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  • चौपाटियों पर घरेलू गैस का इस्तेमाल उजागर, उज्ज्वला योजना के सिलेंडर भी नजर आए

    चौपाटियों पर घरेलू गैस का इस्तेमाल उजागर, उज्ज्वला योजना के सिलेंडर भी नजर आए


    मध्य प्रदेश । रीवा शहर में घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। जहां एक ओर आम उपभोक्ता गैस सिलेंडर की समय पर उपलब्धता और रिफिल में होने वाली देरी को लेकर परेशान दिखाई देते हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की चौपाटियों और खानपान की दुकानों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का खुलेआम उपयोग होता नजर आ रहा है। हालिया पड़ताल में सामने आए तथ्यों ने गैस वितरण व्यवस्था और निगरानी तंत्र दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित चौपाटियों और फूड स्टॉल्स का निरीक्षण करने पर पाया गया कि बड़ी संख्या में दुकानदार घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, शहर की करीब 90 प्रतिशत चौपाटियों पर घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई स्थानों पर उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर भी उपयोग में दिखाई दिए, जबकि इनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को घरेलू ईंधन उपलब्ध कराना है।

    सबसे अधिक चौंकाने वाली स्थिति सिरमौर चौराहे के पीछे स्थित एमपी-17 चौपाटी क्षेत्र में देखने को मिली। यहां संचालित अधिकांश दुकानों में घरेलू गैस सिलेंडर उपयोग में पाए गए। निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई प्रतिष्ठान नहीं मिला जहां नियमानुसार कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा हो। इससे यह सवाल उठने लगा है कि नियमों का उल्लंघन इतने बड़े पैमाने पर होने के बावजूद संबंधित विभागों की नजर इस ओर क्यों नहीं गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों पर सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं का उद्देश्य आम परिवारों की जरूरतों को पूरा करना है। ऐसे सिलेंडरों का व्यावसायिक गतिविधियों में उपयोग न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे गैस आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। यदि बड़ी संख्या में घरेलू सिलेंडर व्यवसायों में खपाए जाएंगे तो वास्तविक उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं।

    शहर के कई उपभोक्ताओं ने समय पर रिफिल नहीं मिलने और बुकिंग के बाद लंबा इंतजार करने की शिकायतें भी की हैं। ऐसे में लोगों का मानना है कि घरेलू सिलेंडरों के दुरुपयोग की जांच की जानी चाहिए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समय-समय पर कार्रवाई की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दिखाई नहीं देते। उनका आरोप है कि यदि नियमित और निष्पक्ष निरीक्षण किए जाएं तो घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग का बड़ा नेटवर्क सामने आ सकता है।

    नियमों के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, फास्ट फूड सेंटर, चाय की दुकान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में केवल कमर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके बावजूद कई स्थानों पर घरेलू सिलेंडरों का उपयोग जारी है, जिससे सुरक्षा और नियामकीय दोनों प्रकार की चिंताएं बढ़ रही हैं।

    मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसडीएम अनुराग तिवारी ने कहा कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग नियमों के विरुद्ध है। यदि ऐसी शिकायतें सामने आई हैं तो संबंधित विभागों से जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी घरेलू गैस सिलेंडर का अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    अब निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। शहरवासियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके और गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

  • आज से घरेलू गैस सिलेंडर ₹29 महंगा: ग्वालियर-उज्जैन में ₹1000 के पार, भोपाल में ₹947 का झटका

    आज से घरेलू गैस सिलेंडर ₹29 महंगा: ग्वालियर-उज्जैन में ₹1000 के पार, भोपाल में ₹947 का झटका


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। रविवार 7 जून से घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। नई दरों के बाद प्रदेश के प्रमुख शहरों में गैस सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं, जिससे आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।

    राजधानी भोपाल में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत ₹918.50 से बढ़कर ₹947.50 हो गई है। वहीं इंदौर में अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए ₹970 चुकाने होंगे। जबलपुर में इसकी कीमत ₹919 पहुंच गई है। सबसे अधिक असर ग्वालियर और उज्जैन के उपभोक्ताओं पर पड़ा है, जहां सिलेंडर की कीमत क्रमशः ₹1025 और ₹1001 हो गई है। इसके साथ ही दोनों शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर का दाम हजार रुपए के आंकड़े को पार कर गया है।

    पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बार है जब घरेलू LPG सिलेंडर महंगा हुआ है। इससे पहले मार्च में सिलेंडर के दामों में ₹60 की वृद्धि की गई थी। ताजा बढ़ोतरी को जोड़कर देखा जाए तो तीन महीने के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर करीब ₹110 महंगा हो चुका है। लगातार बढ़ती कीमतों ने मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि रसोई गैस रोजमर्रा की जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में लगातार वृद्धि और घरेलू बिक्री पर होने वाले नुकसान के कारण कीमतें बढ़ाना आवश्यक हो गया था। सूत्रों के अनुसार सरकारी तेल विपणन कंपनियों को प्रत्येक घरेलू सिलेंडर पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। हालांकि नई वृद्धि के बाद भी कंपनियों को होने वाले नुकसान की केवल आंशिक भरपाई ही हो पाएगी।

    गैस सिलेंडर के अलावा छोटे उपभोक्ताओं के लिए उपयोग होने वाले 5 किलोग्राम LPG सिलेंडर की कीमतों में भी ₹11 की बढ़ोतरी की गई है। नई दरों के बाद इसकी कीमत ₹821.50 तक पहुंच गई है। इससे छोटे परिवारों और अस्थायी श्रमिक वर्ग पर भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

    रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि ऐसे समय हुई है जब हाल के सप्ताहों में पेट्रोल, डीजल और CNG के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कुल मिलाकर ₹7.50 प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं, जबकि CNG लगभग ₹6 प्रति किलोग्राम महंगी हुई है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर भी दिखाई देने लगा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि LPG सिलेंडर की कीमत तय करने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की दरें, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात और परिवहन लागत, बॉटलिंग एवं वितरण खर्च, सरकार की सब्सिडी नीति तथा कर व्यवस्था जैसी कई महत्वपूर्ण बातें शामिल होती हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।

    महंगाई के इस दौर में घरेलू गैस सिलेंडर की नई कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और सरकार की नीतियां तय करेंगी कि उपभोक्ताओं को आगे राहत मिलेगी या कीमतों का दबाव और बढ़ेगा।

  • कमर्शियल LPG महंगी: 993 रुपये की बढ़ोतरी, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत जारी

    कमर्शियल LPG महंगी: 993 रुपये की बढ़ोतरी, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत जारी


    नई दिल्ली। देश में रसोई गैस की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तेल विपणन कंपनियों की ओर से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले के बाद कारोबारियों और व्यावसायिक संस्थानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। हालांकि, आम घरेलू उपभोक्ताओं को इस बार राहत दी गई है और उनके सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    राजधानी New Delhi में अब 19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 3,071.5 रुपये में उपलब्ध होगा। यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में आई तेजी के कारण की गई है।

    तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं, जिनकी संख्या देश में करीब 33 करोड़ है, उनके लिए एलपीजी सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई हैं। इसका सीधा फायदा आम परिवारों को मिलेगा, जिन पर फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

    यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का असर सीधे गैस और ईंधन बाजार पर पड़ रहा है। इससे पहले भी कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों की लागत लगातार बढ़ रही है।

    सरकारी तेल कंपनियों ने यह भी बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम जनता को राहत मिली है। इसके अलावा एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें भी स्थिर रखी गई हैं ताकि हवाई यात्रा की लागत में अचानक बढ़ोतरी न हो।

    वहीं सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगाए गए शुल्कों में भी संशोधन किया है, ताकि घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके। डीजल और एविएशन फ्यूल पर अलग-अलग दरों पर शुल्क लागू किया गया है, जबकि पेट्रोल पर निर्यात शुल्क शून्य रखा गया है।

    कुल मिलाकर, यह बदलाव एक तरफ व्यापारिक क्षेत्र के लिए चिंता बढ़ाने वाला है, तो दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में स्थिरता आने तक ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।