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  • बारिश में टपकने लगा जिला अस्पताल का ICU, मरीजों के बेड तक पहुंचा पानी, बढ़ी संक्रमण और शॉर्ट सर्किट की आशंका

    बारिश में टपकने लगा जिला अस्पताल का ICU, मरीजों के बेड तक पहुंचा पानी, बढ़ी संक्रमण और शॉर्ट सर्किट की आशंका


    सीहोर। मूसलाधार बारिश ने सीहोर जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। अस्पताल के सबसे संवेदनशील आईसीयू वार्ड में एसी और छत से पानी टपकने लगा, जिससे गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिन मरीजों को अत्याधुनिक उपचार और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, उनके बेड तक बारिश का पानी पहुंच रहा है।

    जानकारी के अनुसार आईसीयू में लगा एयर कंडीशनर पूरी तरह फेल हो गया है। ठंडी हवा देने की बजाय उससे लगातार पानी रिस रहा है। छत और पाइपलाइन से भी पानी टपकने के कारण वार्ड में जगह-जगह सीलन और जलभराव की स्थिति बन गई है। आईसीयू में वेंटिलेटर और अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर भर्ती मरीजों के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

    मरीजों के परिजनों का आरोप है कि कई बार अस्पताल प्रबंधन और ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों को इस समस्या की जानकारी दी गई, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पानी लगातार बेड के आसपास टपकता रहा और मरीजों को असुविधा झेलनी पड़ी।

    विशेषज्ञों के अनुसार आईसीयू जैसे वार्ड में नमी और पानी का रिसाव संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है। इसके अलावा वार्ड में लगी जीवन रक्षक मशीनें और अन्य चिकित्सा उपकरण बिजली से संचालित होते हैं। ऐसे में लगातार पानी टपकने से शॉर्ट सर्किट या किसी बड़े विद्युत हादसे की आशंका भी बनी हुई है।

    करोड़ों रुपये के बजट और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच जिला अस्पताल की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। मरीजों और उनके परिजनों ने आईसीयू की तत्काल मरम्मत, एसी सिस्टम को दुरुस्त करने और सुरक्षित उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

    स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं मरीजों के परिजन उम्मीद जता रहे हैं कि आईसीयू जैसे अति संवेदनशील वार्ड की खामियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी मरीज की जान जोखिम में न पड़े।

  • एक्स रे विभाग में सांप दिखते ही मची अफरा तफरी देवास जिला अस्पताल में आधे घंटे बाद मिला राहत

    एक्स रे विभाग में सांप दिखते ही मची अफरा तफरी देवास जिला अस्पताल में आधे घंटे बाद मिला राहत


    देवास । देवास जिला अस्पताल में गुरुवार सुबह उस समय अफरा तफरी का माहौल बन गया जब एक्स रे विभाग में अचानक एक सांप दिखाई दिया। सांप को देखते ही मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही अस्पताल के सुरक्षा गार्ड मौके पर पहुंचे और करीब आधे घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद सांप को सुरक्षित पकड़ लिया गया। इसके बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

    जानकारी के अनुसार सुबह करीब 10 बजे अस्पताल का स्टाफ अपनी ड्यूटी पर पहुंचा था। इसी दौरान एक्स रे विभाग के फर्श पर एक सांप रेंगता हुआ दिखाई दिया। अचानक सांप नजर आने से वहां मौजूद मरीज और कर्मचारी घबरा गए। कुछ ही देर में सांप पास रखी एक अलमारी के भीतर घुस गया जिससे उसे पकड़ना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया।

    घटना की सूचना तुरंत अस्पताल प्रबंधन और सुरक्षा गार्डों को दी गई। गार्ड मौके पर पहुंचे और सबसे पहले सुरक्षा के मद्देनजर एक्स रे विभाग में मरीजों और अन्य लोगों का प्रवेश अस्थायी रूप से रोक दिया गया ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।

    इसके बाद गार्डों ने अलमारी में छिपे सांप को बाहर निकालने के लिए सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान शुरू किया। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद सांप को सुरक्षित पकड़ लिया गया और उसे एक थैले में रखकर अस्पताल परिसर से बाहर ले जाया गया। बाद में उसे प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

    समय रहते सांप को पकड़ लिए जाने से किसी मरीज या कर्मचारी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और अस्पताल की सेवाएं जल्द ही सामान्य रूप से शुरू कर दी गईं। घटना के बाद कुछ समय तक मरीजों में डर का माहौल जरूर रहा लेकिन रेस्क्यू पूरा होने के बाद स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई।

    अस्पताल प्रशासन ने बताया कि बरसात के मौसम में सांप और अन्य जीव-जंतुओं के निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में परिसर की नियमित साफ-सफाई और निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • मैटरनिटी परिसर की घटना के बाद एक्शन देवास जिला अस्पताल ने बदली व्यवस्था अब प्रसव से पहले होगी विशेष निगरानी

    मैटरनिटी परिसर की घटना के बाद एक्शन देवास जिला अस्पताल ने बदली व्यवस्था अब प्रसव से पहले होगी विशेष निगरानी


    देवास  देवास जिला अस्पताल ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को उनकी संभावित प्रसव तिथि से सात दिन पहले अस्पताल में भर्ती किया जाएगा ताकि प्रसव के दौरान किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। यह निर्णय हाल ही में मैटरनिटी परिसर में हुई एक प्रसव संबंधी घटना के बाद लिया गया है जिसमें महिला के अस्पताल देर से पहुंचने की बात सामने आई थी।

    गुरुवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सरोजनी जेम्स बैक ने जिला अस्पताल की मैटरनिटी विंग का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भर्ती गर्भवती महिलाओं से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का भी जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कई हाई रिस्क गर्भवती महिलाएं प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद काफी देर से अस्पताल पहुंचती हैं जिससे मां और नवजात दोनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो जाता है।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को संभावित प्रसव तिथि से सात दिन पहले अस्पताल में भर्ती कर उनकी नियमित चिकित्सकीय निगरानी की जाएगी। इससे किसी भी जटिल स्थिति का समय रहते उपचार संभव हो सकेगा और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    सिर्फ हाई रिस्क गर्भवतियों के लिए ही नहीं बल्कि सामान्य गर्भवती महिलाओं के लिए भी नई पहल शुरू की गई है। अस्पताल प्रशासन अब संभावित प्रसव तिथि से चार दिन पहले गर्भवती महिलाओं से फोन पर संपर्क करेगा और उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचकर भर्ती होने के लिए प्रेरित करेगा। इसका उद्देश्य अंतिम समय की भागदौड़ और प्रसव के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं को कम करना है।

    निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ ने अस्पताल के सोनोग्राफी केंद्र और चिकित्सकों के कक्ष का भी निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और सरकार द्वारा संचालित मातृ स्वास्थ्य योजनाओं का पूरा लाभ उठाने की सलाह भी दी।

    अस्पताल प्रशासन का मानना है कि समय पर भर्ती और लगातार चिकित्सकीय निगरानी से मातृ मृत्यु और नवजात शिशुओं से जुड़े जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देना और हर गर्भवती महिला को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

  • सीहोर बस स्टैंड पर युवक पर लाठी-डंडों से हमला, गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती

    सीहोर बस स्टैंड पर युवक पर लाठी-डंडों से हमला, गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती


    मध्यप्रदेश । सीहोर शहर के प्रमुख और व्यस्त बस स्टैंड क्षेत्र में बीती रात एक युवक पर हुए कथित हमले ने लोगों को झकझोर दिया। पुलिस के अनुसार, बस स्टैंड के पास कुछ लोगों द्वारा युवक के साथ मारपीट किए जाने की सूचना मिली थी। इस दौरान युवक पर लाठी-डंडों से हमला किए जाने का आरोप है, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    घायल युवक को तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार युवक के सिर समेत शरीर के कई हिस्सों में चोटें आई हैं। चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार किया जा रहा है। फिलहाल उसकी स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    पुलिस के मुताबिक घटना के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। घायल युवक और उसके परिजनों से पूछताछ की जा रही है ताकि विवाद के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हमला किसी विवाद के चलते हुआ हो सकता है, लेकिन पुलिस ने अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है।

    बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में हुई इस घटना ने स्थानीय नागरिकों के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के समय आसपास काफी लोग मौजूद थे, लेकिन हमलावरों के आक्रामक रवैये के कारण किसी ने बीच-बचाव करने की हिम्मत नहीं जुटाई। मारपीट के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय बस स्टैंड और आसपास के क्षेत्रों में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग भी उठने लगी है। नागरिकों का मानना है कि प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किए जाने की आवश्यकता है, ताकि इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घायल युवक और उसके परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। शिकायत और जांच के आधार पर प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। साथ ही आरोपियों की पहचान के लिए बस स्टैंड और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। जांच टीम संभावित संदिग्धों की तलाश में जुटी हुई है।

    पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द ही उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी के पास घटना से संबंधित कोई जानकारी हो तो वह पुलिस को उपलब्ध कराए, जिससे जांच में मदद मिल सके। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • जिला अस्पताल में बड़ा फर्जीवाड़ा: ब्लड डोनेशन के नाम पर ग्रामीण से ठगी, आरोपी फरार

    जिला अस्पताल में बड़ा फर्जीवाड़ा: ब्लड डोनेशन के नाम पर ग्रामीण से ठगी, आरोपी फरार


    नई दिल्ली । नरसिंहपुर जिला अस्पताल में ब्लड उपलब्ध कराने के नाम पर ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर में सक्रिय कुछ दलालों ने एक ग्रामीण से उसकी पत्नी के इलाज के लिए ब्लड दिलाने के बहाने ढाई हजार रुपये ऐंठ लिए और बाद में मौके से फरार हो गए। इस घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार, शनिवार को एक दूरस्थ गांव से आया ग्रामीण अपनी पत्नी को जिला अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज करा रहा था। डॉक्टरों ने महिला के लिए ‘ओ पॉजिटिव’ ब्लड की आवश्यकता बताई थी। इसके बाद ग्रामीण ब्लड बैंक पहुंचा, जहां उसे नियमों के तहत डोनर लाने की बात कही गई।

    इसी दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद एक संदिग्ध व्यक्ति, जिसे नशेड़ी और दलाल बताया जा रहा है, ने ग्रामीण से संपर्क किया। उसने ब्लड उपलब्ध कराने का झांसा देकर ढाई हजार रुपये की मांग की। मजबूरी और पत्नी की हालत को देखते हुए ग्रामीण ने पैसे दे दिए और उस व्यक्ति को भोजन भी कराया। लेकिन जब ब्लड देने की बारी आई, तो आरोपी वहां से फरार हो गया।

    ठगी का अहसास होने पर ग्रामीण ने अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों को पूरी घटना बताई। मामला तुरंत ब्लड बैंक अधिकारियों और सिविल सर्जन तक पहुंचा। इसके बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और पीड़ित महिला को तत्काल नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध कराया गया।

    रेडक्रॉस रक्त बैंक प्रभारी डॉ. स्वाति मीणा ने स्पष्ट किया कि इस घटना में ब्लड बैंक के किसी कर्मचारी की संलिप्तता नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्लड बैंक के बाहर सक्रिय दलालों और असामाजिक तत्वों पर रोक लगाने के लिए पहले भी सिविल सर्जन को पत्र लिखा गया था और अब कलेक्टर को भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पत्र भेजा जाएगा।

    उन्होंने यह भी बताया कि रक्त की खरीद-फरोख्त जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए जागरूकता पोस्टर लगाए गए हैं, ताकि लोग ऐसे किसी भी झांसे में न आएं और तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दें।

    वहीं, सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि पीड़ित ग्रामीण ने किसी भी कर्मचारी पर आरोप नहीं लगाया है। मामला केवल बाहरी व्यक्ति की ठगी से जुड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि भविष्य में इस तरह की कोई शिकायत मिलती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अगर किसी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा।

  • ग्वालियर में आवारा सांड का हमला: 6 साल के मासूम को पटककर घसीटा, सिर पर 25 टांके

    ग्वालियर में आवारा सांड का हमला: 6 साल के मासूम को पटककर घसीटा, सिर पर 25 टांके


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आवारा मवेशियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। मुरार क्षेत्र के त्यागी नगर में बीते 9 फरवरी को एक 6 साल के मासूम गोविंद लक्षकार पर आवारा सांड ने जानलेवा हमला कर दिया। घटना सीसीटीवी में कैद हो गई जिससे पता चलता है कि किस तरह सांड ने मासूम को बेरहमी से पटककर घसीटा।

    मासूम गोविंद को कोचिंग से घर लौटते समय यह हमला हुआ। उसी समय उसकी बहन नंदनी ने चीख-पुकार मचाई जिसे सुनकर आसपास के लोग तुरंत पहुंच गए और सांड को भगाकर बच्चे को बचाया। घायल मासूम को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने उसके सिर पर 25 टांके लगाए। साथ ही शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चोटें आई हैं। इलाज के बाद मासूम को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

    घटना की सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि सांड मासूम को जोर-जोर से पटक रहा है और जमीन पर घसीट रहा है। यह दृश्य लोगों में गुस्सा और चिंता दोनों पैदा कर रहा है।

    इस घटना ने नगर निगम के आवारा मवेशियों को पकड़ने के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम समय-समय पर आवारा मवेशियों के नियंत्रण और पकड़ने का दावा करता रहता है लेकिन मुरार क्षेत्र में हुई इस घटना ने यह दिखाया कि वास्तविक स्थिति कितनी खतरनाक है।

    स्थानीय लोग और व्यापारी अब नगर निगम से इस समस्या को गंभीरता से लेने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि आवारा मवेशी सड़क पर घूमते हैं बच्चे और बुजुर्ग खतरे में हैं और कई बार ऐसे मवेशियों के कारण दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।

    पुलिस और नगर निगम की टीमों को इस घटना के बाद सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि केवल जुर्माना या चेतावनी से काम नहीं चलेगा बल्कि आवारा मवेशियों को पकड़कर सुरक्षित गौशालाओं में रखने की व्यवस्था करनी होगी।

    यह घटना ग्वालियर में आवारा मवेशियों की समस्या की एक बार फिर तस्वीर सामने लाती है जिसमें आम नागरिकों की जान जोखिम में है। यदि समय रहते बच्चे को बचाया नहीं जाता तो यह घटना और भी भयावह परिणाम दे सकती थी।

  • उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने फायर सेफ्टी को प्राथमिकता देते हुए मेडिकल कॉलेज के मरम्मत कार्य जल्द पूर्ण करने के दिए निर्देश

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने फायर सेफ्टी को प्राथमिकता देते हुए मेडिकल कॉलेज के मरम्मत कार्य जल्द पूर्ण करने के दिए निर्देश


    भोपाल । उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक कर विभागीय योजनाओं, निर्माण कार्यों और मानव संसाधन से जुड़ी प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कार्यों में समयबद्धता और गुणवत्ता दोनों का ध्यान रखना आवश्यक है, ताकि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। इसी कड़ी में उन्होंने श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा में फायर सेफ्टी से संबंधित लंबित मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही कॉलेज में आवश्यक नवीन कार्यों की स्वीकृति के लिए सभी औपचारिकताएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने को कहा, ताकि कोई भी सुरक्षा संबंधी चूक न रहे और कॉलेज में सेवाओं का सुचारू संचालन हो सके।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में फायर सेफ्टी एक संवेदनशील विषय है और इसे किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने निर्देश दिए कि फायर सेफ्टी से जुड़े सभी मुद्दों की सूची तैयार कर, मरम्मत और नवीनीकरण कार्य जल्द से जल्द शुरू किए जाएं। साथ ही, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और कार्य की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।

    इसके अलावा उन्होंने 16 जिला चिकित्सालयों और क्रिटिकल केयर हेल्थ ब्लॉकों के लिए आवश्यक पदों की स्वीकृति संबंधी प्रस्ताव को प्राथमिकता से तैयार करने और समस्त औपचारिकताएं पूर्ण कर कैबिनेट अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस संबंध में उन्होंने कहा कि मानव संसाधन की कमी से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए समय रहते पदों की स्वीकृति और भर्ती प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

    उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों में फर्नीचर और अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के साथ-साथ उपकरणों और संसाधनों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है, ताकि कॉलेजों का संचालन शुरू होते ही मरीजों और छात्रों को सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए और कहा कि किसी भी तरह की देरी स्वास्थ्य सेवा के विस्तार में बाधा बन सकती है।

    बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री धनराजु एस सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि सभी योजनाओं और निर्माण कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा होती रहे और समय-समय पर आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि विभागीय लक्ष्य समय पर हासिल हो सकें।

  • भोपाल के जेपी अस्पताल में मरीज को दी फफूंद लगी दवा सीनियर डॉक्टर नदारद ओपीडी में इंटर्न डॉक्टरों के भरोसे इलाज

    भोपाल के जेपी अस्पताल में मरीज को दी फफूंद लगी दवा सीनियर डॉक्टर नदारद ओपीडी में इंटर्न डॉक्टरों के भरोसे इलाज


    भोपाल । भोपाल के जेपी अस्पताल जिला चिकित्सालय में एक गंभीर घटना सामने आई है जहां शुक्रवार शाम एक मरीज को फफूंद लगी दवा दी गई। यह मामला दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है। मरीज ने दवा लेने से पहले उसे देखा जिससे किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सका। यदि मरीज ने दवा की स्थिति का ध्यान नहीं किया होता तो यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकती थी।

    मरीज सतीष सेन ने बताया कि वे शुक्रवार शाम करीब पांच बजे पैर में फ्रैक्चर की आशंका के चलते जेपी अस्पताल की आर्थोपेडिक ओपीडी में पहुंचे थे। ओपीडी में उस वक्त कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं थे और इंटर्न डॉक्टरों ने उनका परीक्षण किया। इसके बाद मरीज को एक्स-रे की सिफारिश की गई और दर्द की दवा लिखी गई जो बाद में फफूंद लगी हुई मिली।

    इस घटना ने अस्पताल में चिकित्सा गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीज को अगर दवा की स्थिति का पता न चलता तो इसे स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा माना जा सकता था। इसके अलावा सीनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति ने भी ओपीडी में इलाज के स्तर को प्रभावित किया।

    इस मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और स्वास्थ्य संगठनों नेप्रशासन से कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचा जासके और मरीजों को बेहतर इलाज और दवाइयां मिल सकें। अस्पताल प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत कदम उठाने चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीजों को गुणवत्ता वाली दवाइयां और इलाज मिले।