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  • डोल ग्यारस पर शिवपुरी में रहेगी कड़ी सुरक्षा भीड़ और यातायात संभालने के लिए पुलिस ने तैयार किया प्लान

    डोल ग्यारस पर शिवपुरी में रहेगी कड़ी सुरक्षा भीड़ और यातायात संभालने के लिए पुलिस ने तैयार किया प्लान


    शिवपुरी। शिवपुरी में डोल ग्यारस और आगामी गणेश विसर्जन को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। त्योहारों के दौरान बाजारों और प्रमुख मार्गों पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने शहर की व्यवस्थाओं का जायजा लेना शुरू कर दिया है। सोमवार शाम पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया पुलिस बल के साथ शहर के प्रमुख बाजारों और भीड़ वाले इलाकों में पैदल गश्त पर निकलीं। इस दौरान उन्होंने अलग अलग स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था और यातायात की स्थिति को देखा तथा संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।

    एसपी ने हॉस्पिटल चौराहा कोर्ट रोड सब्जी मंडी माधव चौक गुरुद्वारा चौराहा राजेश्वरी रोड और पोलो ग्राउंड क्षेत्र का भ्रमण किया। पैदल गश्त के दौरान पुलिस अधिकारियों ने बाजारों में लोगों की आवाजाही और वाहनों की स्थिति का जायजा लिया। माधव चौक पर दुकानों के सामने बेतरतीब तरीके से खड़े वाहनों को देखकर एसपी ने यातायात प्रभारी रणवीर यादव को पार्किंग व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान बाजारों में लोगों की संख्या बढ़ने के कारण यातायात व्यवस्था को पहले से व्यवस्थित रखा जाए ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।

    पैदल भ्रमण के दौरान एसपी ने दुकानदारों और आम लोगों से भी बातचीत की। उन्होंने त्योहारों को शांतिपूर्ण तरीके से मनाने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि भीड़ वाले क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

    एसपी ने सभी थाना प्रभारियों को अपने अपने क्षेत्रों में नियमित पैदल गश्त करने के साथ वाहन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। बाजारों और अन्य संवेदनशील तथा भीड़ वाले स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने को भी कहा गया है। त्योहारों के दौरान देर रात तक लोगों की आवाजाही को देखते हुए पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

    शिवपुरी में गणेश विसर्जन का आयोजन बड़े स्तर पर होता है। गणेश प्रतिमाओं और झांकियों के साथ डीजे और बैंड के जरिए जुलूस अलग अलग मार्गों से निकलते हैं। कस्टम गेट पर आयोजकों की ओर से बड़ा मंच भी लगाया जाता है जहां विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। कार्यक्रम देर रात तक चलने के कारण यहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है। ऐसे में पुलिस के सामने भीड़ नियंत्रण के साथ यातायात व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रहती है।

    इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने डोल ग्यारस और गणेश विसर्जन के तय रूट तथा विसर्जन स्थलों पर पर्याप्त बल तैनात करने की तैयारी की है। पुलिस की ओर से जुलूस के दौरान यातायात को व्यवस्थित रखने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। संवेदनशील स्थानों पर भी पुलिस की नजर रहेगी।

    एसपी ने लोगों से अपील की है कि गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन निर्धारित स्थानों पर ही करें। उन्होंने लोगों से विसर्जन के दौरान पानी में उतरने से बचने की अपील भी की है ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। पुलिस प्रशासन ने त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आम लोगों से सहयोग की अपील की है।

    इस दौरान सीएसपी सचिन कुमार धुर्वे यातायात थाना प्रभारी रक्षित निरीक्षक रणवीर यादव कोतवाली थाना प्रभारी रोहित दुबे रक्षित निरीक्षक गायत्री इटोरिया और सूबेदार प्रियंका घोष सहित पुलिस बल मौजूद रहा।

  • डोल ग्यारस के दिन जरूर करें भगवान विष्णु की पूजा जानिए शुभ मान्यता और इस पर्व से जुड़ी खास परंपराएं

    डोल ग्यारस के दिन जरूर करें भगवान विष्णु की पूजा जानिए शुभ मान्यता और इस पर्व से जुड़ी खास परंपराएं


    नई दिल्ली। डोल ग्यारस हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। इसे जलझूलनी एकादशी और परिवर्तिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहा जाता है। मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में इस दिन भगवान की विशेष पूजा अर्चना की जाती है और मंदिरों से डोल यात्रा निकाली जाती है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में इसमें शामिल होकर भगवान के दर्शन करते हैं और सुख समृद्धि की कामना करते हैं।

    डोल ग्यारस का पर्व भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। कई स्थानों पर भगवान की प्रतिमा को सुंदर तरीके से सजाकर डोल में विराजमान किया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु भगवान को जलाशय या नदी के किनारे ले जाते हैं। वहां पूजा अर्चना और जल से संबंधित धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। इसी वजह से इस पर्व को जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है।

    डोल ग्यारस के दिन व्रत रखने की परंपरा भी है। श्रद्धालु अपनी क्षमता और धार्मिक मान्यता के अनुसार उपवास रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन निर्जला व्रत करते हैं जबकि कई श्रद्धालु फलाहार करते हैं। सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पूजा में भगवान को पीले फूल तुलसी की पत्तियां फल और मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं। विष्णु मंत्र का जाप करने के साथ भगवान की आरती की जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है।

    इस पर्व से जुड़ी डोल यात्रा सबसे आकर्षक परंपराओं में से एक है। कई शहरों और गांवों में मंदिरों से भगवान की सवारी निकाली जाती है। डोल को फूलों और रंग बिरंगी सजावट से सजाया जाता है। श्रद्धालु भजन और कीर्तन करते हुए यात्रा में शामिल होते हैं। कई जगहों पर ढोल नगाड़ों के साथ भगवान की सवारी निकाली जाती है। मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं और पूरे वातावरण में धार्मिक उत्साह नजर आता है।

    डोल ग्यारस को लेकर एक धार्मिक मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान विष्णु के शयनकाल में परिवर्तन होता है। इसी कारण यह तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। श्रद्धालु इस दिन दान पुण्य भी करते हैं। जरूरतमंद लोगों को भोजन वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री देना शुभ माना जाता है। कई लोग गौ सेवा और धार्मिक स्थलों पर सेवा कार्य भी करते हैं।

    डोल ग्यारस केवल पूजा और व्रत का पर्व नहीं है बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। डोल यात्रा में अलग अलग वर्गों के लोग एक साथ शामिल होते हैं। मंदिरों में होने वाले आयोजन लोगों को धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं। यही वजह है कि आज भी डोल ग्यारस का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। भगवान विष्णु की पूजा और डोल यात्रा के साथ यह पर्व लोगों के जीवन में सुख शांति और सकारात्मकता की कामना का संदेश देता है।