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  • New Drug Rules: अब डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेगी 12% से अधिक अल्कोहल वाली दवाएं…

    New Drug Rules: अब डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेगी 12% से अधिक अल्कोहल वाली दवाएं…


    नई दिल्ली।
    अगर आप भी अब तक पास के मेडिकल स्टोर (Medical Store) से ऐसी सिरप (Syrup) या दूसरी पीने वाली दवाएं ले आते थे जिनमें अल्कोहल (Alcohol) होता है, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को दवा नियमों (New Drug Rules) में दसवां संशोधन जारी किया है। यह नया नियम, सरकारी गजट में प्रकाशित होने के छह महीने बाद प्रभावी होगा।

    नए नियमों (New Drug Rules) के तहत 30 एमएल से बड़ी पैकिंग और 12% से ज्यादा एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) वाली सभी ओरल दवाओं को शेड्यूल H1 में शामिल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब ये दवाएं केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जा सकेंगी। मेडिकल स्टोर को इनकी बिक्री का रिकॉर्ड भी निर्धारित नियमों के अनुसार रखना होगा।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा ड्रग्स रूल्स, 1945 में किए गए इस बड़े बदलाव का उद्देश्य उन दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना है जिनमें एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) की मात्रा अधिक होती है। इस कदम का मकसद उन प्रोडक्ट्स को रेगुलेट करना है जिनमें अल्कोहल का ज्यादा कंसंट्रेशन होता है और जिन्हें शायद नॉन-मेडिकल इस्तेमाल के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

    अभी तक कुछ आयुर्वेदिक दवाओं जैसे इलायची, अदरक और अन्य सुगंधित टिंचर को शेड्यूल-के के तहत लाइसेंस की अनिवार्यता से छूट प्राप्त थीं। इन दवाओं में कई बार 80 से 90 प्रतिशत तक एथिल अल्कोहल होता है। सरकार को आशंका थी कि इनका इस्तेमाल इलाज की बजाय नशे के लिए किया जा सकता है। इस संबंध में कई राज्यों ने भी चिंता जताई थी।

    इसी को देखते हुए सरकार ने नियमों में संशोधन किया है। अब 12 प्रतिशत से अधिक एथिल अल्कोहल (v/v) वाली और 30 मिलीलीटर से अधिक पैकिंग में बिकने वाली ऐसी सभी दवाओं को शेड्यूल के की छूट नहीं मिलेगी। यानी इन दवाओं के निर्माण और बिक्री के लिए अब ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।


    दवाओं की निगरानी होगी बेहतर

    सरकार का कहना है कि इस बदलाव से अधिक अल्कोहल वाली दवाओं की निगरानी बेहतर होगी। इनका वितरण केवल अधिकृत दवा चैनलों के माध्यम से होगा। इससे गलत इस्तेमाल या नशे के लिए दुरुपयोग की आशंका कम होगी। साथ ही, जिन मरीजों को वास्तव में इन दवाओं की जरूरत है, उन्हें ये पहले की तरह उपलब्ध होती रहेंगी। सरकार के अनुसार यह कदम देश में दवा नियमन को और मजबूत बनाने, दवाओं के सही उपयोग को बढ़ावा देने और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

  • मां को दोष देना बंद करो, साइंस समझो: बच्चे की हालत बिगड़ने पर मां को ताने, डॉक्टर का फूटा गुस्सा

    मां को दोष देना बंद करो, साइंस समझो: बच्चे की हालत बिगड़ने पर मां को ताने, डॉक्टर का फूटा गुस्सा



    नई दिल्ली। बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर अक्सर परिवारों में सबसे पहले मां को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। ऐसा ही एक मामला पीडियाट्रिशियन डॉ. माधवी भारद्वाज के सामने आया, जहां 20 महीने के बच्चे को दौरे पड़ने पर परिवार ने मां की देखभाल पर सवाल उठाए।

    डॉक्टर ने बताया कि बच्चा अचानक बुखार और दौरे की स्थिति में अस्पताल लाया गया था, जहां समय पर इलाज देकर उसकी हालत को स्थिर कर दिया गया। इसके बावजूद घरवालों ने मां से कहा कि अगर उसने ठीक से ध्यान रखा होता, तो यह स्थिति नहीं आती।

    इस पर डॉ. माधवी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लोगों को पहले मेडिकल साइंस समझनी चाहिए। उन्होंने बताया कि 6 महीने से 5 साल तक के बच्चों में तेज बुखार के दौरान फेब्राइल सीजर्स (दौरे) आम होते हैं और यह हमेशा लापरवाही का नतीजा नहीं होता।

    डॉक्टर ने यह भी कहा कि समाज में अक्सर मांओं को हर स्थिति के लिए दोषी ठहरा दिया जाता है, जबकि कई बार यह पूरी तरह मेडिकल कंडीशन होती है। उन्होंने अपील की कि लोगों को दोष देने के बजाय समाधान और सही इलाज पर ध्यान देना चाहिए।

  • MP: सागर में डॉक्टर ने खुद ही कार में आग लगाकर की थी पत्नी की हत्या…सहयोगी के साथ गिरफ्तार

    MP: सागर में डॉक्टर ने खुद ही कार में आग लगाकर की थी पत्नी की हत्या…सहयोगी के साथ गिरफ्तार


    सागर।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) में पत्नी की हत्या कर उसे सड़क दुर्घटना का रूप देने की साजिश का पुलिस ने खुलासा करते हुए आरोपी पति और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार सानौधा थाना क्षेत्र (Sanodha Police Station area) के चनाटौरिया टोल टैक्स प्लाजा (Chanatoriya Toll Tax Plaza) के पास कार में आग लगने की घटना को पहले हादसा बताया गया था, लेकिन जांच के दौरान यह मामला हत्या का निकला। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गढ़ाकोटा निवासी आरोपी BAMS डॉक्टर अपनी पत्नी को कार में लेकर मौके पर पहुंचा था और घटना से पहले मायके पक्ष को फोन कर पत्नी को हार्ट अटैक आने की बात कही थी। बाद में कार में आग लगने को दुर्घटना बताया था। जली हुई कार से उसकी पत्नी का कंकाल मिला था।

    जांच में सामने आया कि आरोपी के किसी अन्य महिला से संबंध थे, जिसके चलते पति-पत्नी के बीच विवाद होता था। इसी प्रेम-प्रसंग के चलते डॉक्टर ने घर पर ही पत्नी का गला घोंटकर हत्या कर दी और सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दिए। इसके बाद उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर साजिश रची और घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की।

    यूं खुली डॉक्टर के झूठ की पोल
    जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल पर माचिस की तीली और ज्वलनशील पदार्थ मिले थे, जबकि आरोपी डॉक्टर कार में CNG ब्लास्ट होने का दावा कर रहा था। हालांकि जांच में यह बात पूरी तरह झूठी निकली। क्योंकि जांच में पता चला कि CNG के टैंक में गैस थी ही नहीं और डॉक्टर पिछले दो दिनों से पेट्रोल का उपयोग कर रहा था। आरोपी द्वारा सीसीटीवी फुटेज डिलीट करना और बार-बार बयान बदलने की वजह से भी वह पुलिस जांच के घेरे में आ गया।

    आरोपी डॉक्टर और दो सहयोगी गिरफ्तार
    पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी डॉक्टर नीलेश कुर्मी सहित उसके सहयोगी रामकृष्ण कुर्मी और शुभम कुर्मी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी डॉक्टर ने इस अपराध में शामिल होने के लिए सहयोगियों को दो-दो लाख रुपए का लालच दिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।