Tag: Dispute

  • राजस्थान HC विवाद…. कॉलेजियम का बड़ा फैसला…. चीफ जस्टिस के लिए की नए नाम की सिफारिश

    राजस्थान HC विवाद…. कॉलेजियम का बड़ा फैसला…. चीफ जस्टिस के लिए की नए नाम की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) के कार्यवाहक चीफ जस्टिस (Acting Chief Justice) संजीव प्रकाश शर्मा (Sanjeev Prakash Sharma) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने सोमवार शाम बड़ा फैसला लिया। कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की है। इस बीच जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा छुट्टी पर चले गए हैं। यह सिफारिश ऐसे समय हुई है जब राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ वकीलों का विरोध तेज हो गया है। इसी दिन जस्टिस शर्मा ने न्यायिक कार्य से खुद को अलग कर लिया।


    जस्टिस शर्मा के खिलाफ क्या आरोप लगे?

    सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को CJI सूर्यकांत को पत्र लिखे थे। इन पत्रों में उन्होंने जस्टिस शर्मा पर ‘पावर के दुरुपयोग’ का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें ऐसी कई शिकायतें मिली हैं, जिनसे कार्यवाहक चीफ जस्टिस की ईमानदारी पर सवाल उठते हैं।

    जस्टिस मेहता ने यह भी मांग की थी कि जस्टिस शर्मा को किसी दूसरे हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया जाए और राजस्थान हाईकोर्ट में नया चीफ जस्टिस नियुक्त किया जाए। कॉलेजियम की बैठक में इन आरोपों पर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलेजियम इन आरोपों की जांच कर सकता है। शिकायत में कथित तौर पर जिन कुछ आदेशों पर सवाल उठाए गए हैं, उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है। हालांकि, जस्टिस शर्मा 26 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं, इसलिए कॉलेजियम इस मामले में सावधानी से आगे बढ़ने के पक्ष में है।


    1 से 5 सितंबर तक नहीं बैठेंगे जस्टिस शर्मा

    राजस्थान हाईकोर्ट के अपडेटेड रोस्टर के मुताबिक, जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा 1 सितंबर से 5 सितंबर तक किसी बेंच में नहीं बैठेंगे। उनकी बेंच के मामलों को दूसरी बेंचों को सौंप दिया गया है। जस्टिस शर्मा को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में वकीलों का विरोध भी तेज हो गया है।

    जयपुर में कुछ वकील कार्यवाहक चीफ जस्टिस की अदालत के बाहर बैठ गए और नारेबाजी की। जोधपुर में दोनों वकील संगठनों ने रविवार तक हड़ताल का ऐलान किया। उनकी मांग है कि जस्टिस शर्मा को न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए। वकील संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को मजबूत प्रतिनिधित्व भेजने का भी फैसला किया है।


    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने और किन नामों की सिफारिश की?

    राजस्थान हाईकोर्ट के लिए संजय कुमार अग्रवाल के अलावा कॉलेजियम ने जस्टिस पुष्पेंद्र भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है। जस्टिस भाटी राजस्थान हाईकोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज हैं। वहीं गुजरात हाईकोर्ट के जज अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। इन तीन सिफारिशों के बाद चीफ जस्टिस की नियुक्ति से जुड़ी कुल सात सिफारिशें सरकार के पास लंबित होंगी।


    कॉलेजियम ने कहा- आरोपों को निष्कर्ष नहीं माना जा सकता

    जस्टिस शर्मा के खिलाफ आरोपों को लेकर CJI सूर्यकांत ने 26 अगस्त को एक बयान में कहा था कि उन्होंने और कॉलेजियम के अन्य सदस्यों ने जस्टिस संदीप मेहता की चिंताओं पर ध्यान दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों से स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत निपटा जाना चाहिए। संबंधित जज को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना जरूरी है और सिर्फ आरोप लगाए जाने से उन्हें निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। CJI ने यह भी कहा था कि कॉलेजियम पहले से ही बाकी हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया पर काम कर रहा था।


    10 महीने से कार्यवाहक चीफ जस्टिस थे शर्मा

    जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा करीब 10 महीने से राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर काम कर रहे थे। सितंबर 2025 में जस्टिस एस. श्रीराम के चीफ जस्टिस पद से रिटायर होने के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली थी। अब कॉलेजियम ने उनकी जगह छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है।

  • आईफोन नहीं, माता-पिता को फिर साथ देखना चाहता था कुनाल, पुणे पहाड़ी हादसे में पारिवारिक विवाद का नया पहलू सामने आया

    आईफोन नहीं, माता-पिता को फिर साथ देखना चाहता था कुनाल, पुणे पहाड़ी हादसे में पारिवारिक विवाद का नया पहलू सामने आया

    नई दिल्ली । पुणे के पहाड़ी हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। शुरुआती जानकारी में इस घटना को 19 वर्षीय कुनाल और उसके माता-पिता के बीच आईफोन तथा उसकी ईएमआई को लेकर हुए विवाद से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब जांच और परिवार से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद मामले का एक अलग पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुनाल की सबसे बड़ी चिंता आईफोन नहीं बल्कि अपने माता-पिता के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करना था। वह चाहता था कि उसके पिता मुरलीधर और मां संगीता फिर सामान्य तरीके से साथ रहें और परिवार में चल रही परेशानियां खत्म हों।

    घटना से जुड़े लोगों के अनुसार कुनाल के माता-पिता के रिश्ते पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण थे। संपत्ति से जुड़े विवाद और कथित वैवाहिक मतभेदों ने परिवार के माहौल को प्रभावित किया था। हालांकि आसपास रहने वाले लोगों ने उनके बीच किसी बड़े विवाद की जानकारी से इनकार किया है। परिवार के परिचितों के मुताबिक दोनों सामान्य व्यवहार करते दिखाई देते थे, लेकिन घर के भीतर की परिस्थितियां अलग थीं।

    परिवार के लिए यह पहला बड़ा सदमा नहीं था। कुनाल के एक भाई की करीब आठ वर्ष पहले मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिवार पर मानसिक दबाव और तनाव बढ़ गया था। कुनाल पढ़ाई में अच्छा था। उसने दसवीं कक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और आगे चलकर एमबीबीएस की पढ़ाई करना चाहता था। परिवार से जुड़ी परेशानियों के बीच उसके व्यवहार और मानसिक स्थिति को लेकर भी अब कई सवाल उठ रहे हैं।

    घटना वाले दिन कुनाल पहाड़ी क्षेत्र में पहुंच गया था। बताया गया कि आईफोन को लेकर घर में विवाद हुआ था और इसके बाद वह खुद को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पहाड़ी की ओर चला गया। उसके माता-पिता उसे समझाने के लिए वहां पहुंचे। पुलिस और दमकल कर्मियों ने भी मौके पर पहुंचकर उसे बचाने का प्रयास किया। खाई में सुरक्षा के लिए जाल भी लगाया गया था, लेकिन कुनाल लगातार अपनी जगह बदल रहा था।

    इसी दौरान उसके पिता ने उसे पकड़कर सुरक्षित स्थान पर खींचने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इसी प्रयास में संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरी खाई में जा गिरे। इसके बाद मां संगीता ने भी खाई में छलांग लगा दी। इस तरह परिवार के तीनों सदस्यों की मौत हो गई। घटना के बाद सामने आए विवरणों ने इसे केवल एक पारिवारिक विवाद या आईफोन से जुड़ा मामला मानने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मुरलीधर की बहन के अनुसार उन्होंने और संगीता ने करीब 22 वर्ष पहले प्रेम विवाह किया था। परिवार के कुछ सदस्य इस विवाह के पक्ष में नहीं थे और शादी के समय भी उनके शामिल नहीं होने की बात सामने आई है। शादी के बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव बना रहा। हालांकि मुरलीधर के परिचित उन्हें अनुशासित और शांत स्वभाव का व्यक्ति बताते हैं। वह करीब दस वर्षों से ड्राइवर के रूप में काम कर रहे थे।

    परिवार कुछ महीने पहले ही किराए के मकान में रहने आया था। घटना के बाद घर में पालतू कुत्ता शेरू अकेला रह गया, जिसे बाद में एक पशु कल्याण समूह अपने साथ ले गया। अब पुलिस और संबंधित अधिकारी पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। परिवार के रिश्तों, घटना से पहले की स्थिति और उस दिन हुए घटनाक्रम को जोड़कर देखा जा रहा है। नए तथ्यों ने यह संकेत जरूर दिया है कि इस दुखद घटना के पीछे केवल आईफोन का विवाद नहीं, बल्कि परिवार के भीतर लंबे समय से चल रहा भावनात्मक और वैवाहिक तनाव भी महत्वपूर्ण भूमिका में हो सकता है।

  • तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस पर आमने-सामने आए दोनों गुट, कार्यक्रम की अनुमति को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

    तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस पर आमने-सामने आए दोनों गुट, कार्यक्रम की अनुमति को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन के भीतर चल रहा विवाद अब 28 अगस्त को होने वाले स्थापना दिवस कार्यक्रम को लेकर खुलकर सामने आ गया है। तृणमूल छात्र परिषद के दो गुटों ने मध्य कोलकाता के मेयो रोड स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगी है। एक ही स्थान और एक ही दिन कार्यक्रम की मांग किए जाने से दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

    तृणमूल छात्र परिषद का स्थापना दिवस हर वर्ष 28 अगस्त को मनाया जाता है। इस अवसर पर मेयो रोड पर रैली और सभा का आयोजन किया जाता रहा है। इस बार पार्टी से जुड़े दो छात्र गुटों की अलग-अलग गतिविधियों के कारण स्थापना दिवस का कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।

    ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति के लिए अदालत का रुख किया जा चुका है। संबंधित याचिका पर सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध भी किया गया। इसके बाद दूसरे गुट ने भी इसी स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं मिलने का हवाला देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट भी 28 अगस्त को मेयो रोड पर कार्यक्रम आयोजित करना चाहता है। इस गुट की ओर से कोलकाता पुलिस से रैली की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया।

    अदालत ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया और इसे अगले शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध किया है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी समर्थक गुट की याचिका पर पहले ही सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस वजह से अब दोनों पक्षों की नजर अदालत के अगले रुख पर टिकी हुई है।

    मामले का मुख्य प्रश्न यह है कि क्या दोनों गुटों को एक ही स्थान पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जा सकती है या फिर प्रशासन और अदालत की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था तय की जाएगी। एक ही दिन और एक ही स्थान पर दो कार्यक्रम होने की स्थिति में कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार करना होगा।

    मेयो रोड का स्थान तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस कार्यक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में स्थान को लेकर दोनों पक्षों की दावेदारी ने संगठन के भीतर चल रहे मतभेद को और स्पष्ट कर दिया है। पहले से मौजूद राजनीतिक खींचतान के बीच छात्र संगठन का यह विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है।

    फिलहाल अदालत के फैसले और प्रशासन की अनुमति पर आगे की तस्वीर निर्भर करेगी। दोनों गुट अपने-अपने कार्यक्रम को लेकर सक्रिय हैं, जबकि 28 अगस्त की तारीख नजदीक आने के साथ विवाद के समाधान को लेकर भी दबाव बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि स्थापना दिवस का आयोजन किस व्यवस्था के तहत होगा और क्या दोनों पक्षों को अलग-अलग कार्यक्रम के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

  • दक्षिण चीन सागर में फिर आमने-सामने चीन और फिलीपींस, अमेरिका के रुख से बढ़ी पूरे विवाद की अहमियत

    दक्षिण चीन सागर में फिर आमने-सामने चीन और फिलीपींस, अमेरिका के रुख से बढ़ी पूरे विवाद की अहमियत


    नई दिल्ली ।दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच लंबे समय से जारी विवाद एक बार फिर चर्चा में है। स्कारबोरो रीफ को लेकर चीन की ओर से उठाए गए नए कदम पर अमेरिका ने आपत्ति जताई है। अमेरिका ने चीन द्वारा इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्रकृति क्षेत्र के रूप में विकसित करने के फैसले का विरोध करते हुए फिलीपींस के साथ खड़े रहने की बात कही है।

    स्कारबोरो रीफ दक्षिण चीन सागर में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है, जिस पर चीन और फिलीपींस दोनों अपना दावा करते रहे हैं। इस इलाके में मछली पकड़ने और समुद्री गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। फिलीपींस के मछुआरे इस क्षेत्र में लंबे समय से मछली पकड़ते रहे हैं और नए नियमों के बाद उनके सामने संभावित परेशानियों को लेकर चिंता जताई जा रही है।

    चीन ने एक अगस्त को स्कारबोरो रीफ से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों में क्षेत्र की देखभाल, निगरानी और सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है। इसके तहत चीन के कई सरकारी विभाग मिलकर इस समुद्री क्षेत्र की निगरानी और प्रबंधन करेंगे। चीन का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य संबंधित सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और क्षेत्र की सुरक्षा तथा संरक्षण को व्यवस्थित करना है।

    चीन ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्रकृति क्षेत्र के रूप में विकसित करने की मंजूरी सितंबर 2024 में दी थी। अब नए नियमों के जरिए वहां प्रशासनिक और निगरानी व्यवस्था को अधिक स्पष्ट किया गया है। हालांकि, फिलीपींस को आशंका है कि इन व्यवस्थाओं का असर उसके मछुआरों की गतिविधियों पर पड़ सकता है।

    अमेरिका ने चीन के इस कदम पर गंभीर आपत्ति जताई है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि नए नियमों से फिलीपींस के उन मछुआरों के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में मछली पकड़ते रहे हैं। अमेरिका ने चीन से क्षेत्र के आसपास मौजूद देशों के अधिकारों और हितों को ध्यान में रखने की अपील की है।

    अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में फिलीपींस के साथ है। इसके साथ ही उसने खुले और स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थन की बात दोहराई है। इससे दक्षिण चीन सागर के विवाद में अमेरिका की रणनीतिक भूमिका एक बार फिर सामने आई है।

    स्कारबोरो रीफ को लेकर विवाद की पृष्ठभूमि काफी पुरानी है। वर्ष 2016 में समुद्री कानून से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय न्यायिक पैनल ने दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यापक समुद्री दावों को कानूनी आधार नहीं माना था। फिलीपींस ने इस फैसले का समर्थन किया था, जबकि चीन ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

    2016 के बाद भी दोनों देशों के बीच इस समुद्री क्षेत्र को लेकर मतभेद खत्म नहीं हुए। समय-समय पर समुद्री गतिविधियों, मछली पकड़ने और क्षेत्रीय अधिकारों को लेकर तनाव सामने आता रहा है। स्कारबोरो रीफ पर चीन की नई प्रशासनिक व्यवस्था ने इसी पुराने विवाद को फिर से सक्रिय कर दिया है।

    मौजूदा घटनाक्रम में चीन अपने नए नियमों को क्षेत्र के संरक्षण और निगरानी से जुड़ी व्यवस्था के तौर पर पेश कर रहा है, जबकि फिलीपींस इसे अपने मछुआरों और समुद्री अधिकारों के संदर्भ में देख रहा है। अमेरिका के खुलकर फिलीपींस का समर्थन करने से इस विवाद का कूटनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।

    फिलहाल दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। स्कारबोरो रीफ पर लागू किए गए नए नियमों को लेकर दोनों पक्षों के रुख में अंतर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और दोनों देशों की प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।

  • भारत-नेपाल सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, सुस्ता में अस्थायी बांध तोड़े जाने के आरोप से विवाद गहराया

    भारत-नेपाल सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, सुस्ता में अस्थायी बांध तोड़े जाने के आरोप से विवाद गहराया

    नई दिल्ली । भारत और नेपाल के बीच सीमा से जुड़े संवेदनशील सुस्ता क्षेत्र में एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है। नेपाल की ओर से आरोप लगाया गया है कि भारतीय सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने नेपाली क्षेत्र में प्रवेश कर वहां बनाया जा रहा एक अस्थायी मिट्टी का बांध हटा दिया। नेपाली पक्ष का कहना है कि यह बांध नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ से स्थानीय बस्तियों की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया जा रहा था। इस घटना के बाद सीमा क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया, हालांकि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

    बताया जा रहा है कि विवाद उस समय सामने आया जब स्थानीय स्तर पर अस्थायी तटबंध निर्माण का कार्य चल रहा था। नेपाल का दावा है कि भारतीय सुरक्षा कर्मियों ने इस निर्माण पर आपत्ति जताई और बाद में बांध को हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान स्थानीय लोगों और भारतीय सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस भी हुई। घटना का एक वीडियो भी सामने आने की चर्चा है, जिसके बाद मामला दोनों देशों के अधिकारियों तक पहुंच गया।

    नेपाल सरकार ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए राजनयिक स्तर पर भारत के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है। नेपाल का कहना है कि सीमा से जुड़े मामलों में पहले से तय व्यवस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी कार्रवाई से पहले आपसी समन्वय आवश्यक है। वहीं भारतीय पक्ष की ओर से यह बताया गया कि जिस क्षेत्र में निर्माण किया जा रहा था, वह लंबे समय से विवादित माना जाता है और ऐसे इलाकों में यथास्थिति बनाए रखने पर दोनों देशों के बीच पहले भी सहमति बन चुकी है।

    सुस्ता क्षेत्र भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। दोनों देश इस क्षेत्र पर अपना-अपना दावा करते रहे हैं। समय-समय पर सीमा निर्धारण, नदी की धारा में बदलाव और स्थानीय गतिविधियों को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के मार्ग में परिवर्तन के कारण इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी समय के साथ बदलती रही है, जिससे सीमा संबंधी विवाद और जटिल हो गया है।

    स्थानीय प्रशासन ने बताया कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई है। एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है ताकि दोनों ओर के नागरिकों के बीच किसी प्रकार का तनाव न बढ़े। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

    भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बेहद मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा व्यवस्था के कारण लाखों लोग रोजमर्रा के आवागमन और व्यापार से जुड़े हैं। ऐसे में सीमा से जुड़े किसी भी विवाद का शांतिपूर्ण और आपसी सहमति से समाधान निकालना दोनों देशों के हित में माना जाता है। जानकारों का मानना है कि संवाद और कूटनीतिक स्तर पर निरंतर संपर्क बनाए रखने से इस प्रकार के विवादों का स्थायी समाधान संभव हो सकता है और द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास कायम रहेगा।

  • रिमोट के बटन को लेकर शुरू हुई मामूली तकरार ने लिया खूनी रूप, भोपाल में सिर पर वार लगने से पति अस्पताल में भर्ती

    रिमोट के बटन को लेकर शुरू हुई मामूली तकरार ने लिया खूनी रूप, भोपाल में सिर पर वार लगने से पति अस्पताल में भर्ती

     मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में घरेलू विवाद का एक अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। टेलीविजन पर मनपसंद चैनल देखने और रिमोट कंट्रोल को लेकर पति-पत्नी के बीच शुरू हुई मामूली कहासुनी देखते ही देखते खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई। तैश में आई पत्नी ने घर में रखे धारदार हंसिए से पति पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    मिली जानकारी के अनुसार यह घटना भोपाल के छोला मंदिर थाना क्षेत्र की है। पीड़ित व्यक्ति पेशे से मजदूर है और अपने परिवार के साथ रहता है। घटना वाले दिन वह काम निपटाकर घर पर टीवी देख रहा था। इसी दौरान उसने रिमोट लेकर अपनी पसंद का चैनल लगा दिया। इस बात पर पत्नी की उससे कहासुनी हो गई। देखते ही देखते दोनों के बीच तकरार इतनी बढ़ गई कि गुस्से में आकर महिला ने पास रखा हंसिया उठाकर पति के सिर और चेहरे पर वार कर दिया।

    अचानक हुए हमले में पति लहूलुहान होकर गिर पड़ा। चीख-पुकार और शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और किसी तरह बीच-बचाव किया। स्थानीय निवासियों ने तत्परता दिखाते हुए गंभीर रूप से घायल पति को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल भी तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया।

    छोला मंदिर पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर घायल पति के बयान दर्ज किए और आरोपी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक पड़ताल में टीवी का चैनल बदलने को लेकर हुआ विवाद ही हमले की मुख्य वजह सामने आया है। दंपती के दो बच्चे हैं और पड़ोसियों के अनुसार उनके बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर आपस में कहासुनी होती रहती थी।

    इस घटना के बाद से क्षेत्र में हड़कंप का माहौल है। पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य जुटाए हैं और आरोपी महिला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

  • मेकेदातु डैम विवाद: राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री के बयान से भड़के सीएम विजय, पीएम मोदी को पत्र लिख की सीधे हस्तक्षेप की मांग

    मेकेदातु डैम विवाद: राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री के बयान से भड़के सीएम विजय, पीएम मोदी को पत्र लिख की सीधे हस्तक्षेप की मांग


    नई दिल्ली ।
    कावेरी नदी पर बनने वाले प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच का अंतर-राज्यीय जल विवाद एक बार फिर गहरा गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग की है। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया है कि जब तक यह परियोजना कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और उच्चतम न्यायालय के फैसलों के पूरी तरह अनुरूप न हो, तब तक इसे किसी भी प्रकार की वैधानिक या प्रशासनिक स्वीकृति न दी जाए।

    तमिलनाडु सरकार की यह तीखी प्रतिक्रिया राज्यसभा में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री द्वारा दिए गए एक हालिया बयान के बाद सामने आई है। संसद में एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा था कि सर्वोच्च अदालत के फैसले में ऐसा स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि नदी पर कोई ढांचा खड़ा करने से पहले ऊपरी राज्य को निचले तटीय राज्यों की पूर्व सहमति लेना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री विजय ने केंद्रीय मंत्री के इस तर्क को बेहद निराशाजनक और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग उठाई है।

    प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कानूनी और तकनीकी पहलुओं का हवाला देते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने पूर्व के फैसलों का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने अलमट्टी डैम मामले में शीर्ष अदालत की संविधान पीठ के फैसले का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में निचले राज्यों की सहमति और केंद्र की मंजूरी पूरी तरह अनिवार्य है। इसके अलावा न्यायाधिकरण की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ऊपरी राज्य बिना आपसी सहमति के ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकता जिससे निचले राज्यों के तय पानी के शेड्यूल पर विपरीत प्रभाव पड़े।

    मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मेकेदातु परियोजना केवल एक साधारण इंजीनियरिंग प्रस्ताव भर नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के लाखों किसानों की आजीविका और जीवनरेखा से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। कावेरी नदी दक्षिण भारत के बड़े भूभाग के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। यही वजह है कि केंद्रीय जल आयोग ने पूर्व में विस्तृत रिपोर्ट को न्यायाधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाने के लिए वापस भेज दिया था। तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से मांग की है कि निचले राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही आगे कोई कदम उठाया जाए।

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रतिनिधि संबंधी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर टली सुनवाई, शीर्ष अदालत ने कहा- बातचीत चल रही है तो दे रहे हैं समय

    इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रतिनिधि संबंधी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर टली सुनवाई, शीर्ष अदालत ने कहा- बातचीत चल रही है तो दे रहे हैं समय

    नई दिल्ली । देश की सर्वोच्च अदालत ने मथुरा स्थित ऐतिहासिक श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़ी एक महत्वपूर्ण याचिका पर होने वाली सुनवाई को आगामी 12 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, पीठ को यह अवगत कराया गया कि इस विवाद से जुड़े विभिन्न हिंदू पक्षों के बीच आपस में कुछ अनौपचारिक बातचीत का दौर चल रहा है। यह आंतरिक विचार-विमर्श इस मुख्य बिंदु पर केंद्रित है कि अदालत के समक्ष चल रहे विभिन्न मुकदमों में से किसे मुख्य मुकदमा माना जाए और किसका दावा प्राथमिक होगा। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने वादियों के बीच चल रही इसी ऑफ-द-रिकॉर्ड चर्चा को ध्यान में रखते हुए मामले को आगे बढ़ाने का निर्देश जारी किया।

    अदालत की कार्यवाही की शुरुआत में ही पीठ ने विभिन्न हिंदू पक्षों का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं से उनके बीच चल रही इस आंतरिक बातचीत की प्रगति के संबंध में सीधे सवाल पूछे। न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि यदि वादियों के बीच मामले को सुलझाने अथवा मुकदमों के एकीकरण को लेकर कोई गंभीर विमर्श चल रहा है, तो अदालत उन्हें उचित समय देने के लिए तैयार है। इस दौरान एक हिंदू पक्ष के वकील ने पीठ से यह भी आग्रह किया कि इस आंतरिक बातचीत को पूरी तरह अनौपचारिक रखा जाए और न्यायालय अपने लिखित आदेश में इस चर्चा का उल्लेख दर्ज न करे। हालांकि, पीठ ने तार्किक रुख अपनाते हुए कहा कि यदि पक्षकारों के बीच कोई सकारात्मक विमर्श चल रहा है, तो उसे आदेश में दर्ज करने में कोई विधिक बाधा नहीं होनी चाहिए।

    सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मामले को बार-बार स्थगित किए जाने की प्रवृत्ति पर भी ध्यान दिलाया। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस संवेदनशील मामले को पूर्व में भी कई बार टाला जा चुका है, इसलिए इस बार स्थगन का आदेश केवल इसी ठोस आधार पर दिया जा रहा है कि पक्षकार आपसी सहमति और मुकदमों के स्वरूप को लेकर किसी निर्णय पर पहुंच सकें। अदालत ने वकीलों को आश्वस्त किया कि वे किसी भी पक्ष को बातचीत के लिए विवश नहीं कर रहे हैं, बल्कि वादियों के बीच के समन्वय को देखते हुए ही प्रक्रिया को समय दे रहे हैं।

    यह पूरा विधिक विवाद दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट के वर्ष 2025 के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में एक विशिष्ट मुकदमे से जुड़े हिंदू पक्ष को भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों का आधिकारिक प्रतिनिधि स्वीकार कर लिया था, जिसे दूसरे हिंदू पक्ष ने चुनौती दी है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस प्रकार का एकपक्षीय प्रतिनिधित्व अन्य वादियों के दावों को प्रभावित कर सकता है। अब सभी पक्षों की नजरें 12 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि हिंदू पक्षों की आपसी बातचीत से मुकदमों की रूपरेखा में क्या बदलाव आता है।

  • MP: सतना के नागौद राजघराने में दो पत्नियों का विवाद….. दूसरी पत्नी ने पहली पर चलाई गोलियां, हालत गंभीर

    MP: सतना के नागौद राजघराने में दो पत्नियों का विवाद….. दूसरी पत्नी ने पहली पर चलाई गोलियां, हालत गंभीर


    सतना।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिले (Satna district) में नागौद राजघराने (Nagod Royal Family) से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां परसमनिया गढ़ी में लंबे समय से चल रहा पारिवारिक विवाद अचानक खूनी संघर्ष में बदल गया. विवाद में कथित तौर पर दूसरी पत्नी ने पहली पत्नी पर गोली चला दी, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया. यह मामला नागौद राजघराने से जुड़ा है. रूपेंद्र सिंह (Rupendra Singh) उर्फ बाबा राजा, जो पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक नागेंद्र सिंह के भतीजे बताए जाते हैं, उनकी पहली पत्नी सुनीता सिंह और दूसरी पत्नी योगिता सिंह के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था. दोनों के बीच पारिवारिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था।

    जानकारी के अनुसार, विवाद को सुलझाने के लिए योगिता सिंह दो दिन पहले अपने परिजनों के साथ परसमनिया गढ़ी पहुंची थीं. यहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी, लेकिन गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे स्थिति अचानक बिगड़ गई और विवाद बढ़ गया. इसी दौरान आरोप है कि सुनीता सिंह ने अपनी लाइसेंसी 22 बोर राइफल उठा ली और कई राउंड फायरिंग कर दी. बताया जा रहा है कि करीब नौ राउंड गोलियां चलाई गईं. फायरिंग के दौरान एक गोली योगिता सिंह के पेट में जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ीं।

    घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायल महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. पहले उन्हें सतना में प्राथमिक इलाज दिया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर रीवा के विंध्य अस्पताल रेफर कर दिया गया. अस्पताल में डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर उनके पेट में फंसी गोली निकाल दी. फिलहाल योगिता सिंह आईसीयू में हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई. परसमनिया गढ़ी में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।


    संपत्ति और पारिवारिक विवाद के एंगल से भी हो रही पड़ताल

    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी सुनीता सिंह को हिरासत में ले लिया है. साथ ही घटना में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी राइफल भी जब्त कर ली गई है. सतना के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रेम लाल कुर्वे ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह विवाद लंबे समय से चल रहा था और मामला संपत्ति या पारिवारिक कारणों से जुड़ा हो सकता है. पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवाद किस तरह इतना बढ़ गया कि गोली चलाने की नौबत आ गई।

  • अधूरा सच और सुर्खियां: रणवीर सिंह से बैन हटने के बाद फेडरेशन ने कंगना रनौत के दावों को बताया बेबुनियाद

    अधूरा सच और सुर्खियां: रणवीर सिंह से बैन हटने के बाद फेडरेशन ने कंगना रनौत के दावों को बताया बेबुनियाद


    नई दिल्ली। फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर अभिनेता रणवीर सिंह और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के बीच उपजा गतिरोध भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इस विवाद ने मनोरंजन उद्योग के भीतर एक नई वैचारिक जंग को जन्म दे दिया है। फेडरेशन द्वारा रणवीर सिंह पर से प्रतिबंध हटाने की घोषणा के तुरंत बाद ही अभिनेत्री और राजनेता कंगना रनौत तथा FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। पूरा मामला उस समय गरमा गया जब कंगना रनौत ने एक सार्वजनिक मंच से इस पूरे विवाद पर टिप्पणी की, जिसके जवाब में अशोक पंडित ने उन पर तथ्यों को जाने बिना केवल सुर्खियां बटोरने के लिए बयान देने का गंभीर आरोप लगाया है।

    दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब कंगना रनौत अपनी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम में शामिल हुईं। वहां जब मीडिया ने उनसे रणवीर सिंह पर लगे प्रतिबंध को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने रणवीर का खुलकर समर्थन किया। कंगना ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि जब किसी व्यक्ति का कद और हैसियत बढ़ती है, तो उसके दुश्मनों की संख्या भी स्वतः ही बढ़ जाती है। सफलता के मार्ग में विरोधियों का आना स्वाभाविक है। इसके साथ ही उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उन्हें भी फिल्म उद्योग के कई धड़ों द्वारा प्रतिबंधित किया जा चुका है। कंगना ने रणवीर सिंह को सांत्वना देते हुए कहा था कि उन्हें इस बात से खुश होना चाहिए कि उनका कद अब इतना बड़ा हो चुका है कि लोग उनके खिलाफ खड़े हो रहे हैं।

    कंगना रनौत के इस बयान पर फिल्म उद्योग के कामगारों और तकनीशियनों की सबसे बड़ी संस्था FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने एक साक्षात्कार के दौरान कंगना को सीधे तौर पर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि फिल्म बिरादरी के कुछ लोग बिना सोचे-समझे और बिना जमीनी सच्चाई को जाने केवल समाचारों में बने रहने के लिए गैर-जिम्मेदाराना प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कंगना के दावों का खंडन करते हुए अशोक पंडित ने अत्यंत सख्त शब्दों में कहा कि फेडरेशन किसी दुर्भावना के तहत कार्रवाई नहीं करता। उन्होंने कहा कि यदि कंगना को प्रतिबंधित किया गया था, तो उसकी वजह उनकी बेवजह की बयानबाजी थी, न कि उनका बढ़ता हुआ कद। उन्होंने साफ किया कि संगठन को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या राय रखता है, क्योंकि फेडरेशन के सामने उद्योग से जुड़े हजारों दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का भविष्य होता है।

    इस दौरान अशोक पंडित ने फेडरेशन के रुख को पूरी तरह से स्पष्ट करते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य कभी भी रणवीर सिंह को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना या प्रताड़ित करना नहीं था। उन्होंने पूरे मामले की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए बताया कि यह विवाद मूल रूप से आगामी फिल्म ‘डॉन 3’ से जुड़ा था, जिसके निर्माता-निर्देशक फरहान अख्तर ने फेडरेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, रणवीर सिंह के अचानक इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से अलग होने के कारण निर्माताओं को भारी वित्तीय क्षति का सामना करना पड़ा था। इसी शिकायत और आर्थिक नुकसान के तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए FWICE ने अभिनेता के खिलाफ असहयोग निर्देश जारी किया था।

    अशोक पंडित के मुताबिक, ऐसे बड़े विवादों का नकारात्मक असर केवल मुख्य अभिनेताओं पर नहीं पड़ता, बल्कि उस फिल्म से जुड़े सैकड़ों छोटे तकनीशियनों, दैनिक कामगारों और सह-कलाकारों के रोजगार पर भी पड़ता है। इसलिए फेडरेशन का कोई भी कदम किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि संपूर्ण फिल्म उद्योग के व्यावसायिक अनुशासन और सामूहिक हितों की रक्षा के लिए उठाया जाता है। बहरहाल, बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से फेडरेशन ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी अपने सभी निर्देशों को आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है, जिससे ‘डॉन 3’ से जुड़ा विवाद तो सुलझ गया है, लेकिन कंगना और अशोक पंडित के बीच शुरू हुआ यह नया वाकयुद्ध आने वाले दिनों में और गहराने की आशंका है।