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  • शिवपुरी में नवजात की मौत से मचा हड़कंप, नाले में मिला महज 775 ग्राम वजन का बालक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    शिवपुरी में नवजात की मौत से मचा हड़कंप, नाले में मिला महज 775 ग्राम वजन का बालक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी में मंगलवार को जिला अस्पताल के पिछले गेट के पास नाले में नवजात बालक का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात के शव को नाले से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक नवजात की नाभि पर कॉर्ड क्लैंप लगा हुआ था। इससे उसके अस्पताल में जन्म लेने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि बालक का जन्म शिवपुरी जिला अस्पताल में हुआ था या किसी दूसरे अस्पताल में। पुलिस इस संबंध में जानकारी जुटा रही है और नवजात के माता-पिता की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

    जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल के पिछले गेट के पास स्थित नाले में नवजात का शव दिखाई देने के बाद पुलिस को सूचना दी गई थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को बाहर निकलवाया। जांच के दौरान नवजात का वजन केवल 775 ग्राम पाया गया। इतना कम वजन होने के कारण उसके जन्म के समय की स्थिति और मौत से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरपी सिंह के मुताबिक नवजात का वजन बेहद कम था। इतने कम वजन वाले शिशु के जीवित रहने की संभावना कम होती है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो दिनों के दौरान जिला अस्पताल में कोलारस सिरसौद और पिछोर क्षेत्र से जुड़े तीन नवजात की मौत हुई थी। इन बच्चों के परिजन उनके शव अपने साथ ले गए थे। अब यह पता लगाया जा रहा है कि नाले में मिले नवजात का उन घटनाओं से कोई संबंध है या नहीं। फिलहाल दोनों मामलों के बीच संबंध होने की पुष्टि नहीं हुई है।

    पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि नवजात को नाले में कैसे और किन परिस्थितियों में छोड़ा गया। नाभि पर कॉर्ड क्लैंप मिलने के कारण उसके अस्पताल में जन्म लेने की संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है। जांच के तहत आसपास के अस्पतालों में जन्म और नवजात से संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई जा सकती है। इसके साथ ही घटनास्थल के आसपास की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भी जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य नवजात की पहचान और उसके परिवार तक पहुंचना है।

    कोतवाली थाने के एसआई सुमित शर्मा ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। फिलहाल पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नवजात का जन्म कहां हुआ था और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। घटना ने अस्पताल परिसर के आसपास सुरक्षा और नवजात की पहचान से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। हालांकि जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • जिला अस्पताल पर उठे सवाल: मासूम की मौत के बाद परिजनों का हंगामा

    जिला अस्पताल पर उठे सवाल: मासूम की मौत के बाद परिजनों का हंगामा

    मध्य प्रदेश।  अशोकनगर  जिले के महुअन गांव में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। पलंग से गिरकर घायल हुए छह माह के मासूम आदर्श चंदेल की मंगलवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। मासूम की मौत के बाद जिला अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई और परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए।

    जानकारी के मुताबिक, महुअन गांव निवासी विकास चंदेल का छह माह का बेटा आदर्श रविवार शाम घर में पलंग पर खेल रहा था। उसी दौरान उसकी मां रवि चंदेल घर से बाहर पानी भरने चली गई थीं। घर लौटने पर उन्होंने देखा कि मासूम पलंग से नीचे फर्श पर गिरा पड़ा है। बच्चे के सिर और शरीर में गंभीर चोटें आई थीं। परिवार के लोग तुरंत उसे इलाज के लिए ईसागढ़ के एक निजी क्लिनिक लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार किया गया।

    परिजनों का कहना है कि सोमवार शाम तक बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, बल्कि उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। इसके बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि मासूम की हालत में सुधार होगा, लेकिन मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

    बच्चे की मौत के बाद अस्पताल परिसर में मातम का माहौल बन गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने समय पर सही उपचार नहीं किया और बार-बार पूछने के बावजूद बच्चे की हालत के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते बेहतर इलाज मिलता, तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी।

    मासूम आदर्श की मौत के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। घटना के बाद गांव में भी शोक की लहर फैल गई। पड़ोसियों और रिश्तेदारों का कहना है कि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    यह हादसा एक बार फिर छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों को कभी भी पलंग या ऊंची जगह पर अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं, परिजन जिला अस्पताल के डॉक्टरों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।