    जस्टिस शर्मा के खिलाफ क्या आरोप लगे?

    सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को CJI सूर्यकांत को पत्र लिखे थे। इन पत्रों में उन्होंने जस्टिस शर्मा पर ‘पावर के दुरुपयोग’ का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें ऐसी कई शिकायतें मिली हैं, जिनसे कार्यवाहक चीफ जस्टिस की ईमानदारी पर सवाल उठते हैं।

    जस्टिस मेहता ने यह भी मांग की थी कि जस्टिस शर्मा को किसी दूसरे हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया जाए और राजस्थान हाईकोर्ट में नया चीफ जस्टिस नियुक्त किया जाए। कॉलेजियम की बैठक में इन आरोपों पर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलेजियम इन आरोपों की जांच कर सकता है। शिकायत में कथित तौर पर जिन कुछ आदेशों पर सवाल उठाए गए हैं, उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है। हालांकि, जस्टिस शर्मा 26 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं, इसलिए कॉलेजियम इस मामले में सावधानी से आगे बढ़ने के पक्ष में है।


    1 से 5 सितंबर तक नहीं बैठेंगे जस्टिस शर्मा

    राजस्थान हाईकोर्ट के अपडेटेड रोस्टर के मुताबिक, जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा 1 सितंबर से 5 सितंबर तक किसी बेंच में नहीं बैठेंगे। उनकी बेंच के मामलों को दूसरी बेंचों को सौंप दिया गया है। जस्टिस शर्मा को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में वकीलों का विरोध भी तेज हो गया है।

    जयपुर में कुछ वकील कार्यवाहक चीफ जस्टिस की अदालत के बाहर बैठ गए और नारेबाजी की। जोधपुर में दोनों वकील संगठनों ने रविवार तक हड़ताल का ऐलान किया। उनकी मांग है कि जस्टिस शर्मा को न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए। वकील संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को मजबूत प्रतिनिधित्व भेजने का भी फैसला किया है।


    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने और किन नामों की सिफारिश की?

    राजस्थान हाईकोर्ट के लिए संजय कुमार अग्रवाल के अलावा कॉलेजियम ने जस्टिस पुष्पेंद्र भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है। जस्टिस भाटी राजस्थान हाईकोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज हैं। वहीं गुजरात हाईकोर्ट के जज अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। इन तीन सिफारिशों के बाद चीफ जस्टिस की नियुक्ति से जुड़ी कुल सात सिफारिशें सरकार के पास लंबित होंगी।


    कॉलेजियम ने कहा- आरोपों को निष्कर्ष नहीं माना जा सकता

    जस्टिस शर्मा के खिलाफ आरोपों को लेकर CJI सूर्यकांत ने 26 अगस्त को एक बयान में कहा था कि उन्होंने और कॉलेजियम के अन्य सदस्यों ने जस्टिस संदीप मेहता की चिंताओं पर ध्यान दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों से स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत निपटा जाना चाहिए। संबंधित जज को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना जरूरी है और सिर्फ आरोप लगाए जाने से उन्हें निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। CJI ने यह भी कहा था कि कॉलेजियम पहले से ही बाकी हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया पर काम कर रहा था।


    10 महीने से कार्यवाहक चीफ जस्टिस थे शर्मा

    जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा करीब 10 महीने से राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर काम कर रहे थे। सितंबर 2025 में जस्टिस एस. श्रीराम के चीफ जस्टिस पद से रिटायर होने के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली थी। अब कॉलेजियम ने उनकी जगह छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है।

  • आईफोन नहीं, माता-पिता को फिर साथ देखना चाहता था कुनाल, पुणे पहाड़ी हादसे में पारिवारिक विवाद का नया पहलू सामने आया

    आईफोन नहीं, माता-पिता को फिर साथ देखना चाहता था कुनाल, पुणे पहाड़ी हादसे में पारिवारिक विवाद का नया पहलू सामने आया

    नई दिल्ली । पुणे के पहाड़ी हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। शुरुआती जानकारी में इस घटना को 19 वर्षीय कुनाल और उसके माता-पिता के बीच आईफोन तथा उसकी ईएमआई को लेकर हुए विवाद से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब जांच और परिवार से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद मामले का एक अलग पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुनाल की सबसे बड़ी चिंता आईफोन नहीं बल्कि अपने माता-पिता के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करना था। वह चाहता था कि उसके पिता मुरलीधर और मां संगीता फिर सामान्य तरीके से साथ रहें और परिवार में चल रही परेशानियां खत्म हों।

    घटना से जुड़े लोगों के अनुसार कुनाल के माता-पिता के रिश्ते पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण थे। संपत्ति से जुड़े विवाद और कथित वैवाहिक मतभेदों ने परिवार के माहौल को प्रभावित किया था। हालांकि आसपास रहने वाले लोगों ने उनके बीच किसी बड़े विवाद की जानकारी से इनकार किया है। परिवार के परिचितों के मुताबिक दोनों सामान्य व्यवहार करते दिखाई देते थे, लेकिन घर के भीतर की परिस्थितियां अलग थीं।

    परिवार के लिए यह पहला बड़ा सदमा नहीं था। कुनाल के एक भाई की करीब आठ वर्ष पहले मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिवार पर मानसिक दबाव और तनाव बढ़ गया था। कुनाल पढ़ाई में अच्छा था। उसने दसवीं कक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और आगे चलकर एमबीबीएस की पढ़ाई करना चाहता था। परिवार से जुड़ी परेशानियों के बीच उसके व्यवहार और मानसिक स्थिति को लेकर भी अब कई सवाल उठ रहे हैं।

    घटना वाले दिन कुनाल पहाड़ी क्षेत्र में पहुंच गया था। बताया गया कि आईफोन को लेकर घर में विवाद हुआ था और इसके बाद वह खुद को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पहाड़ी की ओर चला गया। उसके माता-पिता उसे समझाने के लिए वहां पहुंचे। पुलिस और दमकल कर्मियों ने भी मौके पर पहुंचकर उसे बचाने का प्रयास किया। खाई में सुरक्षा के लिए जाल भी लगाया गया था, लेकिन कुनाल लगातार अपनी जगह बदल रहा था।

    इसी दौरान उसके पिता ने उसे पकड़कर सुरक्षित स्थान पर खींचने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इसी प्रयास में संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरी खाई में जा गिरे। इसके बाद मां संगीता ने भी खाई में छलांग लगा दी। इस तरह परिवार के तीनों सदस्यों की मौत हो गई। घटना के बाद सामने आए विवरणों ने इसे केवल एक पारिवारिक विवाद या आईफोन से जुड़ा मामला मानने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मुरलीधर की बहन के अनुसार उन्होंने और संगीता ने करीब 22 वर्ष पहले प्रेम विवाह किया था। परिवार के कुछ सदस्य इस विवाह के पक्ष में नहीं थे और शादी के समय भी उनके शामिल नहीं होने की बात सामने आई है। शादी के बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव बना रहा। हालांकि मुरलीधर के परिचित उन्हें अनुशासित और शांत स्वभाव का व्यक्ति बताते हैं। वह करीब दस वर्षों से ड्राइवर के रूप में काम कर रहे थे।

    परिवार कुछ महीने पहले ही किराए के मकान में रहने आया था। घटना के बाद घर में पालतू कुत्ता शेरू अकेला रह गया, जिसे बाद में एक पशु कल्याण समूह अपने साथ ले गया। अब पुलिस और संबंधित अधिकारी पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। परिवार के रिश्तों, घटना से पहले की स्थिति और उस दिन हुए घटनाक्रम को जोड़कर देखा जा रहा है। नए तथ्यों ने यह संकेत जरूर दिया है कि इस दुखद घटना के पीछे केवल आईफोन का विवाद नहीं, बल्कि परिवार के भीतर लंबे समय से चल रहा भावनात्मक और वैवाहिक तनाव भी महत्वपूर्ण भूमिका में हो सकता है।

  • तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस पर आमने-सामने आए दोनों गुट, कार्यक्रम की अनुमति को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

    तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस पर आमने-सामने आए दोनों गुट, कार्यक्रम की अनुमति को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन के भीतर चल रहा विवाद अब 28 अगस्त को होने वाले स्थापना दिवस कार्यक्रम को लेकर खुलकर सामने आ गया है। तृणमूल छात्र परिषद के दो गुटों ने मध्य कोलकाता के मेयो रोड स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगी है। एक ही स्थान और एक ही दिन कार्यक्रम की मांग किए जाने से दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

    तृणमूल छात्र परिषद का स्थापना दिवस हर वर्ष 28 अगस्त को मनाया जाता है। इस अवसर पर मेयो रोड पर रैली और सभा का आयोजन किया जाता रहा है। इस बार पार्टी से जुड़े दो छात्र गुटों की अलग-अलग गतिविधियों के कारण स्थापना दिवस का कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।

    ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति के लिए अदालत का रुख किया जा चुका है। संबंधित याचिका पर सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध भी किया गया। इसके बाद दूसरे गुट ने भी इसी स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं मिलने का हवाला देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट भी 28 अगस्त को मेयो रोड पर कार्यक्रम आयोजित करना चाहता है। इस गुट की ओर से कोलकाता पुलिस से रैली की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया।

    अदालत ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया और इसे अगले शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध किया है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी समर्थक गुट की याचिका पर पहले ही सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस वजह से अब दोनों पक्षों की नजर अदालत के अगले रुख पर टिकी हुई है।

    मामले का मुख्य प्रश्न यह है कि क्या दोनों गुटों को एक ही स्थान पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जा सकती है या फिर प्रशासन और अदालत की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था तय की जाएगी। एक ही दिन और एक ही स्थान पर दो कार्यक्रम होने की स्थिति में कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार करना होगा।

    मेयो रोड का स्थान तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस कार्यक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में स्थान को लेकर दोनों पक्षों की दावेदारी ने संगठन के भीतर चल रहे मतभेद को और स्पष्ट कर दिया है। पहले से मौजूद राजनीतिक खींचतान के बीच छात्र संगठन का यह विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है।

    फिलहाल अदालत के फैसले और प्रशासन की अनुमति पर आगे की तस्वीर निर्भर करेगी। दोनों गुट अपने-अपने कार्यक्रम को लेकर सक्रिय हैं, जबकि 28 अगस्त की तारीख नजदीक आने के साथ विवाद के समाधान को लेकर भी दबाव बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि स्थापना दिवस का आयोजन किस व्यवस्था के तहत होगा और क्या दोनों पक्षों को अलग-अलग कार्यक्रम के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

  • दक्षिण चीन सागर में फिर आमने-सामने चीन और फिलीपींस, अमेरिका के रुख से बढ़ी पूरे विवाद की अहमियत

    दक्षिण चीन सागर में फिर आमने-सामने चीन और फिलीपींस, अमेरिका के रुख से बढ़ी पूरे विवाद की अहमियत


    नई दिल्ली ।दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच लंबे समय से जारी विवाद एक बार फिर चर्चा में है। स्कारबोरो रीफ को लेकर चीन की ओर से उठाए गए नए कदम पर अमेरिका ने आपत्ति जताई है। अमेरिका ने चीन द्वारा इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्रकृति क्षेत्र के रूप में विकसित करने के फैसले का विरोध करते हुए फिलीपींस के साथ खड़े रहने की बात कही है।

    स्कारबोरो रीफ दक्षिण चीन सागर में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है, जिस पर चीन और फिलीपींस दोनों अपना दावा करते रहे हैं। इस इलाके में मछली पकड़ने और समुद्री गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। फिलीपींस के मछुआरे इस क्षेत्र में लंबे समय से मछली पकड़ते रहे हैं और नए नियमों के बाद उनके सामने संभावित परेशानियों को लेकर चिंता जताई जा रही है।

    चीन ने एक अगस्त को स्कारबोरो रीफ से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों में क्षेत्र की देखभाल, निगरानी और सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है। इसके तहत चीन के कई सरकारी विभाग मिलकर इस समुद्री क्षेत्र की निगरानी और प्रबंधन करेंगे। चीन का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य संबंधित सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और क्षेत्र की सुरक्षा तथा संरक्षण को व्यवस्थित करना है।

    चीन ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्रकृति क्षेत्र के रूप में विकसित करने की मंजूरी सितंबर 2024 में दी थी। अब नए नियमों के जरिए वहां प्रशासनिक और निगरानी व्यवस्था को अधिक स्पष्ट किया गया है। हालांकि, फिलीपींस को आशंका है कि इन व्यवस्थाओं का असर उसके मछुआरों की गतिविधियों पर पड़ सकता है।

    अमेरिका ने चीन के इस कदम पर गंभीर आपत्ति जताई है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि नए नियमों से फिलीपींस के उन मछुआरों के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में मछली पकड़ते रहे हैं। अमेरिका ने चीन से क्षेत्र के आसपास मौजूद देशों के अधिकारों और हितों को ध्यान में रखने की अपील की है।

    अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में फिलीपींस के साथ है। इसके साथ ही उसने खुले और स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थन की बात दोहराई है। इससे दक्षिण चीन सागर के विवाद में अमेरिका की रणनीतिक भूमिका एक बार फिर सामने आई है।

    स्कारबोरो रीफ को लेकर विवाद की पृष्ठभूमि काफी पुरानी है। वर्ष 2016 में समुद्री कानून से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय न्यायिक पैनल ने दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यापक समुद्री दावों को कानूनी आधार नहीं माना था। फिलीपींस ने इस फैसले का समर्थन किया था, जबकि चीन ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

    2016 के बाद भी दोनों देशों के बीच इस समुद्री क्षेत्र को लेकर मतभेद खत्म नहीं हुए। समय-समय पर समुद्री गतिविधियों, मछली पकड़ने और क्षेत्रीय अधिकारों को लेकर तनाव सामने आता रहा है। स्कारबोरो रीफ पर चीन की नई प्रशासनिक व्यवस्था ने इसी पुराने विवाद को फिर से सक्रिय कर दिया है।

    मौजूदा घटनाक्रम में चीन अपने नए नियमों को क्षेत्र के संरक्षण और निगरानी से जुड़ी व्यवस्था के तौर पर पेश कर रहा है, जबकि फिलीपींस इसे अपने मछुआरों और समुद्री अधिकारों के संदर्भ में देख रहा है। अमेरिका के खुलकर फिलीपींस का समर्थन करने से इस विवाद का कूटनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।

    फिलहाल दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। स्कारबोरो रीफ पर लागू किए गए नए नियमों को लेकर दोनों पक्षों के रुख में अंतर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और दोनों देशों की प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।

  • भारत-नेपाल सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, सुस्ता में अस्थायी बांध तोड़े जाने के आरोप से विवाद गहराया

    भारत-नेपाल सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, सुस्ता में अस्थायी बांध तोड़े जाने के आरोप से विवाद गहराया

    नई दिल्ली । भारत और नेपाल के बीच सीमा से जुड़े संवेदनशील सुस्ता क्षेत्र में एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है। नेपाल की ओर से आरोप लगाया गया है कि भारतीय सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने नेपाली क्षेत्र में प्रवेश कर वहां बनाया जा रहा एक अस्थायी मिट्टी का बांध हटा दिया। नेपाली पक्ष का कहना है कि यह बांध नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ से स्थानीय बस्तियों की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया जा रहा था। इस घटना के बाद सीमा क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया, हालांकि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

    बताया जा रहा है कि विवाद उस समय सामने आया जब स्थानीय स्तर पर अस्थायी तटबंध निर्माण का कार्य चल रहा था। नेपाल का दावा है कि भारतीय सुरक्षा कर्मियों ने इस निर्माण पर आपत्ति जताई और बाद में बांध को हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान स्थानीय लोगों और भारतीय सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस भी हुई। घटना का एक वीडियो भी सामने आने की चर्चा है, जिसके बाद मामला दोनों देशों के अधिकारियों तक पहुंच गया।

    नेपाल सरकार ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए राजनयिक स्तर पर भारत के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है। नेपाल का कहना है कि सीमा से जुड़े मामलों में पहले से तय व्यवस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी कार्रवाई से पहले आपसी समन्वय आवश्यक है। वहीं भारतीय पक्ष की ओर से यह बताया गया कि जिस क्षेत्र में निर्माण किया जा रहा था, वह लंबे समय से विवादित माना जाता है और ऐसे इलाकों में यथास्थिति बनाए रखने पर दोनों देशों के बीच पहले भी सहमति बन चुकी है।

    सुस्ता क्षेत्र भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। दोनों देश इस क्षेत्र पर अपना-अपना दावा करते रहे हैं। समय-समय पर सीमा निर्धारण, नदी की धारा में बदलाव और स्थानीय गतिविधियों को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के मार्ग में परिवर्तन के कारण इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी समय के साथ बदलती रही है, जिससे सीमा संबंधी विवाद और जटिल हो गया है।

    स्थानीय प्रशासन ने बताया कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई है। एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है ताकि दोनों ओर के नागरिकों के बीच किसी प्रकार का तनाव न बढ़े। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

    भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बेहद मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा व्यवस्था के कारण लाखों लोग रोजमर्रा के आवागमन और व्यापार से जुड़े हैं। ऐसे में सीमा से जुड़े किसी भी विवाद का शांतिपूर्ण और आपसी सहमति से समाधान निकालना दोनों देशों के हित में माना जाता है। जानकारों का मानना है कि संवाद और कूटनीतिक स्तर पर निरंतर संपर्क बनाए रखने से इस प्रकार के विवादों का स्थायी समाधान संभव हो सकता है और द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास कायम रहेगा।

  • रिमोट के बटन को लेकर शुरू हुई मामूली तकरार ने लिया खूनी रूप, भोपाल में सिर पर वार लगने से पति अस्पताल में भर्ती

    रिमोट के बटन को लेकर शुरू हुई मामूली तकरार ने लिया खूनी रूप, भोपाल में सिर पर वार लगने से पति अस्पताल में भर्ती

     मध्य प्रदेश। की राजधानी भोपाल में घरेलू विवाद का एक अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। टेलीविजन पर मनपसंद चैनल देखने और रिमोट कंट्रोल को लेकर पति-पत्नी के बीच शुरू हुई मामूली कहासुनी देखते ही देखते खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई। तैश में आई पत्नी ने घर में रखे धारदार हंसिए से पति पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    मिली जानकारी के अनुसार यह घटना भोपाल के छोला मंदिर थाना क्षेत्र की है। पीड़ित व्यक्ति पेशे से मजदूर है और अपने परिवार के साथ रहता है। घटना वाले दिन वह काम निपटाकर घर पर टीवी देख रहा था। इसी दौरान उसने रिमोट लेकर अपनी पसंद का चैनल लगा दिया। इस बात पर पत्नी की उससे कहासुनी हो गई। देखते ही देखते दोनों के बीच तकरार इतनी बढ़ गई कि गुस्से में आकर महिला ने पास रखा हंसिया उठाकर पति के सिर और चेहरे पर वार कर दिया।

    अचानक हुए हमले में पति लहूलुहान होकर गिर पड़ा। चीख-पुकार और शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और किसी तरह बीच-बचाव किया। स्थानीय निवासियों ने तत्परता दिखाते हुए गंभीर रूप से घायल पति को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल भी तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया।

    छोला मंदिर पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर घायल पति के बयान दर्ज किए और आरोपी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक पड़ताल में टीवी का चैनल बदलने को लेकर हुआ विवाद ही हमले की मुख्य वजह सामने आया है। दंपती के दो बच्चे हैं और पड़ोसियों के अनुसार उनके बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर आपस में कहासुनी होती रहती थी।

    इस घटना के बाद से क्षेत्र में हड़कंप का माहौल है। पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य जुटाए हैं और आरोपी महिला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।