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  • जम्मू-कश्मीर के डोडा में प्रकृति का भीषण प्रकोप: बादल फटने से थाथरी कस्बे में मची भारी तबाही, राष्ट्रीय राजमार्ग बंद और कई घर-वाहन क्षतिग्रस्त

    जम्मू-कश्मीर के डोडा में प्रकृति का भीषण प्रकोप: बादल फटने से थाथरी कस्बे में मची भारी तबाही, राष्ट्रीय राजमार्ग बंद और कई घर-वाहन क्षतिग्रस्त


    नई दिल्ली ।
    जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसूनी सीजन के दौरान प्रकृति का भीषण प्रकोप देखने को मिला है। राज्य के डोडा जिले के थाथरी इलाके में अचानक बादल फटने की एक बेहद गंभीर घटना सामने आई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है, जिसने स्थानीय जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। बादल फटने की इस घटना के बाद ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों से भारी मात्रा में कीचड़, बड़े-बड़े पत्थर और मलबा तीव्र गति से रिहायशी इलाकों की तरफ बहकर आ गया, जिसने थाथरी शहर और उसके आस-पास के निचले क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया।

    इस अचानक आई बाढ़ और मलबे के बहाव के कारण थाथरी का मुख्य बाजार और स्थानीय जामिया मस्जिद क्षेत्र सबसे गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। मलबे के तीव्र प्रवाह की वजह से बाजार में खड़ी कई गाड़ियां मलबे में दबकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि कई स्थानीय निवासियों के घरों को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबर है। गनीमत यह रही कि इस पूरी अनहोनी में फिलहाल किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या जान जाने की सूचना नहीं मिली है, जिसे एक बड़ी राहत माना जा रहा है। हालांकि, भौतिक संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचा है।

    इस प्राकृतिक आपदा का सीधा असर क्षेत्र के परिवहन तंत्र पर भी पड़ा है। बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए मलबे के कारण बटोटे-डोडा-किश्तवाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-244) पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। सड़क पर भारी मात्रा में कीचड़ और पत्थर जमा हो जाने की वजह से प्रशासन को एहतियात के तौर पर इस हाईवे को यातायात के लिए पूरी तरह बंद करना पड़ा है। हाईवे बंद होने के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं और मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह से ठप हो गया है।

    मध्य प्रदेश। घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और अन्य संबंधित विभागों ने तत्परता दिखाते हुए प्रभावित क्षेत्र में तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय राजमार्ग को साफ करने और क्षेत्र में सामान्य कनेक्टिविटी को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए भारी अर्थ-मूविंग मशीनरी और जेसीबी मशीनों को काम पर लगाया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने आम जनता और यात्रियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि जब तक सड़क को वाहनों की आवाजाही के लिए पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता, तब तक इस मार्ग पर गैर-जरूरी यात्रा से पूरी तरह परहेज करें।

    इधर जम्मू-कश्मीर के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर और इगतपुरी जैसे पश्चिमी हिस्सों में बादल फटने जैसी अत्यधिक भारी बारिश की आशंका को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया है। सुरक्षा के मद्देनजर वहां स्कूल, कॉलेज और प्रमुख मंदिरों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही ओडिशा में भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने के कारण मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। डोडा में फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी नुकसान का सटीक आकलन करने में जुटे हुए हैं।

  • भिंड के शहीद हवलदार की अंतिम विदाई: 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, पत्नी ने रोना-धोना बंद करने की दी हिम्मत

    भिंड के शहीद हवलदार की अंतिम विदाई: 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, पत्नी ने रोना-धोना बंद करने की दी हिम्मत

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान हुए हादसे में शहीद हुए भिंड के हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव चितावली (अटेर) में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान शहीद के 6 वर्षीय बेटे भावेश ने पिता को मुखाग्नि दी, वहीं शहीद की पत्नी शिवानी ने अदम्य साहस दिखाते हुए लोगों से कहा, “रोना-धोना बंद करो, कुछ नहीं होगा।”

    जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

    सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर सलामी दी। डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरने से शैलेंद्र सिंह समेत 10 जवान शहीद हुए थे।

    पत्नी का दर्दनाक लेकिन साहसी रुख
    शहीद की पत्नी शिवानी ने अपने पति के शव के पास बैठकर बार-बार बलाएं लेकर अपने पति के गाल चूमा और सभी को हिम्मत दी। उनका यह साहस देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि 21 जनवरी की रात शैलेंद्र से आखिरी कॉल पर शैलेंद्र ने कहा था कि उन्हें डर लग रहा है। उन्होंने सपना देखा था कि उनकी बेटियाँ पढ़ाई के बावजूद सफल नहीं हो रही हैं, और परिवार शादी के लिए परेशान है। शिवानी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि रिटायरमेंट के बाद प्लॉट बेचकर बेटियों की शादी कर देंगे, लेकिन शैलेंद्र ने कहा, “मुझे बहुत डर लग रहा है, कुछ होने वाला है।”

    इसके बाद उनकी शहादत की खबर आई।

    परिवार की शौर्य गाथा: दादा भी थे शहीद
    शैलेंद्र के पिता हनुमत सिंह ने गर्व और आंसूओं के साथ बताया कि उनके तीनों बेटे सेना में हैं और शैलेंद्र उनके दूसरे बेटे थे। उन्होंने कहा कि उनका दादा भी 1972 में शहीद हुए थे, और आज उनका बेटा भी देश के लिए शहीद हुआ है।

    शहीद के बड़े भाई देव सिंह ने कहा कि परिवार को दुख है, लेकिन फौजी होने पर गर्व भी है। उन्होंने बताया कि वे तीनों भाई सेना में सेवा कर चुके हैं और देश रक्षा में शैलेंद्र की शहादत पर उन्हें गर्व है।

    अंतिम यात्रा में भावुक माहौल
    अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने फूलों की वर्षा की और “शैलेंद्र सिंह भदौरिया अमर रहें” के नारे लगाए। शमशान घाट पर जब मासूम भावेश ने पिता का शव देखा तो वह फूट-फूटकर रो पड़ा और मुखाग्नि देने से पहले पिता से लिपट गया। इस मौके पर मेजर अक्षय कुमार, एसडीएम शिवानी अग्रवाल, तहसीलदार जगन सिंह कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

    ब्रिगेडियर अमित वर्मा ने कहा कि पूरा आर्मी परिवार शहीद के परिजनों के साथ खड़ा है और परिवार को मिलने वाली सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।