Tag: DK Shivakumar

  • CM बनने से पहले तीखे तेवर… डीके शिवकुमार बोले- गुजरात नहीं ले जाने दूंगा कर्नाटक का हक

    CM बनने से पहले तीखे तेवर… डीके शिवकुमार बोले- गुजरात नहीं ले जाने दूंगा कर्नाटक का हक


    बेंगलुरु।
    डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) कर्नाटक (Karnataka) के अगले मुख्यमंत्री (Chief Minister) बनने वाले हैं। हालांकि मुख्यमंत्री बनने से पहले ही उन्होंने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। डीके शिवकुमार ने सोमवार को कहाकि सरकार में आते ही वह तय करेंगे कि कर्नाटक का हक गुजरात नहीं चला जाए। शिवकुमार ने आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bangalore) की खिताबी जीत के बाद यह बयान दिया है। गौरतलब है आरसीबी ने आईपीएल के खिताबी मुकाबले में गुजरात टाइटंस को हराकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी पर कब्जा जमाया है।


    गुजरात पर प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप

    डीके शिवकुमार ने मीडिया से बातचीत में कहाकि कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) को आईपीएल फाइनल की मेजबानी करनी थी। राज्य सरकार ने भी इसकी अनुमति दी थी। लेकिन गुजरात ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया और फाइनल की मेजबानी कर्नाटक से छीन ली। बुधवार को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने जा रहे डीके ने कहाकि यह हमारे क्रिकेट प्रशंसकों को निराश कर सकता है। हम जरूरी कदम उठा रहे हैं ताकि यह फिर कभी न हो। हालांकि, इसमें कुछ समय लगेगा।


    अहमदाबाद में हुआ था फाइनल

    आरसीबी और जीटी के बीच यह फाइनल मुकाबला गुजरात के अहमदाबाद शहर स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया था। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की जीत पर राजधानी बेंगलुरु और कर्नाटक के अन्य शहरों में जश्न का माहौल है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) ने पिछले महीने अहमदाबाद को आईपीएल फाइनल की मेजबानी के लिए नए वेन्यू के तौर पर चुना था। इससे पहले बेंगलुरु को इस फाइनल की मेजबानी करनी थी। लेकिन सांसदों और विधायकों के लिए टिकटों की मांग को लेकर विवाद के बाद यह फैसला लिया गया।


    दिल्ली पहुंच गए डीके

    गौरतलब है कि कर्नाटक के भावी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया राज्य के अगले मंत्रिमंडल को अंतिम रूप देने के लिए पार्टी आलाकमान से चर्चा करेंगे। सूत्रों का कहना है कि दोनों नेता मंगलवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया सोमवार दोपहर दिल्ली पहुंचे। शिवकुमार बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। कांग्रेस नेतृत्व के कहने पर सिद्धरमैया के इस्तीफा देने के बाद वह इस जिम्मेदारी को संभालने जा रहे हैं।


    कब है शपथ ग्रहण

    कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिवकुमार तीन जून को शाम चार बजकर पांच मिनट पर लोक भवन परिसर में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस दौरान कुछ विधायक भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। शिवकुमार को शनिवार को औपचारिक रूप से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया था। कर्नाटक में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद में अधिकतम 34 मंत्रियों को शामिल किए जाने का प्रावधान है।

  • सीएम बनने से पहले डीके शिवकुमार को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी विदेश यात्रा की मंजूरी

    सीएम बनने से पहले डीके शिवकुमार को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी विदेश यात्रा की मंजूरी

    बेंगलुरु। कर्नाटक के भावी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बेंगलुरु की विशेष अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें 2017 के आयकर चोरी मामले में दो साल की अवधि के लिए विदेश यात्रा करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, यह अनुमति कुछ सख्त शर्तों के साथ दी गई है।

    अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट केएन शिवकुमार ने डीके शिवकुमार की उस याचिका को मंजूरी दी, जिसमें उन्होंने आधिकारिक और व्यावसायिक कार्यों के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी थी। यह अनुमति उनकी जमानत शर्तों में संशोधन के तहत दी गई है।

    किन देशों की यात्रा कर सकेंगे
    अदालत ने डीके शिवकुमार को अगले दो वर्षों के दौरान कई देशों की यात्रा की अनुमति दी है, जिनमें शामिल हैं-
    अमेरिका
    यूरोपीय देश
    यूनाइटेड किंगडम
    ऑस्ट्रेलिया
    रूस
    अरब देश

    कोर्ट की सख्त शर्तें लागू
    अदालत ने स्पष्ट किया है कि हर विदेश यात्रा से पहले डीके शिवकुमार को अपने यात्रा कार्यक्रम की पूरी जानकारी जांच एजेंसी को देनी होगी। इसके अलावा उन्हें अदालत के समक्ष आवश्यकतानुसार पेश होना होगा।

    कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो जांच एजेंसी या अभियोजन पक्ष विदेश यात्रा की अनुमति रद्द कराने के लिए अदालत में आवेदन कर सकता है। 15 मई के आदेश में अदालत ने यह भी कहा था कि किसी भी तरह की चूक होने पर जांच एजेंसी आवश्यक कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होगी।

    क्या है पूरा मामला
    यह मामला 2017 में आयकर विभाग की छापेमारी से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि बेंगलुरु-मैसूरु हाईवे स्थित ईगलटन गोल्फ रिजॉर्ट सहित कई स्थानों पर तलाशी के दौरान सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की गई थी। इस दौरान लगभग 8.83 करोड़ रुपये नकद बरामद होने का दावा भी किया गया था।

    इस मामले में डीके शिवकुमार के साथ अन्य लोग भी आरोपी हैं और उनके खिलाफ आयकर अधिनियम तथा आईपीसी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज है। हालांकि डीके शिवकुमार लगातार इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं।

    अदालत ने क्यों दी अनुमति
    अदालत ने अपने आदेश में कहा कि डीके शिवकुमार को अपने विभागीय कार्यों और कारोबारी गतिविधियों के विस्तार के लिए विदेश यात्रा की आवश्यकता पड़ सकती है। उनके द्वारा दिए गए कारण प्रथम दृष्टया उचित प्रतीत होते हैं।

    कोर्ट ने यह भी माना कि इसी मामले में एक अन्य आरोपी को पहले विदेश यात्रा की अनुमति दी जा चुकी है, इसलिए समान आधार पर उन्हें भी राहत दी गई है। साथ ही अदालत ने यह भी नोट किया कि कुछ सह-आरोपियों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई हुई है, ऐसे में फिलहाल ट्रायल के लिए उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं मानी गई है।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में
    यह राहत ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन और मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने हाल ही में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है, जिससे राज्य में सत्ता संतुलन को लेकर नई राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है।

  • कांग्रेस में बदलाव की सुगबुगाहट? डीके शिवकुमार की बढ़ती दावेदारी के बीच तेज हुआ मंथन

    कांग्रेस में बदलाव की सुगबुगाहट? डीके शिवकुमार की बढ़ती दावेदारी के बीच तेज हुआ मंथन

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार अटकलें तेज होती दिखाई दे रही हैं। कांग्रेस के भीतर संभावित बदलाव और सत्ता की कमान को लेकर चल रहे मंथन ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। हाल के घटनाक्रमों और दिल्ली में शीर्ष स्तर पर जारी बैठकों के बाद यह चर्चा और अधिक तेज हो गई है कि राज्य में नेतृत्व से जुड़ा कोई बड़ा फैसला आने वाले समय में सामने आ सकता है।

    सूत्रों के हवाले से सामने आ रही चर्चाओं के अनुसार, पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर नए समीकरणों पर विचार किया जा रहा है। ऐसी चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ नेता मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था में बदलाव के पक्ष में अपनी राय रख रहे हैं। इसी बीच उपमुख्यमंत्री पद संभाल रहे D. K. Shivakumar का नाम संभावित नेतृत्व विकल्प के रूप में तेजी से चर्चा में आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर उनकी सक्रियता और संगठनात्मक पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बना सकती है।

    बताया जा रहा है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस विषय पर लगातार विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक के बाद एक बैठकों ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दी है। इन बैठकों में पार्टी के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अब तक पार्टी की ओर से किसी आधिकारिक निर्णय या बयान की घोषणा नहीं की गई है।

    राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और नेतृत्व से जुड़े मंथन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वहीं पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की बैठकों और विचार-विमर्श को भी बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और राजनीतिक चर्चाएं अभी सूत्रों पर आधारित हैं।

    दिल्ली में हुई बैठकों ने पूरे मामले को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई चर्चाओं को कर्नाटक के राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार अलग-अलग चरणों में कई बैठकें हुईं, जिनमें राज्य नेतृत्व और संगठनात्मक पहलुओं पर चर्चा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन और नेतृत्व बदलाव का विषय पहले भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बनता रहा है। राज्य की राजनीति में क्षेत्रीय समीकरण, संगठनात्मक संतुलन और नेतृत्व की भूमिका हमेशा अहम रही है। ऐसे में यदि भविष्य में किसी तरह का निर्णय सामने आता है तो उसका असर केवल राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उसके राजनीतिक मायने निकाले जाएंगे।

    फिलहाल पार्टी की ओर से किसी अंतिम निर्णय का संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों और बढ़ती राजनीतिक चर्चाओं ने कर्नाटक की राजनीति को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर होने वाली गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • चुनावी शोर थमा, पर कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संग्राम जारी, सीएम पद को लेकर फिर गरमाई सियासत

    चुनावी शोर थमा, पर कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संग्राम जारी, सीएम पद को लेकर फिर गरमाई सियासत


    नई दिल्ली ।  कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सत्ता को लेकर अंदरूनी संघर्ष सामने आने लगा है। हाल ही में पांच राज्यों के चुनावी माहौल के शांत होने के बाद राज्य में सत्तारूढ़ Indian National Congress के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान फिर से चर्चा में आ गई है। मौजूदा मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री DK Shivakumar के बीच कथित सत्ता-साझेदारी के फॉर्मूले ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

    सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, 2023 में सरकार गठन के समय दोनों नेताओं के बीच एक अनौपचारिक समझौते की बात सामने आई थी, जिसमें कथित तौर पर ढाई-ढाई साल के नेतृत्व की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। जैसे-जैसे सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण के करीब पहुंच रही है, वैसे-वैसे यह मुद्दा फिर से सियासी बहस का केंद्र बन गया है।

    उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के हालिया बयानों को लेकर उनके समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कहा है कि वे पार्टी नेतृत्व के निर्णय का पालन करेंगे, लेकिन उनके बयान के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। शिवकुमार खेमे का मानना है कि समय आ गया है जब कथित समझौते पर आगे की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

    दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के समर्थक इस तरह के किसी भी बदलाव की संभावना को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनके अनुसार राज्य में नेतृत्व स्थिर है और सरकार अपना पूरा कार्यकाल सिद्धारमैया के नेतृत्व में ही पूरा करेगी। साथ ही, पार्टी के भीतर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समूहों का समर्थन भी इस बहस को और जटिल बना रहा है।

    कर्नाटक की राजनीति में जातीय समीकरण भी इस विवाद को और गहरा बना रहे हैं। सिद्धारमैया का समर्थन मुख्य रूप से पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच मजबूत माना जाता है, जबकि डीके शिवकुमार को वोक्कालिगा समुदाय का प्रमुख चेहरा माना जाता है। इन सामाजिक आधारों के कारण यह मुद्दा केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सामाजिक संतुलन का भी हिस्सा बन गया है।

    इसी बीच, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित शीर्ष नेतृत्व से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस विवाद का समाधान निकालेंगे। दिल्ली में जल्द ही एक महत्वपूर्ण बैठक की संभावना जताई जा रही है, जिसमें दोनों नेताओं के बीच समन्वय और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

    वहीं विपक्षी दल इस स्थिति को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमला कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पार्टी जनता के मुद्दों की बजाय सत्ता संघर्ष में उलझी हुई है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को आंतरिक मामला बताते हुए सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की कोशिश कर रहा है।

  • कर्नाटक में CM पद पर सस्पेंस बरकरार: सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार की खींचतान तेज, कांग्रेस हाईकमान पर बढ़ा दबाव

    कर्नाटक में CM पद पर सस्पेंस बरकरार: सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार की खींचतान तेज, कांग्रेस हाईकमान पर बढ़ा दबाव



    नई दिल्ली। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर अंदरूनी टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आता दिख रहा है। एक तरफ मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपनी सरकार को मजबूत करने और कैबिनेट विस्तार पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी नेतृत्व परिवर्तन की अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय हैं। इस पूरे मामले ने कांग्रेस हाईकमान के सामने एक नई राजनीतिक दुविधा खड़ी कर दी है।

    पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, सिद्धारमैया खेमे का फोकस कैबिनेट फेरबदल और खाली मंत्रिपदों को भरने पर है, जिससे सरकार और संगठन दोनों पर उनकी पकड़ मजबूत हो सके। उनका मानना है कि प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखना अभी प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी तरह के नेतृत्व बदलाव को फिलहाल टाल देना चाहिए।

    दूसरी ओर, डीके शिवकुमार खेमे का दावा है कि संगठन को मजबूत करने और विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने में उनकी भूमिका अहम रही है, इसलिए उन्हें भी मुख्यमंत्री पद पर अवसर मिलना चाहिए। उनके समर्थक लगातार “अगले मुख्यमंत्री” जैसे पोस्टर और सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए दबाव बना रहे हैं।

    कांग्रेस आलाकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किसी एक पक्ष के समर्थन से दूसरे खेमे में असंतोष पैदा हो सकता है, जिससे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा है। यही वजह है कि पार्टी फिलहाल “इंतजार करो और देखो” की रणनीति पर काम कर रही है।

    हालांकि, हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि इस मुद्दे पर लंबे समय तक टालमटोल करना मुश्किल हो सकता है। आने वाले दिनों में कांग्रेस हाईकमान को यह तय करना होगा कि सिद्धारमैया के नेतृत्व को जारी रखा जाए या फिर डीके शिवकुमार को कमान सौंपकर सत्ता संतुलन बदला जाए।

  • डीके शिवकुमार ने राज्यपाल के फैसले पर जताई आपत्ति, बोले- ‘TVK को बहुमत साबित करने का मौका न मिलना गलत’

    डीके शिवकुमार ने राज्यपाल के फैसले पर जताई आपत्ति, बोले- ‘TVK को बहुमत साबित करने का मौका न मिलना गलत’

    बंगलूरू। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के उस कथित फैसले की आलोचना की है, जिसमें अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) को सरकार बनाने और विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर नहीं दिए जाने की बात कही गई है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया।

    विधान सौधा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डीके शिवकुमार ने कहा कि यदि किसी दल के पास बहुमत का दावा है तो राज्यपाल उसे सरकार गठन से नहीं रोक सकते। उनके अनुसार, राज्यपाल को विजय के नेतृत्व वाली पार्टी को सदन में बहुमत साबित करने का अवसर देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का यह रवैया उचित नहीं माना जा सकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी संख्या साबित करने का मौका मिलना चाहिए।

    शिवकुमार ने अपने तर्क के समर्थन में कर्नाटक और राष्ट्रीय राजनीति के कई पुराने उदाहरण भी गिनाए। उन्होंने कहा कि पहले भी राज्यपालों और राष्ट्रपतियों ने सबसे बड़े दलों या गठबंधनों को सरकार बनाने का अवसर दिया है, ताकि वे सदन में विश्वास मत हासिल कर सकें।

    उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा का उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक में भी उन्हें सरकार बनाने का मौका दिया गया था। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन और एपीजे अब्दुल कलाम के कार्यकाल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उस समय भी संवैधानिक परंपराओं का पालन करते हुए बहुमत परीक्षण को प्राथमिकता दी गई थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण भी दिया, जिन्हें सदन में बहुमत साबित करने का अवसर मिला था।

    डीके शिवकुमार ने कहा कि TVK को भी इसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपना बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में एक वोट भी बहुमत और अल्पमत तय कर सकता है। यदि कोई दल बहुमत साबित नहीं कर पाता, तब अगला संवैधानिक विकल्प अपनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जनता के जनादेश और भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र जनता की इच्छा से ही चलता है।

  • सीएम पद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में बवाल, डीके शिवकुमार को मिल रहा व्यापक समर्थन

    सीएम पद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में बवाल, डीके शिवकुमार को मिल रहा व्यापक समर्थन


    नई दिल्ली। कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी घमासान खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के विधायक इकबाल हुसैन ने दावा किया कि कांग्रेस के करीब 80 से 90 विधायक उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। हुसैन ने कहा कि कई विधायक मानते हैं कि शिवकुमार के संघर्ष और मेहनत को सम्मानित करना चाहिए और आने वाले चुनावों की रणनीति के लिहाज से भी यह सही कदम होगा।

    रामनगर में पत्रकारों से बातचीत में हुसैन ने बताया कि सभी 140 विधायक बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं और करीब 80-90 विधायक नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी डीके शिवकुमार के समर्थन में हैं और उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ कौन खड़ा है और शिवकुमार के साथ कौन।

    विदेश यात्रा ने बढ़ाई हलचल
    सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले कुछ विधायकों की विदेश यात्रा को गंभीरता से लिया है। पार्टी के कर्नाटक प्रभारी और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उन विधायकों के नाम मांगे हैं जो इस यात्रा में शामिल थे। यह यात्रा राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को शांत करने के लिए आयोजित की गई मानी जा रही है।

    राज्य पशुपालन मंत्री के. वेंकटेश ने कहा कि कुछ नेताओं ने उन्हें इस यात्रा में शामिल होने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा उनके मंत्रालय द्वारा आयोजित नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी कहा कि विधायक और एमएलसी अपने खर्च पर विदेश जा रहे हैं।

    दिल्ली में डीके शिवकुमार की बैठक
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने दिल्ली में सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर बैठक की, जो नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को और मजबूत करती है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि समय ही बताएगा कि आगे क्या होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा या राहुल गांधी से मुलाकात की, तो शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात की और सभी चर्चा पूरी हो गई।

    शिवकुमार ने यह भी कहा कि वे सड़क पर खड़े होकर राजनीति नहीं कर रहे हैं और सब कुछ पार्टी नेतृत्व के मार्गदर्शन में हो रहा है।

    आगे क्या होगा
    कर्नाटक कांग्रेस में यह घमासान अभी जारी है। 80-90 विधायक डीके शिवकुमार के समर्थन में हैं और पार्टी हाईकमान की बैठकें और विदेश यात्रा इस सियासी समीकरण को और जटिल बना रही हैं। अब नजर यह है कि नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में अगला कदम कब और कैसे उठाया जाएगा और क्या डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह संकट राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

  • '80-90 MLA ने हाई कमांड से डीके शिवकुमार को CM पद का मौका देने का किया अनुरोध', दिल्ली रवाना हुए डिप्टी सीएम

    '80-90 MLA ने हाई कमांड से डीके शिवकुमार को CM पद का मौका देने का किया अनुरोध', दिल्ली रवाना हुए डिप्टी सीएम


    नई दिल्ली । कर्नाटक में सीएम की कुर्सी को लेकर बयानबाजी तेज है। कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने कहा कि पार्टी के कम से कम 80 विधायकों ने मुख्यमंत्री पद के लिए उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का नाम हाई कमांड को दिया है। इस बीच, कर्नाटक के डिप्टी CM D K शिवकुमार दो दिनों की नई दिल्ली की यात्रा के लिए रवाना हो चुके हैं, दिल्ली में उनका पार्टी के शीर्ष नेताओं से मिलने का कार्यक्रम है।
    खुलकर नहीं बोल रहे डीके शिवकुमार
    उनके इस दौरे ने एक बार फिर राज्य में सीएम की कुर्सी में बदलाव की अटकलों को हवा दे दी है। हालांकि, डीके शिवकुमार इस दौरे के बारे में कुछ भी खुलकर नहीं बोल रहे हैं। नई दिल्ली जाने से पहले इतना ही कहा कि डिप्टी सीएम होने के साथ-साथ वो प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उस नाते हाई कमांड से मिलने का अवसर मिलता रहता है।
    डीके शिवकुमार को देना चाहिए मौका- हुसैन
    डीके शिवकुमार को सीएम बनाए जाने के सवाल पर कांग्रेस विधायक हुसैन ने कहा, ‘हमने यह मामला हाई कमांड पर छोड़ दिया है। 80-90 विधायकों ने हाई कमांड से डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद के लिए मौका देने का अनुरोध किया है। हम एक अनुशासित पार्टी हैं और हमें शालीनता से व्यवहार करना होगा।

    राजनीति में अनुशासन से लेना होता है काम
    इसके साथ ही कांग्रेस विधायक ने कहा, ‘हमें यह पसंद नहीं है कि वह (यतींद्र सिद्धारमैया) बार-बार अपने पिता के पक्ष में बोलकर हाई कमांड को शर्मिंदा कर रहे हैं। हर पिता अपने बेटे से प्यार करता है और बेटा अपने पिता से, लेकिन राजनीति में हमें अनुशासन से काम लेना होता है। इस तरह के बयानों से दूसरों को उकसाना नहीं चाहिए।

    डीके शिवकुमार को इसी कार्यकाल में दिया जाए मौका

    इकबाल हुसैन ने कहा, ‘हम सभी के मन में यही इच्छा है कि डीके शिवकुमार को मौका दिया जाए। हर कोई यही चाहता है, लेकिन हमें बयानबाजी से कोई भ्रम पैदा नहीं करना चाहिए, इसीलिए सब चुप हैं और कुछ लोग आपस में बात कर रहे हैं। मैं खुले दिल से, जैसा कि मैंने पहले दिन से कहा है कि यही मेरी इच्छा है कि डीके शिवकुमार को इसी कार्यकाल में मौका दिया जाए।’

    जानिए क्या बोले दूसरे विधायक
    कांग्रेस एमएलसी चन्नाराज हट्टीहोली ने भी कहा, ‘मेरी इच्छा है कि डीके शिवकुमार इस कार्यकाल में जल्द ही मुख्यमंत्री बनें।’ पिछले हफ्ते, यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा था कि कांग्रेस हाई कमांड ने सिद्धारमैया को पूरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने रहने की हरी झंडी दे दी है।

    यतींद्र द्वारा अपने पिता के पक्ष में दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए डीके शिवकुमार ने कहा, ‘मैं उनकी हर बात का सम्मानपूर्वक स्वागत करता हूं। चूंकि उन्होंने इस तरह से बात की है जैसे वे हाई कमांड के प्रमुख हों, तो आइए हम उन्हें उसी रूप में स्वीकार करें।

    सीएम की कुर्सी को लेकर नवंबर 2025 से चालू है खींचतान
    कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर खींचतान नवंबर 2025 में शुरू हुई, जब सरकार ने अपने पांच वर्षीय कार्यकाल का आधा समय पूरा कर लिया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ-साथ गृह मंत्री जी परमेश्वर भी शीर्ष पद की दौड़ में शामिल हैं।

  • कर्नाटक CM पद पर खींचतान बरकरार, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात

    कर्नाटक CM पद पर खींचतान बरकरार, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात


    नई दिल्ली / कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर जारी सियासी खींचतान अभी थमने के आसार नहीं दिखा रही है। बेलगावी से लेकर बेंगलुरु तक लगातार बयानबाजी के बीच अब यह मामला सीधे दिल्ली दरबार तक पहुंचता नजर आ रहा है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्य मंत्रीडीके शिवकुमार 14 दिसंबर को नई दिल्ली में कांग्रेस हाई कमान से मुलाकात कर सकते हैं। कुछ दिन पहले हाई कमान के निर्देश पर दोनों नेताओं का मुख्यमंत्री आवास पर नाश्ता हुआ था। उस बैठक के बाद यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सब कुछ सामान्य हो गया है। लेकिन इसके बाद दोनों खेमों से जिस तरह के बयान सामने आए हैं, उससे साफ है कि अंदरखाने असहमति अब भी बनी हुई है।

    दिल्ली में अहम बैठक की संभावना
    हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि यह बैठक सोनिया गांधी, राहुल गांधी या कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे में से किसी एक के साथ हो सकती है। हालांकि समय कम बताया जा रहा है, लेकिन अगर यह मुलाकात होती है तो इसे कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा
    सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। अगर वे हमारे शीर्ष नेतृत्व से मिलना चाहते हैं, तो इसमें कोई बाधा नहीं है।सूत्रों के अनुसार, यह संभावित बैठक नई दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस रैली के बाद हो सकती है, जिसे ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान के तहत आयोजित किया जा रहा है।
    कहां से शुरू हुआ विवाद?
    2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। सत्ता गठन के समय सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उप मुख्यमंत्री बनाया गया था। तभी से यह चर्चा चलती रही कि ढाई साल बाद मुख्यमंत्री पद में बदलाव हो सकता है।20 नवंबर को सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद यह मुद्दा फिर से तेज हो गया। शिवकुमार समर्थकों का दावा है कि चुनाव जीतने के बाद सत्ता साझा करने को लेकर कोई अघोषित समझौता हुआ था, जिसके तहत आधे कार्यकाल के बाद मुख्यमंत्री बदले जाने की बात थी। हालांकि पार्टी और सरकार की ओर से कभी भी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।

    बयानबाजी ने बढ़ाया तनाव

    हाल के दिनों में दोनों नेताओं के समर्थकों की बयानबाजी ने आग में घी डालने का काम किया है। एक ओर सिद्धारमैया खेमे की ओर से यह संदेश दिया जा रहा है कि सरकार स्थिर है और नेतृत्व में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है, वहीं शिवकुमार समर्थक लगातार समझौते” की याद दिला रहे हैं।यह खींचतान न सिर्फ सरकार की छवि पर असर डाल रही है, बल्कि पार्टी के भीतर असंतोष को भी उजागर कर रही है। यही वजह है कि हाई कमान को अब सीधे दखल देना पड़ सकता है।

    हाई कमान के लिए बड़ी चुनौती
    कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कर्नाटक में सरकार की स्थिरता बनी रहे और अंदरूनी कलह बाहर न आए। ऐसे में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की दिल्ली मुलाकात को फायरफाइटिंग मीटिंग के तौर पर देखा जा रहा है।अगर यह बैठक होती है, तो इससे यह साफ हो सकता है कि पार्टी नेतृत्व कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर क्या रुख अपनाने जा रहा है। फिलहाल इतना तय है कि कर्नाटक की सियासत में आने वाले दिन काफी अहम होने वाले हैं।

  • कर्नाटक में CM पद की खींचतान जारी, सिद्धारमैया और शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात

    कर्नाटक में CM पद की खींचतान जारी, सिद्धारमैया और शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात


    नई दिल्‍ली । कर्नाटक(Karnataka) में मुख्यमंत्री पद को लेकर मची खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। हाई कमान के निर्देश पर मुख्यमंत्री के घर हुए दोनों नेताओं के नाश्ते के बाद ऐसा दावा किया जा रहा था कि अब सब ठीक है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से दोनों पक्षों की तरफ से की जा रही बयान बाजी के बाद यह साफ है कि कुछ ठीक नहीं है। हिन्दुस्तान (Hindustan)टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसी खींचतान को लेकर अब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया(Siddaramaiah) और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार(DK Shivakumar) 14 दिसंबर को नई दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं।

    कांग्रेस के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में इन दोनों नेताओं की बैठक सोनिया गांधी, राहुल गांधी या फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी में से किसी एक से हो सकती है। पार्टी के करीबी सूत्र के मुताबिक इस बैठक के लिए समय बहुत कम है लेकिन अगर यह मुलाकात होती है, तो यह कर्नाटक के आगामी हालात के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी।

    कर्नाटक में कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एचटी से कहा, “सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। यदि वे हमारे किसी भी शीर्ष नेता से मिलना चाहते हैं, तो वह हमेशा ऐसा कर सकते हैं।” सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक के नेताओं की कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से यह मुलाकात नई दिल्ली के ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान के तहत रामलीला मैदान में होने वाली रैली के बाद होगी।

    गौरतलब है कि कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से दोनों नेताओं की मुलाकात की खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब दोनों खेमों के बीच में पिछले कई दिनों से खींचतान मची हुई है। 2023 से सत्ता में आने के बाद से दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर तंज कसते रहे हैं। लेकिन 20 नवंबर को सरकार के ढाई साल पूरे होने पर इन हमलों की तीव्रता बढ़ गई। शिवकुमार समर्थकों का कहना है कि जीत के बाद सरकार के आधे पड़ाव पर सत्ता हस्तांतरण की बात हुई थी। हालांकि ऐसा नहीं हो सका।