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  • डॉक्टरों के परिवार की बेटी कैसे बनीं अभिनेत्री? छोटी बुआ से शुरू हुआ फिल्मों का सफर, मां ने दिया सबसे बड़ा सहारा

    डॉक्टरों के परिवार की बेटी कैसे बनीं अभिनेत्री? छोटी बुआ से शुरू हुआ फिल्मों का सफर, मां ने दिया सबसे बड़ा सहारा


    नई दिल्ली। अभिनेत्री दिव्या दत्ता आज 25 सितंबर को अपना 49वां जन्मदिन मना रही हैं। करीब तीन दशक से ज्यादा लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने अलग अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी खास पहचान बनाई है। लुधियाना जैसे शहर से निकलकर मुंबई की फिल्मी दुनिया तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। इसके पीछे परिवार का साथ मेहनत संघर्ष और खुद पर भरोसा सबसे बड़ी वजह रहे। दिव्या दत्ता का जन्म 25 सितंबर 1977 को पंजाब के लुधियाना में डॉक्टर माता पिता के घर हुआ था। परिवार में ज्यादातर लोग डॉक्टर थे लेकिन बचपन से ही दिव्या का मन अभिनय और फिल्मों की तरफ खिंचने लगा था।

    दिव्या दत्ता पढ़ाई में भी काफी अच्छी थीं। बचपन में उनके माता पिता दोनों सरकारी डॉक्टर थे और उनके घर मरीजों का आना जाना लगा रहता था। लोगों के अलग अलग बोलने के अंदाज को सुनते सुनते दिव्या ने कई तरह की भाषा सीख ली थी। उनके पिता को लगा कि बच्ची को कुछ समय दिल्ली में अपनी बुआओं के साथ रहना चाहिए। इसके बाद दिव्या दिल्ली में अपनी तीन बुआओं के पास रहने लगीं। उनकी बुआएं शिक्षिका थीं और उन्होंने दिव्या की पढ़ाई के साथ उनके व्यक्तित्व को भी निखारा।

    दिव्या के भीतर फिल्मों का शौक उनकी सबसे छोटी बुआ ने जगाया। उन्हें फिल्में देखने का बहुत शौक था और दिव्या भी उनके साथ फिल्में देखने लगीं। धीरे धीरे फिल्मों की दुनिया उन्हें आकर्षित करने लगी। वह स्कूल जाने के लिए भी अपनी पसंदीदा अभिनेत्रियों जैसा हेयरस्टाइल बनवाना चाहती थीं। कभी वह नीतू कपूर की तरह दिखना चाहतीं तो कभी जीनत अमान और हेमा मालिनी से प्रभावित होतीं। इसी दौर में उनके भीतर अभिनेत्री बनने का सपना आकार लेने लगा।

    लेकिन दिव्या की जिंदगी में सात साल की उम्र में बड़ा बदलाव आया। उनके पिता का अचानक निधन हो गया। इस घटना ने बेहद कम उम्र में उन्हें जिम्मेदार बना दिया। इसके बाद उनकी मां डॉ नलिनी दत्ता ने दिव्या और उनके भाई की परवरिश अकेले की। दिव्या अपनी मां के बेहद करीब थीं और उनके साथ रहते हुए उन्होंने अभिनय की कई बारीकियां अनजाने में सीख लीं।

    दिव्या बताती हैं कि उनकी मां को पुरानी अभिनेत्रियां पसंद थीं और वह अक्सर उनके अंदाज में एक्सप्रेशन देती थीं। दिव्या भी मां की नकल किया करती थीं। दोनों साथ में गाने सुनते और छत पर डांस करते थे। मां के हाव भाव और अभिनय की शैली को देखते देखते दिव्या के भीतर अभिनय की समझ विकसित होती गई। आगे चलकर फिल्म ट्रेन टू पाकिस्तान में काम करते समय मां से सीखी ये बातें उनके काफी काम आईं।

    मुंबई पहुंचने की कहानी भी दिलचस्प है। दिव्या को फिल्मी मैगजीन पढ़ने का शौक था। एक दिन उन्होंने स्टारडस्ट में छपे टैलेंट हंट का फॉर्म भर दिया लेकिन बाद में इसे भूल गईं। जब उनका फॉर्म स्वीकार हो गया तो उन्होंने अपनी मां को बताया कि वह अभिनेत्री बनना चाहती हैं और मुंबई जाना चाहती हैं। परिवार में कई लोगों ने इस फैसले का विरोध किया लेकिन उनकी मां बेटी के सपने के साथ मजबूती से खड़ी रहीं।

    मुंबई आने के बाद दिव्या को कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने फिल्मों में अपनी जगह बनाई और कई यादगार किरदार निभाए। आज दिव्या दत्ता का नाम उन अभिनेत्रियों में लिया जाता है जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनाई है। उनके जन्मदिन पर उनकी यह कहानी बताती है कि एक छोटे शहर से शुरू हुआ सपना परिवार के भरोसे और लगातार संघर्ष के दम पर मायानगरी तक पहुंच सकता है।

  • अमिताभ बच्चन की सादगी का राज़: दिव्या दत्ता ने बताया क्यों उन्हें कहते हैं ‘असली महानायक’..

    अमिताभ बच्चन की सादगी का राज़: दिव्या दत्ता ने बताया क्यों उन्हें कहते हैं ‘असली महानायक’..


    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन अपने अभिनय के साथ-साथ अपने अनुशासित जीवन, विनम्र स्वभाव और रिश्तों को निभाने के अनोखे तरीके के लिए भी जाने जाते हैं। लंबे समय से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय अमिताभ बच्चन को लेकर सह-कलाकार अक्सर ऐसे अनुभव साझा करते रहते हैं, जो उनके व्यक्तित्व को और भी प्रेरणादायक बना देते हैं। इसी क्रम में एक्ट्रेस दिव्या दत्ता ने हाल ही में एक इंटरव्यू में उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें साझा की हैं, जिनसे उनके व्यवहार की एक खास झलक सामने आती है।

    दिव्या दत्ता ने बताया कि अमिताभ बच्चन की एक खास आदत उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि बिग बी अपने करीबी लोगों को उनके जन्मदिन पर ठीक रात 12 बजे फोन कर बधाई देना नहीं भूलते। यह केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव होता है, जो सामने वाले व्यक्ति को बेहद खास महसूस कराता है। दिव्या दत्ता ने यह भी साझा किया कि उन्हें भी कई बार उनके जन्मदिन पर आधी रात फोन कर शुभकामनाएं मिल चुकी हैं, जो उनके लिए एक यादगार अनुभव रहा है।

    उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में जब व्यस्तता और भागदौड़ के बीच लोग व्यक्तिगत रिश्तों को समय नहीं दे पाते, ऐसे में अमिताभ बच्चन का यह व्यवहार उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। उनके अनुसार, यह आदत उनकी सादगी और रिश्तों के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाती है, जो उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। यही वजह है कि उनके प्रति लोगों का जुड़ाव केवल एक कलाकार के रूप में नहीं बल्कि एक इंसान के रूप में भी गहरा है।

    दिव्या दत्ता ने एक और दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि अमिताभ बच्चन समय के कितने पाबंद हैं। उन्होंने बताया कि जब उनकी किताब के लॉन्च का आयोजन था, तो अमिताभ बच्चन को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम शाम 7:30 बजे तय था, लेकिन वे उससे पहले ही लगभग 7:20 बजे पहुंच गए थे। उन्होंने सहजता से कहा कि वह पहले आ गए हैं, इसलिए बाकी लोग आराम से अपना समय लें। यह घटना उनके अनुशासन और दूसरों के समय के प्रति सम्मान को स्पष्ट रूप से दिखाती है।

    इसके अलावा दिव्या दत्ता ने फिल्मी सेट से जुड़ा एक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके किरदार में आए बदलाव के कारण उनका व्यवहार भी थोड़ा गंभीर हो गया था, जिसे अमिताभ बच्चन ने तुरंत महसूस कर लिया था। इसके बाद उन्होंने उन्हें फोन कर समझाया कि अभिनय केवल एक भूमिका है और इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेना चाहिए। इस बातचीत के बाद उन्होंने दिव्या दत्ता को सहज महसूस कराने के लिए पूरा सहयोग दिया और उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया।

    इन अनुभवों से यह साफ झलकता है कि अमिताभ बच्चन केवल एक महान अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और समझदार इंसान भी हैं। उनका व्यवहार, अनुशासन और रिश्तों के प्रति सम्मान उन्हें एक अलग पहचान देता है। यही कारण है कि दशकों बाद भी वह न केवल फिल्मों में बल्कि लोगों के दिलों में भी एक खास स्थान बनाए हुए हैं।